धर्म-अध्यात्म कहो कौन्तेय-३२ (महाभारत पर आधारित उपन्यास-अंश) September 27, 2011 / December 6, 2011 by विपिन किशोर सिन्हा | Leave a Comment (द्वितीय द्यूत-क्रीड़ा और पाण्डवों का वन गमन) विपिन किशोर सिन्हा द्रौपदी के चीरहरण के समय हुए चमत्कार से धृतराष्ट्र चकित थे – भयभीत भी थे। दुर्योधन और दुशासन के वध के लिए भीम की प्रतिज्ञा और कर्ण-वध के मेरे संकल्प ने उनके भय में और वृद्धि कर दी थी। अपने सातवें पुत्र विकर्ण और अपने […] Read more » Kaho Kauntey कहो कौतेन्य द्वितीय द्यूत-क्रीड़ा और पाण्डवों का वन गमन
धर्म-अध्यात्म वास्तव में सच्चा मुसलमान है कौन? September 27, 2011 / December 6, 2011 by तनवीर जाफरी | 1 Comment on वास्तव में सच्चा मुसलमान है कौन? तनवीर जाफ़री इस्लाम धर्म से संबद्ध विभिन्न वर्गों व समुदायों के उलेमाओं से अक्सर यह सुनने को मिलता है कि इस्लाम धर्म में विभिन्न आस्थाओं, विश्वासों व अंकीदों से जुड़े हुए 73 अलग-अलग वर्ग या फिरके हैं। मुसलमान होने के बावजूद इस प्रकार से वर्ग, समुदाय या फिरकों के रूप में इस्लाम धर्म को मानने […] Read more » Muslim अहमदिया मुसलमान
धर्म-अध्यात्म कहो कौन्तेय-३१ (महाभारत पर आधारित उपन्यास-अंश) September 25, 2011 / December 6, 2011 by विपिन किशोर सिन्हा | Leave a Comment (पाण्डवों की दासता से मुक्ति) विपिन किशोर सिन्हा अब धृतराष्ट्र ने भी मुंह खोला – “पुत्रवधू कृष्णा! तुम मेरी पुत्रवधुओं में सबसे श्रेष्ठ एवं धर्मपारायण हो। तुम्हारा सतीत्व और तुम्हारी भक्ति तुम्हें सम्मानित करते हैं। तुमने अपनी महिमा प्रकट कर दी है। तुम्हारा पातिव्रत्य असंदिग्ध है। तुम्हारी निष्ठा पर मैं अत्यन्त प्रसन्न हूं। तुम मुक्त […] Read more » Kaho Kauntey कहो कौतेन्य पाण्डवों की दासता से मुक्ति
धर्म-अध्यात्म ‘‘श्रद्धा भाव है श्राद्ध’’ September 25, 2011 / December 6, 2011 by डॉ. सौरभ मालवीय | 4 Comments on ‘‘श्रद्धा भाव है श्राद्ध’’ सौरभ मालवीय पितर हमारे किसी भी कार्य में अदृश्य रूप से सहायक की भूमिका अदा करते। क्योंकि अन्ततः हम उन्हीं के तो वंशज हैं। ज्योतिष विज्ञान की मान्यता के अनुसार वे हमारे सभी गतिविधियों पर अपनी अतिन्द्रीय सामर्थ के अनुसार निगाह रखे रहते हैं। यदि हम अपना भाव भावात्मक लगाव उनसे जोड़ सके तो वे […] Read more » पित़पक्ष पितृपक्ष श्राद्ध
धर्म-अध्यात्म कहो कौन्तेय-३० (महाभारत पर आधारित उपन्यास-अंश) September 25, 2011 / December 6, 2011 by विपिन किशोर सिन्हा | Leave a Comment (हस्तिनापुर की द्यूत सभा) विपिन किशोर सिन्हा क्रोध अपनी सीमा पार कर क्षोभ का रूप धर लेता है। मैं क्या था उस क्षण, ठीक जान नहीं पाया। अनुगत भ्राता, वीरत्वहीन पुरुष, हतभाग्य नायक, द्रौपदी का प्राणप्रिय, इन्द्र की सन्तान, श्रीकृष्ण का परम प्रिय सखा या क्रीत दास – ज्ञात नहीं। लेकिन था तो बहुत कुछ […] Read more » Kaho Kauntey कहो कौतेन्य हस्तिनापुर की द्यूत-सभा
धर्म-अध्यात्म कहो कौन्तेय-२९ (महाभारत पर आधारित उपन्यास-अंश) September 17, 2011 / December 6, 2011 by विपिन किशोर सिन्हा | Leave a Comment (हस्तिनापुर की द्यूत-सभा) विपिन किशोर सिन्हा भीम शत्रुओं के जाल में फंसते दीख रहे थे। हम पांचो भ्राताओं की चट्टानी एकता में एक छोटी सी दरार ही तो देखना चाहते थे कौरव। चार उंगलियां कभी मुष्टिका का निर्माण नहीं कर सकतीं। मुष्टिका के बिना शत्रु पर प्रहार असंभव होता है। सिर्फ उंगली उठाने से शत्रु […] Read more » Kaho Kauntey कहो कौन्तेय हस्तिनापुर की द्यूत-सभा
धर्म-अध्यात्म कहो कौन्तेय-२८ (महाभारत पर आधारित उपन्यास-अंश) September 17, 2011 / December 6, 2011 by प्रवक्ता ब्यूरो | Leave a Comment (हस्तिनापुर की द्यूत-सभा) विपिन किशोर सिन्हा “भीम, लौट आओ, मुझे लज्जित न करो। तुम्हें मेरी शपथ, लौट आओ।” युधिष्ठिर ने तेज स्वरों में बार-बार भीम को लौट आने का आदेश दिया। भैया भीम कठपुतली की भांति युधिष्ठिर के पांव के अंगूठे पर दृष्टिपात करते हुए अपने स्थान पर लौट आए। हम चारो भ्राताओं की जीवन-डोर […] Read more » Kaho Kauntey कहो कौन्तेय हस्तिनापुर की द्यूत-सभा
धर्म-अध्यात्म पर्यावरण गंगा और भारत September 16, 2011 / December 6, 2011 by डॉ. सौरभ मालवीय | 16 Comments on गंगा और भारत सौरभ मालवीय गंगा शब्द का अर्थ तीव्रगामनी होता है लेकिन भारत में इस शब्द का अर्थ एक पवित्र नदी के रूप में है। इसका अर्थ पुरूषार्थ चतुष्टय की प्राप्ति का साधन है यू तो संसार में हजारों नदियां हैं और भारत में भी एक सौ तेरह विपुल जल वाली नदियां है परन्तु भारतीय आस्था में […] Read more » India गंगा
धर्म-अध्यात्म कहो कौन्तेय-२५ (महाभारत पर आधारित उपन्यास) September 12, 2011 / December 6, 2011 by विपिन किशोर सिन्हा | Leave a Comment (खाण्डववन-दाह) विपिन किशोर सिन्हा खाण्डववन दाह! संरक्षक देवराज इन्द्र की सत्ता को सीधे चुनौती देने का यह कार्य था। स्वीकार करना सरल था, पूरा करना अत्यन्त कठिन। इन्द्र के वज्र का प्रत्युत्तर मेरे पास नहीं था। श्रीकृष्ण कुछ कर सकते थे। उन्होंने गोकुल में गोवर्धन पर्वत को तर्जनी पर धारण कर इन्द्र का दर्प चूर्ण […] Read more » Kaho Kauntey कहो कौन्तेय खाण्डववन-दाह
धर्म-अध्यात्म क्या स्वतंत्र भारत में ऐसा भी होता है….? September 8, 2011 / December 6, 2011 by राजीव गुप्ता | 15 Comments on क्या स्वतंत्र भारत में ऐसा भी होता है….? राजीव गुप्ता मेरे पति को ईसाईयों ने जान से ख़त्म कर दिया क्योंकि वो ईसाई नहीं बने ! गोद में दुधमुहे बच्चे को लेकर सिसकते हुए अर्चना भार्गव जी जो कि छतीसगढ़ राज्य के विलासपुर जिले के परसापन गाँव से दिल्ली के लोक कला मंच ( नजदीक जवाहरलाल स्टेडियम ) , में ५-६ सितम्बर , […] Read more » ईसाई धर्म परिवर्तन
धर्म-अध्यात्म कहो कौन्तेय-२४ (महाभारत पर आधारित अपन्यास) September 4, 2011 / December 6, 2011 by विपिन किशोर सिन्हा | Leave a Comment (सुभद्रा के साथ अर्जुन का इन्द्रप्रस्थ में पुनरागमन) विपिन किशोर सिन्हा बलराम हतप्रभ रह गए। वे इस प्रस्ताव के लिए प्रस्तुत न थे। राजक्रोध पर नियंत्रण नहीं करते तो सुभद्रा के साथ कृष्ण से भी हाथ धोना पड़ता। शीघ्र ही निर्णय लिया गया – सुभद्रा सहित मुझे द्वारिका ससम्मान लौटा लिवाने का। योजनानुसार मैं रथ […] Read more » Kaho Kauntey अर्जुन कहो कौन्तेय सुभद्रा
धर्म-अध्यात्म कहो कौन्तेय (महाभारत पर आधारित उपन्यास) September 3, 2011 / December 6, 2011 by विपिन किशोर सिन्हा | Leave a Comment (सुभद्रा-हरण) विपिन किशोर सिन्हा मेरे वनवास का अन्तिम चरण प्रारंभ हो चुका था। मैं हृदय से चाहता था कि यह चरण समाप्त ही न हो। इतने लंबे समय तक श्रीकृष्ण का सत्संग! मैं अभिभूत था। मैं भूल गया था कि मुझे इन्द्रप्रस्थ वापस भी लौटना है। श्रीकृष्ण मेरे ज्ञानवर्द्धन और मनोरंजन की ऐसी व्यवस्था करते […] Read more » Kaho Kauntey कहो कौन्तेय सुभद्रा-हरण