कला-संस्कृति धर्म-अध्यात्म विविधा हिंद स्वराज कपिलवस्तु का एक प्रमुख बौद्ध महाविहार-स्तूप November 20, 2015 / November 20, 2015 by डा. राधेश्याम द्विवेदी | 2 Comments on कपिलवस्तु का एक प्रमुख बौद्ध महाविहार-स्तूप सालारगढ़ डा. राधेश्याम द्विवेदी भारतीय संस्कृति एवं इतिहास में अध्यात्मिक एवं ऐतिहासिक महापुरुषों का बहुत ही महत्वपूर्ण योगदान रहा है। महात्मा बुद्ध और तीर्थंकर महाबीर के प्रादुर्भाव से एक नये युग का सूत्रपात हुआ है।1 धर्म दर्शन तथा ललित कलाओ के क्षेत्र में व्यापक परिवर्तन दिखलाई पड़ने लगे हें। उत्तर प्रदेश के नेपाल की सीमा […] Read more » Featured कपिलवस्तु कपिलवस्तु का एक प्रमुख बौद्ध महाविहार-स्तूप प्रमुख बौद्ध महाविहार-स्तूप सा ला र ग ढ़
कला-संस्कृति धर्म-अध्यात्म विविधा ऋषि श्रृंगी की कहानी एवं उनका आश्रम November 18, 2015 / November 18, 2015 by डा. राधेश्याम द्विवेदी | 25 Comments on ऋषि श्रृंगी की कहानी एवं उनका आश्रम उन दिनों देवता व अप्सरायें पृथ्वी लोक में आते-जाते रहते थे। बस्ती मण्डल में हिमालय का जंगल दूर-दूर तक फैला हुआ करता था। जहां ऋषियों व मुनियों के आश्रम हुआ करते थे। आबादी बहुत ही कम थी। आश्रमों के आस-पास सभी हिंसक पशु-पक्षी हिंसक वृत्ति और वैर-भाव भूलकर एक साथ रहते थे। परम पिता ब्रहमा […] Read more » Featured story of shringi rishi ऋषि श्रृंगी की कहानी
धर्म-अध्यात्म प्रातः व सायं संन्ध्या करना सभी मनुष्यों का मुख्य धर्म November 17, 2015 by मनमोहन आर्य | 1 Comment on प्रातः व सायं संन्ध्या करना सभी मनुष्यों का मुख्य धर्म प्रतिदिन प्रातः व सायं सूर्योदय व सूर्यास्त होता हैं। यह किसके ज्ञान व शक्ति से होता है? उसे जानकर उसका ध्यान करना सभी प्राणियों मुख्यतः मनुष्यों का धर्म है। यह मनुष्य का धर्म क्यों है, इसलिए है कि सूर्याेदय व सूर्यास्त करने वाली सत्ता से सभी प्राणियों को लाभ पहुंच रहा है। जो हम सबको […] Read more » Featured प्रातः व सायं संन्ध्या
धर्म-अध्यात्म क्यों माने ईश्वर को? November 16, 2015 by मनमोहन आर्य | Leave a Comment ईश्वर को क्यों माने? यह प्रश्न किसी भी मननशील मनुष्य के मस्तिष्क में आ सकता है। वह अपनी बुद्धि के अनुसार विचार करेगा और हो सकता है कि उसे कोई सन्तोषजनक उत्तर प्राप्त न हो। यदि वह अपने परिवार व मित्रों से इसकी चर्चा करेगा तो सबके उत्तर अलग-अलग होंगे। सभी मतों व सम्प्रदायों के […] Read more » Featured why should we own god क्यों माने ईश्वर को?
धर्म-अध्यात्म सब सत्य विद्याओं एवं उससे उत्पन्न किए व हुए संसार व पदार्थों का मूल कारण ईश्वर November 15, 2015 by मनमोहन आर्य | Leave a Comment हम कोई भी काम करते हैं तो उसमें विद्या अथवा ज्ञान का प्रयोग करना अनिवार्य होता है। अज्ञानी व्यक्ति ज्ञान के अभाव व कमी के कारण किसी सरल कार्य को भी भली प्रकार से नहीं कर सकता। जब हम अपने शरीर का ध्यान व अवलोकन करते हैं तो हमें इसके आंख, नाक, कान, श्रोत्र, बुद्धि, […] Read more » Featured ईश्वर सत्य विद्याओं एवं उससे उत्पन्न किए व हुए संसार व पदार्थों का मूल कारण संसार व पदार्थों का मूल कारण ईश्वर
धर्म-अध्यात्म सृष्टि की उत्पत्ति किससे, कब व क्यों? November 15, 2015 / November 15, 2015 by मनमोहन आर्य | Leave a Comment हम जिस संसार में रहते हैं वह हमें बना बनाया मिला है। हमारे जन्म से पूर्व इस संसार में हमारे माता-पिता व पूर्वज रहते आयें हैं। न तो हमें हमारे माता-पिता से और न हमें अपने अध्यापकों व विद्यालीय पुस्तकों में इस बात का सत्य ज्ञान प्राप्त हुआ कि यह संसार कब, किसने व क्यों […] Read more » Featured सृष्टि की उत्पत्ति कब सृष्टि की उत्पत्ति किससे सृष्टि की उत्पत्ति क्यों?
धर्म-अध्यात्म महर्षि दयानन्द बलिदान दिवस और दीपावली November 12, 2015 by मनमोहन आर्य | Leave a Comment आज महर्षि दयानन्द बलिदान दिवस और दीपावली पर महर्षि दयानन्द ने मनुष्य को ईश्वर, जीवात्मा व संसार का यथार्थ परिचय कराने सहित कर्तव्य और अकर्तव्य रूपी मनुष्य धर्म का बोध कराया मनमोहन कुमार आर्य आज दीपावली का पर्व महर्षि दयानन्द जी का बलिदान पर्व भी है। कार्तिक मास की अमावस्या 30 अक्तूबर, 1883 को दीपावली […] Read more » दीपावली महर्षि दयानन्द बलिदान दिवस
धर्म-अध्यात्म गो-वध व मांसाहार का वेदों में कही भी नामोनिशान तक नहीं है November 10, 2015 by शिवदेव आर्य | 2 Comments on गो-वध व मांसाहार का वेदों में कही भी नामोनिशान तक नहीं है शिवदेव आर्य प्रायः लोग बिना कुछ सोचे समझे बात करते हैं कि वेदों में गो-वध तथा गो-मांस खाने का विधान है। ऐसे लोगों को ध्यान में रखकर कुछ लिखने का यत्न कर रहा हूं, आज तक जो भी ऐसी मानसिकता से घिरे हुऐ लोग हो वे जरुर इसको पढ़ कर समझने का प्रयास करें। क्षणिक […] Read more » गो वध मांसाहार मांसाहार का वेदों में मांसाहार का वेदों में कही भी नामोनिशान तक नहीं है
धर्म-अध्यात्म मैं और मेरा देश November 10, 2015 by मनमोहन आर्य | Leave a Comment मैं अपने शरीर में रहने वाला एक चेतन तत्व हूं। आध्यात्मिक जगत् में इसे जीवात्मा कह कर पुकारा जाता है। मैं अजन्मा, अविनाशी, नित्य, जन्म-मृत्यु के चक्र में फंसा हुआ तथा इससे मुक्ति हेतु प्रयत्नशील, चेतन, स्वल्प परिमाण वाला, अल्पज्ञानी एवं ससीम, आनन्दरहित, सुख-आनन्द का अभिलाषी तत्व हूं। मेरा जन्म माता-पिता से हुआ है। […] Read more » मैं और मेरा देश
धर्म-अध्यात्म मनुष्य और उसका धर्म November 8, 2015 / November 8, 2015 by मनमोहन आर्य | Leave a Comment संसार के सभी मनुष्य अपने-अपने माता-पिताओं से जन्में हैं। जन्म के समय वह शिशु होते हैं। इससे पूर्व 10 माह तक उनका अपनी माता के गर्भ में निर्माण होता है। मैं कौन हूं? यह एक अत्यन्त महत्वपूर्ण प्रश्न है। मैं वह हूं जो अपनी माता से जन्मा है और उससे पूर्व लगभग 10 माह तक […] Read more » मनुष्य और उसका धर्म
धर्म-अध्यात्म उदात्त गरिमा यश प्रदात्री श्रीलक्ष्मी November 8, 2015 by अशोक “प्रवृद्ध” | Leave a Comment अशोक “प्रवृद्ध” समस्त लोकों की ईश्वरी, अपने कर-कमलों में कमल-युगल धारण करने वाली तथा समस्त सर्वांगींण कल्याण का विधान करने वाली जगजननी लक्ष्मी की उपासना भारतवर्ष और इसके बाहर के देशों में अति प्राचीन काल से ही प्रचलित रहा है तथा लक्ष्मी की दशांग उपासना की सम्पूर्ण विधि पटल, पद्धति, शतनाम, सहस्त्रनाम आदि स्त्रोतों एवं […] Read more » Featured उदात्त गरिमा यश प्रदात्री श्रीलक्ष्मी
धर्म-अध्यात्म महर्षि दयानन्द सरस्वती जी की कुछ प्रमुख मान्यतायें November 8, 2015 by मनमोहन आर्य | Leave a Comment वेदों पर आधारित महर्षि दयानन्द जी की कुछ प्रमुख मान्यताओं को पाठकों के लाभार्थ प्रस्तुत कर रहे हैं: ईश्वर विषयक ईश्वर कि जिसके ब्रह्म, परमात्मादि नाम हैं, जो सच्चिदानन्दादि लक्षणयुक्त है, जिसके गुण, कर्म, स्वभाव पवित्र हैं, जो सर्वज्ञ, निराकार, सर्वव्यापक, अजन्मा, अनन्त, सर्वशक्तिमान, दयालु, न्यायकारी, सब सृष्टि का कर्ता, धर्ता, हर्ता, सब जीवों को […] Read more » Featured दयानन्द सरस्वती जी की कुछ प्रमुख मान्यतायें महर्षि दयानन्द महर्षि दयानन्द सरस्वती