धर्म-अध्यात्म लेख वैदिक कर्म-फल सिद्धान्त सत्य नियमों पर आधारित यथार्थ दर्शन है December 8, 2021 / December 8, 2021 by मनमोहन आर्य | 2 Comments on वैदिक कर्म-फल सिद्धान्त सत्य नियमों पर आधारित यथार्थ दर्शन है -मनमोहन कुमार आर्यवैदिक धर्म सृष्टि का सबसे पुराना धर्म है। यह धर्म न केवल इस सृष्टि के आरम्भ से प्रचलित हुआ है अपितु इससे पूर्व जितनी बार भी प्रलय व सृष्टि हुई हैं, उन सब सृष्टि कालों में भी एकमात्र वैदिक धर्म ही पूरे विश्व में प्रवर्तित रहा है। इसका कारण यह है कि ईश्वर, […] Read more » Vedic Karma-False Siddhanta is a real philosophy based on true rules. वैदिक कर्म-फल सिद्धान्त
धर्म-अध्यात्म मनुष्य जीवन की उन्नति के लिए आर्यसमाज के सत्संगों में जाना चाहिये November 16, 2021 / November 16, 2021 by मनमोहन आर्य | Leave a Comment -मनमोहन कुमार आर्य मनुष्य व समाज की उन्नति आर्यसमाज में जाने व आर्यसमाज के प्रचार के कार्यों से होती है। आर्यसमाज का छठा नियम है कि आर्यसमाज को मनुष्यों की शारीरिक, आत्मिक और सामाजिक उन्नति कर संसार का उपकार करना चाहिये। हम जब आर्यसमाज के सत्संगों में जाते हैं तो वहां इस नियम का […] Read more » For the advancement of human life one should attend the satsangs of Arya Samaj. आर्यसमाज के सत्संगों में जाना चाहिये
धर्म-अध्यात्म सृष्टिकर्ता और पालक ईश्वर कहां रहता है और क्या करता है? November 15, 2021 / November 15, 2021 by मनमोहन आर्य | Leave a Comment –मनमोहन कुमार आर्य ईश्वर और उसके अन्य सभी गुण, कर्म और सम्बन्ध वाचक नाम वेदों से संसार में प्रसिद्ध हुए हैं। वेद, सृष्टि के आरम्भ में मनुष्यों की अमैथुनी सृष्टि के साथ परमात्मा की ओर से चार ऋषियों अग्नि, वायु, आदित्य और अंगिरा के माध्यम से प्राप्त हुए ज्ञान व उसकी पुस्तकें हैं। इस […] Read more » Where does the Creator and Guardian God live and what does he do? ईश्वर कहां रहता है
धर्म-अध्यात्म सृष्टि की प्रलयावस्था में हम सभी जीव 4.32 अरब वर्ष तक बिना जन्म-मरण गहरी निद्रा में रहेंगे November 14, 2021 / November 14, 2021 by मनमोहन आर्य | Leave a Comment –मनमोहन कुमार आर्य मनुष्य एक चेतन आत्मा है जो अनादि, नित्य, अविनाशी तथा अमर है। यह भाव पदार्थ है। इसका कभी अभाव नहीं होता और न ही हो सकता है। भाव पदार्थ का कदापि अभाव न होना और अभाव से भाव पदार्थ का अस्तित्व में न आना वैज्ञानिक सिद्धान्त है। हम हैं, इसका अर्थ […] Read more » In the doomsday stage of the universe we all living beings will remain in deep sleep without birth and death for 4.32 billion years. सभी जीव 4.32 अरब वर्ष तक बिना जन्म-मरण गहरी निद्रा में रहेंगे
धर्म-अध्यात्म वेद ईश्वर प्रदत्त स्वतः प्रमाण धर्मग्रन्थ है October 17, 2021 / October 17, 2021 by मनमोहन आर्य | Leave a Comment –मनमोहन कुमार आर्य ईश्वर और धर्म दो महत्वपूर्ण शब्द हैं। ईश्वर उस सत्ता का नाम है जिसने इस संसार को बनाया है और जो इसका संचालन कर रही है। धर्म उस सत्य और तर्कपूर्ण आचार संहिता का नाम है जिसका आचरण मनुष्य को करना होता है और जिसको करने से मनुष्य का जीवन दुःखों […] Read more » Vedas are self-evident scripture given by God वेद
धर्म-अध्यात्म सृष्टि रचना एवं सभी अपौरुषेय रचनायें ईश्वर के अस्तित्व का प्रमाण हैं October 3, 2021 / October 3, 2021 by मनमोहन आर्य | Leave a Comment –मनमोहन कुमार आर्य हम संसार में अनेक रचनायें देखते हैं। रचनायें दो प्रकार की होती हैं। एक पौरुषेय और दूसरी अपौरुषेय। पौरुषेय रचनायें वह होती हैं जिन्हें मनुष्य बना सकते हैं। हम भोजन में रोटी का सेवन करते हैं। यह रोटी आटे से बनती है। इसे मनुष्य अर्थात् स्त्री वा पुरुष बनाते हैं। मनुष्य […] Read more » The creation of the universe and all the unpaurusheya creations are the proof of the existence of God. ईश्वर के अस्तित्व का प्रमाण
धर्म-अध्यात्म जन्म-जन्मान्तरों में हमारे सुख का आधार वैदिक शिक्षाओं का आचरण September 24, 2021 / September 24, 2021 by मनमोहन आर्य | Leave a Comment -मनमोहन कुमार आर्यहम संसार में हमने पूर्वजन्मों के कर्मों का फल भोगने तथा जन्म-मरण के चक्र से छूटने वा दुःखों से मुक्त होने के लिये आये हैं। मनुष्य जो बोता है वही काटता है। यदि गेहूं बोया है तो गेहूं ही उत्पन्न होता है। हमने यदि शुभ कर्म किये हैं तो फल भी शुभ होगा […] Read more » सुख का आधार वैदिक शिक्षा
धर्म-अध्यात्म लेख ईश्वर अनादि काल से हमारा साथी है और हमेशा रहेगा August 29, 2021 / August 29, 2021 by मनमोहन आर्य | Leave a Comment -मनमोहन कुमार आर्यअथर्ववेद के एक मन्त्र ‘अन्ति सन्तं न जहात्यन्ति सन्तं न पश्यति। देवस्य पश्य काव्यं न ममार न जीर्यति।।’ में कहा गया है कि ईश्वर जीवात्मा के अति समीप है। वह जीवात्मा का त्याग नहीं करता। इसका दूसरा अर्थ यह भी है कि ईश्वर हमारे अति समीप है, जीवात्मा उसका त्याग नहीं कर सकता […] Read more » God is our companion from time immemorial and always will be ईश्वर
धर्म-अध्यात्म जीवात्मा, ईश्वर और प्रकृति के समान अनादि, नित्य व अविनाशी सत्ता है August 23, 2021 / August 23, 2021 by मनमोहन आर्य | Leave a Comment –मनमोहन कुमार आर्य हम दो पैर वाले प्राणी हैं जो ज्ञान प्राप्ति में सक्षम होने सहित बुद्धि से युक्त मनुष्य कहाते हैं। हमारा शरीर भौतिक शरीर है। हमारा शरीर पंचभूतो अग्नि, वायु, जल, पृथिवी व आकाश से मिलकर बना है। पंचभूतों में से किसी एक व सभी अवयवों में चेतन होने का गुण नहीं […] Read more » eternal and imperishable being like God and nature. God The soul is the eternal
धर्म-अध्यात्म लेख विश्व के कंेद्र बिंदु पर नटराज-नृत्य August 18, 2021 / August 18, 2021 by प्रमोद भार्गव | Leave a Comment प्रमोद भार्गव भगवान शिव का विश्व के केंद्र बिंदु पर तांंडव नृत्य करना ही इस तथ्य का ठोस प्रतीक है कि नटराज-प्रतिमा का संबंध प्रकृति और उसके भूगोल से है। शिव ने यह नृत्य केरल के चिदंबरम् नामक स्थल पर किया था। इस स्थान को विश्व का केंद्र बिंदु माना जाता है। इस क्षेत्र में […] Read more » Nataraja-dance Nataraja-dance at the center of the world विश्व के कंेद्र बिंदु पर नटराज-नृत्य
धर्म-अध्यात्म पृथिवी सहित समस्त सृष्टि को परमात्मा ने जीवात्माओं के लिये बनाया है August 12, 2021 / August 12, 2021 by मनमोहन आर्य | Leave a Comment –मनमोहन कुमार आर्य हमारा यह संसार अर्थात् हमारी पृथिवी, सूर्य, चन्द्र आदि सब ग्रह–उपग्रह प्रकृति नामक अनादि सत्ता से बने हैं। प्रकृति की संसार में चेतन ईश्वर व जीवात्मा से भिन्न स्वतन्त्र जड़ सत्ता है। इस अनादि प्रकृति को परमात्मा व अन्य किसी सत्ता ने नहीं बनाया है। इस प्रकृति का अस्तित्व स्वयंभू और […] Read more » God has created the entire universe including the earth for the souls. सृष्टि को परमात्मा ने जीवात्माओं के लिये बनाया है
धर्म-अध्यात्म ऋषि दयानन्द का निर्माण स्वामी विरजानन्द की शिक्षा ने किया August 10, 2021 / August 10, 2021 by मनमोहन आर्य | Leave a Comment –मनमोहन कुमार आर्य ऋषि दयानन्द विश्व–दिग्विजयी ऋषि हैं। उन्होंने सभी मतों के आचार्यों को शंका समाधान, वार्ता तथा शास्त्रार्थ का अवसर देकर एवं साथ ही सभी मतों के आचार्यों की शंकाओं का समाधान कर तथा 55 से अधिक शास्त्रार्थों में विजयी होकर वह विश्व गुरु व दिग्विजयी विद्वान् बने हैं। उन्होंने सत्यार्थप्रकाश रूपी जो […] Read more » Rishi Dayanand was created by the education of Swami Virjanand. स्वामी विरजानन्द स्वामी विरजानन्द जी की 153वी पुण्यतिथि स्वामी विरजानन्द जी की 153वी पुण्यतिथि 14 सितम्बर