कविता जब बुखार बन गया फीवर ….!! August 14, 2020 / August 14, 2020 by तारकेश कुमार ओझा | Leave a Comment तारकेश कुमार ओझा एक था गबरूबन गया गब्बरदेश – दुनिया में खूबमचाया अंधेरनए जमाने में उसी के रीमेककी तरह बुखार बन गया फीवरजिसके नाम से अब दुनिया कांपे थर – थरनाम सुनते ही क्या राजू क्या राजापसीने से हो रहे तर – बतरबुखार वाले को देखते ही क्या छोटे क्या बड़ेअच्छे – अच्छे डॉक्टर भी […] Read more » जब बुखार बन गया फीवर ….!!
कविता युवा August 13, 2020 / August 13, 2020 by आलोक कौशिक | Leave a Comment जल रही हो जिसमेंलौ आत्मज्ञान कीसमझ हो जिसकोस्वाभिमान की हृदय में हो जिसकेकरुणा व प्रेम भराबाधाओं व संघर्षों सेजो नहीं कभी डरा अपनी संस्कृति कीहो जिसको पहचानभेदभाव से विमुखकरे सबका सम्मान स्वदेश से करे जोप्रेम अपरम्पारजानता हो चलानाकलम व तलवार राष्ट्र निर्माण में जोसदैव बने अगुवावास्तविक अर्थों मेंवही होता है युवा आलोक कौशिक Read more » युवा
कविता मतलब August 13, 2020 / August 13, 2020 by आर के रस्तोगी | Leave a Comment मतलब की सारी दुनिया है,मतलब के सब है यार।मतलब जब निकल जायेगा,कोई न पूछेगा तुम्हे यार।। मतलब से सब बात करेंगे,मतलब से देगे सब साथ।मतलब जब निकल जाएगा,कोई न करेगा तुमसे बात।। मतलबी सारी दुनिया है,मतलब का है सब संसार।मतलब बिन कोई न पूछे,ये है सब नियमो का सार।। मतलब की सब दुनिया है,मतलब से […] Read more » मतलब
कविता श्रम सभी को करना है। August 13, 2020 / August 13, 2020 by आर के रस्तोगी | Leave a Comment कर्म भूमि की दुनिया में,श्रम सभी को करना है।प्रभु सिर्फ लकीरें देता,रंग तो हमे ही भरना है।। जो आया है वो जायेगा,यह नियम सब पर लागू है।लेखा जोखा है प्रभु के पास,वह तो सबसे बड़ा हिसाबू है। जो बोएगा सो काटेगा,करनी के फल पायेगा।बोए पेड़ बबूल के तूने,फिर आम कहां से खायेगा।। कर्म कर फल […] Read more » श्रम सभी को करना है
कविता करते सिक्के शोर ! August 13, 2020 / August 13, 2020 by प्रियंका सौरभ | Leave a Comment क़तर रहे हैं पंख वो, मेरे ही लो आज !सीखे हमसे थे कभी, भरना जो परवाज़ !! आखिर मंजिल से मिले, कठिन साँच की राह !ज्यादा पल टिकती नहीं, झूठ गढ़ी अफवाह !! अब तक भँवरा गा रहा, जिसके मीठे राग !वो तितली तो उड़ चली, कब की दूजे बाग़ !! वक्त-वक्त का खेल है, […] Read more » करते सिक्के शोर
कविता श्री कृष्ण August 10, 2020 / August 10, 2020 by आलोक कौशिक | Leave a Comment सत्य के रक्षकअधर्म समापकदुष्ट विनाशीधर्म स्थापक हैं सुदामा सखासुभद्रा पूर्वजदेवकीनंदनवसुदेवात्मज वो पार्थसारथीगोप गोपीश्वरअजेय अजन्माश्रीहरि दामोदर प्रेम के पर्यायपरंतु वितृष्णवो राधावल्लभहैं वही श्री कृष्ण ✍️ आलोक कौशिक Read more »
कविता शिक्षक दिवस August 6, 2020 / August 6, 2020 by आर के रस्तोगी | Leave a Comment गुरु बिन न ज्ञान मिले,गुरु बिन न दिशा निर्देश।गुरु ही सर्वोपरि है,गुरु हीब्रह्मा विष्णु और महेश।। गुरु के कारण ही पड़ा है,हमारे नगर का नाम गुरुग्राम,अपने गुरु द्रोणाचार्य जी को,हम सब करते है प्रणाम।। जननी पहली शिक्षक है,उसका करो तुम सम्मान।उसके आशीर्वाद बिन न मिलेअन्य गुरुओं का तुम्हे ज्ञान।। मां एक ऐसी शिक्षक हैजो संकेतो […] Read more » शिक्षक दिवस
कविता सच्चे मित्र की पहचान August 4, 2020 / August 4, 2020 by आर के रस्तोगी | Leave a Comment मित्र वहीं जो बुरे वक़्त पर तुम्हारे काम आए।बने सुख दुख का साथी सच्चा मित्र कहलाए।। बन जायेगे सभी मित्र जब दौलत है होती।बने उस वक़्त वह मित्र जब गरीबी है होती।। देते है इसलिए कृष्ण सुदामा का उदाहरण।एक था राजा दूसरा था गरीब बेचारा ब्राह्मण।। मित्र वही हैं जो तेरे आंसू देख खुद रो […] Read more » True friend identity
कविता राफेल हवाई जहाज August 2, 2020 / August 2, 2020 by आर के रस्तोगी | 1 Comment on राफेल हवाई जहाज बोल रहा था पाक बड़े बोल,उसकी बोलती बन्द कर आते।पड़ा था रास्ते में पाक जब,दो चार गोले छोड़ कर आते।। अभी तो केवल पांच आए है,दुश्मनों के दिल दहलने लगे है।जब और आ जायेगे भारत में,तब जल कर राख होने लगेगे।। अपने भारत देश के अंदर भी,कुछ मूर्खों की कमी नहीं है।कहते है इन जहाजों […] Read more » राफेल हवाई जहाज
कविता हर सांस के साथ तुम हो ! August 2, 2020 / August 2, 2020 by पंडित विनय कुमार | Leave a Comment पंडित विनय कुमार हर सांस के साथ तुम होऔर तुम्हारी पीड़ा भी ।जो पीड़ा हवाओं मेंहर क्षण मौजूद दिख रही है।जिसका होना सुनिश्चित है इस धरा पर।जैसे होना जरूरी है हवाओं काजैसे होना जरूरी है बादलों काजैसे होना जरूरी है नदियों काजैसे होना जरूरी है सागर काजैसे होना जरूरी है सागर के खारे जल काजैसे […] Read more » हर सांस के साथ तुम हो
कविता जीवन है एक रंगमंच August 2, 2020 / August 2, 2020 by पंडित विनय कुमार | Leave a Comment पंडित विनय कुमारजीवन है सचमुचएक रंगमंच की तरहजिसका कोई आरंभ और अंत नहीं होताजो बार-बार मंचित होता है हमारी रगों मेंजो दौड़ता है खून की तरह लगातार…बिना वक्त गँवाये औरअंत में जीवन की साँस के साथसमाप्त हो जाती है !जीवन जो है एक रंगमंचहमारी विभिन्न जीवनगत परिस्थितियाँ हैंउसके कथानकसमय का पहिया घुमता रहता हैरंगमंच के […] Read more » जीवन है एक रंगमंच
कविता बहुत बुरा होता है सपनों का मर जाना…………… August 1, 2020 / August 2, 2020 by पंडित विनय कुमार | Leave a Comment पंडित विनय कुमार मैं जानता हूँ किबहुत बुरा होता हैसपनों का मर जाना-वे सपने, जो जन्मते हैंहमारे जन्म के साथऔर मरते हैं बार-बारविभिन्न परितस्थतियों में जब-तब,जब हम थक-हार जाते हैं,जब प्रकृतिपरिस्थितियों के सामनेहमारी एक नहीं चलती,जब हम प्रत्येक परिस्थितियों मेंअसहायअसफल और अकर्मण्य –से बने रहते हैं तब;जब हमारी चेतना निस्पंद होने लगती है;हमारी जिजिविषा जब […] Read more » बहुत बुरा होता है सपनों का मर जाना