कविता फिर क्यों बहाते हो मातृ कोख का खून? January 29, 2021 / January 29, 2021 by विनय कुमार'विनायक' | Leave a Comment —–विनय कुमार विनायकनदी-पहाड़-झील-झरने-पौधे और खूनक्या हम बना सकते? भगीरथ से पूछो जिसने बीड़ा उठाया थाएक हरकुलियन टास्क गंगा बनाने कापर क्या बना पाया था उन्होंने एक गंगा? जो हिमालय का वक्ष फोड़करगोमुख तोड़कर, शिलाखंड मोड़करअपने गोद में आबाद करतीइलाहाबाद, बनारस, पटना, भागलपुर जैसेविशाल जन आबादी वाले शहरऔर खो जाती समुद्री गर्भ में! फिर क्यों नहीं […] Read more » क्यों बहाते हो मातृ कोख का खून
कविता जवानी January 29, 2021 / January 29, 2021 by आलोक कौशिक | Leave a Comment हो जाती है हर किसी सेकोई-ना-कोई नादानीआती है जब जीवन मेंखिलती हुई जवानी मोहब्बत भी लेती हैपहली बार अँगड़ाईछूती है जब प्यार सेजिस्म को तरुणाई पतझड़ का मौसम भीउसे लगता है सावनबहार बनकर आता हैजिस किसी पर यौवन हर पल होता है द्वंद्वदिल और दिमाग़ मेंजब जल रहा होता हैकोई जवानी की आग में ✍️ […] Read more » जवानी
राजनीति व्यंग्य चौथी कसम उर्फ दिल्ली पहुंचकर मारे गये गुलफाम January 28, 2021 / January 28, 2021 by नवेन्दु उन्मेष | Leave a Comment नवेन्दु उन्मेष तीसरी कसम फिल्म का हीरामन अपनी बैल गाड़ी हांकता हुआ किसान आंदोलन मेंशामिल होने के लिए दिल्ली पहुंच गया। उसके दिल्ली पहुंचते ही अन्यकिसानों ने उसका जमकर स्वागत किया। हीरामन से कहा कि अच्छा हुआ हीरामनतुम दिल्ली आ गये। यहां तो सिर्फ बिहार के किसानों की कमी खल रही थी। कुछदलों की ओर […] Read more » दिल्ली पहुंचकर मारे गये गुलफाम हीरामन अपनी बैल गाड़ी हांकता हुआ किसान आंदोलन में
कविता अच्छा इंसान January 28, 2021 / January 28, 2021 by आलोक कौशिक | Leave a Comment किसी देश का फ़ौजी होया हो कहीं का किसानयह ज़रूरी नहीं हैवह होगा अच्छा इंसान पेशे से नहीं बनतीइंसान की परिभाषाहर पुष्प की नहीं होतीएक जैसी अभिलाषा बेइमानों की जहान मेंमुश्किल है पहचानकिंतु सत्य यह भी हैसब नहीं एक समान इंसानियत जिसमें ज़िंदाजो संवेदनहीन नहींनेक हो जिसकी नीयतहै अच्छा इंसान वही Read more » अच्छा इंसान
कविता अल्लाह, ईश्वर, रब, खुदा खुद एक हो जा January 28, 2021 / January 28, 2021 by विनय कुमार'विनायक' | Leave a Comment —विनय कुमार विनायकअल्लाह, ईश्वर, रब, खुदा खुद एक हो जा,आ मेरे मौला आ, संग-संग होली मना! राधा-कान्हा के संग में तुम भी आज रंग जाआ मेरे मौला आ,संग-संग होली मना! तेरे मिल्लत में हमने ईद की सेवईयां खाई,तुम भी होली उत्सव का थाली भर पुआ खा! अल्लाह,ईश्वर, रब, खुदा खुद एक हो जा!आ मेरे मौला […] Read more » अल्लाह ईश्वर रब
कविता तुम आदमी हो इसलिए आदमी से प्यार नही करते January 27, 2021 / January 27, 2021 by विनय कुमार'विनायक' | Leave a Comment —विनय कुमार विनायकतुम आदमी हो इसलिए आदमी से प्यार नहीं करतेतुम आदमी हो इसलिए आदमी सेआदमी जैसा सद् व्यवहार नही करतेतुम आदमी हो इसलिएआदमी से घृणा और आदमी का संहार करते! तुम आदमी हो इसलिए हो गए कायरबेजुबान पशु पक्षी होते तो जटायु बनकरसीता की बेटियों; निर्भया,प्रियंका,पूजा भारतीऔर तमाम श्रद्धा-हौआ-मरियम मां सदेही कोनवरावण से अपहृत/बलात्कृत/मृत […] Read more » तुम आदमी हो इसलिए आदमी से प्यार नही करते
लेख सार्थक पहल मजबूत हौसले ने दी उड़ान January 27, 2021 / January 27, 2021 by चरखा फिचर्स | Leave a Comment रमा शर्मा टोंक, राजस्थान पिछले महीने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय के शताब्दी समारोह को संबोधित करते हुए कहा था कि पिछले कुछ वर्षों में देश में मुस्लिम बालिका शिक्षा की दर में अभूतपूर्व वृद्धि हुई है। पहले की अपेक्षा स्कूल जाने वाली मुस्लिम बालिकाओं की संख्या बढ़ी है। स्कूलों में लड़कियों के […] Read more » राजस्थान का घुमंतु मुस्लिम बंजारा समुदाय
महिला-जगत लेख यौन शोषण के नित्य नए तर्क व परिभाषायें January 27, 2021 / January 27, 2021 by निर्मल रानी | Leave a Comment Read more » यौन शोषण के नित्य नए तर्क
लेख बड़ा सवाल ; दिल्ली में हुई घटना का जिम्मेदार कौन, जवाब ; हम सब.. January 27, 2021 / January 27, 2021 by सुशील कुमार नवीन | Leave a Comment सुशील कुमार ‘नवीन’ 26 जनवरी को दिल्ली में जो हुआ। गलत हुआ। ऐसा नहीं होना चाहिए था। किसानों का यह तरीका न्यायसंगत नहीं है। किसान नहीं, ये तो खालिस्तानी हैं। उपद्रवी हैं। आंतकवादी हैं। गुंडे हैं। विपक्षी दलों के कार्यकर्ता हैं। पड़ौसी मुल्क द्वारा प्रायोजित हैं। और भी न जाने क्या-क्या। मंगलवार दोपहर बाद यदि […] Read more » kisan andolan delhi riot दिल्ली में हुई घटना का जिम्मेदार कौन
कविता तुम बेटा नहीं, बेटी ही हो January 26, 2021 by विनय कुमार'विनायक' | Leave a Comment —–विनय कुमार विनायकबड़ा कठिन है एक पिता के लिएपुत्र और कन्या में अंतर जान पानाएक किसान की तरह पिता भीनिष्काम भाव से विसर्जित करता है बीजरजस्वला धरती में बिना विचारेकि कौन सा बीज नर है/कौन सा नारायणी! दूर सोरीघर से आती किहूं-किहूं की पुकार काफी हैएक पिता के पितृसुख पाने के लिएपिता; पुत्र या कि […] Read more » तुम बेटा नहीं बेटी ही हो
कविता निर्धन January 26, 2021 / January 26, 2021 by आलोक कौशिक | Leave a Comment पसंद नहीं वर्षा के दिननहीं भाती पूस की रातमिट्टी का घर है उसकानिर्धनता है उसकी ज़ात श्रम की अग्नि में जब वहपिघलाता है कृशकाय तनतब उपार्जन कर पाता हैअपने बच्चों के लिए भोजन उसकी छोटी-सी भूल पर भीउठ जाता सबका उस पर हाथदर्शक सब उसकी व्यथा केनहीं देता कोई उसका साथ मुख से नहीं बताता […] Read more » निर्धन
कविता गणतंत्र January 26, 2021 / January 26, 2021 by आलोक कौशिक | Leave a Comment दुनिया करती हैउस राष्ट्र का सम्मानजिसके पास होता हैअपना संविधान जनता में समाहितहोती है जब सत्तातब किसी देश कागणतंत्र है बनता भारत भी हुआ थातब पूर्ण स्वतंत्रमनाया था इसनेजब दिवस गणतंत्र स्वतंत्रता से भी अधिककरनी पड़ी थी प्रतीक्षाभेदभाव भुलाकर करेंइस गणतंत्र की सुरक्षा ✍️ आलोक कौशिक Read more » poem on republic गणतंत्र