कविता साहित्य कविता – चली जाऊँगी वापस March 28, 2012 / March 28, 2012 by प्रवक्ता.कॉम ब्यूरो | 3 Comments on कविता – चली जाऊँगी वापस मोतीलाल/राउरकेला चली जाऊँगी वापस तुम्हारी देहरी से दूर तुम्हारी खुश्बू से दूर इन फसलोँ से दूर गाँव गली से दूर उन अनाम सी जगह मेँ और बसा लूँगी अपने लिए ठिकाना तिनके के रूप मेँ बहा लूँगी पसीना फीँच लूँगी अपनी देह को खून की कीमत मेँ अगोरना सोख लूँगी आँसूओँ को आँखोँ […] Read more » poem Poems कविता चली जाऊँगी वापस
व्यंग्य बिन ममता सब सून March 26, 2012 / March 26, 2012 by जगमोहन ठाकन | Leave a Comment जग मोहन ठाकन रहिमन ममता राखिये , बिन ममता सब सून । सभी प्राणी अपने बच्चों का तब तक पालन पोषण करते हैं जब तक वे स्वयं भोजन अर्जन एवं अपनी रक्षा करने में समर्थ नहीं हो जाते ।परन्तु बच्चा तो बच्चा होता है, वह बिना समर्थ हुए ही सोचने लगता है कि अब वह […] Read more »
आलोचना आध्यात्मिक गुरूओ के राजनीतिक बयानो से देश को खतरा! March 25, 2012 / March 25, 2012 by शादाब जाफर 'शादाब' | Leave a Comment शादाब जफर ‘‘शादाब’’ “सरकार को शिक्षा का निजीकरण कर के सरकारी विद्यालयो को बंद कर देना चाहिये क्योकि वे नक्सलवाद को जन्म देते है। सरकार को कोई स्कूल नही चलाना चाहिये।“मंगलवार को अमंगल करते हुए देश के सब से गरम राज्य राजस्थान में आर्ट ऑफ लिविंग के संस्थापक आध्यात्मिक गुरू श्री श्री रवि शंकर जी […] Read more » sri sri Ravi Shankar आध्यात्मिक गुरू
कविता कविता-भोर भई मनुज अब तो तू उठ जा,-विजय कुमार March 25, 2012 / March 25, 2012 by विजय कुमार सप्पाती | 1 Comment on कविता-भोर भई मनुज अब तो तू उठ जा,-विजय कुमार भोर भई मनुज अब तो तू उठ जा, रवि ने किया दूर ,जग का दुःख भरा अन्धकार ; किरणों ने बिछाया जाल ,स्वर्णिम और मधुर अश्व खींच रहें है रविरथ को अपनी मंजिल की ओर ; तू भी हे मानव , जीवन रूपी रथ का सार्थ बन जा ! भोर भई मनुज अब तो तू […] Read more » kavita by vijay kumar sappati
कविता साहित्य कविता ; और काबा में राम देखिये March 24, 2012 / March 24, 2012 by श्यामल सुमन | 3 Comments on कविता ; और काबा में राम देखिये श्यामल सुमन विश्व बना है ग्राम देखिये है साजिश, परिणाम देखिये होती खुद की जहाँ जरूरत छू कर पैर प्रणाम देखिये सेवक ही शासक बन बैठा पिसता रोज अवाम देखिये दिखते हैं गद्दी पर कोई किसके हाथ लगाम देखिये और कमण्डल चोर हाथ में लिए तपस्वी जाम देखिये बीते […] Read more » poem Poems और काबा में राम देखिये कविता
कहानी कहानी – शौक March 21, 2012 / March 21, 2012 by प्रवक्ता.कॉम ब्यूरो शाम का वक्त था, सूरज अपनी दिन भर की मेहनत करके घर वापसी की ओर लोट रहा था। ठीक उसी तरह जैसे कोई दिहाडी मजदूर शाम होते ही अपने घर की राह पकडने की ओर आतुर रहता है। कोई 70-72 साल का एक बुजुर्ग अपनी एक टूटी सी साईकिल पर अपने भविष्य की धरोहर, एक […] Read more » stories Story कहानी कहानी - शौक
कविता कविता – आता हूँ प्रतिवर्ष March 20, 2012 by प्रवक्ता.कॉम ब्यूरो | Leave a Comment विमलेश बंसल चैत्र शुक्ल प्रतिपदा के दिन मैं आता हूँ प्रतिवर्ष। जी हाँ मुझको कहते हैं नववर्ष॥ भरता हूँ नव जीवन सबमें, विमल उमंग उत्कर्ष। जी हाँ मुझको कहते हैं नववर्ष॥ 1)मैं वसंत का प्राण निराला। कर देता सबको मतवाला। मुझसे सबको हर्ष॥ जी हाँ मुझको कहते हैं नववर्ष॥ 2)नहीं ग्रीष्म में नहीं शीत में। […] Read more » poem Poems आता हूँ प्रतिवर्ष कविता
कविता साहित्य कविता – वह आया है March 18, 2012 / March 18, 2012 by प्रवक्ता.कॉम ब्यूरो | Leave a Comment मोतीलाल मैँने उसे देखा है अभी-अभी इन्हीँ आँखोँ से वह आया है हमारे इस शहर मेँ और खड़ा है बाहर धुँध से भरे कोहरे मेँ वह आना चाहता है हमारे घरोँ मेँ और दो क्षण सुस्ताना चाहता है थकान से चूर उसकी देह अब नहीँ उठ पाती है और नहीँ ठहरती है आँखेँ किसी […] Read more » poem Poems कविता कविता - वह आया है
कविता परछाइयां March 16, 2012 / March 16, 2012 by नरेश भारतीय | Leave a Comment नरेश भारतीय कल के सच की परछाइयां आज के झूठ को जब सच मानने से इन्कार करतीं हैं तो बीते कल की अनुभूतियां जीवंत हो उठती हैं जीवन सत्य को जो रचती रहीं – मैं नहीं जानता आज के जीवन सत्य कितनी गहराइयों में पैठ कर घोषित किए गए हैं और यह भी कि क्या […] Read more » poem-parchhatetan परछाइयां
आलोचना आईपीएस की लाश पर हवन March 16, 2012 / March 16, 2012 by प्रवक्ता.कॉम ब्यूरो | Leave a Comment डॉ. हिमांशु द्विवेदी अब क्या लाशों पर सियासत छत्तीसगढ़ का भी संस्कार बनेगी। आजाद भारत मेंं शालीन राजनीति की परम्परा का झंडाबरदार रहा यह प्रांत गत तीन दिनों से जिस प्रकार के घटनाक्रम से गुजर रहा है, वह भविष्य को ले कर गंभीर सवाल खड़ा करता है। देश की सबसे प्रतिष्ठित सेवा से संबद्ध अधिकारी […] Read more » IPS Officer Rahul Sharma आईपीएस
कविता साहित्य शब्द साहित्य एवं भावों का समागम है “कभी सोचा है” कविता संग्रह March 15, 2012 / March 15, 2012 by शिवानंद द्विवेदी | Leave a Comment शिवानन्द द्विवेदी “सहर” मन बड़ा प्रफुल्लित होता है जब किसी नए साहित्य को पढ़ने का अवसर प्राप्त होता है ! ६ मार्च की शाम जैसे ही दफ्तर से घर पहुंचा बंद लिफ़ाफ़े में एक पुस्तक प्राप्त हुई, जिज्ञासा वश बिना देर किये लिफाफा खोल कर देखा ! वैसे तो कोई भी साहित्यिक पुस्तक मेरे मन […] Read more » kabhi socha hai poem कभी सोचा है : कविता संग्रह भावों का समागम शब्द साहित्य
लेख सरकारी बैंकों के बढ़ते एनपीए की जमीनी हकीकत March 15, 2012 by सतीश सिंह | Leave a Comment सतीश सिंह वार्षिक लेखाबंदी के निकट आते ही खासकर के मार्च के महीने में सरकारी बैंकों में गैर निष्पादित परिसंपतित (एनपीए) के स्तर को कम करने की कवायद शुरू हो जाती है। अधिकारी गली, मोहल्ले व गांव की धूल फांकने लगते हैं। प्रशासनिक व प्रधान कार्यालयों में मीटिंगों का दौर आरंभ हो जाता है। एनपीए […] Read more » Govt. bank NPA एनपीए सरकारी बैंक