पर्व - त्यौहार लेख वर्त-त्यौहार सृजन एवं समभाव के स्वामी हैं शिव March 5, 2021 / March 5, 2021 by ललित गर्ग | Leave a Comment महाशिवरात्रि-11 मार्च, 2021 पर विशेष-ललित गर्ग- सत्य ही शिव हैं और शिव ही सुंदर है। भगवान शिव की महिमा अपरंपार है। भोलेनाथ को प्रसन्न करने का ही महापर्व है महाशिवरात्रि। इस दिन भक्त जप, तप और व्रत रखते हैं और भगवान के शिवलिंग रूप के दर्शन करते हैं। शिवलिंग शिव एवं सृष्टि का प्रतीक है। […] Read more » mahashivaratri Shiva is the master of creation and equality महाशिवरात्रि-11 मार्च
महिला-जगत लेख समाज भारतीय नारी कब तक रहेगी बेचारी? March 5, 2021 / March 5, 2021 by ललित गर्ग | Leave a Comment अन्तर्राष्ट्रीय महिला दिवस-8 मार्च, 2021 पर विशेष-ललित गर्ग- नारी का नारी के लिये सकारात्मक दृष्टिकोण न होने का ही परिणाम है कि पुरुष उसका पीढ़ी-दर-पीढ़ी शोषण करता आ रहा हैं। इसी कारण नारी में हीनता एवं पराधीनता के संस्कार संक्रान्त होते रहे हैं। जिन नारियों में नारी समाज की दयनीय दशा के प्रति थोड़ी भी […] Read more » भारतीय नारी भारतीय नारी कब तक रहेगी बेचारी
कविता स्त्री और अस्तित्व March 5, 2021 / March 5, 2021 by प्रभुनाथ शुक्ल | Leave a Comment प्रभुनाथ शुक्ल मुँह अँधेरे उठती है वहबुहारती है आँगन माजती है वर्तनबाबू को देती है दवाई औरमाँ की गाँछती है चोटीबच्चों का तैयार करती है स्कूल बैगऔर बांधती है टिफीनसुबह पति को बेड-टी से उठाती हैदरवाजे तक आ छोड़ती है आफिसफिर,रसोई के बचे भोजन से मिटाती है भूखपरिवार में सबकी पीड़ा का मरहम है वहखुद […] Read more » Woman and existence स्त्री और अस्तित्व
कविता कबीर की भाषा का अनुवाद नहीं March 5, 2021 / March 5, 2021 by विनय कुमार'विनायक' | Leave a Comment —विनय कुमार विनायककबीर की नहीं है कोई प्रतिलिपिकबीर की भाषा का अनुवाद नहींकबीर को पढ़ना है तो सीखनी होगीकबीर की अक्खड़ भाषा की प्रकृतिजाननी होगी उसकी नागरी लिपि वर्तनी! कबीर की भाषा साधुकड़ी डिक्टेटर जैसीस्त्रैण नहीं, दैन्य नहीं, पलायन नहीं‘अर्जुनस्य प्रतिज्ञैद्वै न दैनयं न पलायनम्’कबीर की भाषा सीधे-सीधे प्रहार करतीकबीर की भाषा तीर सा दिल […] Read more » कबीर की भाषा का अनुवाद नहीं
लेख मां सीता के बिना अधूरे हैं प्रभु श्रीराम March 3, 2021 / March 3, 2021 by ललित गर्ग | Leave a Comment माता सीता जयन्ती – 6 मार्च, 2021-ः ललित गर्ग:- पौराणिक काल में ऐसी कई महिलाएं हुई हैं जिन्हें हम आदर्श और उत्तम चरित्र की महिलाएं मानते हैं, जो भारतीय संस्कृति की अमूल्य धरोहर हैं। लेकिन उनमें से सर्वोत्तम हैं माता सीता। जैसे श्रीराम को पुरुषों में उत्तम पुरुषोत्तम कहा गया है, उसी तरह माता सीता […] Read more » माता सीता जयन्ती - 6 मार्च
महिला-जगत लेख खुद फैसला लेने में सक्षम होती ग्रामीण महिलाएं March 3, 2021 / March 3, 2021 by चरखा फिचर्स | Leave a Comment राजेश निर्मलसुल्तानपुर, यूपी भारतीय संसद में महिलाओ की संख्या बढाने के लिए जब तैंतिस प्रतिशत आरक्षण की मांग जोर पकड़ने लगी, तब पुरानी धारा के सोचने वाले पुरुष अपनी दलीलों से महिलाओ की काबिलियत पर सवाल खड़े करने लगे। वह महिलाओ को कुशल गृहिणी बता कर उन्हें घर की सीमाओं तक सीमित करने लगे। ऐसे […] Read more » Rural women would be able to decide for themselves खुद फैसला लेने में सक्षम होती ग्रामीण महिलाएं
कविता नारी को अबला न समझना March 3, 2021 / March 3, 2021 by आर के रस्तोगी | Leave a Comment नारी को अबला न समझना तुमवह गगन मे वायुयान उड़ाती है।कल्पना बन कर यही नारी,अब अंतरिक्ष में पहुंच जाती हैं।। विद्वता मे वह अब कम नहीं,उच्च शिक्षा लेकर उच्च अंक पाती हैं।बड़े बड़े स्कूल व कॉलिजो में भीवह अब पुरुषों को भी पढ़ाती हैं।। युद्ध क्षेत्र में भी वह बढ़ चढ़ कर,वह रण कौशल अपने […] Read more » नारी को अबला न समझना
लेख समाज पुरुषप्रधान विश्व रचि राखा March 3, 2021 / March 3, 2021 by डॉ. वेदप्रताप वैदिक | Leave a Comment डॉ. वेदप्रताप वैदिक हम लोग कितने बड़े ढोंगी हैं? हम डींग मारते हैं कि हमारे भारत में नारी की पूजा होती है। नारी की पूजा में ही देवता रमते हैं। ‘यत्र नार्यस्तु पूज्यन्ते तत्र रमन्ते तत्र देवताः।’ अभी-अभी विश्व बैंक की एक रपट आई है, जिससे पता चलता है कि नारी की पूजा करना तो […] Read more » Purusha Rakhi Rakhi Rakha पुरुषप्रधान विश्व रचि राखा
लेख समाज साबरमती में आयशा नहीं, डूब मरी इंसानियत…! March 3, 2021 / March 3, 2021 by प्रभुनाथ शुक्ल | Leave a Comment हेलो, अस्सलाम वालेकुम। मेरा नाम है आयशा आरिफ खान। मैं जो कुछ भी करने जा रही हूं, अपनी मर्जी से करना चाहती हूं। किसी के जोर, दबाव में नहीं। ये समझ लीजिए कि खुदा की दी जिंदगी इतनी ही होती है। डियर डैड, अरे कब तक लड़ेंगे अपनों से। केस विड्रॉल कर दो। अब नहीं […] Read more » Ayesha did not drown in Sabarmati humanity died…!
कविता रवीन्द्रनाथ टैगोर: क्षेत्रीय से वैश्विक कवि March 3, 2021 / March 3, 2021 by विनय कुमार'विनायक' | Leave a Comment —विनय कुमार विनायकगुरुदेव रवीन्द्रनाथ टैगोर बंगाल के,बंगाली अस्मिता, भाषा के रवि थे!गुलाम भारत के एक मात्र कवि थे,राष्ट्रीय नहीं, अंतरराष्ट्रीय छवि के! वे सात मई अठारह सौ इकसठ को,शारदा व देवेन्द्रनाथ के, घर जन्मे!वे कुलीन जमींदार से कलाकार बने,बैरिस्टर बनने की तमन्ना छोड़ के! वे रविन्द्र संगीत के जनक,गीतकार,लेखक,नाटककार, कवि, कथाकार थे!उनकी कविता का स्वर […] Read more » Rabindranath Tagore: regional to global poet
कविता कुणाल तुम्हारी सुन्दर आंखें हो गई काल March 2, 2021 / March 2, 2021 by विनय कुमार'विनायक' | Leave a Comment —विनय कुमार विनायककुणाल! तुम महारानी पद्मावतीव मगध सम्राट अशोक के लाल!तुम्हारी दो आंखें थी खंजन जैसीसुन्दर, हो गई थी तुम्हारा काल! कुणाल नयनाभिराम थे इतने किविमाता; तिष्य हो गई थी बेहाल!जैसे एक पूर्वजा उर्वशी अर्जुन कोदेखकर मोहित हुई थी पूर्व काल! कुणाल धर्मविवर्द्धन! तुम्हारी थीविमाता के प्रति मर्यादा बेमिसाल!विमाता तिष्यरक्षिता ने खेली थी,तुम्हें दंड देने […] Read more » कुणाल तुम्हारी सुन्दर आंखें हो गई काल चन्द्रगुप्त प्रपौत्र बिन्दुसार पौत्र अशोक सुपुत्र मैं युवराज कुणाल!
लेख राष्ट्र के वैभव का परिचायक है विज्ञान March 2, 2021 / March 2, 2021 by डॉ शंकर सुवन सिंह | Leave a Comment वास्तविक ज्ञान ही विज्ञान है।प्राकृतिक विज्ञान प्रकृति और भौतिक दुनिया का व्यवस्थित ज्ञान होता है,या फ़िर इसका अध्ययन करने वाली इसकी कोई शाखा। असल में विज्ञान शब्द का उपयोग लगभग हमेशा प्राकृतिक विज्ञानों के लिये ही किया जाता है। इसकी तीन मुख्य शाखाएँ हैं : भौतिकी,रसायन शास्त्र और जीव विज्ञान। रसायन का वास्तविक ज्ञान,रसायन विज्ञान […] Read more » Science is a symbol of nation glory