कहानी आत्महत्या September 2, 2014 / September 3, 2014 by विजय कुमार सप्पाती | Leave a Comment मुख्य कलाकार : कांस्टेबल रामसिंह सब इंस्पेक्टर काम्बले सूबेदार मेजर रावत डिप्टी कमांडेंट सिंह कमांडेंट देवेन्द्र सेकंड इन कमांडेंट यादव डॉक्टर कृष्णकुमार – साय्कोलोजिस्ट प्रारम्भ स्टेज पर पर्दा उठना सीन एक : [ स्टेज पर लाइट जलता है ] स्थान : ऑफिस का कोरिडोर स्टेज पर कांस्टेबल रामसिंह आता है और अपने एक साथी से […] Read more » आत्महत्या
कहानी उतर जा…! August 2, 2014 by प्रवक्ता.कॉम ब्यूरो | Leave a Comment -क़ैस जौनपुरी- मुंबई की लोकल ट्रेन प्लेटफ़ॉर्म पे रूकी. फ़र्स्ट क्लास के डिब्बे में फ़र्स्ट क्लास वाले आदमी चढ़ गए. फ़र्स्ट क्लास वाली औरतें अपने डिब्बे में चढ़ गईं. तभी एक नंग-धड़ंग आदमी फ़र्स्ट क्लास लेडीज़ डिब्बे में चढ़ गया. वो शकल से खुश दिख रहा है. उसके दांत और आंखें अन्धेरे में चमक रही […] Read more » उतर जा लघु कथा
कहानी हर कदम पर बंदिशें August 2, 2014 by अश्वनी कुमार | Leave a Comment -अश्वनी कुमार- जाड़ों का समय है सूरज के किरणों ने समुद्र की कोख में जाने का मन बना लिया है. धीरे-धीरे वह अगले दिन फिर से आने का संकेत करती हुई चमक (रोशनी) निरंतर कम होती हुई, संतरी और नीले आसमान से गायब हो रही है. हरियाणा के गांव सुकना के प्रधान के घर आज […] Read more » हर कदम पर बंदिशें हिन्दी कहानी
कहानी लघुकथा : मंदिर का पुजारी April 15, 2014 by आर. सिंह | 2 Comments on लघुकथा : मंदिर का पुजारी आर. सिंह एक समृद्ध मंदिर में पुजारी की आवश्यकता थी. राजाज्ञा से प्रधान पुजारी को अपने मंदिर के लिए पुजारी के चुनाव की जिम्मेवारी दी गयी थी..ढिंढोरा पिटवा कर दूर दूर तक इस सन्देश को प्रसारित गया था,जिससे अधिक से अधिक लोग इसमे भाग ले सकें.सबको उचित समय पर मंदिर के प्रांगण में पहुचना था. […] Read more »
कहानी अनसुलझे सवाल! January 13, 2014 / January 13, 2014 by अश्वनी कुमार | Leave a Comment -अश्वनी कुमार- कड़ाके की सर्दी पड़ रही थी। पैरों से चढ़ती ठण्ड हाथों के कम्पन से होती हुई, दांतों की कड़कड़ाहट तक जा रही थी। घर से निकला तो देखा कोहरे की सफ़ेद चादर ने सारे आसमान पर अपना अस्तित्व जमा रखा है। कदम आगे की ओर बढ़ने से मना कर रहे थे, पर […] Read more » Story अनसुलझे सवाल
कहानी लघुकथा : जल्दी करो November 18, 2013 / November 18, 2013 by सुधीर मौर्य | 1 Comment on लघुकथा : जल्दी करो सुधीर मौर्य जल्दबाजी में इकरा बचते-बचाते गैर मजहब इलाके में आ गयी। धार्मिक नारे लगते लोग उसकी तरफ बढे, इकरा सूखे पत्ते की तरह कांपने लगी। किसी तरह आरती उसे उन्मादियों से बचा कर अपने घर लायी और कुछ दिन अपने मजहब की तरह कपड़े पहनने को कहा। दूसरे मजहब के लोग अल्लाह हो अकबर […] Read more »
कहानी दीवाली के तीन दीये November 3, 2013 by प्रवक्ता.कॉम ब्यूरो | Leave a Comment ख्वाजा अहमद अब्बास उस स्त्री ने कहा, ”मैं यहां तुम लोगों के पास रहती हूं… मैं इन खेतों के पास रहती हूं, जहां लक्खू भैया के बाबा अनाज उगाया करते थे और मैं उस कारखाने में भी रहती हूं, जहां लक्खू भैया मशीनों से कपड़ा बुनते हैं। जहां इंसान अपनी मेहनत से अपनी जरूरतें पैदा […] Read more »
कहानी सुबह की कालिमा -सुधीर मौर्य September 2, 2013 / September 2, 2013 by सुधीर मौर्य 'सुधीर' | 1 Comment on सुबह की कालिमा -सुधीर मौर्य अंकिता आज थोड़ा उलझन में है। वो जल्द से जल्द अपने रूम पर पहुँच जाना चाहती है। न जाने क्यूँ उसे लग रहा है, ऑटो काफी धीमे चल रहा है। वो ऑटो ड्राइवर को तेज़ चलाने के लिए बोलना चाहती है, पर कुछ सोच कर चुप रह जाती है। आज उसे निर्णय लेना है। जिसके […] Read more »
कहानी साहित्य आसक्ति से विरक्ति की ओर …..! August 30, 2013 / August 30, 2013 by विजय कुमार सप्पाती | 1 Comment on आसक्ति से विरक्ति की ओर …..! दोस्तों , ये एक प्राचीन बुद्ध कथा है , जिसे मैंने बड़ी मेहनत से अपने शब्दों से सजाया है . इस कथा में एक देशना हम सभी को मिलती है . आपको ये कथा जरुर अच्छी लगेंगी . ::: भाग एक :::: श्रावस्ति नगर के निकट स्थित प्रकृति की सुन्दरता से सजी जेतवन में सुबह की नर्म धूप […] Read more »
कहानी व्यंग्य रोबोट August 28, 2013 / August 28, 2013 by बीनू भटनागर | 1 Comment on रोबोट एक समय की बात है किसी देश मे एक विद्वान रहता था, उसे अर्थशास्त्र का बहुत ज्ञान था। उसी देश मे एक विदेशी देवी रहती थीं जिनके भक्तों का एक बड़ा समूह था। ये विद्वान भी उसी समूह से जुड़े थे और विदेशी देवी के भक्त थे। एक दिन देवी ने इन विद्वान महोदय को […] Read more » रोबोट
कहानी साहित्य शराफत के पेरोकार July 30, 2013 / July 31, 2013 by प्रभुदयाल श्रीवास्तव | Leave a Comment मोहल्ले वालों ने आसमान सिर पर उठा रखा था|पास पड़ौस के सभी धुरंधर उसके मकान के पास एकत्रित थे|सत्तरह मुँह सत्तरह बातें हो रही थीं| |”निकालो उसको यहां से अभी इसी वक्त,कैसे कैसे लोग चले आते हैं,बच्चों पर क्या असर पड़ेगा|”यह नगरप्रमुख लल्ला प्रसाद जी की आवाज़ थी जो भीड़ की अगुआई करते हुये चीख […] Read more » शराफत के पेरोकार
कहानी राष्ट्र वादी July 17, 2013 / July 17, 2013 by प्रभुदयाल श्रीवास्तव | 7 Comments on राष्ट्र वादी भविष्य की कहानी क्या ऐसी होगी दरवाजे पर दस्तक हुई|”मम्मा मम्मा, बाहर कोई दरवाजा पीट रहा है”एक दस ग्यारह साल के बेटे ने अपनी मां को आवाज़ लगाई| “अब इतनी रात गये कौन आ गया”,वह बड़बड़ाआई|”पूछो कौन है,क्या काम है इतनी रात को?”उसने किचिन में से ही जोर से चिल्लाकर बेटे को […] Read more » राष्ट्र वादी