कविता जीवन April 19, 2020 / April 19, 2020 by आलोक कौशिक | Leave a Comment मिलता है विषाद इसमेंइसमें ही मिलता हर्ष हैकहते हैं इसको जीवनइसका ही नाम संघर्ष है दोनों रंगों में यह दिखताकभी श्याम कभी श्वेत मेंकुछ मिलता कुछ खो जातारस जीवन का है द्वैत में लक्ष्य होते हैं पूर्ण कईथोड़े शेष भी रह जाते हैंस्वप्न कई सच हो जातेकुछ नेत्रों से बह जाते हैं चाहे बिछे हों […] Read more » life poem on life जीवन
कविता चलो प्यार की बाते करे April 19, 2020 / April 19, 2020 by आर के रस्तोगी | Leave a Comment चारो तरफ है सन्नाटा ,अब क्या किया जाये ,दिल बहलाने के लिये, अब कुछ लिखा जाये |भेज दू क्या मै जो लिखता हूँ,मै तुम्हारे लिये ,जिससे दिल की बाते,दिल को सुना दिया जाये |\ लिखता हूँ बार बार उसको मिटा देता हूँ मै,हिम्मत नहीं होती है उसको बता दू मै |पता नहीं ये दिल,कमजोर हो […] Read more » चलो प्यार की बाते करे
कविता मोदी तेरी नीति को,करते हम सब प्रणाम | April 16, 2020 / April 16, 2020 by आर के रस्तोगी | Leave a Comment मोदी तेरी नीति को,करते हम सब प्रणाम |तूने देश को बचा लिया,नही निकलते भयंकर परिणाम ||न तूने कोई तोप चलाई,न कोई ली हाथ में ढाल |भारत के प्रधान मंत्री मोदी तूने कर दिया कमाल ||न कोई पुलिस बुलाई न जेल बनाई सबको खुश कर दिया |हाथ जोड़कर बड़ी नम्रता से,सबको घर में बंद कर दिया […] Read more » Modi salutes your policy we all salute him. करते हम सब मोदी को प्रणाम मोदी तेरी नीति को मोदी तेरी नीति को करते हम सब प्रणाम
कविता साहित्य नन्हे राजकुमार April 15, 2020 / April 15, 2020 by आलोक कौशिक | Leave a Comment मेरे नन्हे से राजकुमारकरता हूं मैं तुमसे प्यार जब भी देखूं मैं तुझकोऐसा लगता है मुझकोथा मैं अब तक बेचाराऔर क़िस्मत का माराआने से तेरे हो गया हैदूर जीवन का हर अंधियारमेरे नन्हे से राजकुमार… मेरे दिल की तुम धड़कनतेरी हंसी से मिटती थकनप्यारी लगे तेरी शरारततुम हो जीवन की ज़रूरततुझको देकर मेरे खुदा नेदिया […] Read more »
कविता किसी से ना कहो तो आज मन की बात कर लूं April 15, 2020 / April 15, 2020 by अलका सिन्हा | Leave a Comment — अलका सिन्हा भला लगने लगा है साथ में परिवार के रहनाबड़े ही शौक से घर का, हर इक कोना सजा रखनान जाने कब से ख्वाहिश थी दबी-सी, मन में रहती थीसजा बिटिया को दुल्हन सा, मिलन बारात कर लूंकिसी से ना कहो तो आज मन की बात कर लूं। मुझे चिढ़ हो गई अस्तित्ववादी […] Read more » किसी से ना कहो तो आज मन की बात कर लूं
कविता दौर कुछ ऐसा आया है …. April 14, 2020 / April 14, 2020 by तारकेश कुमार ओझा | Leave a Comment तारकेश कुमार ओझा क्या कोलकाता , क्या खड़गपुरगया हो या टाटाकोरोना वायरस से कांपी दुनियागांव शहर है सन्नाटाहर चेहरे पर चस्पा दहशतदौर कुछ ऐसा आया है .कैसी होगी भविष्य की दुनियासोच कर दिल घबराया है .घर से चलेंगे बाबुओं के दफ्तरगरीब भटकेंगे दर – ब- दरअहसास से मन अकुलाया है ,दौर कुछ ऐसा आया है […] Read more » poem on lockdown दौर कुछ ऐसा आया है
कविता मोदी जी के सात मन्त्र April 14, 2020 / April 14, 2020 by आर के रस्तोगी | Leave a Comment सात बातो में साथ आपका चाहिए |देश को कोरोना मुक्त होना चाहिए || करे उन सब बुजुर्गो का हम ख्याल |जो असमर्थ असहाय और है बेहाल ||करना है उन सबका हमे ध्यान |तभी होगा ये मेरा भारत महान ||बस बुजुर्गो का आशीर्वाद चाहिए—-सात बातो में —— निकले घर से अपना मुहँ ढक कर |बनाये दूरी […] Read more » मोदी जी के सात मन्त्र
कविता बचाना है जान को जहान को April 12, 2020 / April 12, 2020 by आर के रस्तोगी | Leave a Comment बचाना है जान को जहान को ,बचाना है अब हर इंसान को |यही ध्येय होगा अब हमारा ,ये सन्देश पहुँचे हर इंसान को || सबका साथ हो सबका विश्वास हो ,आशा के साथ सबका विकास हो |तब ही कोरोना को जीत पायेंगे ,ऐसा जन-जन में विश्वाश हो || लॉक डाउन ही एक आस है ,बनी […] Read more » Have to save lives बचाना है जान को जहान को
कविता मुलाकात April 11, 2020 / April 11, 2020 by अलका सिन्हा | Leave a Comment मुलाकात नहीं हुई है कई रोज से हालांकि हम साथ-साथ रहते हैं। शाम को जल्दी आ जाना डॉक्टर के पास जाना है या फिर, जमा कर दिया है बिजली का बिल- नहीं होती है बात। बरसों-बरस साथ रहते, सोते, खाते दफ्तर जाते- नहीं होती मुलाकात। जिम्मेदारियां निभाते, काम निबटाते, खो जाती है बात। […] Read more » मुलाकात
कविता बनारस की गली में April 10, 2020 / April 10, 2020 by आलोक कौशिक | Leave a Comment बनारस की गली मेंदिखी एक लड़कीदेखते ही सीने मेंआग एक भड़की कमर की लचक सेमुड़ती थी गंगादिखती थी भोली सीपहन के लहंगामिलेगी वो फिर सेदाईं आंख फड़कीबनारस की गली में… पुजारी मैं मंदिर काकन्या वो कुआंरीनिंदिया भी आए नाकैसी ये बीमारीकहूं क्या जब सेदिल बनके धड़कीबनारस की गली में… मालूम ना शहर हैघर ना ठिकानालगाके […] Read more »
कविता लॉक डाउन है,घर से निकलते क्यों हो | April 10, 2020 / April 10, 2020 by आर के रस्तोगी | Leave a Comment लॉक डाउन है,घर से निकलते क्यों हो |फिर बेबजह पुलिस से इलझते क्यों हो || मालूम है तुमको कोरोना कहर ढा रहा |फिर मौत को गले लगाते क्यों हो || घर में है जब सुंदर सी पत्नि तुम्हारी |फिर बाहर जाकर इश्क लडाते क्यों हो || बूढ़े हो गये जवानी ढल गयी है तुम्हारी |फिर […] Read more » It is locked down why do you leave the house. लॉक डाउन
कविता बिगड़े हालत तो शायद सुधर जायेगे | April 9, 2020 / April 9, 2020 by आर के रस्तोगी | Leave a Comment बिगड़े हालत तो शायद सुधर जायेगे |पर कुछ लोग तो,नजरो से उतर जायेगे || किसीको क्या पता,भविष्य में क्या हो जायेगा |अगर हालात नहीं सुधरे तो हम किधर जायेगे || अच्छा है आज घर में लोग सब एक साथ है |लोक डाउन खुला तो,लोग फिर किधर जायेगे || मानते रहे कहना,लोग अनुशासन में आ जायेगे […] Read more »