आर्थिकी राजनीति वर्तमान वैश्विक आर्थिक संकट का विकल्प सत्ता परिवर्तन नहीं -अपितु नीति परिवर्तन ही सही विकल्प है February 5, 2011 / January 12, 2012 by श्रीराम तिवारी | 3 Comments on वर्तमान वैश्विक आर्थिक संकट का विकल्प सत्ता परिवर्तन नहीं -अपितु नीति परिवर्तन ही सही विकल्प है श्रीराम तिवारी विगत दिनों महाराष्ट्र के मनमाड कस्बे में एक एस डी एम् को कुछ गुंडों ने जिन्दा जला डाला और खबर है कि इस कुकृत्य में शामिल खलनायक भी उसी आग में झुलस कर बाद में अस्पताल में तड़प- तड़प कर मर गया. यह वाकया सर्वविदित है की पेट्रोल में घासलेट की मिलावट करने […] Read more » capitalization समाजवाद
आर्थिकी पसंदीदा निवेश स्थान के रूप में भारत का उदय January 26, 2011 / December 16, 2011 by प्रवक्ता ब्यूरो | Leave a Comment आर. पी. सिंह विकासशील देशों में निवेश हेतु संसाधनों की जरूरत सामान्यत: घरेलू उपलब्ध संसाधनों से ज्यादा होती है। भारत में ऐतिहासिक तौर पर सकल घरेलू निवेश (जीडीआई) सकल घरेलू बचत (जीडीएस) की तुलना में कम रहा है। यहां प्रतिवर्ष सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) की महज 1.2 से 1.3 फीसदी राशि ही निवेशित हो पाती […] Read more » India भारत
आर्थिकी खेत-खलिहान देश की अर्थव्यवस्था में महत्वपूर्ण है जूट January 26, 2011 / December 16, 2011 by प्रवक्ता ब्यूरो | 1 Comment on देश की अर्थव्यवस्था में महत्वपूर्ण है जूट राजेश मल्होत्रा जूट उद्योग का भारत की अर्थव्यवस्था में महत्वपूर्ण स्थान है। यह पूर्वी क्षेत्र खासकर पश्चिम बंगाल के प्रमुख उद्योगों में एक है। स्वर्ण रेशा कहा जाने वाला जूट प्राकृतिक, नवीकरणीय, जैविक और पर्यावरण के अनुकूल उत्पाद होने के कारण सुरक्षित पैकेजिंग के सभी मानकों पर खरा उतरता है। ऐसा अनुमान है कि जूट […] Read more » Jute जूट
आर्थिकी विदेशों में भारतीय धन : सर्वोच्च न्यायालय ने भारत सरकार को लताड़ा January 18, 2011 / December 16, 2011 by लालकृष्ण आडवाणी | 1 Comment on विदेशों में भारतीय धन : सर्वोच्च न्यायालय ने भारत सरकार को लताड़ा लालकृष्ण आडवाणी सभी मूल्यांकनों की कसौटी पर कसे तो मनमोहन सिंह सरकार अपने साढ़े 6 वर्ष के कार्यकाल में सर्वाधिक गंभीर संकट से गुजर रही है। स्पेक्ट्रम घोटाला, कॉमनवेल्थ गेम्स घोटाला और मुंबई के रक्षा मंत्रालय भूमि सम्बन्धी घोटाले एक साथ इस रूप में सामने आए हैं जिससे आम आदमी को यह महसूस होने लगा […] Read more » Black Money काला धन
आर्थिकी राष्ट्रीय विनिर्माण एवं निवेश क्षेत्र-रोजगार सृजन और भारत को विनिर्माण हब बनाना January 18, 2011 / December 16, 2011 by प्रवक्ता ब्यूरो | Leave a Comment समीर पुष्प भारत इस समय विश्व की सबसे तेजी से बढ़ने वाली अर्थव्यवस्थाओं में शामिल है। उसका लक्ष्य प्रति वर्ष स्थायी रूप से 9-10 प्रतिशत की सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) वृद्धि दर हासिल करना है। अंत: यह आवश्यक है कि विनिर्माण क्षेत्र लंबे अरसे तक 13 से 14 प्रतिशत की दर से विकास करे। परंतु […] Read more » National राष्ट्रीय
आर्थिकी आंकड़ों में उलझी हुई गरीबी December 20, 2010 / December 18, 2011 by सतीश सिंह | 1 Comment on आंकड़ों में उलझी हुई गरीबी सतीश सिंह हमारे देश में गरीबों की पहचान करने के दो तरीके प्रचलित हैं। पहला तरीका योजना आयोग का है और दूसरा तेंदुलकर समिति का, पर अफसोस की बात यह है कि हम दोनों तरीकों के रास्तों पर चलकर भी गरीबों की वास्तविक संख्या के बारे में पता नहीं लगा पा रहे हैं। इसके बावजूद भी […] Read more » poverty गरीबी
आर्थिकी रक्त मुद्रा की समानांतर अर्थव्यवस्था November 20, 2010 / December 19, 2011 by रामदास सोनी | Leave a Comment –रामदास सोनी धन वैध हो या अवैध, मनुष्य के ईमान को हिलाकर रख देता है। अकूत धन कमाने की लालसा निंरतर बढ़ती जाती है, यह लालसा एक ऐसा चक्रव्यूह है जिसमें आदमी प्रवेश तो कर जाता है लेकिन उसका बाहर आ पाना मुश्किल हो जाता है। आज भारत में काले धन की समानांतर व्यवस्था चल […] Read more » economy and black money कालाधन
आर्थिकी उत्सर्जन व्यापार October 17, 2010 / December 21, 2011 by प्रवक्ता ब्यूरो | Leave a Comment -कल्पना पालखीवाला उत्सर्जन व्यापार, यानी उत्सर्जन की अंतिम सीमा निर्धारित करना और व्यापार प्रदूषण को नियंत्रित करने का बाजार आधारित दृष्टिकोण है जिसके तहत उत्सर्जन में कटौती करने वालों को आर्थिक सहायता उपलब्ध कराई जाती है। कोई केंद्रीय प्राधिकरण या नियामक वह सीमा/हद तय करता है जितनी मात्रा तक कोई प्रदूषक उर्त्सजन कर सकता है, […] Read more » Profession उत्सर्जन व्यापार
आर्थिकी दीनदयाल उपाध्याय चिन्तन की प्रासंगिकता September 29, 2010 / December 22, 2011 by डॉ. कुलदीप चन्द अग्निहोत्री | 4 Comments on दीनदयाल उपाध्याय चिन्तन की प्रासंगिकता -डॉ. कुलदीप चन्द अग्निहोत्री दीनदयाल उपाध्याय जी राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के प्रचारक थे। 1950 में जब भारतीय जनसंघ का गठन हुआ तो वे जनसंघ का कार्य देखने लगे। डॉ श्यामा प्रसाद मुखर्जी ने कहा था यदि मुझे दीनदयाल उपाध्याय जैसे चार कार्यकर्ता मिल जाये तो मैं देश की राजनीति बदल सकता हूं। उपाध्याय जी जोड़ने […] Read more » Deen Dayal Upadyay पं.दीनदयाल उपाध्याय
आर्थिकी समग्र विकास के लिए हितधारक भागीदारी संवर्धन एवं भारतीय कोरपोरेट क्षेत्र का विकास August 7, 2010 / December 22, 2011 by प्रवक्ता ब्यूरो | Leave a Comment -आर बंदोपाध्याय आर्थिक सुधार, जो 1980 के दशक में शुरू किया गया और मौजूदा दशक में जिसे नयी दिशा दी गयी, के साथ भारतीय कोरपोरेट क्षेत्र लगातार विकास कर रहा है और लगातार वैश्विक अर्थव्यवस्था का अभिन्न हिस्सा बनता जा रहा है। जहां पिछली सहस्राब्दि के अंतिम दशक में विदेशी कंपनियों ने भारत में खूब […] Read more » Corporate भारतीय कोरपोरेट क्षेत्र
आर्थिकी कहां और कैसा विकास August 6, 2010 / December 22, 2011 by प्रवक्ता ब्यूरो | 7 Comments on कहां और कैसा विकास -चन्द्रकांत सारास्वत केन्द्र में जब वाजपेयी की सरकार थी तब उन्होंने ‘भारत उदय’ की बात की थी। उसके बाद आई कांग्रेस सरकार के मंत्री भी बार-बार ये दोहराते रहते हैं कि भारत विकास कर रहा है। सरकार आम आदमी का विकास कर रही है। सरकारों के इस राग में मीडिया भी ताल दे रहा है। […] Read more » Developement विकास
आर्थिकी भारतीय अर्थव्यवस्था और संप्रग रिपोर्ट कार्ड June 10, 2010 / December 23, 2011 by प्रवक्ता ब्यूरो | Leave a Comment -अशोक हांडू भारतीय मौसम विभाग के पूर्वानुमान के अनुरूप मानसून ने 31 मई 2010 को केरल के तट पर दस्तक दी। वैश्विक आर्थिक संकट और सूखे के कठिन दौर से निकलने के बाद इस साल का मानसून देश की अर्थव्यवस्था के लिए बहुत महत्त्वपूर्ण है। अच्छी शुरुआत होने के कारण यह उम्मीद की जा सकती […] Read more » Economy अर्थव्यवस्था संप्रग