पर्यावरण प्राकृतिक कम, मानव निर्मित अधिक हैं बाढ़ के कारण September 15, 2010 / December 22, 2011 by तनवीर जाफरी | 2 Comments on प्राकृतिक कम, मानव निर्मित अधिक हैं बाढ़ के कारण -तनवीर जाफ़री ग्लोबल वार्मिंग संबंधी समाचारों को सुन-सुन कर पूरा विश्व चिंतित हो उठा है। ग्लेशियर कालगातार पिघलना,समुद्र के जलस्तर का बढ़ना, सूखा, बाढ़ जैसी विपदाएं मनुष्य को अपने व अपनी भावी पीढ़ियों के विषय में बहुत कुछ सोचने को मजबूर कर रही हैं। सूर्य का तापमान वर्ष दर वर्ष बढ़ता ही जा रहा है। […] Read more » Flood बाढ़
पर्यावरण दुश्वारियों में अनवाल August 25, 2010 / December 22, 2011 by प्रवक्ता ब्यूरो | 1 Comment on दुश्वारियों में अनवाल -त्रिलोक चन्द्र भट्ट गाँधी आश्रम से लेकर वस्त्र विक्रेताओं की विभिन्न दुकानों पर पर्वतीय भेड़ों से प्राप्त ऊन से बने सुन्दर स्वेटर, दन, चुकटे व थुलम देशी-विदेशी पर्यटकों को खूब लुभाते हैं। उत्तराखण्ड के बागेश्वर, पिथौरागढ़, उत्तरकाशी, गोपेश्वर आदि जिलों में आयोजित मेलों में स्थानीय ऊन से बनी वस्तुओं का अच्छा कारोबार होता है और […] Read more » Enviroment अनवाल
पर्यावरण हिंद महासागर पूर्वानुमान प्रणाली August 7, 2010 / December 22, 2011 by प्रवक्ता ब्यूरो | Leave a Comment पेशकश : असलम ख़ान विभिन्न समयमान के संदर्भ में पूर्वानुमान समुद्री विज्ञानी मापदण्ड (स्तल और अधस्तल) मौसम विज्ञानियों से लेकर मछुआरों और जलसेना से लेकर अपतटीय उद्योगों के लिए बहुत महत्त्वपूर्ण है। इस समय भारतीय राष्ट्रीय समुद्र सूचना सेवा केंद्र (आईएनसीओआईएस) भारतीय समुद्री सीमाओं और पूरे हिंद महासागर में लहरों के बारे में पूर्वानुमान करने […] Read more » Hind Mahasagar हिंद महासागर
पर्यावरण ग्लोबल वार्मिंग से बिगड़ी भारत के मानसून की चाल August 3, 2010 / December 22, 2011 by पंकज चतुर्वेदी | 3 Comments on ग्लोबल वार्मिंग से बिगड़ी भारत के मानसून की चाल -पंकज चतुर्वेदी मानसून की टेढ़ी चाल से भारत में सभी हतप्रभ हैं। पिछले कुछ वर्षों से जिस तरह से मानसून दगा दे रहा है। वो भारत जैसे कृषि प्रधान देश में भारी चिंता का विषय हैं। सामान्यतः मानसून शब्द का उपयोग भारी वर्षा के पर्याय के रूप में होता है, लेकिन वस्तुतः यह हवा की […] Read more » Global Warming ग्लोबल वार्मिंग
पर्यावरण सुन्दरवन तथा न्यू मूर द्वीप पर संकट के बादल July 30, 2010 / December 22, 2011 by मनोज श्रीवास्तव 'मौन' | 1 Comment on सुन्दरवन तथा न्यू मूर द्वीप पर संकट के बादल – मनोज श्रीवास्तव मौन दुनिया में अपने सदाबहार वनों के कारण 3500 किमी. के क्षेत्रफल में फैले और तटबंध से सुरक्षित वन्यक्षेत्र सुंदरवन के रूप में पूरे विश्व में प्रसिद्ध है। सुंदरवन के परिक्षेत्र में स्थित न्यू मूर द्वीप समुद्र की गहराइयों में समा गया है। भारत-बांग्लादेश के मध्य विवादित 9 किलोमीटर परिधि वाले इस […] Read more » Sunder van न्यू मूर द्वीप सुन्दरवन
पर्यावरण बाढ़ से कराहती मानवता July 12, 2010 / December 23, 2011 by संजय द्विवेदी | 2 Comments on बाढ़ से कराहती मानवता प्रलंयकारी बाढ़ के कारणों के स्थाई समाधान खोजने की जरूरत -संजय द्विवेदी कोई संकट अगर हर साल आता है तो क्या उसके स्थाई समाधान नहीं हो सकते। अगर हो सकते हैं तो हमें किसने रोक रखा है। उप्र, बिहार से लेकर देश के तमाम इलाके कभी बाढ़ और कभी सूखे की चपेट में रहते हैं। […] Read more » Flood बाढ़
पर्यावरण शासन व प्रशासन को चुनौती देती प्रलयकारी बारिश व बाढ़ July 12, 2010 / December 23, 2011 by निर्मल रानी | 1 Comment on शासन व प्रशासन को चुनौती देती प्रलयकारी बारिश व बाढ़ -निर्मल रानी ग्रीष्म ऋतु में जब सूर्यदेवता अपने प्रचंड तेवर दिखाते हैं उस समय जनता उनके इस प्रकोप से त्राहि- त्राहि करने लग जाती है। उस दौरान मनुष्य एक ओर जहां असहनीय भीषण गर्मी से परेशान हो उठता है वहीं धरती भी प्राय: इतनी भीषण गर्मी सहन न कर पाते हुए फट पड़ती है तथा […] Read more » Flood बाढ़
पर्यावरण भयावह लगने लगी है आने वाले कल की तस्वीर July 12, 2010 / December 23, 2011 by लिमटी खरे | 1 Comment on भयावह लगने लगी है आने वाले कल की तस्वीर -लिमटी खरे दुनिया की आबदी जिस द्रुत गति से बढ रही है, उसे देखकर यह कहना अतिश्योक्ति नहीं होगा कि आने वाले समय की कल्पना मात्र से रोंगटे खडे हो रहे हैं। दुनिया के पास महज बीस साल का तेल और सौ साल तक उपयोग करने के लिए कोयले का भंडार बचा है, समय रहते […] Read more » Enviroment पर्यावरण
पर्यावरण जल की उपलब्धता और भारतीय ग्राम July 9, 2010 / December 23, 2011 by आलोक कुमार यादव | 2 Comments on जल की उपलब्धता और भारतीय ग्राम -आलोक कुमार यादव भूमंडलीकरण के इस दौर में भारत के ग्रामीण जन जिन मुख्य समस्याओं से रू-ब-रू होना पड़ रहा है उनमें से एक भूजल स्तर का गिरना भी है। जल जीवन की अनिवार्यता है इतिहास इस बात का साक्षी है कि अधिकतर आदि सम्यताएं विभिन्न नदी-घाटियों में जन्मी और फली-फूली है। अनेक महत्वपूर्ण नगर, […] Read more » water जल
पर्यावरण घुट रहा है गंगा का दम July 9, 2010 / December 23, 2011 by राजेश त्रिपाठी | 2 Comments on घुट रहा है गंगा का दम -राजेश त्रिपाठी • गंगोत्री से गंगासागर तक घोला जा रहा है जहर • ममुष्यों के पीने योग्य तो दूर, नहाने लायक भी नहीं रहा गंगाजल • चेतो भारतवासियो! यह जीवनरेखा सूखी तो खत्म हो जायेगा देश पुण्य सलिला सुरसरी, पतितपावनी, जगउद्धारिणी गंगा जिसका हर भारतवासी से जन्म से लेकर मरण तक का अटूट नाता है। […] Read more » Ganga River गंगा
पर्यावरण पानी का ‘पानी’ उतारने में किसे आती है शर्म July 5, 2010 / December 23, 2011 by प्रवक्ता ब्यूरो | 1 Comment on पानी का ‘पानी’ उतारने में किसे आती है शर्म – अखिलेश आर्येन्दु वैज्ञानिकों के मुताबिक अगला युद्ध तेल, पूंजी या तानाशाही स्थापित करने को लेकर नहीं, बल्कि पानी को लेकर होगा। यह अनुमान काफी हद तक सच भी दिखाई पड़ने लगा है। पानी की कमी भारत जैसे विकासशाील देश में ही नहीं दिखाई पड़ रही है बल्कि उन विकसित देशों में भी हो गई […] Read more » water पानी
पर्यावरण प्लास्टिक कचरा : गहराता पर्यावरणीय संकट June 26, 2010 / December 23, 2011 by फ़िरदौस ख़ान | 1 Comment on प्लास्टिक कचरा : गहराता पर्यावरणीय संकट -फ़िरदौस ख़ान प्लास्टिक कचरा पर्यावरण के लिए एक गंभीर संकट बना हुआ है। हर परिवार हर साल क़रीब तीन-4 किलो प्लास्टिक थैलों का इस्तेमाल करता है। बाद में यही प्लास्टिक के थैले कूड़े के रूप में पर्यावरण के लिए मुसीबत बनते हैं। पिछले साल देश में 29 लाख टन प्लास्टिक कचरा था, जिसमें से करीब […] Read more » Plastic Waste प्लास्टिक कचरा