पर्यावरण समाज सार्थक पहल धरा को बचाने का संघर्ष कर रहे हैं आदिवासी August 6, 2017 by राजू पाण्डेय | Leave a Comment विगत 100 वर्षों में विकास की सबसे ज्यादा कीमत किसी ने चुकाई है तो वे आदिवासी हैं। किसी को उसके घर से विस्थापित कर दिया जाए, उसकी आजीविका के जरिये छीन लिए जाएं और उसकी पहचान बदल कर इस धर्म या उस धर्म की बना दी जाए तो उससे दुर्भाग्यशाली भला और कौन होगा? आदिवासी […] Read more » adiwasi saving environment Featured आदिवासी
पर्यावरण समाज 3 फीसद जमीन, 17 फीसद जन July 26, 2017 by हेमेन्द्र क्षीरसागर | Leave a Comment हेमेन्द्र क्षीरसागर बेलगाम बढती आबादी एक विश्वव्यापी समस्या हैं, खासतौर पर अविकसीत और विकासशील देशों के लिए यह और भी अधिक गंभीर हैं। विशेषतः भारत में वृद्धि और विकास को हानि पहॅंुचाते हुए तीव्र गति से बढती जनसंख्या परेशानी का सबक बन चुकी हैं। उधेड़बून में हम 1.30 अरब हो चुके हैं। इतर हमारे पास […] Read more » 17 फीसद जन 3 फीसद जमीन Featured over population in India population control Population Explosion in India:
पर्यावरण विविधा वृक्षारोपण: एक पौधा, दस हाथ July 8, 2017 by हेमेन्द्र क्षीरसागर | 1 Comment on वृक्षारोपण: एक पौधा, दस हाथ कवायद में मध्यप्रदेश सरकार ने नर्मदा बेसिन में 6 करोड 67 लाख पौधे रोपकर दुनिया को पर्यावरण बचाने का शानदार संदेश दिया। प्रदेश में 2 जुलाई 2017 की तारिख इतिहास के पन्नों में दर्ज हो गई। बेमिसाल, दुनिया भर में अब तक एक ही दिन में इतनी बडी संख्या में पौधे रोपने का रिकाॅर्ड कहीं नहीं बना। बना तो सिर्फ और सिर्फ मध्यप्रदेश की सरजमीं पर, फलीभूत सूबे का दूसरी बार नाम गिनीज विश्व रिकाॅर्ड में शुमार हो गया। लिहाजा, सदी के इस सबसे बडे महा वृक्षारोपण प्रकल्प की चहुंओर प्रषंसा हो रही है। बेहतर उक्त एक दिवसीय पौधे रोपण के बाद भी जुलाई-अगस्त में प्रदेश के 51 जिलों में करीबन 8 करोड पौधे लगाए जाने की योजना है। Read more » forestation वृक्षारोपण
पर्यावरण विविधा वृक्षों में जीव विषयक ऋषि दयानन्द के विचार July 7, 2017 by मनमोहन आर्य | Leave a Comment स्वामी दयानन्द जी इस प्रसंग में आगे लिखते हैं कि वृक्ष आदि के बीजों को जब पृथिवी में बोते हैं तब अंकुर ऊपर आता है और मूल नीचे जाता (रहता) है। जो उन (वृक्षों) को नेत्रेन्द्रिय न होता तो (वह) ऊपर-नीचे को कैसे देखता? इस काम से निश्चित जाना जाता है कि नेत्रेन्द्रिय जड़ वृक्षादिकों में भी हैं। बहुत (प्रकार की) लता होती हैं, जो वृक्ष और भित्ती के ऊपर चढ़ जाती हैं, जो (उनमें) नेत्रेन्द्रिय न होता तो उसको (वृक्ष और भित्ति को) कैसे देखता तथा स्पर्शेन्द्रिय तो वे (जैन) भी मानते हैं। जीभ इन्द्रिय भी वृक्षादिकों में हैं क्योंकि मधुर जल से बाग आदि में जितने वृक्ष होते हैं, उनमें खारा जल देने से सूख जाते हैं। जीभ इन्द्रिय न होता तो खारे वा मीठे का स्वाद (वह वृक्ष) कैसे जानते? श्रोत्रेन्द्रिय भी वृक्षादिकों में हैं, क्योंकि जैसे कोई मनुष्य सोता हो, उसको अत्यन्त शब्द (तेज आवाज, शोर वा धमाका आदि) करने से सुन लेता है तथा तोफ आदिक शब्द से भी वृक्षों में कम्प होता है, जो श्रोत्रेन्द्रिय न होता, तो कम्प क्यों होता क्योंकि अकस्मात् भयंकर शब्द के सुनने से मनुष्य, पशु, पक्षी अधिक कम्प जाते हैं, वैसे वृक्षादिक भी कम्प जाते हैं। जो वह कहें कि वायु के कम्प से वृक्ष में चेष्टा हो जाती है, अच्छा तो मनुष्यादिकों को भी वायु की चेष्टा से शब्द सुन पड़ता है, इससे वृक्षादिकों में भी क्षोत्रेन्द्रिय है। Read more » ऋषि दयानन्द वृक्षों में जीव
पर्यावरण विविधा मौसम विभाग की चेतावनी : बादलों के बरसने की घट रही है क्षमता June 24, 2017 by प्रमोद भार्गव | Leave a Comment वायुमण्डल के इन क्षेत्रों में जब विपरीत परिस्थिति निर्मित होती है तो मानसून के रुख में परिवर्तन होता है और वह कम या ज्यादा बरसात के रूप में धरती पर गिरता है। महासागरों की सतह पर प्रवाहित वायुमण्डल की हरेक हलचल पर मौसम विज्ञानियों को इनके भिन्न-भिन्न ऊंचाईयों पर निर्मित तापमान और हवा के दबाव, गति और दिशा पर निगाह रखनी होती है। इसके लिये कम्प्यूटरों, गुब्बारों, वायुयानों, समुद्री जहाजों और रडारों से लेकर उपग्रहों तक की सहायता ली जाती है। इनसे जो आंकड़ें इकट्ठे होते हैं उनका विश्लेषण कर मौसम का पूर्वानुमान लगाया जाता है। Read more » Featured मौसम विभाग की चेतावनी
पर्यावरण समाज लद्दाख के वातावरण को बचाने का अनोखा प्रयास June 12, 2017 by चरखा फिचर्स | Leave a Comment स्थानीय लोगो के माल मवेशी पर हिंसक हमलों के कारण लोगो का तेंदुए पर गुस्सा बहुत अधिक था, ऐसे में क्षेत्र में विभिन्न पशुओं के नस्लों की रक्षा करना महत्वपूर्ण था। रात के समय पशुओं को रखने की जगह चारो ओर से तो सुरक्षित थी परंतु उपर से खुली होती थी। कारणवश स्नो लेपर्ड रात के समय में जानवरों पर हमला कर देता था और लोगो औरस्नोलेपर्ड के बीच संघर्ष का एक वातारण निरंतर रुप से बढ़ता ही जा रहा था। Read more » लद्दाख स्नो लेपर्ड
पर्यावरण विविधा घट रहे हैं पेड़़ June 9, 2017 by प्रमोद भार्गव | Leave a Comment पेड़ लगाने और उनकी सुरक्षा से जुड़ा सबसे दुखद पहलू यह है कि सरकारी नीतियां के चलते सारी जिम्मेबारियां लाल फीताशाही की गिरफ्त में आ गई है। पेड़ लगाने, काटने, उसे परिवहन व विक्रय करने के कायदे-कानून राज्य सरकारों के आधीन हैं। निजी भूमि पर लगाया गया पेड़ भी काटने के लिए राजस्व और वन विभाग से अनुमति लेनी पड़ती है। इनमें रिष्वत का बोलबाला है। नतीजतन इन परेशानियों से बचने के लिए लोगों ने पेड़ उगाना ही बंद कर दिया है। इस कारण आम आदमी का वन प्रबंधन से अब कोई संबंध ही नहीं रह गया है। आज भारत के सबसे गरीब लोग सबसे संमृद्ध वनों में रहते है। किंतु पेड़ और वनोपज से सर्वथा वंचित है। गोया जब इन गरीबों को पेड़ उगाने और काटने के साथ वनोपज के स्वामित्व से जोड़ा जाएगा, तभी वनों का विकास व सरंक्षण संभव है। Read more » पेड़़ वृक्षों का सरंक्षण
पर्यावरण विविधा पर्यावरण में युद्ध स्तरीय सुधार की जरुरत June 7, 2017 by डा. राधेश्याम द्विवेदी | Leave a Comment - पर्यावरण की अवहेलना के गंभीर दुष्परिणाम समूचे विश्व में परिलक्षित हो रहे हैं। अब सरकार जितने भी नियम-कानून लागू करें उसके साथ साथ जनता की जागरूकता से ही पर्यावरण की रक्षा संभव हो सकेगी। इसके लिए कुछ अत्यंत सामान्य बातों को जीवन में दृढ़ता-पूर्वक अपनाना आवश्यक है। जैसे -प्रत्येक व्यक्ति प्रति वर्ष यादगार अवसरों (जन्मदिन, विवाह की वर्षगांठ) पर अपने घर, मंदिर या ऐसे स्थल पर फलदार अथवा औषधीय पौधा-रोपण करे, जहाँ उसकी देखभाल हो सके। उपहार में भी सबको पौधो दें। शिक्षा संस्थानों व कार्यालयों में विद्यार्थी, शिक्षक, अधिकारी और कर्मचारीगण राष्ट्रीय पर्व तथा महत्त्वपूर्ण तिथियों पर पौधों रोपे। Read more » पर्यावरण विश्व पर्यावरण दिवस
पर्यावरण विश्ववार्ता पर्यावरण और विकास June 5, 2017 by अरुण तिवारी | Leave a Comment 05 जून – विश्व पर्यावरण दिवस पर विशेष पर्यावरणीय समृद्धि की चाहत, जीवन का विकास करती है, विकास की चाहत, सभ्यताओं का। सभ्यता को अग्रणी बनाना है, तो विकास कीजिए। जीवन का विकास करना है, तो पर्यावरण को समृद्ध रखिए। स्पष्ट है कि पर्यावरण और विकास, एक-दूसरे का पूरक होकर ही इंसान की सहायता कर […] Read more » विश्व पर्यावरण दिवस
पर्यावरण विविधा विश्व में विकास की अंधी दौड़ से प्रकृति बढ रही विनाश की ओर June 5, 2017 by ब्रह्मानंद राजपूत | Leave a Comment आज विवाह, जन्मदिन, पार्टी और अन्य ऐसे समारोहों पर उपहार स्वरूप पौधों को देने की परंपरा शुरू की जाए। फिर चाहे वो पौधा, तुलसी का हो या गुलाब का, नीम का हो या गेंदे का। इससे कम से कम लोगों में पेड पौधों के प्रति एक लगाव की शुरूआत तो होगी। और लोगों में पर्यावरण के प्रति जागरूकता आएगी और ईको फ्रेंडली फैशन की भी शुरुआत होगी। Read more » Featured world environment day विश्व पर्यावरण दिवस 05 जून
पर्यावरण विविधा विश्व पर्यावरण दिवस : निर्वाह परंपरा का May 31, 2017 by प्रवक्ता ब्यूरो | Leave a Comment डॉ. राजू पाण्डेय 1972 में हुई यूनाइटेड नेशन्स कांफ्रेंस ऑन द ह्यूमन एनवायरनमेंट के प्रथम दिवस को संयुक्त राष्ट्र संघ की सामान्य सभा द्वारा विश्व पर्यावरण दिवस के रूप में मनाने का निर्णय लिया गया। 1974 से प्रत्येक वर्ष एक विशेष थीम को आधार बनाकर यह मनाया जाता है और 1987 से इसका कोई मेजबान […] Read more » Featured world environment day विश्व पर्यावरण दिवस
पर्यावरण विविधा बिहार गाद संकट: समाधान, पहल और चुनौतियां May 24, 2017 by अरुण तिवारी | Leave a Comment जब तक भगीरथी पर टिहरी बांध, गंगा पर भीमगौड़ा, नरोरा जैसे ढांचे नहीं थे, तब तक यह बैक्टीरियोफाॅज हिमालय में पैदा होकर बिहार और बंगाल तक आते थे। बहुत संभव है कि इनके कारण उत्तर प्रदेश, बिहार, झारखण्ड और बंगाल के गंगा किनारे के भूजल की निर्मलता भी सुनिश्चित होती रही हो। नीरी की एक रिपोर्ट बताती है कि अब मात्र 10 प्रतिशत बैक्टीरियोफाॅज ही नीचे आते हैं। शेष 90 प्रतिशत टिहरी की झील में बंधकर रह जाते हैं। जाहिर है कि टिहरी बांध द्वारा पैदा की रुकावट के कारण अब यह बैक्टीरियोफाॅज और हिमालय से निकली विशिष्ट गुणों वाली सिल्ट अब बिहार तक नहीं पहुंचती। Read more » Featured बिहार गाद संकट