कविता बैठ कुऐं की मुंडेर पे November 8, 2010 / December 20, 2011 by संजय कुमार फरवाहा | 3 Comments on बैठ कुऐं की मुंडेर पे सहेली आ बैठ मेरे पास मनं की दो बातें कर लूँ फीर भर के घड़ा पानी का अपने घर को चल दूँ सहेली आ बैठ मेरे पास मनं की दो बातें कर लूँ फीर भर के घड़ा पानी का अपने घर को चल दूँ सुबह से सोच रही थी कब , भरने पानी मैं जाऊं […] Read more » Sit बैठ
कविता कविता: आ भैया तुझे तिलक लगाऊ November 6, 2010 / December 20, 2011 by प्रवक्ता ब्यूरो | 1 Comment on कविता: आ भैया तुझे तिलक लगाऊ भाई दूज का पावन पर्व मैं मनाऊं सनेह भरी अभिव्यक्ति देकर तेरी खुशहाली के मंगल गीत मैं गाऊ आ भैया तुझे तिलक लगाऊं कितना पावन दिन यह आया जिसने भाई बहन को फिर से मिलाया मनं मैं बहती स्नेह की गंगा ख़ुशी के अश्रुँ को मैं कैसे छुपाऊं आ भैया तुझे तिलक लगाऊ भाई दूज […] Read more » bhai dooj भैया दूज
कविता कविता: जब तिमिर बढ़ने लगे तो November 4, 2010 / December 20, 2011 by गिरीश पंकज | 9 Comments on कविता: जब तिमिर बढ़ने लगे तो जब तिमिर बढ़ने लगे तो दीप को जलना पड़ेगा दैत्य हुंकारें अगर तो देव को हँसना पड़ेगा दीप है मिट्टी का लेकिन हौसला इस्पात-सा हमको भी इसके अनोखे रूप में ढलना पड़ेगा रौशनी के गीत गायें हम सभी मिल कर यहाँ प्यार की गंगा बहाने प्यार से बहना पड़ेगा सूर्य-चन्दा हैं सभी के रौशनी सबके […] Read more » Diwali दीपावली
कविता कविता : चलो अरुंधती राय बन जाएँ November 4, 2010 / December 20, 2011 by शिखा वार्ष्णेय | 15 Comments on कविता : चलो अरुंधती राय बन जाएँ -शिखा वार्ष्णेय भूखे नंगों का देश है भारत, खोखली महाशक्ति है , कश्मीर से अलग हो जाना चाहिए उसे .और भी ना जाने क्या क्या विष वमन…पर क्या ये विष वमन अपने ही नागरिक द्वारा भारत के अलावा कोई और देश बर्दाश्त करता ? क्या भारत जैसे लोकतंत्र को गाली देने वाले कहीं भी किसी […] Read more » kashmir अरुधंती राय कश्मीर
कविता एंड्रीनी रिच की चार कविताएं November 2, 2010 / December 20, 2011 by प्रवक्ता ब्यूरो | Leave a Comment 1. जीत भीतरी तहों में कुछ पसर रहा है, हमसे अनकहा त्वचा के अंदर भी उसकी उपस्थिति अघोषित है जीवन के समस्त रूप-प्रत्यय नाटकीय स्वार्थों की सघन झाड़ियों में उलझे मशीनी देवताओं से संवाद नहीं करना चाहते, स्पष्टत: कटे-छँटे शरणार्थी प्राचीन या अनित्य ग्रामों से हमारे अवसरवादी चाहनाओं में फँसे पगलाकर ढूँढ़ रहे हैं एक […] Read more » poem एंड्रीनी रिच
कविता मधुसूदनजी की कविता: मास्को में बारिश, मुंबई में छाता November 2, 2010 / December 20, 2011 by डॉ. मधुसूदन | 5 Comments on मधुसूदनजी की कविता: मास्को में बारिश, मुंबई में छाता बिन बादल, बिन बरसात, बिना धूप, सर पर छाता! एक लाल मित्र मुम्बई में मिले। पूछा, भाई छाता क्यों, पकडे हो? बारिश तो है नहीं? तो बोले, वाह जी, मुम्बई में बारिश हो, या ना हो, क्या फर्क? मास्को में तो, बारिश हो रही है। १० साल बाद। जब मास्को से भी कम्युनिज़्म निष्कासित है। […] Read more » communism कम्युनिज्म वामपंथ
कविता राजनीति राजीव दुबे की कविता : प्रश्नों के बढ़ते दायरे November 2, 2010 / December 20, 2011 by राजीव दुबे | 5 Comments on राजीव दुबे की कविता : प्रश्नों के बढ़ते दायरे प्रश्नों के दायरे बढ़ रहे हैं, और आवाजें फुसफुसाहटों से कोहराम में बदल रही हैं। ‘कलावती’ का नाम लेकर संसद में तालियाँ तो बज़ गईं, और ‘कलावती’ को कुछ रुपये भी मिल गये होंगे – सहायता के नाम पर। अब उसी ‘कलावती’ और उस जैसों के हजारों करोड़ लुट गए दिल्ली की निगरानी में – […] Read more » poem कविता
कविता कविता: व्यस्तता October 30, 2010 / December 20, 2011 by प्रवक्ता ब्यूरो | 4 Comments on कविता: व्यस्तता व्यस्तता आज हम हर पल व्यस्तता का बहाना बना रहे हैं व्यस्तता की आड़ लेकर अपनों से ही बहुत दूर हुऐ जा रहे हैं जरा सोचिए, दिल से सोचिए कहीं हम रिश्तों के नाम पर औपचारिकता तो नहीं निभा रहे हैं आज हम हर पल व्यस्तता का बहाना बना रहे हैं पहले जब कोई दुःख […] Read more » poem व्यस्तता
कविता उलूक दर्शन October 28, 2010 / December 20, 2011 by राजीव दुबे | 6 Comments on उलूक दर्शन उलूक दर्शन उल्लुओं की भाषा के जानकारों ने बताया है कि आजकल उल्लू अपनी हर सभा में चीख – चीख कर कह रहे हैं – “अगर घोड़ों ने सभ्यता के विकास के शुरुआती दौर में आदमी को अपने ऊपर चढ़कर अपना शोषण न करने दिया होता तो यह पूंजीवादी युग कभी नहीं आता । “ […] Read more » poem
कविता कविता/रामजन्मभूमि October 27, 2010 / December 20, 2011 by अमल कुमार श्रीवास्तव | Leave a Comment सुलग रहे है शोले रामजन्म स्थल पर भभक रही है ज्वाला अयोध्या के नाम पर नतमस्तक है जिन चरणों पर पूरा देश उस राम की सम्पूर्ण वंदना अभी रह गयी है शेष जाग उठो अब मां भारती के संतान करने को तैयार हो जाओ फिर भोले सा विषपान ना जागे तो हो जायेगी मातृभूमि कलंकित […] Read more » poem कविता
कविता कविता : एक मुलाकात बापू से October 26, 2010 / December 20, 2011 by प्रवक्ता ब्यूरो | 6 Comments on कविता : एक मुलाकात बापू से एक दिन, मन था कुछ खिन्न मैं बाग के कोने में बैठा था उदास तभी सामने दिखाई दिये महात्मा गांधी श्री मोहनदास मैं चकरा कर बोला ”हैलो डैड , हाउ आर यू” उत्तर मिला ”मै तो ठीक हूं पर कौन है तू ? लोग मुझे बापू कहते थे तू डैड कह रहा है हिन्दुस्तानी है […] Read more » poem बापू
कविता अनामिका की कविता : चढ़कर इश्क की October 26, 2010 / December 20, 2011 by प्रवक्ता ब्यूरो | 2 Comments on अनामिका की कविता : चढ़कर इश्क की चढ़कर इश्क की कई मंजिले अब ये समझ आया इश्क के दामन में फूल भी है और कांटे भी और मेरे हाथ काँटों भरा फूल आया ————- फूल सा इश्क पाकर फूला न समाया पर बेवफाई का काँटा हर फूल ने ज़रूर चुभाया —————- अब तो मेरी हालत देख दोस्त ये कहे इश्क का तो […] Read more » Ishq इश्क