व्यंग्य आत्महत्या से पहले और आत्महत्या के बाद April 13, 2012 / April 13, 2012 by पंडित सुरेश नीरव | Leave a Comment पंडित सुरेश नीरव आज का लेटेस्ट अपडेट- वतन की आबरू खतरे में है। तैयार हो जाओ। और ये भी बता दें कि खतरा बाहर के दुश्मन से नहीं अपने उन खूंखार खबरचियों से है जो कि खबर के रेपर में लपेटकर सनसनी बेचते हैं। इनके लिए बस एक अदद खबर महत्वपूर्ण है। क्योंकि ये खबरफरोश […] Read more » before and after suicide-satire आत्महत्या के बाद आत्महत्या से पहले
कविता गजल-श्यामल सुमन- दीपक April 13, 2012 / April 14, 2012 by श्यामल सुमन | 2 Comments on गजल-श्यामल सुमन- दीपक श्यामल सुमन जिन्दगी में इश्क का इक सिलसिला चलता रहा लोग कहते रोग है फिर दिल में क्यों पलता रहा आँधियाँ थीं तेज उस पर तेल भी था कम यहाँ बन के दीपक इस जहाँ में अनवरत जलता रहा इस तरह पानी हुआ कम दुनियाँ में, इन्सान में दोपहर के बाद सूरज जिस […] Read more » poem Poems कविता दीपक कविता
कविता गजल-श्यामल सुमन- इंसानियत April 13, 2012 / April 14, 2012 by श्यामल सुमन | Leave a Comment श्यामल सुमन इंसानियत ही मज़हब सबको बताते हैं देते हैं दग़ा आकर इनायत जताते हैं उसने जो पूछा हमसे क्या हाल चाल है लाखों हैं बोझ ग़म के पर मुसकुराते हैं मजबूरियों से मेरी उनकी निकल पड़ी लेकर के कुछ न कुछ फिर रस्ता दिखाते हैं खाकर के सूखी रोटी लहू बूँद […] Read more » poem Poems कविता कविता इंसानियत
कविता गजल-श्यामल सुमन- पहलू April 13, 2012 / April 14, 2012 by श्यामल सुमन | Leave a Comment श्यामल सुमन मुस्कुरा के हाल कहता पर कहानी और है जिन्दगी के फलसफे की तर्जुमानी और है जिन्दगी कहते हैं बचपन से बुढ़ापे का सफर लुत्फ तो हर दौर का है पर जवानी और है हौसला टूटे कभी न स्वप्न भी देखो नया जिन्दगी है इक हकीकत जिन्दगानी और है ख्वाब से […] Read more » poem Poems कविता पहलू कविता
व्यंग्य सिक्के का दूसरा पहलू April 13, 2012 / April 13, 2012 by विजय कुमार | Leave a Comment विजय कुमार यों तो शर्मा जी से हर दिन सुबह-शाम भेंट हो ही जाती है; पर दो दिन से मेरा स्वास्थ्य खराब था। अतः वे घर पर ही मिलने आ गये। कुछ देर तो बीमारी, डॉक्टर, दवा और परहेज की बात चली, फिर इधर-उधर की चर्चा होने लगी। – वर्मा जी, कहते हैं कि हर […] Read more »
कविता गजल-श्यामल सुमन- आदत April 12, 2012 / April 14, 2012 by श्यामल सुमन | Leave a Comment श्यामल सुमन मेरी यही इबादत है सच कहने की आदत है मुश्किल होता सच सहना तो कहते इसे बगावत है बिना बुलाये घर आ जाते कितनी बड़ी इनायत है कभी जरूरत पर ना आते इसकी मुझे शिकायत है मीठी बातों में भरमाना इनकी यही शराफत है दर्पण दिखलाया तो कहते […] Read more » poem Poems आदत कविता कविता
कविता गजल-श्यामल सुमन – भावना April 12, 2012 / April 14, 2012 by श्यामल सुमन | Leave a Comment श्यामल सुमन अलग थलग दुनियाँ से फिर भी इस दुनियाँ में रहता हूँ अनुभव से उपजे चिन्तन की नव-धारा संग बहता हूँ पद पैसा प्रभुता की हस्ती प्रायः सब स्वीकार किया अवसर पे ऐसी हस्ती को बेखटके सच कहता हूँ अपना कहकर जिसे संभाला मेरी हालत पे हँसते ऊपर से हँस भी […] Read more » poem Poems कविता
व्यंग्य बेलगाम धनपशु का राजनीतिक उत्पात April 1, 2012 by पंडित सुरेश नीरव | Leave a Comment पंडित सुरेश नीरव क्या करोड़पति होना भी हमारे देश में कोई गुनाह है। और अगर करोड़पति होना गुनाह है तो फिर कौन बनेगा करोड़पति की पवित्र भावना से ओत-प्रोत होकर हर क्षण-हर पल अपने अमिताभ भैया काहे को थोक में लोगों को करोड़पति बनाने पर आमादा रहते हैं। ऐसा इम्मोशनल अत्याचार कतई नहीं चलेगा। पहले […] Read more » millionaire and politics धनपशु
आलोचना क्या काले लोगों का अस्तित्व नहीं ? March 31, 2012 / March 31, 2012 by प्रवक्ता.कॉम ब्यूरो | 3 Comments on क्या काले लोगों का अस्तित्व नहीं ? रंगभेदी विज्ञापन क्यों ? लीना ‘अब व्हाइट जीतेगा’ चेस खेलने वाली एक गोरी महिला दावे के साथ कहती है। ब्लैक आउट व्हाइट इन- बड़े गर्व के साथ कहा जाता है। सिर्फ यही नहीं आप अच्छा गाती हैं लेकिन यदि काले या सांवले भी हैं तो गा नहीं पाएंगे, इसके लिए आपको क्रीम लगाकर पहले गोरा […] Read more » color discrimination ad रंगभेदी विज्ञापन
व्यंग्य सरकारी इकबाल कमाल है कमाल March 30, 2012 / March 30, 2012 by प्रवक्ता.कॉम ब्यूरो | 1 Comment on सरकारी इकबाल कमाल है कमाल मनोहर पुरी ” अरे कनछेदी यह क्या हो रहा है, सरकारी इकबाल की तरह तुम्हारी तरकारी का इकबाल भी कहीं खो रहा है। कुछ अजब ही खिचड़ी पक रही है, कोर्इ नहीं जानता कि किसकी दाल कहां खप रही है। जिसका जब मन होता है वह देगची में कड़छी चलाता है,कोर्इ कोर्इ तो कच्चे पकवान […] Read more »
महत्वपूर्ण लेख लेख अर्थवाही शब्द रचना-डॉ.मधुसूदन March 30, 2012 / July 22, 2012 by डॉ. मधुसूदन | 19 Comments on अर्थवाही शब्द रचना-डॉ.मधुसूदन सूचना: एकाग्रता बनाए रखे, और कुछ समझते समझते, धीरे धीरे पढें, मैं मेरी ओर से पूरा प्रयास करूंगा, विषय को सरल बनाने के लिए। –धन्यवाद। (१) अर्थवाही भारतीय शब्द तेल शब्द कहांसे आया? तो पढा हुआ समरण है, कि तेल शब्द का मूल ”तिल” है। अब तिल को निचोडने से जो द्रव निकला उसे ”तैल” […] Read more » formation of words अर्थवाही शब्द रचना
आलोचना जि़म्मेदार शख्सियतों के गैऱ जि़म्मेदाराना बयान ! March 28, 2012 by तनवीर जाफरी | Leave a Comment तनवीर जाफरी भारत ही नहीं बल्कि दुनिया के कई देशों में अपने भक्तों व शिष्यों को शांति व प्र्रेम का सबक सिखाने वाले आर्ट ऑफ लिविंग यानी जीने की कला नामक मिशन के संस्थापक श्री श्री रविशंकर इन दिनों एक ऐसे विवाद मे उलझ गए हैं जिससे उनका बाहर निकल पाना मुश्किल हो रहा […] Read more » sri ravi shankar