कहानी खुशी July 16, 2013 / July 16, 2013 by प्रभुदयाल श्रीवास्तव | Leave a Comment “क्या बात है,बहुत खुश हो आज|”उसने उससे कहा| “बात ही ऐसी है,आज खुश नहीं होऊंगा तो कब होऊंगा|’ “अरे भाई पता भी तो लगे हमारे प्रिय मित्र की खुशी का रहस्य|” “आज बहुत बड़ी साध पूरी हो हई मेरी|” “क्या कोई लाटरी लग गई या कारूं का खजाना मिल गया?” “इससे भी बड़ी उपलब्धि” “अरे […] Read more » खुशी
कहानी ऊंचे विचार वाले July 15, 2013 / July 15, 2013 by प्रभुदयाल श्रीवास्तव | 1 Comment on ऊंचे विचार वाले साहित्यिक गोष्ठी समाप्त हो चुकी थी और मैं अपने गृह नगर वापिसी के लिये ट्रेन पकड़ने कॆ उद्देश्य से स्टेशन आ गया था||ट्रेन करीब दो घंटे लेट थी| हम पति पत्नी समय बिताने के लिये एक बेंच पर बैठ गये|प्लेट फार्म पर बहुत चहल पहल थी| थोड़ी […] Read more » ऊंचे विचार वाले
कहानी लघु कथा-स्टाफ July 13, 2013 / July 13, 2013 by जगमोहन ठाकन | 2 Comments on लघु कथा-स्टाफ जग मोहन ठाकन अम्बेडकर चौक । राजस्व विभाग का नाका। हर समय दो प्रहरी तैनात । पद के अनुरूप भारी तोंद वाला हवलदार कुर्सी पर विराजमान । छरहरे बदन वाले सिपाही द्वारा हर आने जाने वाले वाहन को चैकिंग के बहाने रोक कर रिजर्व बैंक द्वारा छापी गर्इ मुद्रा की वसूली कर आगे बढ़ने का […] Read more »
कहानी साहित्य उत्तराखण्ड का ‘बेताज’ अंग्रेज राजा July 6, 2013 / July 6, 2013 by डा.राज सक्सेना | 3 Comments on उत्तराखण्ड का ‘बेताज’ अंग्रेज राजा सन 1842 की बात है | पहले अंग्रेज-अफगान युद्ध में अंग्रेजों की हार हुई | कुछ अज्ञात कारणों से सेना से कुछ लोग भाग निकलें | शायद मरने के डर से,जेल के डर से या हारने की आत्मग्लानि से, कारण कुछ भी हो कुछ सिपाही भागे तो, इन्ही भागे हुए सिपाहियों में से एक भगोड़े […] Read more » उत्तराखण्ड का 'बेताज' अंग्रेज राजा
कहानी साहित्य “एक सौ नवासी का कफन” June 22, 2013 / June 22, 2013 by सेराज खान 'जासम' | 1 Comment on “एक सौ नवासी का कफन” जून का महीना था, सुबह के दस बजे होंगे| हवाओं मे इतनी गर्माहट थी मानो भट्टे से गर्म करके भेजी जा रही हो| खिड़की के सामने की दीवार पे एक पुरानी तस्वीर लगी थी तस्वीर दो कील वाली थी जिसकी एक कील गिर गयी है और तस्वीर एक कील पे दोलन गति कर रही थी| […] Read more » “एक सौ नवासी का कफन”
कहानी साहित्य लधुकथा(राजनीति) June 15, 2013 / June 15, 2013 by नरेंद्र भारती | Leave a Comment गरीब थी ,बेचारी रोज शहर में दिहाड़ी कमाने जाती, शाम ढलते ही वापस घर आ जाती थी । एक दिन उसकी बस छूट गई । बस अड्डे पर अकेली खड़ी थी । तभी एक दम तेज गति से एक कार रूकी,एक दादा टाईप लड़का उसके पास आया, बोला कहां जाना है, जी रामनगर !चलो कार […] Read more » लधुकथा(राजनीतिद्ध)
कहानी साहित्य लधुकथा(पुस्तकवध्द) June 15, 2013 / June 15, 2013 by नरेंद्र भारती | 1 Comment on लधुकथा(पुस्तकवध्द) आज रविवार था ,विजय को भी दफतर से अवकाश था । सोचा परिवार सहित बाजार घूमने चलें । विजय की पत्नी नेहा व बच्चे भी जल्दी से तैयार हुए और गाड़ी में बैठकर चल दिए । विजय की पत्नी नेहा व बेटी स्नेहा ने शापिगं की । खरीदारी करने के बाद विजय एक बुकस्टाल पर […] Read more » पुस्तकद्ध
कहानी एक थी माया ………….!!! June 13, 2013 / June 13, 2013 by विजय कुमार सप्पाती | 3 Comments on एक थी माया ………….!!! मैं सर झुका कर उस वक़्त बिक्री का हिसाब लिख रहा था कि उसकी धीमी आवाज सुनाई दी, “अभय, खाना खा लो” ,मैंने सर उठा कर उसकी तरफ देखा, मैंने उससे कहा ,” माया , मै आज डिब्बा नहीं लाया हूं ।” दरअसल सच तो यही था कि मेरे घर में उस दिन खाना नहीं बना था । गरीबी का वो ऐसा दौर था कि बस कुछ पूछो […] Read more » एक थी माया
कहानी साहित्य बलिदान-विनय साहू June 12, 2013 by विनय साहू | Leave a Comment थाने में एनकाउंटर में मारे गए अमजद की लाश रखी हुई है। उसी के बगल पुलिस की रोबदार वर्दी में मोहनीश बैठा हुआ था। हमेशा चुस्त फुर्त रहने वाले ,पुलिस विभाग का शेर कहलाने वाले मोहनीश के चेहरे पर न ही वो रोब था, न वो हिम्मत ,ये मोहनीश की ज़िन्दगी का पहला एनकाउंटर नहीं […] Read more » बलिदान
कहानी मैं तो आपकी हूं पापा May 23, 2013 / May 23, 2013 by शिखा श्रीवास्तव | Leave a Comment अरे! सुनती हो निक्को की मम्मी, लड़के वालों ने अपनी निक्को को पसंद कर लिया है। कितना परेशान से थे दो साल से। चलो भगवान ने हमारी सुन ली।’ घर के बड़े दरवाजे से दीनानाथ तेज कदमों और चेहरे पर ढेर सारी खुशियों को समेटे बाहर से ही यह खुशखबरी सुनाते हुए आए। क्या बात […] Read more » story by shikha srivastav मैं तो आपकी हूं पापा
कहानी बच्चों का पन्ना झुन्ने और शन्नो April 22, 2013 / April 22, 2013 by प्रभुदयाल श्रीवास्तव | Leave a Comment बसंत उभार पर था|और जब यह शहंशाह उभार पर होता है तो फिर क्या कहनें| जागते हुये भी लोगों को रंगीन और हसीन सपने आने लगते हैं|चारों तरफ बहार ,क्या जंगल क्या गांव और क्या शहर,मजे ही मजे|पीली सरसों, गेहूं की पकती हुईं बालियां और आम […] Read more » झुन्ने और शन्नो
कहानी ..ओवो ये ज़द्म्ये वलाख… March 18, 2013 / March 18, 2013 by प्रवक्ता.कॉम ब्यूरो | 1 Comment on ..ओवो ये ज़द्म्ये वलाख… (दिसइस द लास्ट ट्रेन ….) कहीं पढ़ा था युद्ध कहीं भी हो मारी तो औरत ही जाती है|संयुक्त युगोस्लाविया का अंग क्रोअशिया –तेरह शताब्दियों का कबीलाई इतिहास लिए वर्षों से अपनी स्वायत्तता की मांग करता रहा |कभी वह आस्ट्रो-हंगरियन गंठजोड़ का अंग बना तो कभी अपनी संस्कृति ,भाषा की रक्षा के लिए लड़ता रहा, सपना […] Read more »