कविता प्रभु पुत्र ईसा मसीह June 13, 2021 / June 13, 2021 by विनय कुमार'विनायक' | Leave a Comment —विनय कुमार विनायकगौतम की आत्मा भटकती रहीईसा-तीर्थंकर-गुरु नानक बनकर,दशमेश गुरु गोविन्द सिंह सोढ़ीऔर बापू महात्मा गांधी बनकर! पर क्या वे सफल हुए थे,अपने लक्ष्य को पाने में? ईश्वर के पुत्र ईसा मसीह कोजिसने माना खुद ईसाई होकरकिन्तु क्या वे ईसा सा बन पाते?ईसा की अपनी जाति यहूदी कोक्या ईसाई बनकर अपनाते? वर्गभेद और नश्लवाद कीअमानवीय […] Read more » lord son jesus christ प्रभु पुत्र ईसा मसीह
कविता अमीर खुसरो खड़ी बोली हिन्दी का जन्मदाता June 13, 2021 / June 13, 2021 by विनय कुमार'विनायक' | Leave a Comment —विनय कुमार विनायकअमीर खुसरो खड़ी बोली हिन्दी के जन्मदाता,‘तूती ए हिन्द’ कहलाते थे उर्दू भाषा के पिता! जब हिन्दू डिंगल-अपभ्रंश में साहित्य रचते थे,मुसलमान फारसी भाषा की ओर मुखातिब थे!ऐसे में हिंदू-मुस्लिम दोनों दूर थे जनभाषा से, ऐसी घड़ी में भारत में एक मुस्लिम भारत भक्त;अमीर खुसरो ने जन्म लिया बारह सौ तिरेपन में,शैफुद्दीन व […] Read more » Amir Khusro is the originator of Khari Boli Hindi
कविता मैं कौन हूं? अथ अहं ब्रह्मास्मि (नौ) June 11, 2021 / June 11, 2021 by विनय कुमार'विनायक' | Leave a Comment —विनय कुमार विनायकमैं ‘यदु’ अधिकार वंचितब्राह्मण का दौहित्र,ओजस्वी क्षत्रिय का प्रथम रक्त बूंदज्येष्ठांशभागी युवराज था!किन्तु ब्राह्मणत्व अहंऔर क्षत्रियत्व दंभ के द्वन्द नेमुझको किया सत्ताविहीन भिखारी!मैं बना वणिक-वैश्य,मेरा भ्राता तुरु तुर्कद्रहयु द्रविड़/अनु भोज-म्लेच्छ आनवऔर लघु अनुज पुरु पौरवराज बना!चन्द्रवंश का गौरव,कौरव-पाण्डव का पुरखा,चक्रवर्ती पद का अधिकारी!देखा मैंने इन आंखों सेपितृजन की गद्दारीमैं छलित हुआ/मैं दलित हुआमैं […] Read more » अथ अहं ब्रह्मास्मि
कविता मैं कौन हूं? अथ अहं ब्रह्मास्मि (छः) June 10, 2021 / June 10, 2021 by विनय कुमार'विनायक' | Leave a Comment —विनय कुमार विनायकमैं इलापुत्र ऐल!सूर्यवंशी मनु का दौहित्र,उस द्वन्द की कड़ी मेंचन्द्रवंशी आर्य ‘पुरुरवा’ था!सप्तद्वीप नौ खण्ड का स्वामीउर्वशी का भोगी,आयु का जन्मदाता!(7)मैं ‘नहुष’आयु का आत्मज,अति शौर्यवश हुआइन्द्र पदाभिषिक्तमेरी मुट्ठी में कैद थीधरती-स्वर्ग-इन्द्रासन!क्या ब्राह्मणत्व!क्या देवत्व! क्या आर्यत्व!सबने किया मेरा नमन,किन्तु स्वअहंवशमैं हुआ पतनशीलब्राह्मणत्व से शापित होकर,देवत्व से क्षीण/आर्यत्व से मलीनमैं हुआ इन्द्रपद से च्युत,अकर्मण्य अजगर […] Read more » Atha Aham Brahmasmi अथ अहं ब्रह्मास्मि
कविता मैं कौन हूं? अथ अहं ब्रह्मास्मि (तीन) June 9, 2021 / June 9, 2021 by विनय कुमार'विनायक' | Leave a Comment —विनय कुमार विनायकमन्वन्तर-दर-मन्वन्तरमनु के बेटों कामनु की व्यवस्था सेपूछा गया सवाल,पूछता है फिर-फिरआज भी मनु का बेटा!यह जानकर भीकि जबाव नहीं देगा व्यवस्थाकारखामोश ही रहेगा सीधे सवाल परमानक बनाने वालामैं का/मैन का/मन का!अस्तु अवसर विशेष पर कहे गएब्रह्मवाक्य में हीहल ढूंढेगा मनु का बेटा यह जानकरकि ब्रह्मवाक्य मिथ्या नहीं होता!हे आदि सनातन धर्म के नियामकमेरे […] Read more » अथ अहं ब्रह्मास्मि
कविता मैं कौन हूं अथ अहं ब्रह्मास्मि (दो) June 8, 2021 / June 8, 2021 by विनय कुमार'विनायक' | Leave a Comment —विनय कुमार विनायकमैं कौन हूंमन्वन्तर-दर-मन्वन्तरमनु के बेटों का मनु की व्यवस्था सेपूछा गया सवाल,पूछता है फिर-फिरमनु का बेटा/यह जानकर भीकि सीधे सवाल पर तुम खामोश ही रहोगे!तुम जानते हो हर विरोध पर गुम साधनातुम्हें ज्ञात है,ऊर्जा चालित होता हर विरोध/आक्रोश/जोशऊर्जा समाप्ति परजिसे लील जाती मौन सहिष्णुता!मनु-शतरुपा/आदम-हौआ की व्यवस्था केखिलाफ हर व्यक्तिवादी पंथिक विरोधबुद्ध की तरह […] Read more » Aham Brahmasmi अहं ब्रह्मास्मि
कविता मैं कौन हूं? अथ अहं ब्रह्मास्मि June 7, 2021 / June 7, 2021 by विनय कुमार'विनायक' | Leave a Comment —-विनय कुमार विनायकमैं कौन हूं?मन्वन्तर-दर-मन्वन्तरमनु के बेटों कामनु की व्यवस्था सेपूछा गया सवाल पूछता हैफिर-फिर मनु का बेटा!यह जानकर भीकि जबाव देगा नहींव्यवस्थाकारमानक बनाने वालामैं का/मैन का/मन का,अहंब्रह्मास्मि का व्याख्याता,समस्त सृष्टि में विशिष्ट होता!सुविधानुसार संज्ञा-सर्वनाम कोविशेष्य-विशेषण की कसौटी मेंअपनी तरह से परखने वाला,सार को असार/असार कोसार कहने वाला!भूत-भविष्य-वर्तमान का नियोजकसुकरात को जहर पिलाने वाला,कभी जीवित […] Read more » अथ अहं ब्रह्मास्मि (एक)
कविता सिद्धार्थ गौतम भगवान बुद्ध June 6, 2021 / June 6, 2021 by विनय कुमार'विनायक' | Leave a Comment —विनय कुमार विनायकब्राह्मणवाद और जातिप्रथा के बैरीअवतारवाद के दुश्मन,अहिंसा की मूर्तिबुद्ध तथागत कोतुमने ही दरेरा मारकरघर से निकाला!उनके अहिंसा दर्शन को चुराकरस्वनाम घोषित किया,प्रबुद्ध बुद्ध/बौद्ध जन को बुद्धू बनाकर!तुम्हारी खोखलीअवतारवाद और पुनर्जन्म कीकपोल कल्पना की पोल खोलते,उन्होंने ही कहा थातुम मृत मानवीय समाधिऔर पाषाण मूर्ति को पूज सकते!किन्तु दीन-दलित जीवंत मानवीयप्रतिमा को छूने से कतराते,तुम […] Read more » Siddhartha Gautama Lord Buddha सिद्धार्थ गौतम भगवान बुद्ध
कविता प्रकृति व पर्यावरण June 5, 2021 / June 5, 2021 by आर के रस्तोगी | Leave a Comment जब पल पल पेड़ कटते जायेंगे ,तब सब जंगल मैदान बन जायेंगे |मानव तब बार बार पछतायेगा ,जब सारे वे मरुस्थल बन जायेगे || जब पौधे सिमट गए हो गमलो में ,प्रकृति सिमट गयी हो बंगलो में |जब उजाड़ जायेगे घौसले पेड़ो से,तब बन्द हो जायगे पक्षी पिंजरों में || जब गांव बस रहे हो […] Read more » Nature and environment प्रकृति व पर्यावरण
कविता यदुकुल शिरोमणि भगवान कृष्ण June 4, 2021 / June 4, 2021 by विनय कुमार'विनायक' | Leave a Comment —विनय कुमार विनायकयदुपति कृष्ण की वही गति थीजैसी है पिछड़ों की आजमहा मनस्वी यती-तपी थे,गीता के अमृत वाणी थे,किन्तु तुम्हारी घृणा भाव से,वे भी पानी-पानी थे!तुममें से किसी सहृदय नेउनका अग्रपूजन किया थालगे हाथ तुमने हीउन्हें सौ-सौ गालियां दी थी!आखिर क्या करते,करने चले थे सम्मानितस्वदलित पिछड़े बांधवों कोपर क्या स्वयं अपमानित हो मरते?आखिर क्या करते?समझौता […] Read more » यदुकुल शिरोमणि भगवान कृष्ण
कविता मर्यादा पुरुषोत्तम भगवान राम June 2, 2021 / June 2, 2021 by विनय कुमार'विनायक' | Leave a Comment —विनय कुमार विनायकगो ब्राह्मण के रक्षक रामथे महान मर्यादावादी! दीन-दलितों के भगवान,थे घोर परम्परावादी! परम्परा को छोड़ना,ब्राह्मणी विधान को तोड़नाराम के लिए मुश्किल था! तब ही तो उन्होंने तप:शील,वेदाध्यायी,निर्दोष शूद्र शम्बूक कानिशंक शिरच्छेद किया था! कैसा न्याय या अन्यायराम को भी पता नहीं थासिर्फ ज्ञात था उनकोबाबा भृगु रचित मनुस्मृतिगुरु वशिष्ठ का ब्रह्मज्ञान, ‘शूद्र हेतु […] Read more » Maryada Purushottam Lord Rama मर्यादा पुरुषोत्तम भगवान राम
कविता फर्ज मां बाप के प्रति June 1, 2021 / June 2, 2021 by आर के रस्तोगी | Leave a Comment जन्म दिया जिन्होंने,उन्हे कल भुला ना देना,हंस रहे हैं जो आज,उन्हे कल रुला ना देना।। सिखाया है जिन्होंने,उंगली पकड़ कर चलाना,कल उनके सपनों को मिट्टी में मिला ना देना। खिलाया है जिन्होंने तुम्हे खुद भूखा रहकर,उन्हें कभी भूल से भूखा मत सुला ना देना। पढ़ाया लिखाया है तुम्हे खुद अनपढ़ रहकर,पढ़ लिख कर,मां बाप का […] Read more » duty towards parents फर्ज मां बाप के प्रति