कविता तब अकेली थामे हाथ बनी सेनीटाईजर हाला February 18, 2021 / February 18, 2021 by विनय कुमार'विनायक' | Leave a Comment —विनय कुमार विनायककोरोना काल में गंगा जल से बेहतर ये हाला,बिना हाला से हाथ धोए, गटका नहीं निवाला! नमक को छोड़ा,तेल छोड़ा,चीनी को भी छोड़ा,ये सारे हैं ब्लड प्रेशर व सुगर को बढ़ानेवाला! पर किसी ने बुरे दौर में भी टाली नहीं हाला,ये विषाणु मिटाने वाली, आला दर्जे की हाला! हाला को हलाहल कहके,बुरा कहनेवालो […] Read more » सेनीटाईजर
कविता शहीद दिवस February 18, 2021 / February 18, 2021 by आर के रस्तोगी | Leave a Comment नमन करते है उन शहीदों को,जिन्होंने अपनी जान थी गवाई |ब्रिटिश हकूमत में जिन्होंने,फांसी की सजा थी पाई || सच्चे सपूत थे भारत के वे ,अपना सुख दुःख भूल गए |भारत की आजादी के लिए ,फांसी के तख्ते पर झूल गए || नाम था उनका भगत सिंह,सुखदेव और राजगुरु आदिजो ब्रिटिश शासन से न डरते […] Read more » शहीद दिवस
कविता जो भाषा आसेतु हिमालय के बीच सेतु February 17, 2021 / February 17, 2021 by विनय कुमार'विनायक' | Leave a Comment —विनय कुमार विनायकजो भाषा आसेतु हिमालय के बीच सेतु,काम आती परिचित-अपरिचित,आम-खास, लोग-बाग के बोलचाल हेतु! जिस भाषा में सूर तुलसी जैसे धूमकेतुविश्व साहित्य के ग्रह नक्षत्रों के मध्य उभरे! जिनकी ऊंचाई अंग्रेजी के शेक्सपियर मिल्टन तो क्यासमस्त विश्व साहित्य के कोई भी पलटन छू ना सके! जिस भाषा की लिपि देवनागरी की वर्तनी कीवैज्ञानिकता, संवहनीयता,संप्रेषणीयता […] Read more » भाषा
कविता बसंत पंचमी February 16, 2021 / February 16, 2021 by आर के रस्तोगी | Leave a Comment आओ बसंत पंचमी मनाए,नील गगन में पतंग उड़ाए,मां सरस्वती करे हम पूजा,उसको अपना शीश झुकाये । पीले पीले फूल है खिलते,जीवन के आनंद है मिलते,करते स्वागत वसंत ऋतु का,शरद ऋतु को विदा हम करते। बसंती चोला पहने इस दिन,मन बसंती होता है इस दिन,चारों तरफ है बसंत की शोभासबसे सुंदर लगते हैं ये दिन।। बसंत […] Read more » बसंत पंचमी
कविता हर कोई रिश्तेदार यहां पिछले जन्म का February 15, 2021 / February 15, 2021 by विनय कुमार'विनायक' | Leave a Comment —विनय कुमार विनायकहर कोई रिश्तेदार यहां पिछले जन्म का,हर कोई किराएदार यहां पिछले जन्म का!हर कोई कर्ज चुकाने,उगाहने आता पिछले जन्म का! यहां नहीं कोई मित्र, नहीं कोई शत्रु होता,दोस्त और दुश्मन आ मिलते, पिछले जन्म का,जिससे तुमने जो लिया, दिया, वो सब ले, दे जाएंगे! खाली हाथ आए,खाली हाथ जाएंगे,जो भी तुमने लिया, दिया […] Read more » Everyone's relative is here हर कोई रिश्तेदार यहां पिछले जन्म का
कविता वेद व्यास से कहना है February 15, 2021 / February 15, 2021 by विनय कुमार'विनायक' | Leave a Comment —विनय कुमार विनायकहे वेद व्यासदेव कृष्णद्वैपायन!आप वेदवेत्ता!अठारह पुराणों के ज्ञाता,महाभारत महाकाव्य के रचयिता! आपके परपितामह ब्रह्मर्षि वशिष्ठवैदिक श्रुति-सुक्त के मंत्रवेत्ता!पितामह शक्ति/पिता पराशरऔर स्वयं आप जन्मत: क्या थे? ‘गणिका-गर्भ संभूतो, वशिष्ठश्च महामुनि:।तपसा ब्राह्मण: जातो संस्कारस्तत्र कारणम्।।जातो व्यासस्तु कैवर्त्या: श्वपाक्यास्तु पराशर:।वहवोअन्येअपि विप्रत्यं प्राप्ताये पूर्वमद्विजा।।‘ आपने हीं तो महाभारत में कहा था-गणिका के गर्भ से उत्पन्न महामुनिवशिष्ठ तप […] Read more » Veda says to Vyas वेद व्यास से कहना है
कविता प्रिय की पाती February 11, 2021 / February 11, 2021 by प्रभुनाथ शुक्ल | Leave a Comment पाती जब आती है सुखद संदेशा लाती है !सांसो की बंद पड़ी धड़कन खिल जाती है ! ! छुई- मुई वनिता नचिकेता सी बन जाती है !जब सांसो के सरगम में घुलमिल जाती है ! ! संदेशा साजन का जब कोई भी लाता है !बेदर्दी दिल को कोई यूँ खुश कर जाता है ! ! […] Read more » प्रिय की पाती
कविता हम हिन्दी हैं देश हमारा हिन्दुस्तान February 11, 2021 / February 11, 2021 by विनय कुमार'विनायक' | Leave a Comment —विनय कुमार विनायकहम हिन्दी हैं,देश हमारा है हिन्दुस्तान! हम हिन्दी हैं,मिटी नहीं अपनी पहचान! देख फिजा में,गूंज रहा है एक ही नाम! प्यारा हिन्दुस्तान,हम कभी रहे नहीं गुमनाम! वायदा में पक्के,धोखाधड़ी नहीं हमारा काम! मानवता धर्म हमारा,हम देते हैं सबको सम्मान! नमस्कार, नमस्ते से,हम करते विश्व को प्रणाम! हमने दिया विश्व को,सत्य,अहिंसा धर्म का पैगाम! […] Read more » our country is our India We are Hindi हम हिन्दी हैं देश हमारा हिन्दुस्तान
कविता कोयल की तेरी बोली February 10, 2021 / February 10, 2021 by विनय कुमार'विनायक' | Leave a Comment —विनय कुमार विनायकआज देखा ठूंठ पर बैठावृद्ध कोयल को बेतहाशा रोतेअपने बच्चों की नादानी परबच्चे जो कौवे के कोटर में पलकर बड़े होतेजो होश संभालते ही घर छोड़ देते!कोयल जिसे घर नहीं होताजो हर शाख, जर्रा-जर्रा को घर समझता!जाने कैसे कोयल के बच्चेलड़ पड़े घर के लिए!समझाया भी था उसने‘कोयल की संतानों/ खुद को पहचानो’कुछ […] Read more » कोयल की तेरी बोली
कविता चाहे जितना जलाओ विचार जलता नहीं February 9, 2021 / February 9, 2021 by विनय कुमार'विनायक' | Leave a Comment —विनय कुमार विनायकचाहे जितना जलाओ विचार जलता नहीं,विचार मरता नहीं एकबार उग आने पर!युगों-युगों तक जीवित रहता रहेगा विचार! विचार एक सीधी रेखा है कागज पर,जो मिटता नहीं विचारक के मिट जाने पर! विचार एक अनाशवान हथियार है,जिसका होता नहीं कोई मारक प्रतिहथियार! एक विचार प्रतिस्थापित होता नेक विचार से,एक रेखा के समानांतर दूसरी बड़ी […] Read more » चाहे जितना जलाओ विचार जलता नहीं
कविता ऋतुराज बसन्त February 9, 2021 / February 9, 2021 by शकुन्तला बहादुर | Leave a Comment Read more » ऋतुराज बसन्त
कविता भाषा नहीं किसी धर्म-मजहब की, ये पुकार है रब की February 8, 2021 / February 8, 2021 by विनय कुमार'विनायक' | Leave a Comment —विनय कुमार विनायकपाट दो मन की खंदक-खाई,भाषा की दीवार नहीं होतीहवा सी उड़कर जाती-आती, भाषा मन पर सवार होती! इसपार-उसपार उछल जाती, खुद ही विस्तार हो जाती,भाषा ध्वनि का झोंका है, पूरे संसार में फैलती जाती! बड़े-बड़े साम्राज्य ढह गये,उजड़ गये भाषा की मार से,बड़ी धारदार होती भाषा,किन्तु बिना तलवार की होती! भाषा सदा से […] Read more »