कला-संस्कृति धर्म-अध्यात्म पर्व - त्यौहार लेख वर्त-त्यौहार संतों की ऋतु है बसंत February 12, 2024 / February 12, 2024 by डॉ शंकर सुवन सिंह | Leave a Comment डॉ. शंकर सुवन सिंह बसंत ऋतु नवीनता का प्रतीक है। नवीनता उल्लास को जन्म देती है। उल्लास सुख समृद्धि का द्योतक है। सुख शांति का वास ज्ञान में है। इस ऋतु में प्रकृति अपना नया रूप दिखती है। बसंत पंचमी ज्ञान की देवी सरस्वती को समर्पित है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार माता सरस्वती का अवतरण […] Read more » Spring is the season of saints
जन-जागरण टेक्नोलॉजी लेख नागर समाज से समुदाय का रेडियो February 12, 2024 / February 12, 2024 by मनोज कुमार | Leave a Comment 13 फरवरीविश्व रेडियो दिवस पर विशेषमनोज कुमार कभी नागर समाज के लिए प्रतिष्ठा का प्रतीक होने वाला रेडियो आज समुदाय के रेडियो के रूप में बज रहा है। समय के विकास के साथ संचार के माध्यमों में परिवर्तन आया है और उनके समक्ष विश्वसनीयता का सवाल खड़ा है तो रेडियो की विश्वसनीयता के साथ उसका […] Read more » community radio from civil society
लेख शख्सियत समाज महावीर नए भारत के अभ्युदय की जीवंत प्रेरणा है February 12, 2024 / February 12, 2024 by ललित गर्ग | Leave a Comment – ललित गर्ग – राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ ने भगवान महावीर के 2550वें मोक्ष कल्याणक दिवस को मनाने की सार्थक पहल करके एक अनूठा उदाहरण प्रस्तुत किया है। दिनांक 12 फरवरी 2024 को विज्ञान भवन में आयोजित इस राष्ट्रीय समारोह में संघ के सर संघचालक श्री मोहन भागवत जी एवं चारों जैन संप्रदाय के आचार्य और […] Read more » Mahavir is the living inspiration for the emergence of new India
लेख मंगल ग्रह पर पहुँचना आसान लेकिन कठिन ‘खुले में शौच’ का निपटान February 12, 2024 / February 12, 2024 by डॉ. सत्यवान सौरभ | Leave a Comment भारत दुनिया का चौथा देश (रूस, संयुक्त राज्य अमेरिका और यूरोपीय संघ के बाद) और अंतरिक्ष में मंगल जांच शुरू करने वाला एकमात्र उभरता हुआ देश बन गया। लेकिन यह 50% से कम स्वच्छता कवरेज वाले 45 विकासशील देशों के समूह का हिस्सा बना हुआ है,जहां कई नागरिक या तो शौचालय तक पहुंच की कमी […] Read more » Easy to reach Mars but difficult to dispose of 'open defecation'
लेख जलवायु परिवर्तन के शोर से सन्नाटे तक February 12, 2024 / February 12, 2024 by प्रवक्ता ब्यूरो | Leave a Comment दीपमाला पाण्डेय केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (सीपीसीबी) ने भारत में विभिन्न क्षेत्रों के लिए अनुमेय शोर स्तर निर्धारित किया हुआ है। ध्वनि प्रदूषण नियमों ने दिन और रात, दोनों समय के लिए, विभिन्न क्षेत्रों में शोर के स्वीकार्य स्तर को परिभाषित भी किया है। जैसे औद्योगिक क्षेत्रों में, अनुमेय सीमा दिन के लिए 75 डीबी और रात में […] Read more » From the noise to silence of climate change
पर्यावरण लेख इंडिया एनेर्जी वीक: क्या ग्रीन हाइड्रोजन बनेगी गेम चेंजर? February 12, 2024 / February 12, 2024 by निशान्त | Leave a Comment गोवा में चल रहा इंडिया एनर्जी वीक 2024 भारत के ऊर्जा भविष्य की रोमांचक तस्वीर दिखा रहा है. क्लीन एनेर्जी, महत्वाकांक्षी जलवायु लक्ष्य और एनेर्जी सेक्युर्टी पर जोर के साथ, इस कार्यक्रम में कई प्रमुख घटनाक्रम सामने आए हैं, खासकर हाइड्रोजन का बढ़ता महत्व. लेकिन यहाँ बड़ा सवाल ये उठता है कि ये घटनाक्रम भारतीय […] Read more » India Energy Week: Will green hydrogen become a game changer?
लेख पुस्तकों का मेला क्यों है अलबेला February 8, 2024 / February 8, 2024 by ललित गर्ग | Leave a Comment -ललित गर्ग – इंसान की ज़िंदगी में विचारों का सर्वाधिक महत्वपूर्ण स्थान है। वैचारिक क्रांति एवं विचारों की जंग में पुस्तकें सबसे बड़ा हथियार है। लेकिन यह हथियार जिसके पास हैं, वह ज़िंदगी की जंग हारेगा नहीं। जब लड़ाई वैचारिक हो तो पुस्तकें हथियार का काम करती हैं। पुस्तकों का इतिहास शानदार और परम्परा भव्य […] Read more » Why is the book fair so bad
लेख युवा नौकरी देने वाला क्यों न बनें? February 8, 2024 / February 8, 2024 by चरखा फिचर्स | Leave a Comment सुहैल अलीपुंछ, जम्मू समय के साथ साथ इंसान ने ऐसी चीजें खोज ली हैं जो हर संभव सफलता हासिल कर उसके जीवन को आसान बना रही है. इसमें विज्ञान और टेक्नोलॉजी का सबसे बड़ा योगदान है. इसकी मदद से आज इंसान दुनिया के एक कोने से बैठकर किसी भी कोने में आसानी से लोगों से बात […] Read more » Why not become a youth employer युवा नौकरी देने वाला क्यों न बनें
लेख अब सशक्त हो रही हैं ग्रामीण किशोरियां February 7, 2024 / February 7, 2024 by चरखा फिचर्स | Leave a Comment हेमा रावलगनीगांव, उत्तराखंड कुछ साल पहले तक उत्तराखंड के जिन गांवों की किशोरियां 8वीं या बहुत ज्यादा 10वीं तक ही पढ़ा करती थी. जिन्हें लगता था कि वह पढ़ाई करके भी क्या कर सकती हैं? आज उसी गांव की लड़कियां न केवल 10वीं से आगे कॉलेज की पढ़ाई कर रही हैं बल्कि हर क्षेत्र में […] Read more » Now rural girls are becoming empowered
आर्थिकी लेख स्वास्थ्य, शिक्षा और सामाजिक क्षेत्रों में व्यापक सुधार की जरूरत February 6, 2024 / February 6, 2024 by प्रियंका सौरभ | Leave a Comment 2024 का अंतरिम बजट प्रशासनिक रवायत है क्योंकि पूर्ण बजट तो जुलाई में आएगा‚ जिस पर नई सरकार का रिपोर्ट कार्ड़ स्पष्ट नजर आएगा। व्यवसायों को फलने-फूलने के लिए एक सक्षम वातावरण बनाने, पर्यावरण से संबंधित मुद्दों पर ध्यान केंद्रित करने और समाज के हाशिए पर रहने वाले वर्ग के उत्थान की आवश्यकता है। यह […] Read more »
लेख लैंगिक भेदभाव से मुक्त नहीं हुआ ग्रामीण समाज February 6, 2024 / February 6, 2024 by चरखा फिचर्स | Leave a Comment सीमा कुमारीगया, बिहार“दीदी, हमको भी पढ़ने का बहुत मन करता है. लेकिन मम्मी-पापा स्कूल जाने नहीं देते हैं, कहते हैं पढ़ कर का करेगी. चूल्हा-चौका सीख लेगी तो ससुराल में काम आएगा. घर का काम नहीं सीखेगी तो ससुराल वाले हमें बुरा कहेंगे. आप बताइए दीदी, क्या हम लड़कियों का जन्म खाली (केवल) ससुराल की सेवा […] Read more » लैंगिक भेदभाव से मुक्त नहीं हुआ ग्रामीण समाज
लेख सोशल मीडिया पर सहज होती महिलाएं February 6, 2024 / February 6, 2024 by चरखा फिचर्स | Leave a Comment ज्योतिदिल्ली पूजा, एक 31 वर्षीय महिला है. वह दिल्ली के उत्तम नगर इलाके में अपने पति और दो पुत्रों के साथ किराए के मकान में रहती है. उसकी इच्छा थी कि वह एक स्वतंत्र और आत्मनिर्भर महिला बने. उन्होंने 4 साल पहले सिलाई सीखी और अब वह इसे घर के कामों के साथ-साथ आत्मनिर्भरता की […] Read more » Social Media