पर्यावरण भूगर्भीय घटनाएं व भूकम्प से दिन की लम्बाई में कमी तथा धुरी छोड़ने पर विवश धरती June 18, 2010 / December 23, 2011 by मनोज श्रीवास्तव 'मौन' | 5 Comments on भूगर्भीय घटनाएं व भूकम्प से दिन की लम्बाई में कमी तथा धुरी छोड़ने पर विवश धरती – मनोज श्रीवास्तव ”मौन’‘ धरती पर भूकम्प के अध्ययन कार्य में हजारों वैज्ञानिक लगे हुए हैं जो इस बात पर विचार कर रहे हैं कि भूकम्प जैसी प्राकृतिक घटनाएं जान माल का नुकसान करने के अतिरिक्त और किस-किस तरह से धरती को प्रभावित कर सकती हैं। आने वाले भूकम्पों में संख्यात्मक दृष्टि से गुणात्मक वृद्धि […] Read more » Earth धरती भूकम्प भूगर्भीय घटनाएं
पर्यावरण जल संरक्षण महाभियान पर विशेष June 9, 2010 / December 23, 2011 by अशोक बजाज | 4 Comments on जल संरक्षण महाभियान पर विशेष “जल जो न होता तो ये जग जाता जल” – अशोक बजाज चांदी सा चमकता ये नदिया का पानी , पानी की हर बूंद देती जिंदगानी ! अम्बर से बरसे जमीन पर मिले , नीर के बिना तो भैय्या काम ना चले ! ओ मेघा रे………. जल जो न होता तो ये जग जाता जल, […] Read more » Water Reservation जल संरक्षण
पर्यावरण संकटग्रस्त सुन्दरवन और न्यू मूर द्वीप अब सागर के आगोश की ओर May 28, 2010 / December 23, 2011 by मनोज श्रीवास्तव 'मौन' | Leave a Comment -मनोज श्रीवास्तव ”मौन’‘ दुनिया में अपने सदाबहार वनों के कारण 3500 किमी. के क्षेत्रफल में फैले और तटबन्ध से सुरक्षित वन्यक्षेत्र सुन्दरवन के रूप में पूरे विष्व में प्रसिद्ध है। सुन्दरवन के परिक्षेत्र में स्थित न्यू मूर द्वीप समुद्र के गहराईयों में समा गया है। भारत-बांग्लादेश के मध्य विवादित 9 किलोमीटर परिधि वाले इस निर्जन […] Read more » Sunder van न्यू मूर द्वीप सुन्दरवन
पर्यावरण हीट स्ट्रोक के मामलों में इज़ाफ़ा, अहतियात बरतने की सलाह May 19, 2010 / December 23, 2011 by प्रवक्ता ब्यूरो | 1 Comment on हीट स्ट्रोक के मामलों में इज़ाफ़ा, अहतियात बरतने की सलाह –चांदनी नई दिल्ली. भीषण गर्मी के कारण देश में हीट स्ट्रोक के मामलों में इज़ाफ़ा में इज़ाफ़ा हो रहा है. हार्ट केयर फाउंडेशन ऑफ इंडिया ने गर्मी में मरीजों द्वारा की जाने वाली गलतियों और प्रबंध के बारे में दिशा-निर्देश जारी किए हैं. हार्ट केयर फाउंडेशन ऑफ इंडिया के अध्यक्ष डॉ. के के अग्रवाल और […] Read more » Hot गर्मी हीट स्ट्रोक
पर्यावरण एक लाख रूपए रोजाना खर्च के बावजूद प्यासे हैं कंठ May 13, 2010 / December 23, 2011 by लिमटी खरे | 1 Comment on एक लाख रूपए रोजाना खर्च के बावजूद प्यासे हैं कंठ -लिमटी खरे मध्य प्रदेश के हृदय प्रदेश की राजधानी भोपाल और उसी सूबे में भगवान शिव की नगरी सिवनी में क्या समानता है, इस प्रश्न का उत्तर दोनों ही शहरों में रहने वाला हर एक नागरिक दे सकता है। दोनों ही शहरों में पेयजल के पर्याप्त स्त्रोत होने के बावजूद भी दोनों ही शहरों के […] Read more » water पानी
पर्यावरण सोचो, करो कुछ भी…जमीन हमारी ही है !! May 10, 2010 / December 23, 2011 by प्रवक्ता ब्यूरो | 2 Comments on सोचो, करो कुछ भी…जमीन हमारी ही है !! -अशोक मालवीय सरकार हो या पूँजीवादी ताकतें, इन्होंने कभी भी आदिवासियों को उनका हक नहीं देना चाहा है? लेकिन जब जनाक्रोश एक सैलाब का रूप धारण कर लेता तो इसकी दहशत की वजह से इनके हक को दर्शाने वाले कानून तो बना दिये जाते है। परन्तु इसके सही क्रियान्वयन न करने की निरन्तर प्रक्रिया के […] Read more » Forest lease वन पट्टा
पर्यावरण पानी माफिया की मुट्ठी में कैद है हिन्दुस्तान की सियासत April 22, 2010 / December 24, 2011 by लिमटी खरे | Leave a Comment ब्रितानी जब हिन्दुस्तान पर राज किया करते थे, तब उन्होंने साफ कहा था कि आवाम को पानी मुहैया कराना उनकी जवाबदारियों में शामिल नहीं है। जिसे पानी की दरकार हो वह अपने घर पर कुंआ खोदे और पानी पिए। यही कारण था कि पुराने घरों में पानी के स्त्रोत के तौर पर एक कुआ अवश्य […] Read more » politics सियासत
पर्यावरण ग्रीन हाउस गैस और पर्यावरण से उपजी समस्या – मनोज श्रीवास्तव ‘मौन’ March 24, 2010 / December 24, 2011 by मनोज श्रीवास्तव 'मौन' | 2 Comments on ग्रीन हाउस गैस और पर्यावरण से उपजी समस्या – मनोज श्रीवास्तव ‘मौन’ विकास के नाम पर सभी देशों में वनों को काटने में जरा भी कसर नहीं छोड़ी जा रही है। हरी पहाड़ियों की हरियाली छीनकर सड़कों का निर्माण तथा रिहायसी निर्माण किया जा रहा है। चट्टानों वाली छोटी पहाड़ियों से खुदाई करके निर्माण के लिए गिटि्टयां, टाइले, सीमेंट आदि तैयार करते हुए धरती में गहरे गड्ढ़े […] Read more » Green House Gas ग्रीन हाउस गैस
पर्यावरण जलवायु प्रश्न March 13, 2010 / December 24, 2011 by अरुण माहेश्वरी धरती की जलवायु पर कोपेनहेगन सम्मेलन (7–18 दिसंबर ’09) खत्म हो गया। सम्मेलन के अंदर और बाहर, सभी जगह बेहिसाब उत्तेजना रही। उत्तेजना के मूल में यह चिंता थी कि इस पृथ्वी ग्रह को बचाने का आखिरी मौका है। अब न चेता गया तो पृथ्वी और उसपर मनुष्य मात्र के अस्तित्व पर खतरा है। इसके […] Read more » Climate Change जलवायु परिवर्तन
पर्यावरण जनाधिकार है पर्यावरण February 15, 2010 / December 25, 2011 by जगदीश्वर चतुर्वेदी | 1 Comment on जनाधिकार है पर्यावरण आज समय की मांग है कि विश्व के प्रति ऐसा दृष्टिकोण अपनाया जाए, जो मानव जाति की एकता, समाज और प्रकृति में समन्वय के सिध्दान्त पर आधारित हो। विश्व के प्रति नया दृष्टिकोण विश्व-स्तर पर मानव के ‘अधिकार’ को भी प्रभावित करेगा। मानव जाति की संपत्ति होने के कारण ‘ पृथ्वी’ पर किसी का भी […] Read more » Enviroment पर्यावरण
पर्यावरण पानी के लिए लोग होंगे पानी-पानी – संतोष सारंग February 13, 2010 / December 25, 2011 by प्रवक्ता ब्यूरो | Leave a Comment आज विश्व की लगभग एक अरब आबादी को जल के लिए तरसना पड़ रहा है। भारत, श्रीलंका, पाकिस्तान, ब्राजील जैसे तमाम विकासशील देशों में लाखों लोग गंदे पानी से पैदा होनेवाली बीमारियों के कारण मौत के ग्रास बन जाते हैं। धरती के संपूर्ण जल में साफ पानी का प्रतिशत 0.3 से भी कम है। आनेवाले […] Read more » water पानी
पर्यावरण पर्यावरणवादियों के तर्कशास्त्र के परे February 12, 2010 / December 25, 2011 by जगदीश्वर चतुर्वेदी | Leave a Comment पर्यावरण के प्रति उत्तर-आधुनिकों का रवैया मिथकीय और विज्ञान विरोधी है। पर्यावरण को ये लोग पूंजीवाद के आम नियम से पृथक् करके देखते हैं। कायदे से पर्यावरण के बारे में मिथों को तोड़ा जाना चाहिए। विज्ञान-सम्मत दृष्टिकोण का प्रचार किया जाना चाहिए। पर्यावरण के प्रश्न सामाजिक विकास के प्रश्न हैं। इनकी उपेक्षा नहीं होनी चाहिए। […] Read more » Enviroment पर्यावरणवादि