कविता परम्पराओं पर आघात मत सहो July 6, 2011 / December 9, 2011 by डॉ. आशुतोष वाजपेयी | 8 Comments on परम्पराओं पर आघात मत सहो कड़ी परीक्षा है संस्कृति की सत्य तो अब कहना होगा मेरी परम्पराएँ पावन दृढ इस पे रहना होगा काले अंग्रेजों सुन लो तुम वेदनेत्र यह ज्योतिष है ज्ञान प्राप्त करने के हित इस धारा में बहना होगा अब मुझसे ये सत्य सुनो पैथागोरस इक झूंठा था बौधायन कि इक प्रमेय उनका वो शोध अनूठा […] Read more » Traditions आघात परम्पराओं
लेख कन्या भ्रूण हत्या July 6, 2011 / December 9, 2011 by प्रवक्ता ब्यूरो | 2 Comments on कन्या भ्रूण हत्या यह पतन की पराकाष्ठा है। पश्चिमी सभ्यता भारतीय जीवन-मूल्यों को लीलने में जुटा हुआ है। भारतीय खान-पान, वेश-भूषा, भाषा, रहन-सहन, जीवन-दर्शन इन सब पर पाश्चात्य प्रवृति हावी होती जा रही है। हम नकलची होते जा रहे हैं। हम अपना वैशिष्टय भूलते जा रहे हैं। हम स्व-विस्मृति के कगार पर हैं। :कन्या भ्रूण हत्या परमात्मा की […] Read more » Female Foeticide कन्या भ्रूण हत्या
व्यंग्य व्यंग्य/ इंडियन साहब इन यमलोक July 6, 2011 / December 9, 2011 by अशोक गौतम | Leave a Comment अशोक गौतम यमलोक के परलोक निर्माण विभाग मंडल दो में कार्यरत इंजिनियर कौशल साहब रिटायर हुए तो वहां पर इंजिनियर का पद रिक्त हो गया। ब्रह्मांडीय मंदी के चलते न चाहते हुए भी यमराज ने निर्णय लिया कि क्यों न प्रतिनियुक्ति पर जंबूद्वीप भारत खंड से इंजिनियर बुला लिया जाए और उन्होंने भारत खंडे सरकार […] Read more »
लेख स्वतंत्रता जयन्ती पर विशेष:पुनर्निमाण के पहले ज़रूरी है विध्वंश July 5, 2011 / December 9, 2011 by राम कृष्ण | Leave a Comment रामकृष्ण स्वतंत्रता दिवस नये विचारों, नयी धारणाओं के प्रतिपादन और प्रकाशन का पर्व माना जाता है. इससे इस अवसर पर सामान्यतः हमें अपने देश की प्रगति, उसके विकास, उसके निर्माण की चर्चा ही अभीष्ट होनी चाहिए थी, विभिन्न विधाओं में वह कितना आगे बढ़ है और तकनीकी और वैज्ञानिक शोध की दिशा में उसने कितनी […] Read more » Independence Day पुनर्निमाण विध्वंश स्वतंत्रता जयन्ती स्वतंत्रता दिवस
कविता बाल गीत/ क्षेत्रपालशर्मा July 5, 2011 / December 9, 2011 by क्षेत्रपाल शर्मा | 2 Comments on बाल गीत/ क्षेत्रपालशर्मा फूलों जैसे उठो खाट से बछड़ों जैसी भरो कुलांचे अलसाये मत रहो कभी भी थिरको एसे जग भी नांचे नेक भावना रखो हमेशा जियो कि जैसे चन्दा तारे एसे रहो कि तुम सब के हो और सभी है सगे तुम्हारे फूलो फलो गाछ हो जैसे बोलो बहता नीर कांटे बनकर मत जीना तुम हरो परायी […] Read more » Child song बाल गीत
आर्थिकी व्यंग्य हास्य-व्यंग्य/चवन्नी की मौत पर July 5, 2011 / December 9, 2011 by पंडित सुरेश नीरव | 1 Comment on हास्य-व्यंग्य/चवन्नी की मौत पर पंडित सुरेश नीरव मैं और मेरे जैसे देश के तमाम चवन्नी छाप आजकल भयानक राष्ट्रीय सदमें में हैं। सरकार ने अचानक चवन्नी की नस्ल को खत्म करने का जो जघन्य पराक्रम किया है उसे इतिहास कभी माफ नहीं करेगा। और इतिहास-वितिहास से हमें क्या लेना-देना। हम कोई हिस्ट्रीशीटर हैं क्या। हां, हम चवन्नीछाप लोग जरूर […] Read more » Chavanni चवन्नी
व्यंग्य वो भगवान से भी बड़ा है… July 4, 2011 / December 9, 2011 by पंडित सुरेश नीरव | Leave a Comment पंडित सुरेश नीरव आज के दौर का सबसे ताकतवर प्राणी-दलाल है। सतयुग के जंगलों में जो शौर्य कभी डायनासौर का हुआ करता था कलयुग के सभ्य समाज में वही जलवा दलाल का है। इस प्रजाति के जीव की आज यत्र-तत्र-सर्वत्र पूजा होती है। यह किसी पद पर नहीं होता मगर नाना प्रकार के पद इसके […] Read more » God दलाल
व्यंग्य जय हो बदलीराम की July 2, 2011 / December 9, 2011 by पंडित सुरेश नीरव | Leave a Comment पंडित सुरेश नीरव समाज सेवी बदलीरामजी के नागरिक अभिनंदन का धुआंधार जलसा बड़े जोर-शोर से आज संपन्न हुआ। शहर के स्थानीय लोग इसे जिले स्तर का कोमनवेल्थ गेम मान रहे हैं। सारा प्रशासन शासन के कंधे-से-कंधा मिलाकर बदलीरामजी के सम्मान सर्कस को सफल बनाने में जुटा रहा। बदलीरामजी का पराक्रम है ही कुछ ऐसी डिजायन […] Read more » जय हो बदलीराम की
व्यंग्य लाइट दा मामला July 2, 2011 / December 9, 2011 by पंडित सुरेश नीरव | Leave a Comment पंडित सुरेश नीरव लाइट के मामले को कभी लाइटली नहीं लेना चाहिए। खासकर के यूपी और बिहार के लोगों को। क्योंकि उनके लिए तो लाइट से ज्यादा सीरीयस मामला कोई और होता ही नहीं है। कई-कई दिनों बाद लाइट के दर्शम होते हैं। और होते हैं तो एक दिन में कई-कई ये कोई दिल्ली मुंबई […] Read more » लाइट दा मामला
पुस्तक समीक्षा पुस्तक चर्चा : स्त्रीत्व धारणाएँ एवं यथार्थ, लेखिका-कुसुमलता केडिया July 2, 2011 / December 9, 2011 by प्रवक्ता ब्यूरो | Leave a Comment पृष्ठ : 180 मूल्य : $13.95 प्रकाशक : विश्वविद्यालय प्रकाशन आईएसबीएन : 978-81-7124-680 प्रकाशित : जनवरी ०१, २००९ पुस्तक क्रं : 7584 मुखपृष्ठ : सजिल्द प्रस्तुत हैं पुस्तक के कुछ अंश विश्व की ‘एकेडमिक्स’ यूरोईसाई सिद्धान्तों, अवधारणाओं एवं विचार-प्रयत्नों से संचालित है। आधुनिक स्त्री-विमर्श पूरी तरह पापमय, हिंसक और सेक्स के विचित्र आतंक से पीड़ित […] Read more » स्त्रीत्व धारणाएँ एवं यथार्थ
व्यंग्य हास्य व्यंग्य-सम्मान की ठरक July 2, 2011 / December 9, 2011 by पंडित सुरेश नीरव | Leave a Comment पंडित सुरेश नीरव सम्मान की ठरक एक ऐसी सनातन ठरक है जिससे आदमी कभी मुक्त नहीं हो पाता है। उसे जिंदा रहते तो क्या मरणोपरांत भी सम्मान की ललक बनी रहती है। और इसे पाने के लिए न्नहा-सा आदमी नाना प्रकार के जुगाड़ करता है। वह हर क्षण-हर पल यही सूंघता रहता है कि उसे […] Read more »
कविता कविता-सुदर्शन प्रियदर्शिनी June 29, 2011 / December 9, 2011 by सुदर्शन प्रियदर्शनी | Leave a Comment सुदर्शन प्रियदर्शिनी चेहरा इस धुन्धिआये खंडित सहस्त्र दरारों वाले दर्पण में मुझे अपना चेहरा साफ़ नही दीखता . . . जब कभी अखंडित कोने से दीख जाता है तो ….. कहीं अहम तो कहीं स्वार्थ की बेतरतीब लकीरों से कटा- पिटा होता है . . . चलचित्र चलचित्र तेरे हवा में छल्लेदार धुएं […] Read more » poem कविता