आर्थिकी देशी विदेशी कंपनियों के इशारों पर सरकार ! February 1, 2010 / December 25, 2011 by पीयूष पंत सरकारी फैसलों को अपने हित में प्रभावित करने के लिए कॉरपोरेटी दबाव बनाने की बात कोई नई नहीं है। पूरी दुनिया में लंबे समय से चलता आ रहा है। इसके लिए कंपनियों और उद्योगपतियों द्वारा संपर्क साधने उपहार देने जैसे तरीके अपनाए जाते रहे हैं। लेकिन आज स्थिति इतनी भयावह हो गई है कि अब […] Read more » Country आर्थिक
आर्थिकी महंगाई : कांग्रेस की काली करतूत January 18, 2010 / December 25, 2011 by प्रवक्ता ब्यूरो | 4 Comments on महंगाई : कांग्रेस की काली करतूत आज जनता बेहाल है। बढ़ती कीमतों से वह परेशान है। जीवनावश्यक खाद्यान्नों के दामों में मानों जैसे आग लगी है। कीमत थमने का नाम ही नहीं ले रही है। रोज की सुबह बढ़ते दामों के समाचार पढ़कर ही शुरूआत होती है। कल के दामों के हिसाब से पैसे लेकर बाजार में जाए, तो गणित गड़बड़ा […] Read more » Inflation महंगाई
आर्थिकी अर्थशास्त्र के स्थापित सिद्धांत बदल गये हैं बिहार में January 17, 2010 / December 25, 2011 by सतीश सिंह | 3 Comments on अर्थशास्त्र के स्थापित सिद्धांत बदल गये हैं बिहार में अर्थशास्त्र के सिद्धांतों को मानें तो बिना उधोग-धंधों के विकास के, किसी भी प्रदेश की विकास की बात करना बेमानी है। आमतौर पर माना जाता है कि विकास की प्रथम सीढ़ी कृषि के क्षेत्र में विकास का होना होता है। विकास का रास्ता खेतों से निकल कर के ही कल-कारखानों के ऑंगन तक जाता है। […] Read more » bihar अर्थशास्त्र बिहार विकास दर
आर्थिकी कांग्रेस शासन में महंगाई ने तोडी कमर January 12, 2010 / December 25, 2011 by मयंक चतुर्वेदी | 5 Comments on कांग्रेस शासन में महंगाई ने तोडी कमर कांग्रेसनीत संप्रग सरकार को जनता ने जिस विश्वास के साथ सत्ता पर बैठने का अधिकार सौंपा वस्तुत: सरकार की नीतियों से नहीं लग रहा है कि वह जनता के प्रति गंभीर है। सरकार द्वारा जारी आकडों में भारत वैश्विक स्तर पर तेजी से उभर रहा है। देश में हर सेक्टर में दिन दूनी रात चौगनी […] Read more » Inflation कांग्रेस महंगाई
आर्थिकी विकास के पथ पर बिहार का बढ़ता कारवां January 11, 2010 / December 25, 2011 by सतीश सिंह | 4 Comments on विकास के पथ पर बिहार का बढ़ता कारवां ‘जहाँ चाह वहाँ राह’ वाली बरसों पुरानी कहावत को बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने अक्षरश: चरितार्थ कर दिया है। केन्द्रीय सांख्यकीय संगठन के ताजा रपट को यदि सच मानें तो बिहार का विकास दर 11.03 फीसद है जो गुजरात के विकास दर 11.05 फीसद से मात्र 00.02 फीसद कम है, पर राष्ट्रीय औसत जोकि […] Read more » bihar बिहार विकास दर
आर्थिकी राजनीति जैन साहब गरीब की इज्जत गली में मत लाओ December 4, 2009 / December 25, 2011 by प्रवक्ता ब्यूरो | Leave a Comment मध्यप्रदेश के खाद्य नागरिक आपूर्ति मंत्री पारस जैन की सोच के अनुसार यदि तख्तियां टांगने या घरों के सामने लिखने का काम किया जाये तो हर घर के सामने की दीवार मे नेम प्लेट की जगह किसी के घर मैं बेईमान हँ, मैं चोर हँ, मैं डकेत हँ, मैं राष्ट्रद्रोही हँ, मैं कामचोर हँ, मैं […] Read more » Respect of poor गरीब की इज्जत
आर्थिकी बांस बिन कैसे बजे वंशकारों की बांसुरी December 4, 2009 / December 25, 2011 by प्रवक्ता ब्यूरो | Leave a Comment न रहेगा बांस, न बजेगी बांसुरी। यह कहावत प्रदेश के लाखों वंशकारों की आजीविका पर आये संकट का हाल बंया करती है। बांस पर निर्भर रहने वाले इन बांस कारीगरों के लिये बांस वनों में न कोई जगह है और न ही राज्य सरकार की कार्ययोजना में। राष्ट्रीय बांस मिशन के तहत गठित होने वाली […] Read more » Flute बांस बांसुरी
आर्थिकी जमाखोरी को रोकने के सख्त उपाय सफल होंगे या नहीं ? September 17, 2009 / December 26, 2011 by जयराम 'विप्लव' | Leave a Comment केंद्र की संप्रग सरकार ने खाद्य पदार्थों की जमाखोरी और कालाबाजारी रोकने हेतु उनके भंडारण पर सीमा और कारोबार पर लाइसेंस आदि की शर्तो की मियाद एक साल के लिए बढा दिया है .सरकार ने इसके लिए आवश्यक वस्तु कानून के तहत दालों, चीनी, धान, खाद्य तेल, तिलहन और चावल के संबंध में केंद्रीय अधिसूचनाओं की अवधि अगले वर्ष सितंबर तक बढ़ा दी है। Read more » Food Products कालाबाजारी खाद्य पदार्थों जमाखोरी
आर्थिकी आर्थिक मंदी से बचाने में ग्रामीण अर्थव्यवस्था की अहम भूमिका September 17, 2009 / December 26, 2011 by जयराम 'विप्लव' | Leave a Comment भारतीय अर्थशास्त्रियों ने विश्व आर्थिक मंदी का भारत पर कम असर होने के कई कारण दिए हैं. कहा गया है कि भारतीय अर्थव्यवस्था अभी भी दुनिया की मुख्यधारा से बची हुई है, निर्यात पर निर्भरता कम है, बैंकों पर अभी भी काफ़ी नियंत्रण है, और आमतौर पर पश्चिमी देशों की तरह कर्ज़ लेकर ख़र्च करने […] Read more » GDP Indian Economy आर्थिक मंदी भारतीय अर्थव्यवस्था सकल घरेलू उत्पाद
आर्थिकी कला-संस्कृति अब आओ ऊपर वाले तुम, गायों को अगर बचाना है… September 17, 2009 / December 26, 2011 by गिरीश पंकज | 12 Comments on अब आओ ऊपर वाले तुम, गायों को अगर बचाना है… अब आओ ऊपर वाले तुम, गायों को अगर बचाना है, इंसान के बस की बात नहीं, वह स्वारथ में दीवाना है।। जिस माँ का दूध पिया सबने, उस माँ पर नित्य प्रहार किया। बदले में दूध-दही देकर, माता ने बस उपकार किया। जो है कपूत उन लोगो को, गायों का पाठ पढ़ना है।। ….. कहने […] Read more » Cow गाय
आर्थिकी व्यंग्य: गरीब और गांव का बजट September 12, 2009 / December 26, 2011 by रामस्वरूप रावतसरे | Leave a Comment प्रणव दा ने देश का बजट पेश किया तो लगा कि इस बार हमारी सारी समस्याओं का निदान अपने आप ही हो जावेगा क्योंकि पहली बार बजट गांव व गरीब के लिये पेश किया गया है। हम बजट को ध्यान में रख कर यह विचार कर रहे थे बजट के गांव में आ जाने से […] Read more » vyangya व्यंग्य
आर्थिकी खेत-खलिहान विश्व मंगल गो ग्राम यात्रा September 4, 2009 / December 26, 2011 by प्रवक्ता ब्यूरो | 4 Comments on विश्व मंगल गो ग्राम यात्रा भारत गांवों का देश है। गांव देश की आत्मा और कृषि उसकी योति है। इनका प्राण-तत्व गाय है। प्रकृति की यह अनमोल दैन (गो वंश) विलुप्त होने की कगार पर है। देश में गाय की सैकड़ों प्रजातियां (नस्लें) थीं। मोटे तौर पर आज इनमें से मात्र तैंतीस प्रजातियां बची हैं। ये भी उपेक्षा का शिकार […] Read more » Cow गो ग्राम यात्रा