कविता महिला-जगत स्तनपान बनाम बोतलपान : एक नवजात शिशु की अभियक्ति August 2, 2010 / December 22, 2011 by शालिनी मैथु | 1 Comment on स्तनपान बनाम बोतलपान : एक नवजात शिशु की अभियक्ति हे माँ ! मैं तो नन्हा सा मासूम हूँ . तेरा ही सलोना सा लाल हूँ. मेरी स्नेहिल अनुभूति को समझा है, तूने, आँचल को छुड़ाकर,बोतल दिया है,तूने. यह कैसा है न्याय तेरा, कहती है तो लाल है मेरा. आधुनिकता की दोड़ मैं सिद्ध तूने किया है, स्तनपान के बजाय बोतलपान मेरा आहार है. इस […] Read more » child स्तनपान
कविता अरुणा की चार प्रेम कविताएं July 15, 2010 / December 23, 2011 by अरुणा राय | 4 Comments on अरुणा की चार प्रेम कविताएं (1) हर मुलाकात के बाद जो चीज हममें कामन थी वो था हमारा भोलापन और बढता गया वह हर मुलाकात के बाद पर दुनिया हमेशा की तरह केवल सख्तजां लोगों के लिए सहज थी सो हमारा सांस लेना भी कठिन होता गया और अब हम हैं मिलते हैं तो गले लग रोते हैं अपना आपा […] Read more » Love प्रेम
कविता कविता : पूर्णिमा May 19, 2010 / December 23, 2011 by प्रवक्ता ब्यूरो | 1 Comment on कविता : पूर्णिमा हीरक नीलाम्बर आवेष्टित, विहॅस रही राका बाला। शुभ सुहाग सिन्दूरी टीका, सोहत है मंगल वाला॥1॥ अलंकृता कल कला प्रेय संग, पहुँची मानो मधुशाला। छिन्न भिन्न छकि छकि क्रीड़ा में, विखरत मोती की माला॥2॥ -डॉ0 महेन्द्र प्रताप पाण्डेय ”नन्द” Read more » Poems पूर्णिमा
कविता कविता : राजनीति May 19, 2010 / December 23, 2011 by अमल कुमार श्रीवास्तव | 1 Comment on कविता : राजनीति कुर्सी की लालसा में बढ रहा अब राजनीति का खेल हर नेता पाने को लोलुप कर रहा एक दूसरे से मेल। बुद्धिजीवी बनाकर बैठा घर को अपने जेल सत्ताधारियों के नंगे नाच की चल पडी अब रेल। आम आदमी करवा रहा है खुद से खुद का शोषण जनप्रतिनिधि के कुर्सी पर बैठा रहा विभीषण। जन्म […] Read more » politics राजनीति
कविता कविता: माँ May 19, 2010 / December 23, 2011 by प्रवक्ता ब्यूरो | 8 Comments on कविता: माँ -ललित गिरी प्यारी जीवन दायिनी माँ!, जब मैनें इस जीवन में किया प्रवेश पाया तेरे ऑंचल का प्यारा-सा परिवेश मेरे मृदुल कंठ से निकला पहला स्वर माँ! पूस की कॅंपी-कॅपी रात में, तूने मुझे बचाया। भीगे कम्बल में स्वयं सोकर, सूखे में मुझे सुलाया॥ तब भी नहीं निकली तेरी कंठ से, एक भी आह। क्योंकि […] Read more » Maa माँ
कविता एक गीत/तुमसे तन-मन मिले प्राण प्रिय! April 22, 2010 / December 24, 2011 by फ़िरदौस ख़ान | Leave a Comment तुमसे तन-मन मिले प्राण प्रिय! सदा सुहागिन रात हो गई होंठ हिले तक नहीं लगा ज्यों जनम-जनम की बात हो गई राधा कुंज भवन में जैसे सीता खड़ी हुई उपवन में खड़ी हुई थी सदियों से मैं थाल सजाकर मन-आंगन में जाने कितनी सुबहें आईं, शाम हुई फिर रात हो गई होंठ हिले तक नहीं, […] Read more » song
कविता वंदना शर्मा की कविता March 16, 2010 / December 24, 2011 by प्रवक्ता ब्यूरो | 1 Comment on वंदना शर्मा की कविता याद आता है मुझे वो बीता हुआ कल हमारा, जब कहना चाहते थे तुम कुछ मुझसे, तब मै बनी रही अनजान तुमसे, जाना चाहती थी मैं दूर, पर पास आती गई तुम्हारे, लेकिन धीरे-धीरे होती रही दूर खुदसे, फिर तो जैसे आदत बन गई मेरी हर जगह टकराना जाके यूँ ही तुमसे, जब तक नहीं […] Read more » poem कविता
कविता मैं होली हूँ – सतीश सिंह February 28, 2010 / December 24, 2011 by सतीश सिंह | 1 Comment on मैं होली हूँ – सतीश सिंह सदियों से मैं खुशियों की तस्वीर होली हूँ . अमराई की खुशबू हूँ, सबके दिल की धड़कन हूँ . रंगों का त्यौहार हूँ जो रंगों से कतराए उसके लिए शैतान हूँ जीवन के सफ़र में मैं बरगद की छावं हूँ अमराई की खुशबू हूँ, सबके दिल की धड़कन हूँ . फागुन की मेहरबानियाँ कछुए भी […] Read more » Holi Satish Singh मैं होली हूँ सतीश सिंह होली
कविता राकेश उपाध्याय की दो कविताएं February 25, 2010 / December 24, 2011 by राकेश उपाध्याय | 3 Comments on राकेश उपाध्याय की दो कविताएं 1.ईश्वरत्व के नाते मैंने नाता तुमसे जोड़ा… कल मैंने देखा था तुम्हारी आंखों में प्यार का लहराता समंदर उफ् कि मैं इन लहरों को छू नहीं सकता, पास जा नहीं सकता।। कभी-कभी लगता हैं कि इंसान कितना बेबस और लाचार है सोचता है मन कि आखिर क्यों बढ़ना है आगे, लेकिन कुछ तो है, जो […] Read more » Love प्रेम
कविता कविता : अब हैरान हूँ मैं …. February 12, 2010 / December 25, 2011 by शिवानंद द्विवेदी | 2 Comments on कविता : अब हैरान हूँ मैं …. जीवन की इस भीड़ भरी महफ़िल में, एक ठहरा हुआ सा वीरान हूँ मै, क्यों आते हो मेरे यादों के मायूस खंडहरों में , अब चले जाओ बड़ा परेशान हूँ मै … तुमसे मिलकर ही सजोयी थी चंद खुशियाँ मैंने, पर तुम्हें समझ ना पाया ऐसा अनजान हूँ मैं, बड़ा मासूम बनकर उस दिन जो […] Read more » poem
कविता कविता : मेरी माँ … February 9, 2010 / December 25, 2011 by शिवानंद द्विवेदी | 6 Comments on कविता : मेरी माँ … आज फिर अल्लसुबह उसी तुलसी के विरवा के पास केले के झुरमुटों के नीचे पीताम्बर ओढ़े वो औरत नित्य की भांति दियना जला रही थी ! मै मिचकती आँखों से उसे देखने में रत था , वो साधना वो योग वो ध्यान वो तपस्या, उस देवी के दृढ संकल्प के आगे नतमस्तक थे ! वो […] Read more » Maa मां
कविता रंगीन पतंगें February 8, 2010 / December 25, 2011 by ए. आर. अल्वी | Leave a Comment अच्छी लगती थीं वो सब रंगीन पतंगें काली नीली पीली भूरी लाल पतंगें कुछ सजी हुई सी मेलों में कुछ टंगी हुई बाज़ारों में कुछ फंसी हुई सी तारों में कुछ उलझी नीम की डालों में उस नील गगन की छाओं में सावन की मस्त बहारों में कुछ कटी हुई कुछ लुटी हुई पर थीं […] Read more » Kites पतंग