पर्यावरण विकास के लिये पर्यावरण की उपेक्षा कब तक? May 14, 2019 / May 14, 2019 by ललित गर्ग | Leave a Comment ललित गर्ग आज समग्र्र मनुष्य जाति पर्यावरण के बढ़ते असंतुलन से संत्रस्त है। इधर तेज रफ्तार से बढ़ती दुनिया की आबादी, तो दूसरी तरफ तीव्र गति से घट रहे प्राकृतिक ऊर्जा स्रोत। समूचे प्राणि जगत के सामने अस्तित्व की सुरक्षा का महान संकट है। पिछले लम्बे समय से ऐसा महसूस किया जा रहा है कि […] Read more » पर्यावरण की उपेक्षा
पर्यावरण यह समृद्धि का कैसा विकास है? February 17, 2019 / February 18, 2019 by ललित गर्ग | 1 Comment on यह समृद्धि का कैसा विकास है? ललित गर्ग व्यक्ति, समाज एवं राष्ट्र के विकास को नापने का एक ही पैमाना है और वह है समृद्धि। व्यक्ति का विकास मतलब व्यक्ति की समृद्धि और देश का विकास मतलब देश की समृद्धि। समृद्धि का भी अर्थ निश्चित और सीमित कर दिया गया है। पैसों और संसाधनों का अधिकाधिक प्रवाह ही समृद्धि का अर्थ […] Read more »
पर्यावरण महत्वपूर्ण लेख विविधा ई-कचरे के विरुद्ध शुरू हुआ सार्थक अभियान January 24, 2019 / January 24, 2019 by प्रमोद भार्गव | 1 Comment on ई-कचरे के विरुद्ध शुरू हुआ सार्थक अभियान संदर्भः- अमेरिका व यूरोप से ‘राइट टू रिपेयर‘ यानी ‘मरम्मत करने के अधिकार‘ की मांग का शुरू हुआ अभियान प्रमोद भार्गव दुनियाभर में वस्तुओं के ‘उपयोग करो और फेंको‘ कचरा संस्कृति के विरुद्ध शंखनाद हो गया है। दरअसल पूरी दुनिया में इलेक्ट्रोनिक कचरा (ई-कचरा) बड़ी एवं घातक समस्या बनकर पेश आ रहा है। पृथ्वी, […] Read more » campaign started against e-waste e-waste Right to repair ई-कचरे के विरुद्ध अभियान राइट टू रिपेयर
पर्यावरण वायु प्रदूषण एक महामारी December 8, 2018 / December 8, 2018 by गौहर आसिफ | Leave a Comment गौहर आसिफ देश की राजधानी दिल्ली में बढ़ते वायु प्रदूषण ने सभी को सकते में ला दिया है। हल्दी सर्दी के दस्तक के साथ ही वायु प्रदूषण का खराब स्तर अपने चरम पर पहुंच गया। तमाम प्रयासों के बाद भी हालात सुधरने के बजाय बिगड़ते नज़र आए। तकरीबन डेढ़ माह होने को जा रहा है […] Read more » महामारी वायु प्रदूषण वायु प्रदूषण एक महामारी
पर्यावरण विकास के नाम पर पर्यावरण की उपेक्षा क्यों? March 22, 2018 by ललित गर्ग | Leave a Comment -ललित गर्ग- ‘सबका साथ, सबका विकास’ वर्तमान सरकार का नारा है, यह नारा जितना लुभावना है उतना ही भ्रामक एवं विडम्बनापूर्ण भी है। यह सही है कि आम आदमी की जरूरतें चरम अवस्था में पहुंच चुकी हैं। हम उन जरूरतों को पूरा करने के लिए विकास की कीमत पर्यावरण के विनाश से चुकाने जा रहे […] Read more » environmental devastation Featured पर्यावरण की उपेक्षा विकास
पर्यावरण विविधा बेलगाम ध्वनि प्रदूषण:नियंत्रण ज़रूरी January 13, 2018 by निर्मल रानी | Leave a Comment निर्मल रानी हमारे देश में आम जनता स्वतंत्रता को कुछ अपने ही तरीके से परिभाषित करने में लगी रहती है। आज़ादी का अर्थ पराधीनता से छुटकारा और मानसिक,सामाजिक तथा राजनैतिक स्वतंत्रता के बजाए कुछ इस तरह समझा जाता है गोया हम इस कद्र आज़ाद हैं कि जब और जहां चाहें जो चाहें वह कर सकते […] Read more » Control Required on Sound Pollution sound pollution uncontrolled Sound Pollution ध्वनि प्रदूषण बेलगाम ध्वनि प्रदूषण
पर्यावरण विविधा अम्लीय प्रदूषण से दूषित होती नदियां December 20, 2017 by प्रमोद भार्गव | Leave a Comment प्रमोद भार्गव जल संपदा की दृष्टि से भारत की गिनती दुनियां ऐसे देशों में है, जहां बड़ी तादात में आबादी होने के बावजूद उसी अनुपात में विपुल जल के भंडार अमूल्य धरोहर के रूप में उपलव्ध हैं। जल के जिन अजस्त्र स्त्रोतों को हमारे पूर्वजों व मनीषियों ने पवित्रता और शुद्धता के पर्याय मानते हुये […] Read more » acidic pollution Featured Rivers contaminate Rivers contaminated Rivers contaminated with acidic pollution अम्लीय प्रदूषण दूषित होती नदियां
पर्यावरण विविधा धुंध का समाधान – गोवंश आधारित खेती November 13, 2017 by विजय कुमार | Leave a Comment इन दिनों दिल्ली और पूरा उत्तर भारत धुंध से परेशान है। प्रशासन ने कई जगह छोटे बच्चों के स्कूल बंद करा दिये हैं। सांस तथा फेफड़े के मरीजों को विशेष सावधानी रखने तथा अधिकाधिक तरल पदार्थ लेने को कहा जा रहा है। सुबह टहलने वालों को भी कुछ दिन घर ही रहने की सलाह दी […] Read more » Featured गोवंश आधारित खेती धुंध का समाधान
पर्यावरण विविधा दिल्ली में बढ़ते प्रदूषण का जिम्मेदार कौन ? November 13, 2017 / November 23, 2017 by प्रभुनाथ शुक्ल | Leave a Comment प्रभुनाथ शुक्ल दिल्ली की आबोहवा दमघोंटू हो चुकी है। सांस लेना भी मुश्किल हो चला है। हमारे लिए यह कितनी बड़ी बिडंबना है। जहरीली होती दिल्ली हमारे लिए बड़ा खतरा बन गई है। पर्यावरण की चिंता किए बगैर विकास का सिद्धांत मुश्किल में डाल रहा है। यह पूरी मानव सभ्यता के लिए चिंता का विषय […] Read more » Featured pollution in Delhi दिल्ली दिल्ली में बढ़ते प्रदूषण
पर्यावरण समाज सार्थक पहल धरा को बचाने का संघर्ष कर रहे हैं आदिवासी August 6, 2017 by राजू पाण्डेय | Leave a Comment विगत 100 वर्षों में विकास की सबसे ज्यादा कीमत किसी ने चुकाई है तो वे आदिवासी हैं। किसी को उसके घर से विस्थापित कर दिया जाए, उसकी आजीविका के जरिये छीन लिए जाएं और उसकी पहचान बदल कर इस धर्म या उस धर्म की बना दी जाए तो उससे दुर्भाग्यशाली भला और कौन होगा? आदिवासी […] Read more » adiwasi saving environment Featured आदिवासी
पर्यावरण समाज 3 फीसद जमीन, 17 फीसद जन July 26, 2017 by हेमेन्द्र क्षीरसागर | Leave a Comment हेमेन्द्र क्षीरसागर बेलगाम बढती आबादी एक विश्वव्यापी समस्या हैं, खासतौर पर अविकसीत और विकासशील देशों के लिए यह और भी अधिक गंभीर हैं। विशेषतः भारत में वृद्धि और विकास को हानि पहॅंुचाते हुए तीव्र गति से बढती जनसंख्या परेशानी का सबक बन चुकी हैं। उधेड़बून में हम 1.30 अरब हो चुके हैं। इतर हमारे पास […] Read more » 17 फीसद जन 3 फीसद जमीन Featured over population in India population control Population Explosion in India:
पर्यावरण विविधा वृक्षारोपण: एक पौधा, दस हाथ July 8, 2017 by हेमेन्द्र क्षीरसागर | 1 Comment on वृक्षारोपण: एक पौधा, दस हाथ कवायद में मध्यप्रदेश सरकार ने नर्मदा बेसिन में 6 करोड 67 लाख पौधे रोपकर दुनिया को पर्यावरण बचाने का शानदार संदेश दिया। प्रदेश में 2 जुलाई 2017 की तारिख इतिहास के पन्नों में दर्ज हो गई। बेमिसाल, दुनिया भर में अब तक एक ही दिन में इतनी बडी संख्या में पौधे रोपने का रिकाॅर्ड कहीं नहीं बना। बना तो सिर्फ और सिर्फ मध्यप्रदेश की सरजमीं पर, फलीभूत सूबे का दूसरी बार नाम गिनीज विश्व रिकाॅर्ड में शुमार हो गया। लिहाजा, सदी के इस सबसे बडे महा वृक्षारोपण प्रकल्प की चहुंओर प्रषंसा हो रही है। बेहतर उक्त एक दिवसीय पौधे रोपण के बाद भी जुलाई-अगस्त में प्रदेश के 51 जिलों में करीबन 8 करोड पौधे लगाए जाने की योजना है। Read more » forestation वृक्षारोपण