धर्म-अध्यात्म अघोरियों का तीर्थ- बाबा कीनाराम स्थल September 2, 2014 / September 2, 2014 by नीरज वर्मा | 2 Comments on अघोरियों का तीर्थ- बाबा कीनाराम स्थल …..लीक से हटकर अघोर या अघोरी जैसे शब्द कान में गूंजते ही अजीबो-गरीब ख्याल आते हैं ! शमशान, दारू , स्त्री-संग , चमत्कार , भय-विकृति और ना जाने क्या-क्या ! पर मजे की बात ये है कि- ज़ेहन में ये सारे सवाल बरसों पुराने मिथक पर आधारित होते हैं या फिर “काल-कपाल-महाकाल” जैसे भ्रामक सीरियल्स […] Read more » अघोरी तीर्थ बाबा कीनाराम बाबा कीनाराम स्थल
धर्म-अध्यात्म संसार के मार्गदर्शक हैं श्रीकृष्ण August 19, 2014 by अरविंद जयतिलक | Leave a Comment -अरविंद जयतिलक- परम सत्य वह है जिससे प्रत्येक वस्तु अद्भुत है। श्रीकृष्ण साक्षात परब्रह्म हैं। ईश्वर हैं। समस्त पदार्थों के बीज हैं। नित्यों के नित्य और जगत के नियंता हैं। शास्त्रों में ब्रह्म को निर्विशेष कहा गया है। श्रीकृष्ण साकार हैं। श्रीकृष्ण ध्वंस और निर्माण, क्रोध और करुणा, पार्थिकता और आध्यामिकता, सगुण और निर्गुण, राजनीति, […] Read more » कृष्णा भागवान कृष्ण श्रीकृष्ण संसार के मार्गदर्शक हैं श्रीकृष्ण
धर्म-अध्यात्म स्वस्थ मन, स्वस्थ तन और स्वस्थ समाज का द्योतक है ‘नाग पंचमी’ August 2, 2014 by रमेश पांडेय | Leave a Comment -रमेश पाण्डेय- पर्व, त्यौहार और उत्सव दो तरह के होते हैं। शाश्वत और सामयिक। शाश्वत पर्व वे हैं, जो किसी विषय वस्तु विशेष के कारण से नहीं बल्कि नैसर्गिक आवश्यकता के अनुक्रम में मनाए जाते हैं। यथा बसंत पंचमी, मकर संक्रान्ति। इसी क्रम में नाग पंचमी का भी पर्व आता है। सामयिक पर्व वे हैं […] Read more » नागपंचमी स्वस्थ तन और स्वस्थ समाज का द्योतक है ‘नाग पंचमी’ स्वस्थ मन
धर्म-अध्यात्म ‘महर्षि दयानन्द सरस्वती को चार वेद कब, कहां, कैसे व किससे प्राप्त हुए?’ July 22, 2014 by मनमोहन आर्य | 2 Comments on ‘महर्षि दयानन्द सरस्वती को चार वेद कब, कहां, कैसे व किससे प्राप्त हुए?’ -मनमोहन कुमार आर्य- हर अध्येता व स्वाध्याय करने वाले को सभी शंकाओं व प्रश्नों के उत्तर सरलता से प्राप्त नहीं होते, परन्तु प्रयास व पुरूषार्थ करने से कुछ के उत्तर मिल जाते हैं और अन्यों के बारे में अनुमान व संगति लगा कर काम चलाना पड़ता है। हम भी स्वामी दयानन्द के सभी ग्रन्थों सहित […] Read more » चार वेद महर्षि दयानन्द सरस्वती
धर्म-अध्यात्म ईद, रोजा और रमजान July 21, 2014 by फखरे आलम | Leave a Comment -फख़रे आलम- इस्लामी इतिहास में सर्वप्रथम ईद जंग-ए-बदर के विजय के उपरान्त आठ दिनों के पश्चात् एक शव्वाल दो हिजरी को अर्थात् 27 मार्च 624 ई. को ईद मनाया गया था। रमजान के एक महीने रोजा के समाप्ती पर एक श्वाल को ईद का त्योहार मनाया जाता है। ईद की नमाज से पूर्व प्रत्येक मुसलमान […] Read more » ईद रमजान रोजा
धर्म-अध्यात्म श्रावणी मेला में साकार होता है शिव का विराट स्वरूप July 17, 2014 by प्रवक्ता.कॉम ब्यूरो | Leave a Comment -कुमार कृष्णन- शिवपुराण में भगवान भोले शंकर के महात्म्य की चर्चा करते हुए उल्लखित है कि जैसे नदियों में गंगा, सम्पूर्ण नदी में शोणभद्र, क्षमा में पृथ्वी, गहराई में समुद्र और समस्त ग्रहों में सूर्यदेव का विशिष्ट स्थान है, उसी प्रकार समस्त देवताओं में भगवान शिव श्रेष्ठ माने गये हैं। प्रत्येक वर्ष श्रावण के पावन […] Read more » भागवान शंकर भोलेनाथ शिव शिव का विराट स्वरूप श्रावणी मेला सावन
चिंतन भाषा की गरीबी: गरीबी उन्मूलन के लिए पहले भाषा की गरीबी हटानी पड़ेगी July 10, 2014 / July 11, 2014 by प्रवक्ता.कॉम ब्यूरो | 2 Comments on भाषा की गरीबी: गरीबी उन्मूलन के लिए पहले भाषा की गरीबी हटानी पड़ेगी -विराट दिव्यकीर्ति- नरेंद्र मोदी सरकार ने हाल ही में ‘हिन्दी पहले’ का आग्रह क्या किया एक अच्छी खासी बहस शुरू हो गयी. आधुनकि भारत में भाषा का प्रश्न कई बार उठाया गया है. हिन्दी भाषी बहुसंख्यकों को लगता है कि यह स्वाभाविक है कि हिन्दी को राष्ट्र भाषा बनाना चाहिए. परन्तु भारत बहु-भाषा संपन्न देश […] Read more » गरीबी उन्मूलन भाषा भाषा की गरीबी
धर्म-अध्यात्म प्रासंगिकता हिन्दुत्व की May 30, 2014 / May 30, 2014 by अतुल तारे | Leave a Comment अतुल तारे हिन्दुत्व क्या है? आज के परिप्रेक्ष्य में हिन्दुत्व की प्रासंगिकता क्या है? यह प्रश्न अत्यंत महत्वपूर्ण है। एक सार्थक बहस, एक गंभीर विमर्श एवं सतत् चिंतन आज इस विषय पर समय की मांग है। परन्तु बावजूद इसके इन प्रश्नों को समझे बिना, इनके उत्तर को जानने की कोशिश किए बिना ही फिर एक […] Read more » प्रासंगिकता हिन्दुत्व की
धर्म-अध्यात्म शक्ति संगठन और समरसता के प्रतीक परशुराम जी May 2, 2014 by प्रवक्ता.कॉम ब्यूरो | Leave a Comment -रमेश शर्मा- भारतीय वाङमय में सबसे दीर्घजीवी चरित्र परशुराम जी का है। सतयुग के समापन से कलयुग के प्रारंभ तक उनका उल्लेख मिलता है। भारतीय इतिहास में इतना दीर्घजीवी चरित्र किसी का नहीं है। वे हमेशा निर्णायक और नियामक शाक्ति रहे। दुष्टों का दमन और सत-पुरूषों को संरक्षण उनके की चरित्र विषेशता है। उनका चरित्र […] Read more » Parshuram परशुराम
चिंतन चुनाव शासन और अनुशासन April 25, 2014 / April 25, 2014 by प्रवक्ता.कॉम ब्यूरो | Leave a Comment -विजय कुमार- चुनाव के इस दौर में सब ओर शासन की ही चर्चा है। कोई वर्तमान शासन को ‘कुशासन’ बताकर उसे बदलना चाहता है, तो कुछ उसे ‘सुशासन’ कहकर बनाये रखने के पक्षधर हैं। कुछ इस व्यवस्था को ही ‘दुःशासन’ मानकर इसे पूरी तरह बदलना चाहते हैं। यद्यपि इसके बदले वे कौन सी व्यवस्था लाएंगे, […] Read more » administration-and-discipline लोकसभा चुनाव शासन और अनुशासन
कला-संस्कृति धर्म-अध्यात्म धर्मयुक्त अर्थोपार्जन से सर्वे भवन्तु सुखिन: April 24, 2014 / April 24, 2014 by कन्हैया झा | Leave a Comment -कन्हैया झा- आज से 5000 वर्ष पूर्व सिन्धु-घाटी सभ्यता के समृद्ध शहरों से मिस्र एवं फारस के शहरों से व्यापार होता था. इन शहरों के व्यापारियों को “पणि” कहा जाता था, जो संभवतः कालांतर में वणिक अथवा व्यापारी शब्द में परिवर्तित हुआ. शायद इन्हीं व्यापारियों के कारण भारत को “सोने की चिड़िया” भी कहा गया […] Read more » धर्मयुक्त अर्थोपार्जन सर्वे भवन्तु सुखिन:
चिंतन विविधा धर्म के नाम पर शोर का ‘अधर्म’ ? April 20, 2014 / April 20, 2014 by निर्मल रानी | 1 Comment on धर्म के नाम पर शोर का ‘अधर्म’ ? -निर्मल रानी- बेशक हम एक आज़ाद देश के आज़ाद नागरिक हैं। इस ‘आज़ादी’ के अंतर्गत हमारे संविधान ने हमें जहां तमाम ऐसे मौलिक अधिकार प्रदान किए हैं जिनसे हमें अपनी संपूर्ण स्वतंत्रता का एहसास हो सके, वहीं इसी आज़ादी के नाम पर तमाम बातें ऐसी भी देखी व सुनी जाती हैं जो हमें व हमारे समाज को […] Read more » 'irreligious' laud on the name of religion धर्म के नाम पर शोर का 'अधर्म' ?