सिनेमा फिल्म ”गांधी टू हिटलर मेरे नाटक की नकल है – फ्रैंक हुजूर August 14, 2011 / December 7, 2011 by सुनील अमर | Leave a Comment सुनील अमर गत दिनों देश के कुछ सिनेमाघरों में प्रदर्शित द्विभाषी फिल्म ‘गॉंधी टू हिटलर’ की पटकथा विवाद में आ गई है। देश के युवा अंग्रेजी लेखक मनोज खान उर्फ फ्रैंक हुजूर ने आरोप लगाया है कि यह फिल्म उनके 1998 में लिखे नाटक ‘हिटलर इन लव बिद मैडोना’ की भावाभिव्यक्ति है। फ्रैंक कहते हैं […] Read more » Gandhi to hitler गांधी टू हिटलर
सिनेमा ‘आरक्षण’ फिल्म और खोखली दलित चिन्ताएं August 14, 2011 / December 7, 2011 by जगदीश्वर चतुर्वेदी | Leave a Comment जगदीश्वर चतुर्वेदी आरक्षण फिल्म रिलीज हो गयी। तीन राज्यों उत्तरप्रदेश,पंजाब और आंध्र ने इसके प्रदर्शन पर रोक लगायी हुई है। आंध्र में कांग्रेस ,यू.पी. में बहुजन समाज पार्टी और पंजाब में अकाली-भाजपा की राज्य सरकार है। यह संकेत है कला और राजनीति के अन्तर्विरोध का। सुप्रीम कोर्ट और बॉम्बे हाईकोर्ट में मामला विचाराधीन है। इस […] Read more » Reservation आरक्षण
सिनेमा सामाजिक समानता के लिए ‘आरक्षण’ अनिवार्य ! August 12, 2011 / December 7, 2011 by राजेश कश्यप | Leave a Comment राजेश कश्यप जाने माने फिल्मकार प्रकाश झा की बहुविवादित फिल्म ‘आरक्षण’ अंतत: अपनी निर्धारित तिथि 12 अगस्त को प्रदर्शित हो ही गई। पंजाब, उत्तर प्रदेश एवं आन्ध्र प्रदेश की राज्य सरकारों द्वारा पूर्ण प्रतिबन्ध लगाने के बाद तो मामला एकदम अति संवेदनशील हो गया था। पाठकों की बेसब्री को देखते हुए बता दें कि फिल्म […] Read more » Reservation आरक्षण प्रकाश झा
सिनेमा हिन्दुस्तान में हिन्दी के प्रचार प्रसार का प्रभावी एवं सशक्त माध्यम – बॉलीवुड एवं दूरदर्शन August 10, 2011 / December 7, 2011 by उमेश कुमार यादव | 4 Comments on हिन्दुस्तान में हिन्दी के प्रचार प्रसार का प्रभावी एवं सशक्त माध्यम – बॉलीवुड एवं दूरदर्शन उमेश कुमार यादव आज के तारीख में हिन्दी फिल्म इतनी लोकप्रिय हो चुकी है कि चाहे जो भी भाषा-भाषी हो, हिन्दी फिल्म अवश्य देखते हैं । उनके हिट गानें अवश्य गुनगुनाते हैं, भले ही उसका अर्थ नहीं पता हो । क्योंकि आज लोगों को लगने लगा है कि यदि नाम कमाना है या फिर लोकप्रिय […] Read more » hindi हिन्दी
खेल जगत ‘बाप भए चयनकर्ता तो जुगाड़ काहे न होए’ August 2, 2011 / December 7, 2011 by राजकुमार साहू | Leave a Comment राजकुमार साहू यह तो सभी जानते हैं कि आज कि्रकेट, भारत ही नहीं, दुनिया भर में एक ग्लैमरस खेल है और खेलप्रेमियों में इस खेल का जुनून सिर च़कर बोलता है। देशदुनिया में ऐसे भी खेल प्रेमी मिलते हैं, जिनके लिए कि्रकेट ही सब कुछ है तथा उनके पसंदीदा कि्रकेटर भगवान होते हैं। कि्रकेट के […] Read more » बाप भए चयनकर्ता तो जुगाड़ काहे न होए’
सिनेमा 1 अगस्त जन्मदिन पर विशेष: मीना कुमारी August 1, 2011 / December 7, 2011 by शादाब जाफर 'शादाब' | 1 Comment on 1 अगस्त जन्मदिन पर विशेष: मीना कुमारी शादाब जफर “शादाब’’ मीना कुमारी हम तुम्हे कभी नही भूला सकते शायद ही कोई हिन्दी फिल्म प्रेमी ऐसा हो जिस ने अपने जीवन काल में फिल्म पाकीज़ा एक बार न देखी हो। आज फिल्मे किस स्तर पर पहुच गई है कुछ कहने की जरूरत नही। आज की फिल्मे और फिल्म हीरोईनो की ऐसी कहानी हो […] Read more » Meena Kumari मीना कुमारी
कार्टून कार्टून : बी.जे.पी. को भाई कैटरीना की ‘राजनीति’ July 31, 2011 / December 7, 2011 by प्रवक्ता ब्यूरो | 2 Comments on कार्टून : बी.जे.पी. को भाई कैटरीना की ‘राजनीति’ Read more » bjp बी.जे.पी.
सिनेमा ‘खाप’ बनाम ‘खाप’ के निहितार्थ चन्द यक्ष प्रश्न July 29, 2011 / December 8, 2011 by प्रवक्ता ब्यूरो | 3 Comments on ‘खाप’ बनाम ‘खाप’ के निहितार्थ चन्द यक्ष प्रश्न राजेश कश्यप उत्तरी भारत की खाप-प्रथा के खिलाफ ओमपुरी द्वारा अभिनीत फिल्म ‘खाप’ आगामी २९ जुलाई को रीलिज होने जा रही है। क्योंकि फिल्म अत्यन्त संवेदनशील मुद्दे पर बनी है, तो फिल्म के निहितार्थ कुछ तथ्यों पर गहन मन्थन करना अत्यन्त अनिवार्य हो जाता है। चूंकि सिनेमा, समाज का दर्पण होता है और उसने खाप […] Read more » Khap खाप’
सिनेमा सोप-ओपेरा July 19, 2011 / December 8, 2011 by क्षेत्रपाल शर्मा | Leave a Comment क्षेत्रपाल शर्मा पश्चिमी जगत में साहित्य की एक समृद्ध, नाट्य विधा में जो उत्थान आया उसकी जड़ में यह ध्येय नजर आता है कि ‘जो कहते हो वो करो, और जो करते हो वही कहो ।’ यही सत्यं, शिवं और सुन्दरम भी है । मैं लिख तो रहा था ‘कविताओं के नए तेवर’ पर कुछ […] Read more » सोप-ओपेरा
सिनेमा पुण्यतिथि 31 जुलाई पर विशेष:मौहम्मद रफी July 15, 2011 / December 8, 2011 by शादाब जाफर 'शादाब' | 1 Comment on पुण्यतिथि 31 जुलाई पर विशेष:मौहम्मद रफी तुम मुझे यू भुला ना पाओगे………… तुम मुझे यू भुला ना पाओगे, जब कभी भी सुनोगे गीत मेरे संग संग तुम भी गुनगुनाओगे। रफी साहब का गाया ये गीत आज उन की जिन्दगी पर कितना सही बैठता है। आज हिन्दुस्तान ही नही पूरी दुनिया में जहॉ जहॉ रफी साहब को सुना जाता है उन के […] Read more » मौहम्मद रफी
सिनेमा फ़साने की हकीकत:हकीकत का फ़साना July 15, 2011 / December 8, 2011 by राम कृष्ण | Leave a Comment रामकृष्ण चेतन आनन्द ने जब हक़ीकत बनाने की योजना बनायी थी तब उनकी जेब में इतने पैसे भी नहीं रहते थे कि जुहूस्थित अपने आवास से अधोहस्ताक्षरी के लिंकिंग रोडस्थित फ्लैट तक वह बसों से भी आ जा सकें. हम दोनों ही उन दिनों पूरी तरह कड़के थे और मामूली खानपान के लिये भी हमें […] Read more »
सिनेमा धरती की पुकार पर प्यार का बीज बिछाने वाले अनोखे फ़िल्मकार:-बिमल कुमार रॉय July 12, 2011 / December 9, 2011 by राम कृष्ण | Leave a Comment बिमलदा ने तब तक स्वतंत्ररूप से अपनी कोई निर्माण संस्था नहीं स्थापित की थी और बम्बई टॉकीज़ के लिये मां का निर्देशन करने में व्यस्त थे. बम्बई टाकीज़ का कार्यालय उन दिनों चर्चगेट के क्षेत्र में अवस्थित था. जब उनसे मेरी भेंट हुई तो अपने चिरपरिचित धोतीकुरते में सुसज्जित होने के बजाए वह पैंट और […] Read more » Bimal kumar Rai बिमल कुमार रॉय