कविता मर्यादा पुरुषोत्तम भगवान राम June 2, 2021 / June 2, 2021 by विनय कुमार'विनायक' | Leave a Comment —विनय कुमार विनायकगो ब्राह्मण के रक्षक रामथे महान मर्यादावादी! दीन-दलितों के भगवान,थे घोर परम्परावादी! परम्परा को छोड़ना,ब्राह्मणी विधान को तोड़नाराम के लिए मुश्किल था! तब ही तो उन्होंने तप:शील,वेदाध्यायी,निर्दोष शूद्र शम्बूक कानिशंक शिरच्छेद किया था! कैसा न्याय या अन्यायराम को भी पता नहीं थासिर्फ ज्ञात था उनकोबाबा भृगु रचित मनुस्मृतिगुरु वशिष्ठ का ब्रह्मज्ञान, ‘शूद्र हेतु […] Read more » Maryada Purushottam Lord Rama मर्यादा पुरुषोत्तम भगवान राम
कविता फर्ज मां बाप के प्रति June 1, 2021 / June 2, 2021 by आर के रस्तोगी | Leave a Comment जन्म दिया जिन्होंने,उन्हे कल भुला ना देना,हंस रहे हैं जो आज,उन्हे कल रुला ना देना।। सिखाया है जिन्होंने,उंगली पकड़ कर चलाना,कल उनके सपनों को मिट्टी में मिला ना देना। खिलाया है जिन्होंने तुम्हे खुद भूखा रहकर,उन्हें कभी भूल से भूखा मत सुला ना देना। पढ़ाया लिखाया है तुम्हे खुद अनपढ़ रहकर,पढ़ लिख कर,मां बाप का […] Read more » duty towards parents फर्ज मां बाप के प्रति
कविता नौकरी June 1, 2021 / June 2, 2021 by आर के रस्तोगी | 1 Comment on नौकरी नौकरी के नौ काम है,दसवां काम है हां जी का,करते रहो सारे काम,कोई काम नहीं ना जी का। नौकरी में नहीं हैं आजादी,ये काम है गुलामी का,सारे दिन हां हां करो,पूरे दिन ये काम सलामी का। नौकर के नौ हाथ होते,पूरा काम टांग तराजू का,एक हाथ से काम न चलेगा,काम दोनों बाजू का। नौकरी में […] Read more » नौकरी
कविता अब भी समय है जातिभेद मिटाने का May 31, 2021 / May 31, 2021 by विनय कुमार'विनायक' | Leave a Comment —विनय कुमार विनायकअपने ही बाणों से बींधे जाएंगे ब्राह्मण,अपने ही तीरों से तीरे जाएंगे ब्राह्मण,शब्द ब्रह्म है साक्षी प्रमाण ऐसा होने का,अब भी समय है जाति भेद मिटाने का! जब अधम योनिजा; मछुआरन,स्वपाकी,दासी, गणिका का बेटा थे श्रेष्ठ ब्राह्मण;वेद व्यास,पराशर, शक्ति व ऋषि वशिष्ठ,फिर वशिष्ठ का बेटा अबके ब्राह्मण कैसेविशिष्ट औ’ ब्राह्मणों के मातृगोत्री जातिदास, […] Read more » There is still time to eradicate caste अब भी समय है जातिभेद मिटाने का
कविता फिर एक महाभारत May 31, 2021 / May 31, 2021 by विनय कुमार'विनायक' | Leave a Comment —–विनय कुमार विनायकआज लड़ना हैफिर से एक महाभारतउस मानसिकता के खिलाफजिसमें एक कृष्ण सिंहदूसरे कृष्ण मंडल सेकंश जैसा व्यवहार करता हैदफ्तर में दुत्कारता है! वही कृष्ण सिंह दुर्योधन सिंह कोदफ्तर में पुचकारता हैकृष्ण झा से मुहूर्त विचारता हैकि कब और कैसे?कृष्ण मृगों का शिकार करना है! ऐसे में कृष्णा दास,कृष्णा मराण्डी क्या कर पाएगा,किससे गुहार […] Read more » फिर एक महाभारत
कविता मैं कैसा हूं इंसान? May 30, 2021 / May 31, 2021 by विनय कुमार'विनायक' | Leave a Comment —विनय कुमार विनायकसंघर्ष में जीता हूंघूंट जहर का पीता हूंकिसको आत्मीयजन समझूं,जबकि सब मुझसे हैं अंजान,मैं कैसा हूं इंसान? अर्थ का बना नही दास,किया नही मैं अर्थ तलाश,फिर भी कुछ को मुझसे आस,क्या दूं उनको अनुदान,मैं कैसा हूं इंसान? घंटों कलम घिसकर,जो कुछ भी पाता हूं,कर्तव्य की वेदी पर चढ़ा,मात्र प्रसाद भर खाता हूं,पर दुनिया […] Read more » मैं कैसा हूं इंसान?
कविता जाति-वर्ण ही कर्ण के दुख का कारण था May 30, 2021 / May 31, 2021 by विनय कुमार'विनायक' | Leave a Comment —विनय कुमार विनायकजातिवाद बड़ी समस्या है भारतदेश की,कभी धर्म के नाम लड़ाई, कभी वर्ण के,एक जाति ने दूसरी जाति की हत्या की,कभी शस्त्र के साथ लड़े,कभी शास्त्र से! भारत सदा कराह रहा जाति विषदंत से,गुरु परशुराम और द्रोण भी कहां कम थे,महादंभी व अताताई रावण,कौरव,कंश से,पक्षधर नहीं धर्म के, बल्कि वर्ण-वंश के! महाभारत नहीं राज्य […] Read more » Caste-varna was the cause of Karna's misery जाति-वर्ण ही कर्ण के दुख का कारण था
कविता डाकघर का लौह मुहर देख प्रेमपत्र सिहर उठता May 29, 2021 / May 29, 2021 by विनय कुमार'विनायक' | Leave a Comment —विनय कुमार विनायकडाकघर;एक पूर्ण सरकारी दफ्तरबाबा आदम युग से पाकरएक प्यारी मुंहबोली संज्ञाआज भी कहलाता डाकघर,यही हकीकत नही माखौल!डाकघर की जय बोल! डाकघर की छाती पर,इस चीक-चाक के दौर मेंगौ की घंटी सी टंगी गोल,चिर भुख्खड़ सा मुंह खोलेअपूर्ण,अतृप्त,अनबोली पेटी,कहलाती डाकघर का ढोल!डाकघर की जय बोल! डाकघर!प्राचीन परम्परा का रखवाला,सेफ-संदूक,लॉकर-बंदूक के युग मेंबोरे में रुपया […] Read more » डाकघर का लौह मुहर
कविता आज अच्छी नही अच्छाई May 27, 2021 / May 27, 2021 by विनय कुमार'विनायक' | Leave a Comment —विनय कुमार विनायकआज अच्छी नही अच्छाईमूर्खता हो गई ईमानदारीगदर्भराग है सच बोलना! तथाकथित उक्त गुणवाहकसुनो सुनो कान खोलकर सुनोतुम जहां कहीं भी होपूरी तरह से घिर चुके हो! आगे पीछे, दाएं बाएंनिस्सहाय अभिमन्यु की तरहएकमत बहुसंख्यक लोगों सेजाने कब किस दु:शासन का पुत्रगदा प्रहार कर बैठेगा तुझपर! तुम गिनती में अति अल्प होतेरी गृहस्वामिनी भी […] Read more »
कविता आत्मा और परमात्मा अनादि है May 25, 2021 by विनय कुमार'विनायक' | Leave a Comment —विनय कुमार विनायकआत्मा और परमात्मा अनादि हैहर आत्मा परमात्मा का पारद साखंडित अंश है जिसका लक्ष्य हैपरमात्मा में समाहित हो जाना! आत्मा अनेकबार जन्म-मृत्यु से गुजरी हैजीवात्मा की दुश्मनी और रिश्तेदारी भीपूर्व जन्मों से निर्धारित, सुनियोजित होती! आत्मा की जन्म अवस्था लक्षित है,जो शरीरी इन्द्रियों द्वारा है दृष्टिगोचर,परन्तु आत्मा की मृत्यु से जन्म केबीच की […] Read more » आत्मा और परमात्मा अनादि है
कविता बच्चों का पन्ना नहीं भला होता लड़ने से May 25, 2021 / May 25, 2021 by प्रभुदयाल श्रीवास्तव | Leave a Comment Read more » नहीं भला होता लड़ने से
कविता कोरोना से अब लड़ना है May 25, 2021 / May 25, 2021 by आर के रस्तोगी | Leave a Comment कोरोना से अब लड़ना है,इसका मुंह काला करना है। दो गज की दूरी रखनी है,मुंह पर मास्क लगाना है।घर से नहीं अब निकलना,घर से ही काम करना है।कोरोना से अब लड़ना है,इसका मुंह काला करना है। किसी के घर नहीं जाना है,किसी को नहीं बुलाना है।वैक्सीन सबको लगवानी है,अपने आप सुरक्षा करनी है।सबको ही विश्वास […] Read more » कोरोना से अब लड़ना है