कहानी उपहार August 28, 2023 / August 28, 2023 by प्रभुनाथ शुक्ल | Leave a Comment प्रभुनाथ शुक्ल प्रज्ञान न जाने किस उधेड़बुन में खोया-खोया सा था।उसे कुछ अच्छा नहीं लग रहा था।दो-तीन दिन से उसने खाना भी ठीक से नहीं खाया था।बस मौन… खुद से बातें करता और बार-बार आसमान को निहारता। प्रज्ञान के भीतर चल रहे इस संघर्ष को पत्नी […] Read more » उपहार
कहानी लेख ताँगे वाला July 26, 2023 / July 26, 2023 by प्रभुदयाल श्रीवास्तव | Leave a Comment प्रभुदयाल श्रीवास्तव मन बड़ा चंचल और चलायमान होता है इस पर बड़े- बड़े देवता, ऋषि मुनि और साधु संत तक नियंत्रण नहीं कर सके तो इंसान […] Read more » story on tonga wala
कहानी कुल्हाड़ी June 5, 2023 / June 5, 2023 by प्रभुनाथ शुक्ल | Leave a Comment लघुकथा : पर्यावरण दिवस 05 जून पर विशेष प्रभुनाथ शुक्ल देखिए ! हमने इस पेड़ को खरीद लिया है। इसे काटने का अधिकार मेरा बनता है। क्योंकि, यह आम का पेड़ मोंगाराम का है उन्होंने इस पेड़ को मुझे बेंच दिया है। आप […] Read more » पर्यावरण दिवस 05 जून
कहानी घाव March 10, 2023 / March 10, 2023 by डॉ० शिबन कृष्ण रैणा | Leave a Comment अमर मालमोही (रूपान्तर: डा० शिबन कृष्ण रैणा) “और वह घाव के साथ मुंह सटाकर मेरे खून को चूसने लगी ।” “खून को चूसने लगी ?” “हां, मेरे खून को चूसने लगी, गर्म-गर्म खून को, लाल-लाल खून को !” “मगर क्यों ? “ इससे पहले कि दयकाक आगे कुछ कह पाता, वह आंखें बंद कर न […] Read more »
कहानी कश्मीर को किसकी नजर लग गई? January 12, 2023 / January 12, 2023 by डॉ० शिबन कृष्ण रैणा | Leave a Comment बात तब की है जब कश्मीर में आतंकवादी घटनाएं अपने चरम पर थीं। 1989-90 का वर्ष खासतौर पर इसलिए याद किया जाएगा क्योंकि इस साल रोज-रोज के बम धमाकों, अत्याचारों, आतंकी घटनाओं,हत्याओं आदि से तंग आकर बड़ी संख्या में कश्मीरी पंडित घाटी से विस्थापित होकर देश के दूसरे हिस्सों में चले आए।चले क्या आये,जिहादियों द्वारा […] Read more »
कहानी झुरमुठ January 2, 2023 / January 2, 2023 by रुचि श्रीवास्तव | Leave a Comment आज रविवार है। मिसेस मुखर्जी के घर, रविवार का पता लगाना बहुत ही आसान है। सुबह मॉर्निंग वॉक से मिस्टर मुखर्जी का हाथ में थैला लेकर लौटना। गेट खुलने की आवाज से मिसेस मुखर्जी का हड़बड़ा कर उठना ,बालों को समेटते हुए, पैरों में नीली हवाई चप्पल डालना। कुर्सी पर रखे दुपट्टे को कंधे पर […] Read more » झुरमुठ
कहानी अनकही बात December 28, 2022 / December 28, 2022 by डॉ० शिबन कृष्ण रैणा | Leave a Comment शिबन कृष्ण रैणा जाड़े की रात और समय लगभग बारह बजे। फोन की घंटी बजी। जाने क्यों एक क्षण के लिए मुझे लगा कि फोन अस्पताल से आया होगा। जब तक कि मैं फोन उठाऊँ, घंटी का बजना बंद हो गया। मैंने दिमाग पर जोर डाला- क्या बात हो सकती है ? किस का फोन […] Read more » अनकही बात
कहानी सिकन्दर December 16, 2022 / December 16, 2022 by डॉ० शिबन कृष्ण रैणा | Leave a Comment शिबन कृष्ण रैणा रात के ग्यारह बजे और ऊपर से जाड़ों के दिन। मैं बड़े मज़े में रजाई ओढ़े निद्रा-देवी की शरण में चला गया था। अचानक मुझे लगा कि कोई मेरी रजाई खींचकर मुझे जगाने की चेष्टा कर रहा है। अब आप तो जानते ही हैं कि एक तो मीठी नींद और वह भी […] Read more »
कहानी आठ अस्सी December 13, 2022 / December 13, 2022 by दिलीप कुमार सिंह | Leave a Comment फुटपाथ के दुकानदार ने सख्त लहजे में कहा “ यहां से जाओ चाचा , अस्सी रुपये में ये चप्पल नहीं मिलेगी,बढ़ाओ अपनी साइकिल यहाँ से “। ये सुनकर वो सोच में पड़ गए कि फुटपाथ की सबसे सस्ती दुकान पर तो वो तो खड़े हैं ,अब इससे आगे वो कहाँ जाएं अगर बेटे की पढ़ाई […] Read more »
कहानी मुलाकात November 21, 2022 / November 21, 2022 by डॉ० शिबन कृष्ण रैणा | Leave a Comment शिबन कृष्ण रैणा हमारे घर की बिल्कुल सामने वाली सडक़ के कोने वाला मकान बहुत दिनों तक खाली पड़ा रहा। मकान मालिक संचेती जी की चार वर्ष पूर्व नौकरी के सिलसिले में कहीं दूसरी जगह पर बदली हुई थी और तभी से उनका मकान एक अच्छा किराएदार न मिलने के कारण लगभग दो वर्षों तक […] Read more »
कहानी फौजी जीवन October 28, 2022 / October 28, 2022 by डॉ० शिबन कृष्ण रैणा | Leave a Comment शिबन कृष्ण रैणा हमारे पड़ोस में रहने वाले बाबूजी की उम्र यही कोई अस्सी के लगभग होनी चाहिए। इस उम्र में भी स्वास्थ्य उनका ठीक–ठाक है। ज़िंदगी के आख़िरी पड़ाव तक पहुँचते–पहुँचते व्यक्ति आशाओं–निराशाओं एवं सुख–दुख के जितने भी आयामों से होकर गुजरता है, उन सबका प्रमाण उनके चेहरे को देखने से मिल जाता है। […] Read more » फौजी जीवन
कहानी लेख उसका मंदिर October 13, 2022 / October 13, 2022 by डॉ० शिबन कृष्ण रैणा | Leave a Comment रोज़ की तरह आज भी राजरानी की आँख जल्दी खुल गई। जरा-सी भी आहट किए बिना उसने दरवाजा खोला और वह बाहर बरामदे में आ गई। कमरे में अंदर पड़े-पड़े उसका जी घुट रहा थ। गेट तक दो बार चक्कर काटकर वह बरामदे में लगी कुर्सी पर बैठ गई। पास पड़ोस के घरों के दरवाजें […] Read more » उसका मंदिर