कविता कुछ अच्छा सा काम करो हे मन March 2, 2021 / March 2, 2021 by विनय कुमार'विनायक' | Leave a Comment —विनय कुमार विनायककुछ अच्छा सा काम करो हे मन!जाने क्यों असमय छूट जाता तन! हमारे नहीं, हमारे परिजन के प्राण,जिनके बिना दुखद होता ये जीवन!जिनके निधन से लोग होते निर्धन!जिनके दम पे सफल था ये जन्म! जिन नाते-रिश्ते पर इतराते थे हम,जिनके होने से मिलता था दम-खम,जिनके ना होने से जगत मिथ्या-भ्रम,जिनके बाद ना न्यारा […] Read more » Do some good work कुछ अच्छा सा काम करो हे मन
लेख स्वास्थ्य-योग मिलावट तो मौन-हत्या है March 2, 2021 / March 2, 2021 by डॉ. वेदप्रताप वैदिक | Leave a Comment डॉ. वेदप्रताप वैदिक खाद्य-पदार्थों और दवाइयों में मिलावट करनेवाले अब जरा डरेंगे, क्योंकि बंगाल, असम और उप्र की तरह अब मध्यप्रदेश भी उन्हें उम्र कैद देने का प्रावधान कर रहा है। अब तक उनके लिए सिर्फ 6 माह की सजा और 1000 रु. के जुर्माने का ही प्रावधान था। इस ढिलाई का नतीजा यह हुआ […] Read more » Adulteration मिलावट मौन-हत्या
लेख अणुव्रत सूर्योदय है नये भारत का March 1, 2021 / March 2, 2021 by ललित गर्ग | Leave a Comment अणुव्रत आंदोलन स्थापना दिवस-1 मार्च, 2021 पर विशेष -ललित गर्ग – नये युग के निर्माण और जन चेतना में नैतिक क्रांति के अभिनव एवं अनूठे मिशन के रूप में अणुव्रत आन्दोलन न केवल देश बल्कि दुनिया का पहला नैतिक आन्दोलन है जो इतने लम्बे समय से इंसान को इंसान बनाने में जुटा है। यह अशांत […] Read more » अणुव्रत
लेख शख्सियत संत श्री रविदास ने सामाजिक समरसता के लिए अपना जीवन अर्पित किया था March 1, 2021 / March 1, 2021 by प्रह्लाद सबनानी | Leave a Comment “मन चंगा तो कठौती में गंगा”, ये कहावत आपने जरूर सुनी होगी। क्या आप जानते हैं ये कहां से आई, इसके पीछे एक दिलचस्प घटना है, जिसका संबंध मिलजुल कर रहने, भेदभाव मिटाने और सबके भले की सीख देने वाले सामाजिक समरसता के महान संत शिरोमणी श्री रविदास जी महाराज से है। प्रति वर्ष माघ […] Read more » संत श्री रविदास
कहानी कोख का कर्ज March 1, 2021 / March 1, 2021 by प्रभुनाथ शुक्ल | Leave a Comment जगेश बाबू का कभी अपना जलवा था। रौबिले और गठिले जिस्म पर सफेद कुर्ता-धोती मारवाड़ी पगड़ी खूब फबती। हाथ में छड़ी और मुंह में पान की गिलौरी दबाए ताव से मूंछों पर हाथ भांजते रहते। शहर से गांव आते तो उनकी जेब में सूंघनी की डिब्बी और गमकौवा इत्र पड़ा रहता। जग्गन महतो गांव आते […] Read more » Womb loan कोख का कर्ज
कविता भारत की आंखें March 1, 2021 / March 1, 2021 by विनय कुमार'विनायक' | Leave a Comment —विनय कुमार विनायकभारत की आंखेंबड़ी ही खूबसूरत होती हैभारत की आंखों मेंईश्वर की मोहिनी मूरत होती हैभारत की आंखों नेदेखी दिखाई दुनिया कोराम कृष्ण बुद्ध महावीर बनकरभारत की आंखेंगुरु नानक,गोविंद,प्रताप,शिवाजी जैसीभारत की आंखें त्रिनेत्र होतीभारत की आंखेंभूत, भविष्य, वर्तमान एक साथ देखती हैभारत की आंखें राम जैसीराजीव नयन नयनाभिराम होती हैभारत की आंखें घनश्याम जैसीखेल-खेल […] Read more » Eyes of india
कविता मैं पागल हूं, रहने दो।। March 1, 2021 / March 1, 2021 by अजय एहसास | Leave a Comment कुछ कहता हूँ कहने दो , मैं पागल हूं, रहने दोआँसू देख तेरे आंखों में मेरे अश्क भी बहने दोवो कहती है मैं पागल , मैं पागल हूँ रहने दो। उसकी कद्र मैं करता हूं, पीर मैं उसके समझता हूँउसको अपना मानता हूँ, मन की बातें जानता हूँराज खुले तो मैं पागल, मैं पागल हूँ […] Read more » I'm crazy
राजनीति व्यंग्य रवीश कुमार को रामकिशोर की चिट्ठी March 1, 2021 / March 1, 2021 by डॉ.रामकिशोर उपाध्याय | Leave a Comment डिअर रवीश कुमार पांडे जी बेरोजगारों के पक्ष में प्रधान मंत्री जी को पत्र लिखने और समाप्त होती पत्रकारिता पर शोक व्यक्त करने के लिए आभार | जानकर प्रसन्नता हुई कि देश-विदेश के युवा बेरोजगार अपनी समस्याएँ लेकर आपके पास आते हैं | कन्हैया कुमार, उमर खालिद,सरजील इमाम से लेकर दिशा रवि तक सैकड़ों […] Read more » रवीश कुमार को रामकिशोर की चिट्ठी
लेख मोह में विरक्ति February 26, 2021 / February 26, 2021 by बीनू भटनागर | Leave a Comment श्रीमति सुधा मूर्ति के इंगलिश लेख Detachment in attachment का हिंदी अनुवाद करने का प्रयास किया है। यहाँ आये दिन उपदेशात्मक लहजे मे रोज़ लोग माता पिता और बच्चों के रिश्तों में आई दरारों के कारण युवाओं को कोसते रहते है ,इस लिहाज़ से सुधा जी के इस लेख ने मुझे बहुत प्रभावित किया। प्रस्तुत […] Read more » Detachment in attachment श्रीमति सुधा मूर्ति
कविता कोयल तुम बोलती हो अपनी बोली February 25, 2021 / February 25, 2021 by विनय कुमार'विनायक' | Leave a Comment —विनय कुमार विनायककोयल तुम बोलती हो अपनी बोली,इसलिए तू आजाद हो नीलगगन में! कोयल तुम्हारी कूक अपने दिल की,इसलिए तुम बसी हो सबके मन में! कोयल तुम नहीं कूकती पराई वाणी,इसलिए तू कैद नहीं किसी बंधन में! कोयल तुम्हारी भाषा नहीं नकल की,इसलिए तू रहती हो अपने चमन में! कोयल तू तोते सा नहीं हो […] Read more » Cuckoo you speak your dialect कोयल तुम बोलती हो अपनी बोली
कविता समय का पहिया February 25, 2021 / February 25, 2021 by प्रभात पाण्डेय | Leave a Comment मानो तो मोती ,अनमोल है समयनहीं तो मिट्टी के मोल है समयकभी पाषाण सी कठोरता सा है समयकभी एकान्त नीरसता सा है समयसमय किसी को नहीं छोड़ताकिसी के आंसुओं से नहीं पिघलतासमय का पहिया चलता हैचरैवेति क्रम कहता हैस्वर्ण महल में रहने वालेतेरा मरघट से नाता हैसारे ठौर ठिकाने तजकरमानव इसी ठिकाने आता है ||भूले […] Read more » समय का पहिया
लेख विनायक सावरकर: स्वर्णिम अध्याय का नाम February 25, 2021 / February 25, 2021 by डॉ. पवन सिंह मलिक | Leave a Comment -डॉ. पवन सिंह मलिक “मैं तुम्हारे दर्शन करने आया हूँ मदन, मुझे तुम पर गर्व है. सावरकर तुम्हें मेरी आँखों में डर की परछाई तो नहीं दिखाई दे रही, बिल्कुल नहीं मुझे तुम्हारे चेहरे पर योगेश्वर कृष्ण का तेज दिखाई दे रहा है , तुमने गीता के स्थितप्रज्ञ को साकार कर दिया है मदन” न […] Read more » Vinayak Savarkar विनायक सावरकर