दोहे पीली सरसों चन्द्रमुखी संग ! February 16, 2020 / February 16, 2020 by गोपाल बघेल 'मधु' | Leave a Comment पीली सरसों चन्द्रमुखी संग, मन बगिया में खिलती देखी; अद्भुत सुन्दर मन मोहक छवि, स्वप्न खेत बिच भायी नीकी! आए चले संग पगडंडी, वाहन किसी अजब बहुरंगी; स्वैटर पहन बान्द्री निकली, जंगल ओर गई वो टहली ! अभिनव दुर्लभ शोभा लख कर, अति आनन्द रहा मन छाई; खींचन चाहा चित्र फ़ोन से, तभी गई निद्रा […] Read more » पीली सरसों पीली सरसों चन्द्रमुखी संग !
दोहे काल चक्र घूमता है February 14, 2020 / February 14, 2020 by गोपाल बघेल 'मधु' | Leave a Comment काल चक्र घूमता है, केन्द्र शिव को देखलो;भाव लहरी व्याप्त अगणित, परम धाम परख लो! कितने आए कितने गए, राज कितने कर गए;इस धरा की धूल में हैं, बह के धधके दह गए ! सत्यनिष्ठ जो नहीं हैं, स्वार्थ लिप्त जो मही;ताण्डवों की चाप सहके, ध्वस्त होते शीघ्र ही ! पार्थ सूक्ष्म पथ हैं चलते, […] Read more » काल चक्र घूमता है
महिला-जगत लेख समाज स्वास्थ्य-योग जानिए किराए की कोख अर्थात सरोगेसी आखिर क्या है बला! February 14, 2020 / February 14, 2020 by लिमटी खरे | Leave a Comment लिमटी खरे दुनिया भर में हर प्राणी, चाहे वह मनुष्य हो, जलचर हों, नभचर हों या धरती पर रहने वाले जीव, सभी के द्वारा अपने अपने तौर तरीकों से संतानोत्पत्ति की अभिलाषा रखी जाती है। इन सभी में मनुष्य ही इकलौता ऐसा जीव है जो वंश बढ़ाने के अलावा आनंद के लिए संसर्ग करता है। […] Read more » Know what the hell is for surrogacy surrogacy सरोगेसी
लेख समाज संकट आदर्श जीवनशैली के बिखरने का February 14, 2020 / February 14, 2020 by ललित गर्ग | Leave a Comment -ललित गर्ग –हमारे देश की सांस्कृतिक परंपराएँ और आदर्श जीवन-मूल्य समृद्ध एवं सुदृढ़ रहे हैं। किंतु अंग्रेजों की हम पर गुलामी की पूरी एक सदी ने, पश्चिमी हवाओं ने हमारे जन-मानस में जहर घोलकर हमारे रहन-सहन और आचार-विचार को विकृत किया है, और इससे हमारी संयुक्त परिवार, आदर्श जीवनशैली एवं प्रेरक संस्कृति की परंपरा बिखर […] Read more » Crisis of the ideal lifestyle
व्यंग्य ट्रेन और टॉयलट…!! February 14, 2020 / February 14, 2020 by तारकेश कुमार ओझा | Leave a Comment तारकेश कुमार ओझाट्रेन के टॉयलट्स और यात्रियों में बिल्कुल सास – बहू सा संबंध हैं। पतानहीं लोग कौन सा फ्रस्ट्रेशन इन टॉयलट्स पर निकालते हैं। आजादी के इतनेसालों बाद भी देश में चुनाव शौचालय के मुद्दे पर लड़े जाते हैं। किसनेकितने शौचालय बनवाए और किसने नहीं बनवाए , इस पर सियासी रार छिड़ी रहतीहै। देश […] Read more » sattire on toilets in train ट्रेन और टॉयलट
व्यंग्य अंकल कम्यूनलिज्म February 13, 2020 / February 13, 2020 by दिलीप कुमार सिंह | Leave a Comment “वो सादगी कुछ भी ना करे तो अदा ही लगे वो भोलापन है कि बेबाकी भी हया ही लगे अजीब शख्स है नाराज हो के हँसता है मैं चाहता हूँ कि वो खफा हो तो खफा ही लगे” पोस्ट ट्रुथ के बाद ये फिलहॉल एक नया फैंसी शब्द है जो अपने को डिफेंड करते हुए […] Read more » communalism कम्यूनलिज्म
कविता है मुझे स्मरण… जाने जाना जानेमन ! February 13, 2020 / February 13, 2020 by आलोक कौशिक | Leave a Comment वो पल वो क्षण हमारे नयनों का मिलन जब था मूक मेरा जीवन तब हुआ था तेरा आगमन कलियों में हुआ प्रस्फुटन भंवरों ने किया गुंजन है मुझे स्मरण… जाने जाना जानेमन ! तेरा रूप तेरा यौवन जैसे खिला हुआ चमन चांद सा रौशन आनन चांदनी में नहाया बदन झूम के बरसा सावन फूलों में […] Read more » है मुझे स्मरण… जाने जाना जानेमन
कविता बच्चों का पन्ना साहित्य छूना है सूरज के कान February 13, 2020 / February 13, 2020 by प्रभुदयाल श्रीवास्तव | Leave a Comment तीन साल के गुल्लू राजा, हैं कितने दिलदार दबंग। जब रोना चालू करते हैं, रोते रहते बुक्का फाड़। उन्हें देखकर मुस्काते हैं, आँगन के पौधे और झाड़। जब मरजी कपड़ों में रहते, जब जी चाहे रहें निहंग। नहीं चाँद से डरते हैं वे, तारों की तो क्या औकात। डाँट डपट कर कह देते हैं, नहीं […] Read more » छूना है सूरज के कान
दोहे ब्रहत हो स्वत्व ब्रह्म गति धाता ! February 11, 2020 / February 11, 2020 by गोपाल बघेल 'मधु' | Leave a Comment ब्रहत हो स्वत्व ब्रह्म गति धाता, परम सत्ता का स्वाद चख पाता; अहं को फिर कहाँ है भा पाता, सृष्टि को अपनी समझ रस लेता ! दोष दूजों में तब न लख पाता, समझ हर अपना द्वैत ना रहता; किए सहयोग तब चला होता, योग की हर कड़ी मगन रहता ! घड़ी हर घट में […] Read more » ब्रहत हो स्वत्व ब्रह्म गति धाता !
लेख शख्सियत ऐसे थे महान् संत रविदास जी February 10, 2020 by योगेश कुमार गोयल | Leave a Comment संत रविदास जयंती (9 फरवरी) पर विशेष – योगेश कुमार गोयल समस्त भारतीय समाज को भेदभाव से ऊपर उठकर मानवता और भाईचारे की सीख देने वाले 15वीं सदी के महान् समाज सुधारक संत रविदास का जन्म वाराणसी के गोवर्धनपुर गांव में माघ पूर्णिमा के दिन हुआ था। इसीलिए प्रतिवर्ष माघ पूर्णिमा के ही दिन […] Read more » sant ravidas ji संत रविदास जी
लेख आर्य समाज के जुड़े हमारे कुछ मित्रों का संक्षिप्त परिचय February 10, 2020 by मनमोहन आर्य | Leave a Comment -मनमोहन कुमार आर्य हमने दो दिन पूर्व एक लेख में अपने कुछ आर्यमित्रों की जानकारी दी है जिनके साहचर्य से हम जीवन में वर्तमान अवस्था तक पहुंचें हैं। आज इस लेख में हम कुछ अन्य मित्रों की चर्चा कर रहे हैं। हम भाग्यशाली हैं कि हमें एक बहुत ही अच्छी समर्पित मित्रों की मण्डली […] Read more »