कविता नवगीत/तूफ़ान सड़क पर February 12, 2011 / December 15, 2011 by प्रवक्ता ब्यूरो | 1 Comment on नवगीत/तूफ़ान सड़क पर -रामेश्वर काम्बोज ‘हिमांशु’ जब देश लूटता राजा कोई करे कहाँ शिकायत , संसद में बैठे दागी एकजुट हो करें हिमायत ; बेहयाई नहीं टूटती , रोज़ उठें तूफ़ान सड़क पर । दूरदर्शनी बने हुए इस दौर के भोण्डे तुक्कड़, सरस्वती के सब बेटे हैं घूमते बनकर फक्कड़ ; अपमान का गरल पी रहा ग़ालिब का […] Read more » song
कविता कविता/ तलाश February 5, 2011 / December 15, 2011 by प्रवक्ता ब्यूरो | 1 Comment on कविता/ तलाश पाकिस्तान व चीन का हर बड़ा शहर अब हमारी तरकश की मार की पहुंच में है हमारे देश में हर साल उग आते हैं अनेकों अरबपति सासंदों की आय हो जाती है हर साल दोगुना एक अम्बानी अपनी पत्नी को उसके जन्म दिन पर भेंट दे देता है एक उड़नखटोला…….. चन्द्रमा पर पानी की गम्भीर […] Read more » poem कविता/ तलाश
कविता डॉ. अरुण दवे की कविताएं January 28, 2011 / December 15, 2011 by प्रवक्ता ब्यूरो | 2 Comments on डॉ. अरुण दवे की कविताएं फक्कड़वाणी (1) आजादी के बाद भी, हुए न हम आबाद काग गिद्ध बक कर रहे, भारत को बर्बाद भारत को बर्बाद, पनपते पापी जावे तस्कर चोर दलाल, देश का माल उड़ावे कहे फक्कड़ानन्द, दांत दुष्टों के तोड़ो गद्दारों से कहे, हमारा भारत छोडो (2) कहता है इक साल में, लाल किला दो बार झोपड़ियाँ चिन्ता […] Read more » Dr.Arun Dave Poems कविताएं डॉ. अरुण दवे
कविता कविता / तिरंगा January 26, 2011 / December 15, 2011 by प्रवक्ता ब्यूरो | 2 Comments on कविता / तिरंगा माँ के अंग तिरंगा चढ़ता हम ले चले भेंट मुस्काते घर-घर से अनुराग उमड़ता, दानव छल के जाल बिछाते लो छब्बीस जनवरी आती! माँ की ममता खड़ी बुलाती!! दाती कड़ी परीक्षा लेती तीनों ऋण से मुक्ति देती कुंकुम-रोली का क्या करना? खप्पर गर्म लहू से भरना! खोपे नहीं, खोपड़े अर्पित! चण्डी मुण्डमाल से अर्चित!! देखें […] Read more » poem on national flag तिरंगा
कविता कविता / भ्रांति January 26, 2011 / December 15, 2011 by डॉ. मधुसूदन | 5 Comments on कविता / भ्रांति चीखो, चिल्लाओ, नारा लगाओ। सुनता हमारी कौन है? (सारे बोलने में व्यस्त है।) इसी के अभ्यस्त है। लिखो लिखो झूठा इतिहास। हमारा भी नहीं विश्वास। पढ़ता उसे कौन है ? चीखो, चिल्लाओ, नारा लगाओ। करना धरना कुछ, नहीं। नारा लगाना कार्य है। नारा लगाना क्रांति है। यही तो भ्रांति है। हिंदू संस्कृति मुर्दाबाद। वेद वेदांत, […] Read more » poem by Pr.Madhusudan कविता भ्रांति
कविता कविता/याचना January 26, 2011 / December 16, 2011 by प्रवक्ता ब्यूरो | 1 Comment on कविता/याचना मेरी ख़ामोशी का ये अर्थ नहीं कि तुम सताओगी तुम्हारी जुस्तजू या फिर तुम ही तुम याद आओगी वो तो मैं था कि जब तुम थी खड़ी मेरे ही आंगन में मैं पहचाना नहीं कि तुम ही जो आती हो सपनों में खता मेरी बस इतनी थी कि रोका था नहीं तुमको समझ मेरी न […] Read more » poem कविता
कविता कविता/अपनी जमीं पर… January 26, 2011 / December 16, 2011 by डॉ. सीमा अग्रवाल | 2 Comments on कविता/अपनी जमीं पर… आसमाँ सा ऊँचा उठकर, झिलमिल सपनों में खो जाऊँ। दीन-हीन की पीन पुकार, एक बधिरवत् सुन न पाऊँ। सागर-सी गहराई पाकर, अपने सुख मेँ डूबूँ-उतराऊँ, गम मेँ किसी के गमगीँ होकर, आँसू भी दो बहा न पाऊँ। तो, नहीं चाहिए ऐसी उच्चता, और न ऐसी गहराई। इससे तो मैं अच्छा हूँ, अपनी जमीं पर ठहरा […] Read more » poem कविता
कविता आज मां ने फिर याद किया January 21, 2011 / December 16, 2011 by अंकुर विजयवर्गीय | 3 Comments on आज मां ने फिर याद किया भूली बिसरी चितराई सी कुछ यादें बाकी हैं अब भी जाने कब मां को देखा था जाने उसे कब महसूस किया पर , हां आज मां ने फिर याद किया ।।। बचपन में वो मां जैसी लगती थी मैं कहता था पर वो न समझती थी वो कहती की तू बच्चा है जीवन को नहीं […] Read more » Maa मां
कविता कविता/की जब मैंने दुख से प्रीत January 21, 2011 / December 16, 2011 by डॉ. सीमा अग्रवाल | 5 Comments on कविता/की जब मैंने दुख से प्रीत कल क्या होगा, इस चिंता में रात गई आँखों में बीत। होठों पर आने से पहले, सुख का प्याला गया रीत। आशाओं का दीप जला ढूँढा, न मिला जीवन संगीत। किस्मत भी जब हुई पराई, फूट पडा अधरों से गीत। साथी सुख तन्हा छोड़ गया जब, दर्द मिला बन मन का मीत। हर सुख से […] Read more » poem कविता
कविता कविता/ “मगंल पाण्डेय” January 17, 2011 / December 16, 2011 by प्रवक्ता ब्यूरो | 1 Comment on कविता/ “मगंल पाण्डेय” जो मरा नहीं अमर है, किताबों में उसका घर है, उसके लिये हमारी आखें नम हैं। जो करा काम कल, शुक्रिया भी कहना कम हैं। क्या हमारे अन्दर इतना दम हैं, दम नहीं तो क्या हम- हम हैं, जो दूसरों के लिये क्या वही कर्म हैं। कोई है जो कहे मगंल पाण्डेय हम हैं, बस […] Read more » poem कविता
कविता कविता / मन का शृंगार January 11, 2011 / December 16, 2011 by अंकुर विजयवर्गीय | 2 Comments on कविता / मन का शृंगार काश। एक कोरा केनवास ही रहता मन…। न होती कामनाओं की पौध न होते रिश्तों के फूल सिर्फ सफेद कोरा केनवास होता मन…। न होती भावनाओं के वेग में ले जाती उन्मुक्त हवा न होती अनुभूतियों की गहराईयों में ले जाती निशा। सोचता हूं, अगर वाकई ऐसा होता मन तो मन मन नहीं होता तन […] Read more » poem कविता
कविता कविता / कपूत January 11, 2011 / December 16, 2011 by प्रवक्ता ब्यूरो | 2 Comments on कविता / कपूत कितने तीर्थ किये माता ने और मन्नत के बांधे धागे! चाह लिए संतति की मन में, मात-पिता फिरते थे भागे! सुनी प्रार्थना ईश ने उनकी मैं माता के गर्भ में आया! माना जन्म सार्थक उसने हुई विभोर ज्यों तप-फल पाया नौ-दस मास पेट में ढोया पर माथे पर शिकन न आई! सही उसने प्राणान्तक पीड़ा […] Read more » poem कविता