कविता जप ले प्रभु का नाम तू बन्दे March 25, 2021 / March 25, 2021 by आर के रस्तोगी | Leave a Comment जप ले प्रभु का नाम तू बन्दे ,मत कर तू झूठा अभिमान बन्दे।झूठी है ये काया,झूठी है ये माया,मत कर तू इस पर गुबान बन्दे।। न कुछ लाया था,न कुछ ले जायेगा,मरने के बाद यही सब रह जायेगा।किसके लिए ये कुछ जोड़ रहा तू बन्दे,तेरा शरीर भी मिट्टी में मिल जाएगा बन्दे।।जप ले प्रभु का […] Read more » जप ले प्रभु का नाम तू बन्दे
कविता अबकी बार क्या करना है होली में March 24, 2021 / March 24, 2021 by आर के रस्तोगी | Leave a Comment जो ग़मगीन चेहरे है,रंगीन रंग भर दो उनकी झोली में |कोई भी उदास न रहे,इस गुलाल रंगो से भरी होली में || बंद है जो बुजुर्ग घरो में,इस कमीने कोरोना काल में |उनके साथ होली खेलो,खुश रखो उनको हर हाल में || रूठे है जो दोस्त तुमसे,गुलाल लगाओ उनको होली में |नाचो कूदो उनके संग,गाना […] Read more » अबकी बार क्या करना है होली में
कविता तुम प्यार करते हो शर्तों में March 22, 2021 / March 22, 2021 by विनय कुमार'विनायक' | Leave a Comment —विनय कुमार विनायकमैं उन्मादी हूंअत्यधिक प्रेम करनेवाला प्रेमीमैं अनुरागी हूंपागलपन की हद से गुजरकरप्यार करनेवालामैं सनकी हूं अक्सरा सनक जाता हूंकि मैं प्यार करता हूंउन्मादित, अनुरागित,पागलपन की हद से गुजरकरऔर प्रतिउत्तर में पाता हूंतुम्हें हाथ में पैमाना लिए हुएकि तुम्हारे प्यार में हदबंदी हैकि तुम प्यार करते हो शर्तों मेंकि तुम्हारे हाथ में तुला हैकि […] Read more » तुम प्यार करते हो शर्तों में
कविता जल है तो भविष्य उज्जवल है March 22, 2021 / March 22, 2021 by आर के रस्तोगी | Leave a Comment जल है तो भविष्य उज्जवल है,जल नहीं तो केवल कल कल है।कल के लिए जब जल बचाओगे,तभी तुम अपना भविष्य बचाओगे।। जल ही तो केवल जीवो का जीवन है,वरना जल बिन जीवन का मरण है।अगर विश्व में जल कल नहीं होगा,भविष्य निश्चित अंधकार में होगा।। अब तो जल के लिए विश्व युद्ध होगा,जल बिन अणु […] Read more » जल है तो भविष्य उज्जवल है
कविता हां! हां! दुर्योधन बांध मुझे मैं जीवित जीव अभिमन्यु हूं March 20, 2021 / March 20, 2021 by विनय कुमार'विनायक' | Leave a Comment —विनय कुमार विनायकहां! हां! दुर्योधन बांध मुझे!यदि तुम चक्रवर्ती हो कहीं के,तो मैं चक्र सुदर्शन हूं मही के!यदि तुम आर्य छत्रधारी शीर्ष हो,तो मैं अर हूं, छत्र हूं उपर सिर के! हां! हां! दुर्योधन बांध ले मुझे!यदि तुम ब्राह्मण हो धरा के,तो मैं ब्रह्म हूं सकल ब्रह्मांड में!यदि तुम जैन हो,तो मैं चौबीसों जिन हूं!यदि […] Read more » Yes! Yes! Duryodhan dam me i am living organism abhimanyu दुर्योधन बांध मुझे मैं जीवित जीव अभिमन्यु हूं
कविता भले की भलाई की कीमत नहीं होती March 18, 2021 / March 18, 2021 by विनय कुमार'विनायक' | Leave a Comment विनय कुमार विनायकजाने क्यों ईमानदार के चेहरों पर,सदा परेशानी पसरी-पसरी रहती है! परलोक की अप्सरा हूर लगती है,बेईमान का चेहरा लगता नूरानी है! क्यों सरकारी दफ्तर के अफसर से,जनता को बड़ी डर होने लगती है? देखते-देखते आंखें अभ्यस्त हो गई!इसमें किसी का कोई कसूर नहीं है! सदियों से जनता मजबूर लगती है,कुर्सी के आगे झुकी […] Read more » भले की भलाई की कीमत नहीं होती
कविता लिखूं क्या मै,मुझे लिखना नहीं आता March 16, 2021 / March 16, 2021 by आर के रस्तोगी | Leave a Comment लिखूं क्या मै,मुझे लिखना नहीं आता।दिल टूट गया है,इसे जोड़ना नहीं आता।। गया था गम भूलाने मै मयखाने मे।पर गम को मुझे भूलना नहीं आता।। कोशिश की थी यारो ने मुझे पिलाने की।मुश्किल ये थी वहां,मुझे पीना नहीं आता।। दिल के टुकड़े हुए हजार,सब बिखर गए।मुश्किल है मेरी उनको समेटना नहीं आता।। मांगता हूं मौत […] Read more » मुझे लिखना नहीं आता लिखूं क्या मै
कविता आगम व निगम में त्याग ग्रहण का अंतर है March 16, 2021 / March 16, 2021 by विनय कुमार'विनायक' | Leave a Comment —विनय कुमार विनायकहिन्दुओं के धर्मग्रंथआगम और निगमसनातन धर्म की दो धाराएंचल रही है आरंभ से! आगम परंपरागत ज्ञान है,निगम वेदों का विधान है,आगम मानव जातियों के लिएप्रयास समता और एकीकरण का! निगम के तीन वेद तीन द्विज वर्णों केअध्ययन हेतु,बांकी के लिए वर्जित,चौथा वेद अथर्व कमतर जादू टोना! एक जैन तीर्थंकरों का आगम,दूसरा वैदिक ऋषियों […] Read more » आगम व निगम में त्याग ग्रहण का अंतर है
कविता वक्त के खिलाफ मुहिम March 14, 2021 / March 14, 2021 by विनय कुमार'विनायक' | Leave a Comment —विनय कुमार विनायकजबतक दिकभ्रमित होकर,हम काटते रहेंगे अपने हाथ-पांवतबतक कमजोर प्रतिद्वंदी भीबांटता रहेगा देश, नगर और गांव! आज हम फिर से पंगु हैंएक राजा भोज तो अनेक गंगू हैंऐसे में कोई कैसे समझेकि कभी हम थे जगतगुरु के दावेदारवोल्गा से गंगा तक सारे थे रिश्तेदार! आज हम देख रहे एक पिता के पुत्र चारपहला कुलीन […] Read more » Campaign against time वक्त के खिलाफ मुहिम
कविता बीते हुए दिनो को भुला न देना March 14, 2021 / March 14, 2021 by आर के रस्तोगी | Leave a Comment बीते हुए दिनो को भुला न देना,आज हसे है, कल रुला न देना।। मिला है मुश्किल से स्नेह तुम्हारा,इसको तुम मिट्टी में मिला न देना। किया है प्यार घर्णा का मंथन मैंने,अमृत पिला कर विष पिला न देना। सातो जन्म तक साथ दूंगी मै तेरा,मनुष्य जीवन को यूं बिता न देना। बीते है पल जो […] Read more » बीते हुए दिनो को भुला न देना
कविता मेरे बाबा है भोले भंडारी March 12, 2021 / March 12, 2021 by आर के रस्तोगी | Leave a Comment मेरे बाबा है भोले भंडारी,उनकी नंदी की है सवारी।उनके पास जो कोई जाता,कभी खाली हाथ न आता।। मेरे बाबा पहने सर्पो की माल,वे काल के भी है महाकाल।उनके मस्तक पर चंद्र बिराजे,जटाओं में गंगा मैया है बिराजे।। मेरे बाबा मृग छाला है पहने,हाथो मे रुद्राक्ष अनेकों पहने।वे त्रिशूल पर डमरू लटकाते,वे भांग धतूरा भी खूब […] Read more » मेरे बाबा है भोले भंडारी
कविता परमेश्वर के पर्याय की आपसी तकरार है March 11, 2021 / March 11, 2021 by विनय कुमार'विनायक' | Leave a Comment —–विनय कुमार विनायककभी किसी ने सच कहा होगाजन-जन,कण-कण मेंपरम पिता परमेश्वर बसते हैं! पर आज कहना बेकार हैआज तो आतंकवाद कापरमेश्वर ही पहला शिकार है! अपने ही पर्यायों से परास्तन जाने कैसे होते गए ईश्वरकि परमेश्वर का जीना दुश्वार है! मंदिर में श्रीराम का शरभगवान शंकर का त्रिशूलश्रीकृष्ण का सुदर्शन चक्रमाता दुर्गा का हिंसक शेरबजरंगबली […] Read more » there-is-a-quarrel-on-synonyms-of-god परमेश्वर के पर्याय की आपसी तकरार है