कविता ईश निंदा के बहाने दूसरे धर्म के ईश्वर की बेअदबी करना November 15, 2021 / November 15, 2021 by विनय कुमार'विनायक' | Leave a Comment —विनय कुमार विनायकतुम अपने ईश की निंदाऔर धार्मिक किताब की बेअदबी के बहानेकरते हो दूसरे धर्म के देवी देवताओं कीमूर्तियों की तोड़फोड़ व निर्दोष लोगों की हत्या! क्या तुम ऐसा करके पराए धर्म केईश्वर रब खुदा के साथ बेअदबी नहीं कर रहे हो? आखिर तुम इतने बर्वर क्यों हो जाते होऔर निरीह अल्पसंख्यक लोगों का […] Read more » defaming a god of another religion on the pretext of blasphemy ईश निंदा के बहाने दूसरे धर्म के ईश्वर की बेअदबी करना
लेख मशरूम उत्पादन बना रहा है आत्मनिर्भर November 15, 2021 / November 15, 2021 by चरखा फिचर्स | Leave a Comment फूलदेव पटेल मुज़फ़्फ़रपुर, बिहार कोरोना के बाद बेरोजगारों की तादाद बढ़ गई है. युवा आर्थिक तंगी का सामना कर रहे हैं. दरअसल कोरोना की भयावहता ने उन्हें स्थानीय स्तर पर ही रोजगार और मजदूरी करने के लिए बाध्य कर दिया है. कुछ युवा तो अपने राज्य में उचित अवसर नहीं मिलने की वजह से दूसरे […] Read more » Mushroom production is making self-sufficient मशरूम उत्पादन
कविता पैरों की पूजा होती मगर मुख हाथ पेट पूज्य नहीं होते November 15, 2021 / November 15, 2021 by विनय कुमार'विनायक' | Leave a Comment —विनय कुमार विनायकपैरों की पूजा होती मगरमुख हाथ पेट पूज्य नहीं होतेपैर चाहे जिनके भी होंपैर पूजने की परंपरा है भारत भूमि मेंआखिर पैर क्यों पूजनीय हैक्योंकि पैर कभी इच्छा याचनाऔर ग्रहण नहीं करतेपैर त्यागी और पथ प्रदर्शन करतेमुख हाथ पैर ग्रहणशील होतेमुख और पेट को चाहिए भोजनब्राह्मण और बनिए की तरहएक करता है भोजन […] Read more » Feet are worshiped but mouth stomach are not worshipped. पैरों की पूजा होती मगर मुख हाथ पेट पूज्य नहीं होते
लेख धर्मरक्षक भगवान बिरसा मुंडा के विविध पक्ष November 15, 2021 / November 15, 2021 by कृष्णमुरारी त्रिपाठी अटल | Leave a Comment ~कृष्णमुरारी त्रिपाठी अटलभारतीय इतिहास के विभिन्न कालक्रम में ऐसे-ऐसे महापुरुष ,प्रवर्तक, समाजसुधारक ,दैवीय अवतार हुए हैं जिन्होंने सुप्त पड़ी भारतीय चेतना को जागृत कर धर्म की स्थापना और विकृतियों के उन्मूलन के लिए समाज को प्रेरित बस ही नहीं किया । बल्कि ऐसे श्रेष्ठतम मानक स्थापित किए हैं जो इतिहास के स्वर्णिम पृष्ठों एवं लोक […] Read more » Dharmarakshak Lord Birsa Munda Various aspects of Dharmarakshak Lord Birsa Munda धर्मरक्षक भगवान बिरसा मुंडा भगवान बिरसा मुंडा
कविता अगर हिन्दुत्व बचाना है तो जातिवाद होगा मिटाना November 14, 2021 / November 14, 2021 by विनय कुमार'विनायक' | 1 Comment on अगर हिन्दुत्व बचाना है तो जातिवाद होगा मिटाना —विनय कुमार विनायकआज ये जुमला उछल रहा है,वोट और बेटी जाति में देना! जहां जुगाड़ नहीं बैठ रहा हो,तो जाति समीकरण बिठाना! जाति के नाम पर इतराना,पराई जाति से दूरी बनाना! ये पतन की राह है बंधुवर,इस मुगालते में नहीं रहना! जाति, जाति में भेद करना,अपनी जाति से प्रेम करना! हिन्दू धर्म की बड़ी बुराई […] Read more » If Hindutva is to be saved then casteism will be eradicated. अगर हिन्दुत्व बचाना है तो जातिवाद होगा मिटाना
कविता खुशहाली November 14, 2021 / November 14, 2021 by प्रभात पाण्डेय | Leave a Comment अपने पन की बगिया है ,खुशहाली का द्वारजीवन भर की पूंजी है ,एक सुखी परिवारखुशहाली वह दीप है यारोंहर कोई जलाना चाहता हैखुशहाली वह रंग है यार्रोंहर कोई रमना चाहता हैखुशहाली वह दौर था यारों कागज़ की नावें होती थींमिट्टी के घरौंदे थे ,छप्पर की दुकानें होती थीकहीं सुनाई देती थी रामायणकहीं रोज अजानें होती […] Read more » happiness खुशहाली
राजनीति लेख बिरसा मुंडा की उलगुलान परंपरा का नया वाहक: जनजातीय गौरव दिवस November 14, 2021 / November 14, 2021 by प्रवीण गुगनानी | Leave a Comment आज जब देश के प्रधानमंत्री श्रीयुत नरेंद्र मोदी देश में भगवान् बिरसा मुंडा के जन्मदिन 15 नवंबर को राष्ट्रीय जनजातीय गौरव दिवस के रूप में मनाने की परंपरा का शुभारंभ कर रहे हैं तब स्वाभाविक ही विदेशी परंपरा व विघ्नसंतोषियों के “मूलनिवासी दिवस” का विचार हृदय में आता है। भारत में मूलनिवासी दिवस या इंडिजिनस […] Read more » New bearer of Birsa Munda's Ulgulan tradition: Tribal Pride Day जनजातीय गौरव दिवस बिरसा मुंडा की उलगुलान परंपरा
राजनीति लेख बिरसा मुंंडा के सपनों को सच करता मध्यप्रदेश November 14, 2021 / November 14, 2021 by मनोज कुमार | Leave a Comment जनजातीय गौरव दिवस 15 नवम्बर के लिए विशेषमनोज कुमारमध्यप्रदेश के इतिहास में एक और दिन 15 नवम्बर ऐतिहासिक दिन के रूप में लिखा जाएगा जब जनजातीय गौरव दिवस के रूप में बिरसा मुंडा की जयंती का जयघोष होगा। ह्दयप्रदेश मध्यप्रदेश हमेशा से बड़े दिल का रहा है और रांची के इस महान वीर सपूत बिरसा […] Read more » 15 November for Tribal Pride Day Tribal Pride Day जनजातीय गौरव दिवस जातीय गौरव दिवस 15 नवम्बर बिरसा मुंंडा
लेख बिरसा मुंडा हैं पृथ्वी के पिता एवं आदिवासी मसीहा November 14, 2021 / November 14, 2021 by ललित गर्ग | Leave a Comment बिरसा मुंडा की 146वीं जन्म जयन्ती, 15 नवम्बर, 2021 पर विशेष– ललित गर्ग- ’धरती आबा’ यानी पृथ्वी के पिता के नाम से जाने वाले आदिवासी जनजीवन के मसीहा एवं भगवानतुल्य बिरसा मुंडा का 146वां जन्मोत्सव ’जनजातीय गौरव दिवस’ के रूप में मनाया जा रहा है। बिरसा मुंडा ने न केवल अपनी प्रकृति, जंगल, जमीन की रक्षा के लिए लड़ाई […] Read more » birsa munda Tribe pride day बिरसा मुंडा बिरसा मुंडा जन्म जयन्ती
लेख सहरिया जनजाति की गौरव गाथा November 14, 2021 / November 14, 2021 by प्रमोद भार्गव | Leave a Comment संदर्भः 15 नवंबर जनजातीय गौरव दिवस हेतु प्रमोद भार्गव ग्वालियर-चंबल अंचल में रहने वाली बहुसंख्यक जनजाति ‘सहरिया’ की गौरव एवं शौर्य गाथाओं का उल्लेख स्वतंत्रता संग्राम के संदर्भ में अपवादस्वरूप ही होता है। लेकिन इतिहास सम्मत तथ्य है कि जब झांसी की रानी लक्ष्मीबाई ने झांसी से निकलकर शिवपुरी जिले के गोपालपुर जागीर में पड़ाव […] Read more » 15 November for Tribal Pride Day Pride story of Sahariya tribe संदर्भः 15 नवंबर जनजातीय गौरव दिवस हेतु सहरिया जनजाति सहरिया जनजाति की गौरव गाथा
राजनीति लेख हिंदुत्व की आधारशिला हैं श्री राम November 14, 2021 / November 14, 2021 by डॉ शंकर सुवन सिंह | Leave a Comment डॉ.शंकर सुवन सिंह हिंदुत्व शब्द संस्कृत के त्व प्रत्यय से बना है। यह शब्द हिन्दू होने के गुण को चरितार्थ करता है। हिंदुत्व एक विचार धारा है। जीवन जीने की कला ही हिंदुत्व है। सभी धर्म जीवन जीने की पद्वति/नियम बताते हैं। धर्म जीना सिखाता है तो अधर्म मरना। इसलिए कहा जाता है धर्म की […] Read more » Shri Ram is the cornerstone of Hindutva हिंदुत्व की आधारशिला हैं श्री राम हिंदुत्व के साथ खिलवाड़
लेख मांगलिक कार्य आरम्भ होने का दिन है ‘‘देवोत्थान एकादशी’’ November 14, 2021 / November 14, 2021 by ब्रह्मानंद राजपूत | Leave a Comment देवोत्थान एकादशी कार्तिक मास के शुक्ल पक्ष की एकादशी को कहते हैं। दीपावली के ग्यारह दिन बाद आने वाली एकादशी को ही प्रबोधिनी एकादशी अथवा देवोत्थान एकादशी या देव-उठनी एकादशी कहा जाता है। आषाढ़ मास के शुक्ल पक्ष की एकादशी को देव चार मास के लिए शयन करते हैं। इस बीच हिन्दू धर्म में कोई भी मांगलिक कार्य शादी, विवाह आदि नहीं होते। देव चार महीने शयन करने के बाद कार्तिक, शुक्ल पक्ष की एकादशी के दिन उठते हैं। इसीलिए इसे देवोत्थान (देव-उठनी) एकादशी कहा जाता है। देवोत्थान एकादशी तुलसी विवाह एवं भीष्म पंचक एकादशी के रूप में भी मनाई जाती है। इस दिन लोग तुलसी और सालिग्राम का विवाह कराते हैं और मांगलिक कार्यों की शुरुआत करते हैं। हिन्दू धर्म में प्रबोधिनी एकादशी अथवा देवोत्थान एकादशी का अपना ही महत्त्व है। इस दिन जो व्यक्ति व्रत करता है उसको दिव्य फल प्राप्त होता है। उत्तर भारत में कुंवारी और विवाहित स्त्रियां एक परम्परा के रूप में कार्तिक मास में स्नान करती हैं। ऐसा करने से भगवान् विष्णु उनकी हर मनोकामना पूरी करते हैं। जब कार्तिक मास में देवोत्थान एकादशी आती है, तब कार्तिक स्नान करने वाली स्त्रियाँ शालिग्राम और तुलसी का विवाह रचाती है। पूरे विधि विधान पूर्वक गाजे बाजे के साथ एक सुन्दर मण्डप के नीचे यह कार्य सम्पन्न होता है। विवाह के समय स्त्रियाँ मंगल गीत तथा भजन गाती है। कहा जाता है कि ऐसा करने से भगवान् विष्णु प्रसन्न होते हैं और कार्तिक स्नान करने वाली स्त्रियों की हर मनोकामना पूर्ण करते हैं। हिन्दू धर्म के शास्त्रों में कहा गया है कि जिन दंपत्तियों के संतान नहीं होती, वे जीवन में एक बार तुलसी का विवाह करके कन्यादान का पुण्य प्राप्त कर सकते हैं। अर्थात जिन लोगों के कन्या नहीं होती उनकी देहरी सूनी रह जाती है। क्योंकि देहरी पर कन्या का विवाह होना अत्यधिक शुभ होता है। इसलिए लोग तुलसी को बेटी मानकर उसका विवाह सालिगराम के साथ करते हैं और अपनी देहरी का सूनापन दूर करते हैं। प्रबोधिनी एकादशी अथवा देवोत्थान एकादशी के दिन भीष्म पंचक व्रत भी शुरू होता है, जो कि देवोत्थान एकादशी से शुरू होकर पांचवें दिन पूर्णिमा तक चलता है। इसलिए इसे इसे भीष्म पंचक कहा जाता है। कार्तिक स्नान करने वाली स्त्रियाँ या पुरूष बिना आहार के रहकर यह व्रत पूरे विधि विधान से करते हैं। इस व्रत के पीछे मान्यता है कि युधिष्ठर के कहने पर भीष्म पितामह ने पाँच दिनो तक (देवोत्थान एकादशी से लेकर पांचवें दिन पूर्णिमा तक) राज धर्म, वर्णधर्म मोक्षधर्म आदि पर उपदेश दिया था। इसकी स्मृति में भगवान् श्रीकृष्ण ने भीष्म पितामह के नाम पर भीष्म पंचक व्रत स्थापित किया था। मान्यता है कि जो लोग इस व्रत को करते हैं वो जीवन भर विविध सुख भोगकर अन्त में मोक्ष को प्राप्त करते हैं। देवोत्थान एकादशी की कथा एक समय भगवान विष्णु से लक्ष्मी जी ने कहा- हे प्रभु ! अब आप दिन-रात जागा करते हैं और सोते हैं तो लाखों-करोड़ों वर्ष तक को सो जाते हैं तथा उस समय समस्त चराचर का नाश भी कर डालते हैं। अत: आप नियम से प्रतिवर्ष निद्रा लिया करें। […] Read more » The day to start auspicious work is Devotthana Ekadashi देवोत्थान एकादशी प्रबोधिनी एकादशी