धर्म-अध्यात्म कहो कौन्तेय-१८ (महाभारत पर आधारित उपन्यास) August 25, 2011 / December 7, 2011 by विपिन किशोर सिन्हा | Leave a Comment (पाण्डवों के विवाहोपरान्त हस्तिनापुर की राजसभा) विपिन किशोर सिन्हा पिछला भाग पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें द्रौपदी से हमारे विवाह का समाचार हस्तिनापुर में सबसे पहले महात्मा विदुर को प्राप्त हुआ। विश्वस्त गुप्तचरों के माध्यम से हमारा संपर्क उनसे निरन्तर बना हुआ था। उन्होंने पितामह भीष्म और महाराज धृतराष्ट्र को हमारे जीवित बच जाने […] Read more » Kaho Kauntey कहो कौन्तेय
धर्म-अध्यात्म कहो कौन्तेय-१७ (महाभारत पर आधारित उपन्यास) August 23, 2011 / December 7, 2011 by विपिन किशोर सिन्हा | 3 Comments on कहो कौन्तेय-१७ (महाभारत पर आधारित उपन्यास) (द्रौपदी-विवाह) विपिन किशोर सिन्हा स्मृति पटल पर साकार हो उठती है – द्रौपदी से मिलन की प्रथम रात्रि – जैसे स्वर्ग शयन-कक्ष में सिमट आया हो। भार्यारूप में पांचाली कृष्णा, मेरे विजयगान की तरंगिणी, मेरे भाग्यसूर्य की प्रथम नवकिरण ने मेरे मरुभूमि सम जीवन शैली में सावन की रिमझिम की भांति प्रवेश किया। शयनागार को […] Read more » Kaho Kauntey कहो कौन्तेय-१७
धर्म-अध्यात्म कहो कौन्तेय-१६ (महाभारत पर आधारित उपन्यास) August 22, 2011 / August 22, 2011 by विपिन किशोर सिन्हा | Leave a Comment विपिन किशोर सिन्हा पिछला भाग पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें इधर कर्ण को युद्ध के लिए अपने सम्मुख पाकर मैं अत्यन्त प्रसन्न हुआ। रंगभूमि में उसने मुझे द्वंद्व युद्ध की चुनौती दी थी। समयाभाव और कृपाचार्य की व्यवस्था के कारण हम लोगों में युद्ध नहीं हो सका था। आज विधाता ने बिना मांगे ही […] Read more » कहो कौन्तेय
धर्म-अध्यात्म सौंह करे, भौंहन हंसे, देन कहे, नटि जाइ August 22, 2011 / December 7, 2011 by क्षेत्रपाल शर्मा | 3 Comments on सौंह करे, भौंहन हंसे, देन कहे, नटि जाइ क्षेत्रपाल शर्मा आइए आज जन्माष्टमी पर प्रभु के अवतार रूप पर एक मानवीय पक्ष पर गौर करें. सूरदास जैसा कोई शायद ही विलक्षण कवि हो, जिसने बाल पक्ष पर श्री कृष्ण की लीला गाई हो. किसी नटखट गोपी ने कृष्ण की मुरली छिपा दी है। मुरली बजाना कृष्ण को बड़ा अच्छा लगता है। वे मुरली […] Read more » कृष्ण
धर्म-अध्यात्म कहो कौन्तेय-१५ (महाभारत पर आधारित उपन्यास) August 22, 2011 / December 7, 2011 by विपिन किशोर सिन्हा | Leave a Comment विपिन किशोर सिन्हा पिछला भाग पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें “ये हैं मेरे मित्र अंगराज कर्ण।” दुर्योधन का अहंमन्य उत्तर सभामण्डप में गूंजा। द्रौपदी ने त्रियक दृष्टि से श्रीकृष्ण की ओर दृष्टिपात किया। उन्होंने सहज स्मित बिखेरते हुए आंखों ही आंखों में द्रौपदी से ठीक वैसे ही बात की जैसे धनुष के समीप पहुंचकर, […] Read more » Kaho Kauntey कहो कौन्तेय-१५
धर्म-अध्यात्म कहो कौन्तेय-१४ (महाभारत पर आधारित उपन्यास) August 19, 2011 / December 7, 2011 by विपिन किशोर सिन्हा | Leave a Comment विपिन किशोर सिन्हा पिछला भाग पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें हम स्वयंवर में आमंत्रित तो नहीं थे, लेकिन ब्राह्मणों के छद्मवेश में वहां पहुंच ही गए। स्वयंवर के लिए नगर से ईशानकोण में रंगमण्डप का निर्माण कराया गया था। आंखें चौंधिया रही थीं, उसकी भव्यता निरखकर। सुना था पांचाली को श्वेत रंग बहुत भाता […] Read more » Kaho Kauntey कहो कौन्तेय
धर्म-अध्यात्म पर्यावरण प्रदूषण मुक्त गंगा, प्रदूषण मुक्त सार्वजनिक जीवन August 19, 2011 / December 7, 2011 by लालकृष्ण आडवाणी | Leave a Comment लालकृष्ण आडवाणी परमार्थ निकेतन, ऋषिकेश के स्वामी चिदानंद सरस्वती उन आध्यात्मिक विभूतियों में से एक हैं जिनका मैं अत्यंत आदर करता हूं। गंगा के किनारे उनका आश्रम सचमुच में शांति, पवित्रता और दिव्यता का स्वर्ग है। मैं अपने परिवार के साथ वहां अनेक बार गया हूं। घाट पर संध्या आरती के समय जब स्वामीजी अपने […] Read more » Ganga River Pollution गंगा प्रदूषण
धर्म-अध्यात्म कहो कौन्तेय-१३ (महाभारत पर आधारित उपन्यास) August 18, 2011 / December 7, 2011 by विपिन किशोर सिन्हा | 1 Comment on कहो कौन्तेय-१३ (महाभारत पर आधारित उपन्यास) विपिन किशोर सिन्हा हम लाक्षागृह पहुंचे। नए राजभवन का नाम “शिवभवन” था। बाहर और अंदर से अत्यन्त भव्य इस महल का निरीक्षण हमने अत्यन्त सूक्ष्मता से किया। महात्मा विदुर द्वारा भेजे गए कुशल शिल्पियों के अनवरत श्रम द्वारा, गुप्त रूप से शिवभवन से गंगा किनारे तक धरती के भीतर एक सुरंग का निर्माण कराया गया। […] Read more » Kaho Kauntey कहो कौन्तेय
धर्म-अध्यात्म कहो कौन्तेय-१२ August 16, 2011 / December 7, 2011 by विपिन किशोर सिन्हा | Leave a Comment विपिन किशोर सिन्हा महाराज धृतराष्ट्र राजकीय कार्यों में सार्वजनिक रूप से महात्मा विदुर की सलाह लेते थे लेकिन अपने व्यक्तिगत कार्यों में कूटनीतिज्ञ कणिक का ही परामर्श उन्हें भाता था। वह उनका प्रिय मंत्री था। महाराज के व्यक्तिगत कक्ष में दुर्योधन के साथ कर्ण, शकुनि और मंत्री कणिक की बैठकें सामान्य से कुछ अधिक होने […] Read more » Kaho Kauntey कहो कौन्तेय
धर्म-अध्यात्म मूल्यपरक जीवन जीने का प्रषिक्षण है रोजा August 14, 2011 / December 7, 2011 by इफ्तेख़ार अहमद | Leave a Comment मो. इफ्तेखार अहमद, रमजान का महत्व धार्मिक ही नहीं, वैज्ञानिक भी ’’रमजान‘‘ के पाक महीना के आरम्भ होते ही मस्जिदों में इबादत की हलचल व तिलावत-ए कुरआन षरीफ गुंजने लगी है। रोजे की पवित्रता से लोगों के मन इस कद्र पाक हो जाता है कि षाम होते ही रोजेदार इफतार के लिए रंग-बिरंगी टोपियॉ सर […] Read more » roja रोजा
धर्म-अध्यात्म श्रीमद्भगद्गीता और छद्म धर्मनिरपेक्षवादी – चर्चा-५ August 9, 2011 / December 7, 2011 by विपिन किशोर सिन्हा | 1 Comment on श्रीमद्भगद्गीता और छद्म धर्मनिरपेक्षवादी – चर्चा-५ विपिन किशोर सिन्हा छद्म धर्मनिरपेक्षवादियों को जब कोई पुष्ट आरोप समझ में नहीं आता, तो राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ या भाजपा द्वारा किए गए अच्छे कार्यों को भी सांप्रदायिक करार देकर अपना कर्त्तव्यपालन कर लेते हैं। अब तो बिना कुछ किए भी संघ को समाचार पत्रों और न्यूज चैनलों में आवश्यकता से अधिक कवरेज प्राप्त होने […] Read more » Srimadbhagwat Gita छद्मधर्मनिरपेक्ष श्रीमद्भगद्गीता
धर्म-अध्यात्म श्रीमद्भगवद्गीता और छद्म धर्मनिरपेक्षवादी – चर्चा-४ August 8, 2011 / August 8, 2011 by विपिन किशोर सिन्हा | 4 Comments on श्रीमद्भगवद्गीता और छद्म धर्मनिरपेक्षवादी – चर्चा-४ विपिन किशोर सिन्हा कर्म गीता का मूलमंत्र है। निष्काम कर्मयोग में सारे दर्शन समाहित हैं। Work is worship — कार्य ही पूजा है, का सिद्धान्त गीता से निकला (Derived) है। ईश्वर की प्राप्ति के लिए श्रीकृष्ण के पूर्व यह मान्यता थी कि संसार का परित्याग कर घने वन, पर्वत पर, नदी के किनारे या […] Read more » छद्म धर्मनिरपेक्ष श्रीमद्भगवद्गीता