कविता कविता / मुखौटे वाला July 19, 2011 / December 8, 2011 by आर. सिंह | Leave a Comment पहले भी वह मुखौटे बेचता था. तरह तरह के मुखौटे बेचता था. किसिम किसिम के मुखौटे बेचता था. दूकान थी उसकी नुक्कड़ के कोने में. मुखौटे बनाता भी वह खुद था. कितने अच्छे थे उसके मुखौटे राम को मुखौटा लगा दो वह रावण बन जाता. रावण को मखौटा लगाया वह बन गया राम. दूकान थी […] Read more » Mask मुखौटा
व्यंग्य हमें पता है कि ये आतंकवादी कौन हैं July 19, 2011 / December 8, 2011 by पंडित सुरेश नीरव | 2 Comments on हमें पता है कि ये आतंकवादी कौन हैं पंडित सुरेश नीरव हादसे हमारे देश की लाइफ लाइन हैं। हादसों के बिना मुर्दा है हमारा देश। हादसे नहीं होते तो ज़िंदगी नीरस हो जाती है। वो तो भला हो भगवान का कि जब-तब बाढ़ और अकाल लाकर थोड़ी चहल-पहल देश में ला देते हैं। वरना इन आतंकवादियों के भरोसे तो कुछ भी नहीं होने […] Read more » terrorism आतंकवाद
आलोचना हिन्दी में संवाद का अंत July 18, 2011 / December 8, 2011 by जगदीश्वर चतुर्वेदी | 1 Comment on हिन्दी में संवाद का अंत जगदीश्वर चतुर्वेदी हिन्दी के इस देश में दो रूप हैं एक संवैधानिक है जिसके तहत हिन्दी कुछ राज्यों में प्रधानभाषा है तो कुछ राज्यों अल्पसंख्यक भाषा है। जहां वह अल्पसंख्यकों की भाषा है वहां हिन्दीभाषी सांस्कृतिक अल्पसंख्यक हैं। इससे हमारे राष्ट्र-राज्य के ढ़ांचे को कोई चुनौती नहीं है। इस परिधि के बाहर दूसरी ओर हिन्दी […] Read more » hindi संवाद हिंदी
आलोचना हिन्दी की देह है फोटो, प्राण है संगीत July 18, 2011 / December 8, 2011 by जगदीश्वर चतुर्वेदी | Leave a Comment जगदीश्वर चतुर्वेदी हिन्दी भाषा में अहंकार का भाव नहीं है। नायक नहीं हैं। यह ऐसी भाषा है जो प्रकृति से उदार है। हिन्दी न तो राष्ट्रभाषा है न मातृभाषा है और न पितृभाषा बल्कि वातावरण या परिवेश की भाषा है। भारतीय समाज में संचार और संबंध की स्वाभाविक भाषा है,जीवन में इसे दूसरी प्रकृति कहते […] Read more » hindi हिंदी
व्यंग्य जूते के बूते July 17, 2011 / December 8, 2011 by पंडित सुरेश नीरव | 2 Comments on जूते के बूते पंडित सुरेश नीरव जूते भी बड़ी अजीब चीज़ हैं। ये पैदा तो पैरों के लिए होते हैं मगर जुगाड़ लगाकर पहुंच पगड़ी के देश में जाते हैं। ठीक उन भारतीयों की तरह जो पैदा तो इंडिया में होते हैं मगर नागरिकता अमेरिका की पाने को हमेशा ललचाते रहते हैं। और कुछ हथिया भी लेते हैं। […] Read more » जूते जूते के बूते
व्यंग्य बंधक प्रधानमंत्री “बंधन” तोड़ो !! July 16, 2011 / December 8, 2011 by कुशल सचेती | 4 Comments on बंधक प्रधानमंत्री “बंधन” तोड़ो !! क्या इस मुल्क की किस्मत में बंधक प्रधानमंत्री लिखा हुआ है जिसे अपने मंत्रियो से लेकर उनके विभागों तक का फैसला करने का अधिकार ना हो ! क्या यह मुल्क ऐसे गृहमंत्री की रहनुमाई में खुद को महफूज़ रख सकता है जो सीना तान कर यह कहे कि मुम्बई में हुआ आतंकवादी हमला खुफिया तंत्र […] Read more » Manmohan Singh बंधक प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह
व्यंग्य कसम भगवान की अब कसम नहीं खाऊंगा July 16, 2011 / December 8, 2011 by पंडित सुरेश नीरव | 1 Comment on कसम भगवान की अब कसम नहीं खाऊंगा पंडित सुरेश नीरव नेता तो हमारे देश में आजादी से पहले भी हुआ करते थे और आजादी के बाद भी हो रहे हैं। फर्क इतना है कि पहले होते थे, अब हो रहे हैं। हैं। मगर लोगों का मानना है कि आजादी से पहले के नेता बड़ी हाई क्वालिटी के हुआ करते थे। उंचे विचारोंवाले […] Read more »
व्यंग्य व्यंग्य: तिहाड़ मंत्रिमंडल July 16, 2011 / December 8, 2011 by विजय कुमार | 2 Comments on व्यंग्य: तिहाड़ मंत्रिमंडल विजय कुमार लिखने-पढ़ने का स्वभाव होने से कई लाभ हैं, तो कई नुकसान भी हैं। मोहल्ले-पड़ोस में किसी बच्चे को कोई निबन्ध लिखना हो या किसी वाद-विवाद प्रतियोगिता में भाग लेना हो, तो उसके अभिभावक अपना सिर खपाने की बजाय उसे मेरे पास भेज देते हैं। कल भी ऐसा ही हुआ। बाल की खाल निकालने […] Read more » Corruption भ्रष्टाचार
लेख और कितने आतंकवादी हमले सहेगा भारत? July 15, 2011 / December 8, 2011 by नरेश भारतीय | 3 Comments on और कितने आतंकवादी हमले सहेगा भारत? नरेश भारतीय भारत में आतंकवादी धमाकों का दौर फिर से शुरू हो गया है. महानगरी मुम्बई जो अभी २००८ के धमाकों की गूंज और विनाशलीला को भुला नहीं सकी है उस पर इन ताजा हमलों से प्रकटत: उन्हीं तत्वों द्वारा पुनरपि यह सन्देश भारत को दिया गया है कि उनकी तरफ से लड़ाई रुकी नहीं […] Read more » terrorism आतंकवाद इन्डियन मुजाहिदीन मुंबई पर हमला
लेख हुसैन की कला और कलाबाजी July 15, 2011 / December 8, 2011 by शंकर शरण | 4 Comments on हुसैन की कला और कलाबाजी शंकर शरण भारत के लोग दिवंगत व्यक्तियों के प्रति अप्रिय सत्य सामान्यतः नहीं कहते। किन्तु राजनीतिक लोगों और राष्ट्रीय प्रश्नों पर यह सलीका छोड़ना पड़ता है। फिर भी यदि नीचे कही गई बातें किन्हीं को अवसर के उपयुक्त न लगे तो उसे निवेदन है कि मुल्कराज आनंद के निधन पर खुशवंत सिंह का लिखा लेख […] Read more » MF Hussain कला कलाबाजी चित्रकार मकबूल फिदा हुसैन हुसैन
लेख बलि दो नौकरी लो – सरकारी बाबा July 14, 2011 / December 8, 2011 by अब्दुल रशीद | 1 Comment on बलि दो नौकरी लो – सरकारी बाबा हादसों में शिकार मासूम जिन्दगी कि मौत पर गैर जिम्मेदाराना राजनीति और खबरों के नाम पर भावनाओं के साथ मीडिया द्वारा बलात्कार करना लोकतंत्र के लिए ठीक नहीं । रेल हादसा के बाद होने वाली मौत पर सरकार – मौत के सन्नटे को चीरता सरकारी घोषणा मौत के लिए मुआवज़ा देना, मानो हादसे में मरने […] Read more » Rail accident रेल हादसा सीरियल बम बलास्ट
व्यंग्य बात की बात में से बात July 14, 2011 / December 8, 2011 by पंडित सुरेश नीरव | 2 Comments on बात की बात में से बात पंडित सुरेश नीरव बातों की महिमा न्यारी है। बात की बात में से बात निकल आती है। असली बात पर कोई पते की बात नहीं करता मगर बात निकलती है तो बिना बात ही बहुत दूर तक चली जाती है। और बिना रुके चलती ही चली जाती है। कश्मीर के मुद्दे पर पिछले साठ साल […] Read more »