Category: धर्म-अध्यात्म

धर्म-अध्यात्म

“देश व विश्व से क्या कभी धर्म विषयक अविद्या दूर होगी?”

/ | Leave a Comment

मनमोहन कुमार आर्य,  आज का युग ज्ञान व विज्ञान का युग है। ज्ञान व विज्ञान दिन प्रतिदिन उन्नति कर रहे हैं। मनुष्यों का ज्ञान निरन्तर बढ़ रहा है परन्तु जब सत्य धर्म की बात करते हैं तो हमें दो प्रकार के मत मुख्यतः ज्ञात होते हैं। एक ईश्वर व आत्मा नामी चेतन पदार्थों को मानने […]

Read more »

धर्म-अध्यात्म समाज

“पराधीन भारत में अंग्रेजों की आर्यसमाजियों पर क्रूर दृष्टि के कुछ उदाहरण”

/ | Leave a Comment

  मनमोहन कुमार आर्य,  पराधीन भारत में अंग्रेज पादरियों और अधिकारियों की आर्यसमाज के अनुयायियों पर कू्रर दण्डात्मक दृष्टि थी। इसके लगभग 24 उदाहरण आर्यसमाज के विद्वान आचार्य पं. सत्यप्रिय शास्त्री, प्राचार्य, दयानन्द ब्राह्म महाविद्यालय, हिसार ने अपनी पुस्तक ‘भारतीय स्वातन्त्र्य संगाम में आर्यसमाज का योगदान’ में दिये हैं। वह पुस्तक के छठे अध्याय में […]

Read more »

धर्म-अध्यात्म

“विधवा विवाह के समर्थन में दो सनातनधर्मी पक्षों में हुए शास्त्रार्थ में आर्यसमाजी ठाकुर अमर सिंह एक पक्ष के शास्त्रार्थकर्ता बनाये गये”

/ | Leave a Comment

–मनमोहन कुमार आर्य,  सन् 1935 में होशियारपुर, पंजाब में सनातन धर्म के दो पक्षों में विधवाओं के पुनर्विवाह के समर्थन में शास्त्रार्थ होना निश्चित हुआ। सनातन धर्म में विधवा विवाह का निषेध मानने वालों को शास्त्रार्थ के लिए दो विद्वान पं. अखिलानन्द और पं. कालूराम शास्त्री मिल गये पर विधवा विवाह का समर्थन करने वाला […]

Read more »