कविता बच्चों का पन्ना साहित्य छूना है सूरज के कान February 13, 2020 / February 13, 2020 by प्रभुदयाल श्रीवास्तव | Leave a Comment तीन साल के गुल्लू राजा, हैं कितने दिलदार दबंग। जब रोना चालू करते हैं, रोते रहते बुक्का फाड़। उन्हें देखकर मुस्काते हैं, आँगन के पौधे और झाड़। जब मरजी कपड़ों में रहते, जब जी चाहे रहें निहंग। नहीं चाँद से डरते हैं वे, तारों की तो क्या औकात। डाँट डपट कर कह देते हैं, नहीं […] Read more » छूना है सूरज के कान
दोहे ब्रहत हो स्वत्व ब्रह्म गति धाता ! February 11, 2020 / February 11, 2020 by गोपाल बघेल 'मधु' | Leave a Comment ब्रहत हो स्वत्व ब्रह्म गति धाता, परम सत्ता का स्वाद चख पाता; अहं को फिर कहाँ है भा पाता, सृष्टि को अपनी समझ रस लेता ! दोष दूजों में तब न लख पाता, समझ हर अपना द्वैत ना रहता; किए सहयोग तब चला होता, योग की हर कड़ी मगन रहता ! घड़ी हर घट में […] Read more » ब्रहत हो स्वत्व ब्रह्म गति धाता !
लेख शख्सियत ऐसे थे महान् संत रविदास जी February 10, 2020 by योगेश कुमार गोयल | Leave a Comment संत रविदास जयंती (9 फरवरी) पर विशेष – योगेश कुमार गोयल समस्त भारतीय समाज को भेदभाव से ऊपर उठकर मानवता और भाईचारे की सीख देने वाले 15वीं सदी के महान् समाज सुधारक संत रविदास का जन्म वाराणसी के गोवर्धनपुर गांव में माघ पूर्णिमा के दिन हुआ था। इसीलिए प्रतिवर्ष माघ पूर्णिमा के ही दिन […] Read more » sant ravidas ji संत रविदास जी
लेख आर्य समाज के जुड़े हमारे कुछ मित्रों का संक्षिप्त परिचय February 10, 2020 by मनमोहन आर्य | Leave a Comment -मनमोहन कुमार आर्य हमने दो दिन पूर्व एक लेख में अपने कुछ आर्यमित्रों की जानकारी दी है जिनके साहचर्य से हम जीवन में वर्तमान अवस्था तक पहुंचें हैं। आज इस लेख में हम कुछ अन्य मित्रों की चर्चा कर रहे हैं। हम भाग्यशाली हैं कि हमें एक बहुत ही अच्छी समर्पित मित्रों की मण्डली […] Read more »
कविता बच्चों का पन्ना कुक्कू मुर्गा February 10, 2020 / February 10, 2020 by प्रभुदयाल श्रीवास्तव | Leave a Comment कुक्कू मुर्गा बड़ी जोर से, कुकड़ूँ कूँ चिल्लाया। सूरज बोला ,अब मत चिल्ला, में जल्दी ही आया। लेकिन प्यारे कुक्कू भाई, नहीं समझ में आया। तू अपने मालिक को अब तक, नहीं जगा क्यों पाया? रोज -रोज चिल्ला चिल्लाकर, मुझे बुला तू लेता। पर तेरी कुकड़ूँ कूँ को अब, कौन तब्बजो देता। मैं तो हर […] Read more » कुक्कू मुर्गा
दोहे हिम आच्छादित धरती रहते ! February 7, 2020 / February 7, 2020 by गोपाल बघेल 'मधु' | Leave a Comment हिम आच्छादित धरती रहते, हिय वसंत हम कितने देखे ! भावों से भास्वर जगती पै, आयामों के पहरे निरखे ! सिमटे मिटे समाये कितने, अटके खटके चटके कितने; चोट खसोटों कितने रोये, आहट पाए कितने सोये ! खुल कर खिल कितने ना पाए, रूप दिखा ना कितने पाए; मन की खोह खोज ना पाए, तन […] Read more » हिम आच्छादित धरती रहते !
व्यंग्य बापू ! सत्याग्रह पर हैं February 4, 2020 / February 4, 2020 by प्रभुनाथ शुक्ल | Leave a Comment प्रभुनाथ शुक्ल हमारे मित्र ढोंगी लाल ने काफी हाउस में चुस्कियां लेते हुए चुटकी ली। “अरे भाई ! सुना है बापू यानी गाँधी जी ने पुनः सत्याग्रह करने का ऐलान किया है। उन्हें दुःख है कि कुछ लोग उनके सत्याग्रह और आजादी मार्च […] Read more » बापू ! सत्याग्रह पर हैं
व्यंग्य साहित्य खिचड़ी बनाम बिरयानी February 4, 2020 / February 4, 2020 by दिलीप कुमार सिंह | Leave a Comment “मालिन का है दोष नहीं ,ये दोष है सौदागर का, जो भाव पूछता गजरे का और देता दाम महावर का” ऐसा ही कुछ आजकल के धरना प्रदर्शनों का है जो किसी अन्य वजहों की वजह चर्चा में आ जाते हैं बजाय उसके जो वजह उन्होंने चुनी है ।धरना ,वैचारिक मतभेदों को लेकर है ,चर्चा में बिरयानी […] Read more » biryani serving to shahin bagh protester protest at shahin bagh बिरयानी
दोहे रच कौन क्या गया है सृष्टि ! February 3, 2020 / February 4, 2020 by गोपाल बघेल 'मधु' | Leave a Comment रच कौन क्या गया है सृष्टि, कौन देखता; कितना अनन्त उसके शून्य, वही झाँकता; गुणवत्ता आँकता है वही, सत्ता परखता; अलवत्ता उसे कोई कभी, ही है समझता ! संज्ञान उसका लेता जो भी, वो है थिरकता; अणु अपना अहं करके वही, उसमें सिमटता ! अपना विराट रूप वही, जगती में पाता; हर प्राण परश उर […] Read more » रच कौन क्या गया है सृष्टि !
कविता अपना आपा खो दॅू February 3, 2020 / February 3, 2020 by आत्माराम यादव पीव | Leave a Comment अपने घर -परिवार के लिये, अपने सगे संबंधियों के लिये अपने समाज व देश के लिये मैं जीना चाहता हॅू सभी के लिये इस हद तक, कि अपना आपा खो दॅू। मैं अपने सारे स्वार्थो के बिना मैं अपने सारे हितों के बिना दूसरों के लिये अपना सारा जीवन जीना चाहता हॅू इस हद तक, […] Read more » अपना आपा खो दॅू
दोहे स्वर्गलोक-भूलोक हो एकीभूत February 3, 2020 / February 3, 2020 by आत्माराम यादव पीव | Leave a Comment जो गिरा हुआ है, उसे गिरने का क्या डर होगा जो नतमस्तक है, उसे घमण्ड ने क्या छुआ होगा। खुद मालिक उसे राह दिखायेे,जो नम्र हुआ होगा। जिसने जीत लिया मन को,वह संतोशी रहा होगा। जो शरण प्रभु की पा जाये,समर्पित वह रहा होगा।। जो दिल का बोझ उठाये, वासनाओं में घिरा होगा।। जो सत्य […] Read more » स्वर्गलोक-भूलोक हो एकीभूत