धर्म-अध्यात्म ईश्वर न होता तो क्या यह संसार और प्राणी जगत होता? February 3, 2020 / February 4, 2020 by मनमोहन आर्य | Leave a Comment –मनमोहन कुमार आर्य हम अपनी आंखों से भौतिक जगत वा संसार का प्रत्यक्ष करते हैं। इस संसार में सूर्य, पृथिवी, चन्द्र व अनेक ग्रह-उपग्रह हैं। हमारे सौर मण्डल के अतिरिक्त भी सृष्टि में असंख्य व अनन्त लोक-लोकान्तर एवं सौर्य मण्डल हैं। यह सब आकाश में विद्यमान हैं और अपनी धुरी सहित अपने-अपने सूर्य-सम मुख्य […] Read more » ईश्वर
धर्म-अध्यात्म क्या सनातन वैदिक धर्म अमर है और इसके सभी अनुयायी सुरक्षित हैं? January 28, 2020 / January 28, 2020 by मनमोहन आर्य | Leave a Comment -मनमोहन कुमार आर्य संसार का सबसे पुराना धर्म और संस्कृति वेद और वैदिक धर्म है। वैदिक मान्यताओं के अनुकूल व अनुरूप ही जीवन शैली से सम्बन्धित सभी विचार, मान्यतायें एवं परम्परायें वैदिक संस्कृति का निर्माण करती हैं व कहलाती हैं। जो मान्यता व कर्म वेदानुकूल हों, वही मनुष्यों के लिये करने योग्य होता है […] Read more » सनातन वैदिक धर्म सनातन वैदिक धर्म अमर है
धर्म-अध्यात्म जानिए कपूर के उपयोग एवम लाभ को January 27, 2020 / January 27, 2020 by पंडित दयानंद शास्त्री | Leave a Comment हिंदू धर्म में पूजा में यदि कपूर को शामिल न किया जाए, तो पूजा अधूरी मानी जाती है। इसके प्रयोग से घर की नकारात्मक ऊर्जा तो दूर होती ही है, यह सेहत के लिए भी लाभकारी औषधि है। कपूर हमारे जीवन में कई तरह से लाभ पहुंचाता है। पूजन-पद्धतियों में कपूर का महत्वपूर्ण हिस्सा होता […] Read more » benefits of camphor use of camphor कपूर के उपयोग कपूर के उपयोग एवम लाभ कपूर के लाभ
धर्म-अध्यात्म वेदों में सच्चा अध्यात्मवाद है जो देशवासियों को देशभक्त बनाता है January 27, 2020 / January 27, 2020 by मनमोहन आर्य | Leave a Comment –मनमोहन कुमार आर्य वेद ही विश्व में अध्यात्म का आदि वा सर्वप्राचीन ग्रन्थ है। ईश्वर, जीव व प्रकृति विषयक त्रैतवाद का सिद्धान्त वेद की ही देन है। सभी विद्वानों की अपनी-अपनी योग्यता होती है। बहुत से विद्वान बहुत से विषयों को नहीं जान पाते। ऐसा ही वेदपाठी व वेदों के अध्ययनकर्ता विद्वानों के साथ […] Read more » ‘अध्यात्मवाद’
धर्म-अध्यात्म लेख नर्मदा का कंकड़ भी नर्मदेश्वर शिवलिंग बन जाता है। January 27, 2020 / January 27, 2020 by आत्माराम यादव पीव | Leave a Comment विश्व की एकमात्र पाप-नाशिनी है नर्मदा– आत्माराम यादव समूचे विश्व में जो दिव्य व रहस्यमयी है तो वह नर्मदा। नर्मदा का वर्णन चारों वेदों की व्याख्या में विष्णु के अवतार वेदव्यास जी ने स्कन्द पुराण के रेवाखण्ड में किया है। रामायण और महाभारत में भी नर्मदा का उल्ल्ेख मिलता है। कालिदास ने नर्मदा […] Read more » The pebble of Narmada also becomes Narmadeswara Shivling. नर्मदेश्वर शिवलिंग
धर्म-अध्यात्म मनुष्य अपने अगले जन्मों को उन्नत व श्रेष्ठ बनाने के लिए क्या करे? January 24, 2020 / January 24, 2020 by मनमोहन आर्य | Leave a Comment -मनमोहन कुमार आर्य मनुष्य एक चेतन व अल्पज्ञ आत्मायुक्त शरीर को कहते हैं जिसके पास दो हाथ व दो पैरों सहित बोलने के लिये वाणी होती है तथा एक विवेकवान व मनन करने की क्षमता से युक्त बुद्धि व मस्तिष्क होता है। मनुष्य की मृत्यु होने पर उसका शरीर अन्त्येष्टि कर्म के द्वारा नष्ट […] Read more » मनुष्य
धर्म-अध्यात्म लेख सज्जनों से द्वेष और दुष्ट व असत्य आचरण वालों से प्रेम उचित नहीं January 23, 2020 / January 23, 2020 by मनमोहन आर्य | Leave a Comment –मनमोहन कुमार आर्य द्वेष किसी से नफरत करने को कहते हैं। इसके अनेक कारण होते व हो सकते हैं। कुछ लोग अच्छे होते हैं परन्तु अपने किन्हीं स्वार्थों के कारण कुछ लोग उनसे भी द्वेष करते हैं। ऐसा करना वस्तुतः बुरा है। परन्तु कुछ ऐसे लोग भी होते हैं जो अपने स्वार्थ के लिये […] Read more » दुष्ट व असत्य आचरण वालों से प्रेम सज्जनों से द्वेष
धर्म-अध्यात्म महाभारत युद्ध के बाद ऋषि दयानन्द जैसे कुछ ऋषि होते तो देश में अविद्या व अन्धविश्वास उत्पन्न न होते January 21, 2020 / January 21, 2020 by मनमोहन आर्य | Leave a Comment -मनमोहन कुमार आर्य हमारा देश महाभारत युद्ध के बाद अज्ञान, अन्धविश्वास, पाखण्ड, कुरीतियों वा मिथ्या परम्पराओं सहित अनेकानेक आडम्बरों से भर गया था जिसका परिणाम देश में छोटे-छोटे राज्यों के निर्माण सहित देश की पराधीनता के रूप में सामने आया। अज्ञान व अन्धविश्वासों के कारण ही देश में चेतन ईश्वर का तिरस्कार कर जड़ […] Read more »
धर्म-अध्यात्म अतीत के सभी विद्वानों व राज्याधिकारियों के आलस्य-प्रमाद युक्त कार्यों की कीमत भावी पीढ़ियों को चुकानी पड़ती है January 18, 2020 / January 18, 2020 by मनमोहन आर्य | Leave a Comment –मनमोहन कुमार आर्य मनुष्यों के दो भेद प्रायः देखने को मिलते हैं। एक विद्वान बुद्धिजीवी वर्ग होता है और दूसरा शासित सामान्य अल्प शिक्षित वर्ग। विद्वान बुद्धिजीवी देश के शिखरस्थ राजनीतिक पदों पर आसीन होकर निर्णय लेते, नीतियां व योजनायें बनाते हैं। उनके निर्णयों एवं कार्यों का प्रभाव देश के वर्तमान एवं भविष्य दोनों […] Read more » विद्वानों व राज्याधिकारियों के आलस्य-प्रमाद युक्त कार्य
धर्म-अध्यात्म वेद-विहित विधि से ईश्वरोपासना न करने से जन्म-परजन्मों में हानियां January 17, 2020 / January 17, 2020 by मनमोहन आर्य | Leave a Comment –मनमोहन कुमार आर्य मनुष्य को उपासना की आवश्यकता क्यों है? इसके अनेक कारण हैं। मुख्य कारण तो उपासना से हमें उपास्य ईश्वर के सद्गुणों का ज्ञान होने सहित ईश्वर से अपनी जीवन यात्रा को सुगम रीति से चलाने में मार्गदर्शन भी प्राप्त होता है। ईश्वर उपासक निर्धन व दरिद्र नहीं होता। ईश्वर की उपासना […] Read more » ईश्वरोपासना
धर्म-अध्यात्म मनुष्य परमात्मा प्रदत्त बुद्धि का विवेकपूर्वक सदुपयोग न कर अपनी व देश-समाज की हानि करता है January 17, 2020 / January 17, 2020 by मनमोहन आर्य | Leave a Comment -मनमोहन कुमार आर्य हमारा यह संसार एवं प्राणी जगत ईश्वर की विशिष्ट रचना है। यह संसार परमात्मा ने अपना कोई प्रयोजन पूरा करने के लिये नहीं अपितु जीवात्माओं का सुख एवं कल्याण करने की भावना से बनाया है। जीवात्मा चेतन तथा अल्पज्ञ सत्ता है। जीवात्मा अनादि व नित्य होने से संसार में सदा से […] Read more » परमात्मा बुद्धि का विवेकपूर्वक सदुपयोग
धर्म-अध्यात्म हमें ईश्वर को जगत में उसकी चेष्टाओं व क्रियाओं के द्वारा देखना चाहिये January 16, 2020 / January 16, 2020 by मनमोहन आर्य | Leave a Comment मनमोहन कुमार आर्य परमात्मा ने हमें मानव शरीर और इसमें पांच ज्ञानेन्द्रियां एवं पांच कर्मेन्द्रियां दी हैं। हमारे नेत्र हमारी ज्ञानेन्द्रिय है जो हमें स्थूल दृश्यों का दर्शन कराती हैं। अपने नेत्रों से हम स्वयं को व दूसरे मनुष्यो, अन्य प्राणियों एवं पृथिवी, वृक्ष, सूर्य, चन्द्र, जल आदि पदार्थों को देखते हैं। वेद से […] Read more »