धर्म-अध्यात्म “महनीय विस्मृत जीवन अथर्ववेद भाष्यकार पं. क्षेमकरणदास त्रिवेदी” November 23, 2018 / November 23, 2018 by मनमोहन आर्य | Leave a Comment मनमोहन कुमार आर्य, वेद ईश्वर प्रदत्त ज्ञान है जो सृष्टि के अनुकूल व ज्ञान-विज्ञान पर भी सत्य सिद्ध है। महाभारतकाल तक देश में ऋषियों की परम्परा विद्यमान रही जिससे सर्वत्र वेदों व उनके सत्य अर्थों का प्रचार था। महाभारत युद्ध के बाद देश व संसार में अज्ञान का अन्धकार फैल गया। लोगों में वेदों के […] Read more » “महनीय विस्मृत जीवन अथर्ववेद भाष्यकार पं. क्षेमकरणदास त्रिवेदी” अवतारवाद ऊंच-नीच छुआछूत पाषाण मूर्तिपूजा फलित ज्योतिष मृतक श्राद्ध
धर्म-अध्यात्म “ऋषि दयानन्द के एक जीवनीकार बाबू देवेन्द्रनाथ मुखोपाध्याय” November 22, 2018 / November 22, 2018 by मनमोहन आर्य | 1 Comment on “ऋषि दयानन्द के एक जीवनीकार बाबू देवेन्द्रनाथ मुखोपाध्याय” मनमोहन कुमार आर्य, ऋषि दयानन्द सरस्वती (1825-1883) की अनुसंधानपूर्ण मौलिक जीवनी लेखकों में बंगाल निवासी बाबू देवेन्द्रनाथ मुखोपाध्याय का नाम सम्मिलित है। आपने 10 वर्षों तक देश भर में घूम कर ऋषि जीवन की सामग्री का संग्रह किया था। उन्होंने ही ऋषि दयानन्द के जन्म स्थान टंकारा की खोज की और ऋषि दयानन्द के बाल्यकाल […] Read more » ‘आर्य लेखक कोश “ऋषि दयानन्द के एक जीवनीकार बाबू देवेन्द्रनाथ मुखोपाध्याय” आर्यसमाजी महर्षि दयानन्द सरस्वती मैसर्स विजयकुमार गोविन्दराम हासानन्द
धर्म-अध्यात्म ‘भारत में उत्पन्न सब लोगों को देश की उन्नति तन, मन व धन से करनी चाहिये’ November 21, 2018 / November 21, 2018 by मनमोहन आर्य | Leave a Comment –मनमोहन कुमार आर्य, हम बहुधा देखते कि कुछ स्वदेशवासियों व संस्थाओं में स्वदेश भक्ति कम है अथवा नहीं है। देश और मातृभूमि को सबसे ऊंचा व बड़ा नहीं माना जाता। ऐसे भी लोग हैं जो विदेशी मत-मतान्तरों व उनके अनुसार जीवन जीने में ही अपने को गौरवान्वित अनुभव करते हैं। ऐसे लोगों का आचार, विचार […] Read more » आर्याभिविनय उपनिषद ऋग्वेदादिभाष्य दर्शन प्रक्षेपरहित वेद सत्यार्थप्रकाश
धर्म-अध्यात्म “ऋषि दयानन्द लिखित राजा भोज के जीवन की कुछ विशेष बातें” November 20, 2018 / November 20, 2018 by मनमोहन आर्य | Leave a Comment मनमोहन कुमार आर्य, महर्षि दयानन्द सरस्वती (1825-1883) जी ने अपने विश्व प्रसिद्ध ग्रन्थ सत्यार्थप्रकाश के ग्यारहवें समुल्लास में राजा भोज (1010-1055) के समय पुराणों की रचना एवं महाभारत व इसके प्रक्षेपों की चर्चा की है। उन्होंने राजा भोज के समय में विद्यमान कुछ वैज्ञानिक आविष्कारों व उपकरणों का भी उल्लेख किया है। ऋषि दयानन्द वेद, […] Read more » अन्धविश्वासों ऋषि दयानन्द वेद भेदभाव महर्षि दयानन्द सरस्वती मिथ्यापूजा वैदिक विज्ञान वैदिक साहित्य सामाजिक
धर्म-अध्यात्म “सृष्टि की उत्पत्ति और इसकी व्यवस्था ईश्वर के अस्तित्व का प्रमाण है” November 19, 2018 / November 19, 2018 by मनमोहन आर्य | Leave a Comment मनमोहन कुमार आर्य, हम जिन पदार्थों व वस्तुओं को आंखों से प्रत्यक्ष देखते हैं उनके अस्तित्व को स्वीकार करते हैं। जो पदार्थ हमें दीखते नहीं हैं उन्हें हम प्रायः स्वीकार नहीं करते। ईश्वर है या नहीं, इसका उत्तर सामान्य बुद्धि के लोग यही कहते हैं कि दिखाई न देने के कारण ईश्वर का अस्तित्व स्वीकार […] Read more » “सृष्टि की उत्पत्ति और इसकी व्यवस्था ईश्वर के अस्तित्व का प्रमाण है” ईश्वर ऋषि दयानन्द जिह्वा ज्ञानेन्द्रियों नाक सृष्ट्यित्पत्ति
धर्म-अध्यात्म “ऋषि बोधोत्सव कैसे मनाओगे? : स्वामी श्रद्धानन्द” November 17, 2018 / November 17, 2018 by मनमोहन आर्य | Leave a Comment मनमोहन कुमार आर्य, आगामी ऋषि बोधोत्सव का पर्व मार्च 2019 में पड़ रहा है। इस अवसर के लिये मन और मस्तिष्क को प्रभावित करने वाला उपर्युक्त शीर्षक से लिखा व प्रकाशित स्वामी श्रद्धानन्द जी महाराज का एक लेख हम प्रस्तुत कर रहे हैं।क्या इस बार व्याख्यान सुन और चार आने भेंट चढ़ा कर पल्ला छुड़ाओगे। […] Read more » ऋषि दयानन्द स्वामी श्रद्धानन्द स्वामी श्रद्धानन्द जी
धर्म-अध्यात्म “सृष्टि रचना का उद्देश्य जीवों को भोग व अपवर्ग प्रदान कराना” November 16, 2018 by मनमोहन आर्य | Leave a Comment मनमोहन कुमार आर्य, मनुष्य चेतन प्राणी है। मनुष्य का शरीर पंच भौतिक तत्वों से बना है। पृथिवी (सूर्य, चन्द्र, सभी ग्रह व उपग्रह), अग्नि, वायु, जल, आकाश पंच भौतिक पदार्थ हैं। यह सभी पदार्थ जड़ हैं। इनका उपादान कारण त्रिगुणात्मक प्रकृति है जो कि जड़ है। यह प्रकृति अनादि? नित्य व अविनाशी तत्व है।सृष्टि में […] Read more » अजर अमर अल्पज्ञ आनन्द रहित आनन्द व सुखाभिलाषी ईश्वर सच्चिदानन्दस्वरूप एकदेशी चेतन निराकार न्यायकारी परिमाण पवित्र सर्वज्ञ सर्वव्यापक सर्वशक्तिमान सर्वान्तर्यामी
धर्म-अध्यात्म “देश और समाज को अपना सर्वस्व समर्पित करने वाले आदर्श महापुरुष ऋषिभक्त स्वामी श्रद्धानन्द” November 15, 2018 / November 15, 2018 by मनमोहन आर्य | Leave a Comment मनमोहन कुमार आर्य, महर्षि दयानन्द ने सत्यार्थप्रकाश में जिस प्राचीन वैदिक कालीन गुरुकुलीय शिक्षा पद्धति का विवरण प्रस्तुत किया था उसे साकार रूप देने का स्वप्न उनके प्रमुख अन्यतम शिष्य स्वामी श्रद्धानन्द जी (पूर्वनाम महात्मा मुंशीराम) ने लिया था। उन्होंने इसके लिये अपना सर्वस्व अर्पण किया। इतिहास में शायद ऐसा उदाहरण नहीं मिलता। उन्होंने अपना […] Read more » तन धन मन स्वामी श्रद्धानन्द
धर्म-अध्यात्म “स्वाध्याय करने से ज्ञान प्राप्ति सहित आत्मिक व सामाजिक उन्नति” November 14, 2018 / November 14, 2018 by मनमोहन आर्य | Leave a Comment मनमोहन कुमार आर्य, मनुष्य की आत्मा अनादि, नित्य, अविनाशी एवं अमर है। एकदेशी होने से यह अल्पज्ञ है। हमें नहीं पता कि पूर्वजन्म में हम मनुष्य ही थे या किसी अन्य योनि में थे। इस जन्म में हमें पूर्वजन्म की किसी बात की याद नहीं है। मनुष्य का स्वभाव पुरानी बातों को भूलने का है। […] Read more » “स्वाध्याय करने से ज्ञान प्राप्ति सहित आत्मिक व ऋषियों सहित ऋषि दयानन्द पं. लेखराम सामाजिक उन्नति” स्वामी श्रद्धानन्द
धर्म-अध्यात्म “वेदों की अनमोल देन सब सुखों का आधार अग्निहोत्र यज्ञ” November 13, 2018 / November 13, 2018 by मनमोहन आर्य | Leave a Comment मनमोहन कुमार आर्य, वैदिक मान्यता के अनुसार मनुष्य जीवन चार आश्रमों में विभाजित है। ये आश्रम हैं ब्रह्मचर्य, गृहस्थ, वानप्रस्थ और संन्यास। एक अरब छियानवें करोड़ से अधिक वर्षों के वैदिक युग में 8 से 12 वर्ष तक की आयु के बच्चे गुरुकुल में अध्ययन हेतु जाते थे। इससे पूर्व का उनका समय माता-पिता के […] Read more » “वेदों की अनमोल देन सब सुखों का आधार अग्निहोत्र यज्ञ” आयुवर्धक आरोग्यदायक पुष्टिकारक बलवर्धक विषनाशक
धर्म-अध्यात्म “महात्मा मुंशीराम एवं पं. लेखराम द्वारा सन् 1891 में हरिद्वार के कुम्भ मेले में धर्म प्रचार का विवरण” November 12, 2018 / November 12, 2018 by मनमोहन आर्य | Leave a Comment मनमोहन कुमार आर्य, महर्षि दयानन्द (1825-1883) ने अपने जीवन काल में सन् 1867 और 1879 के हरिद्वार के कुम्भ मेलों में घर्म-प्रचार किया था। सन् 1883 में उनका देहावसान हुआ। देहावसान के 8 वर्ष बाद सन् 1891 में हरिद्वार में कुम्भ का मेला पुनः आया। तब तक आर्य प्रतिनिधि सभा, पंजाब के अतिरिक्त किसी अन्य […] Read more » आत्मानन्द जी ब्रह्मचारी नित्यानन्द जी ब्रह्मचारी ब्रह्मानन्द जी और पंडित आर्यमुनि स्वामी पूर्णानन्द जी स्वामी विश्वेश्वरानन्द जी
धर्म-अध्यात्म “सृष्टि की उत्पत्ति का कारण और कर्म-फल सिद्धान्त” November 12, 2018 / November 12, 2018 by मनमोहन आर्य | Leave a Comment –मनमोहन कुमार आर्य हम इस विश्व के अनेकानेक प्राणियों में से एक प्राणी हैं। यह विश्व जिसमें असंख्य सूर्य, पृथिवी व चन्द्र आदि लोक लोकान्तर विद्यमान है, इसकी रचना वा उत्पत्ति किस सत्ता ने क्यों की, यह ज्ञान हमें होना चाहिये। महर्षि दयानन्द ने जहां अनेक प्रकार का ज्ञान अपने सत्यार्थप्रकाश आदि ग्रन्थों में दिया […] Read more » “सृष्टि की उत्पत्ति का कारण और कर्म-फल सिद्धान्त” अखण्डनीय अजन्मा अजर अनन्त अनादि अनुत्पन्न अमर अविनाशी नित्य निराकार सच्चिदानन्दस्वरूप सर्वव्यापक सर्वशक्तिमान सर्वान्तर्यामी