लेख मुझे सिंगापुर पसंद नहीं आया. December 7, 2015 by आर. सिंह | 1 Comment on मुझे सिंगापुर पसंद नहीं आया. सच,मुझे सिंगापुर पसंद नहीं आया. साठ के दशक में एक गाना बहुत प्रचलित हुआ था,यह शहर बड़ा अलबेला हर तरफ हसीनों का मेला.तू चला चल अकेला.सिंगापुर सिंगापुर.फिल्म के हीरो सम्मी कपूर थे.मैंने फिल्म नहीं देखी थी,पर गाने ने सिंगापुर देखने की एक चाह तो अवश्य पैदा कर दी थी.उस समय तक सिंगापुर मलेशिया का ही […] Read more » मुझे सिंगापुर पसंद नहीं आया.
लेख विविधा शख्सियत साहित्य डॉ. हरिवंशराय बच्चन: जन्मदिन विशेष November 26, 2015 by प्रतिमा शुक्ला | 2 Comments on डॉ. हरिवंशराय बच्चन: जन्मदिन विशेष क्या भूलूँ, क्या याद करूँ प्रस्तुति – प्रतिमा शुक्ला ‘‘मैं छुपाना जानता तो जग मुझे साधु समझता शत्रु मेरा बन गया है, छल रहित व्यवहार मेरा’’ यह पंक्तियाँ जैसे ही जेहन में उतरती हैं, कविवर डॉ. हरिवंशराय बच्चन का व्यक्तित्व व कृतित्व साकार हो जाता है। बच्चनजी का साहित्य पढ़ने से यह बात स्वतः ही […] Read more » Featured हरिवंशराय बच्चन
लेख विविधा समाज मानवता के विकास में बाधा बनती कट्टरता November 20, 2015 by प्रमोद भार्गव | Leave a Comment संदर्भःपेरिस में पत्रकारों पर हमला प्रमोद भार्गव यह विडंबना ही है कि एक तरफ दुनिया चहुंमुखी एवं सुविधायुक्त विकास की ओर बढ़ रही है, वहीं इस्लामिक उग्रवाद और असहिष्णुता विश्वव्यापी हो रही है। यह ठीक है कि फ्रांस जैसे कायरतापूर्ण हमलों का अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता पर असर, अर्से तक ठहरने वाला नहीं है। पत्रकारों […] Read more » Featured कट्टरता बाधा बनती कट्टरता मानवता के विकास में मानवता के विकास में बाधा बनती कट्टरता
कला-संस्कृति महत्वपूर्ण लेख लेख साहित्य हिंद स्वराज हिन्दू धर्म ही नहीं जीवन दर्शन है November 18, 2015 by डा. राधेश्याम द्विवेदी | 3 Comments on हिन्दू धर्म ही नहीं जीवन दर्शन है डा राधेश्याम द्विवेदी हिन्दू राष्ट्र और हिन्दू धर्म को लेकर पूरे देश में कुछ लोगों ने एक मुहिम चला रखी है । अनेक राजनेता एवं धार्मिक जन इसका उल्टा.सीधा अर्थ निकालकर देश की भोली भाली जनता को दिग्भ्रमित कर रहे हैं । वे अपनी पूर्वाग्रहयुक्त बातों को समाज एवं राष्ट्र पर थोपने का प्रयास कर […] Read more » Featured hindu Hinduism हिन्दू धर्म जीवन दर्शन है हिन्दू धर्म है
लेख साहित्य महुवा डाबर : एक और जलियावालाबाग की अनकही कहानी November 17, 2015 / November 17, 2015 by डा. राधेश्याम द्विवेदी | Leave a Comment डा. राधेश्याम द्विवेदी 1857 के स्वतंत्रता आन्दोलन में बस्ती मण्डल का योगदान सामान्य ही रहा। जिस समय यह जिला बना था उस समय यह गोरखपुर का भाग था। इसका कोई नागरिक केन्द्र नहीं था। इसके इतिहास को गोरखपुर के इतिहास से अलग करके नहीं देखा जा सकता है साथ ही गोण्डा एवं फैजाबाद से भी […] Read more » Featured एक और जलियालाबाग एक और जलियालाबाग की अनकही कहानी महुवा डाबर
लेख साहित्य पुरस्कार वापसी – अंर्तराष्ट्रीय साजिश November 8, 2015 / November 8, 2015 by डा. अरविन्द कुमार सिंह | 3 Comments on पुरस्कार वापसी – अंर्तराष्ट्रीय साजिश डा. अरविन्द कुमार सिंह जरा सोचिए, यदि संपूर्ण प्रिंट एवं इलेक्ट्रानिक मीडिया का प्रकाशन एवं प्रसारण बंद कर दिया जाए तो हम राष्ट्रीय परिप्रेक्ष्य की घटनाओं तथा राजनेताओं के बारे में कितना जान पाते? राहुल गाॅधी, अरविन्द केजरीवाल तथा नरेन्द्र मोदी के बारे में कितना जानते? हमारी विचारधारायें सूचना के आभाव में कितनी धारदार हो […] Read more » Featured अंर्तराष्ट्रीय साजिश पुरस्कार वापसी
लेख साहित्य फुटपाथ पर सोया बालक और मेरा ममत्व November 4, 2015 / November 4, 2015 by अनुप्रिया अंशुमान | Leave a Comment मुझे ये लगता है कि माँ होना या माँ बनना, दोनो ही बातें, अपने में एक विशेषता लिए आती है । हमेशा ही मेरी आँखें माँ के नाम पर नम हो जाती है; और माँ बनने की अभिलाषाओं को त्वरित कर देती है । कहते है कि स्त्री तब तक माँ नहीं बनती जब तक […] Read more » फुटपाथ पर सोया बालक मेरा ममत्व
लेख साहित्य मुझे भी सम्मान की दरकार, क्या सम्भव है? November 2, 2015 by डॉ. भूपेंद्र सिंह गर्गवंशी | Leave a Comment डॉ. भूपेन्द्र सिंह गर्गवंशी/ पाठकों मैं वादा करता हूँ कि यदि मुझे कोई सम्मान मिला तो मैं उसे कभी भी किसी भी परिस्थिति में लौटाने की नहीं सोचूँगा। एक बात और बता दूँ वह यह कि मेरी कोई पहुँच नहीं और न ही मैंने राजनीति के शिखर पर बैठे लोगों, माननीयों का नवनीत लेपन ही […] Read more » मुझे भी सम्मान की दरकार सम्मान की दरकार
लेख साहित्य ‘साजिश के तहत सम्मान वापसी का सिलसिला’ October 30, 2015 by दीपक शर्मा 'आज़ाद' | 3 Comments on ‘साजिश के तहत सम्मान वापसी का सिलसिला’ पश्चिम के किनारों पर बैठ कर जो लोग अपने ही मुल्क की ईबारत लिखने की कोशिशों में जुटे हैं, वे एक दिन इस राष्ट्र का सर्वनाश कर बैठेंगे। वैसे अब कोई कसर तो बची नहीं, वाममार्गियों ने भारतीय इतिहास के साथ जो तोड़फोड़ की है उसका आभार। उनके हिसाब से भारतीय स्वात़ंत्र्य समर 1857 महज […] Read more » Featured सम्मान वापसी सम्मान वापसी का सिलसिला
कला-संस्कृति लेख विविधा शातिर मैकाले का मोहरा – हिन्दू धर्म का महान शत्रु “मैक्स मूलर” October 29, 2015 by हरिहर शर्मा | Leave a Comment फ्रेडरिक मैक्समूलर एक ऐसा नाम है जिसे ब्रिटिश शासनकाल में ब्रिटिश राजनीतिज्ञों, प्रशासकों और कूटनीतिज्ञों ने एक सदी (१८४६-१९४७) तक लगातार हिन्दुओं का एक अभिन्न मित्र और वेदों के महान विद्वान के रूप में प्रस्तुत किया ! परन्तु क्या यह सत्य है ? जी नहीं सत्य ऐसे बिलकुल विपरीत है ! वास्तव में मैक्स मूलर […] Read more » Featured मैक्स मूलर शातिर मैकाले का मोहरा हिन्दू धर्म का महान शत्रु
लेख विविधा सर्व प्रथम, यह पाखण्ड नहीं है. October 27, 2015 / October 28, 2015 by आर. सिंह | 16 Comments on सर्व प्रथम, यह पाखण्ड नहीं है. संगोष्ठी (सम्मान वापसी -प्रतिरोध या पाखंड?) सर्व प्रथम, यह पाखण्ड नहीं है. आज यह प्रश्न उठ रहा है या उठाया जा रहा है कि अवार्ड इस समय ही क्यों लौटाए जा रहे हैं,पहले क्यों नहीं?आम लोगों को यह प्रश्न स्वाभाविक लग रहा है,पर मेरे विचार से यह प्रश्न एक सिरे से अस्वाभाविक है.यह प्रश्न उन […] Read more » Featured यह पाखण्ड नहीं है.
लेख विविधा लेखक के विरोध का तरीका केवल लेखन है October 27, 2015 / October 28, 2015 by राजीव रंजन प्रसाद | Leave a Comment राजीव रंजन प्रसाद व्यवस्था के विरुद्ध सभी लड़ाईयों में जो सर्वाधिक कारगर हथियार सिद्ध होता रहा है वह है – कलम। सामाजिक-सांस्कृतिक आन्दोलन हों अथवा साम्प्रदायिक असहिष्णुताओं को समरसताओं में कायांतरित किये जाने के प्रयास, यह अब तक लेखकों के कंधों का दायित्व रहा है। व्यवस्था कोई भी हो और सरकारें कैसी भी हों, लेखन […] Read more » Featured लेखक के विरोध का तरीका