पुस्तक समीक्षा ‘संगठन सर्वोपरि’ और नितिन गडकरी February 27, 2011 / December 15, 2011 by डॉ. मनोज चतुर्वेदी | 2 Comments on ‘संगठन सर्वोपरि’ और नितिन गडकरी पुस्तक समीक्षक : डॉ. मनोज चतुर्वेदी भाजपा के कई राष्ट्रीय अध्यक्ष हुए जैसे श्री अटल बिहारी वाजपेयी, श्री लालकृष्ण आडवाणी, श्री कुशाभाऊ ठाकरे, डॉ. मुरलीमनोहर जोशी, श्री वेंकया नायडू, श्री बंगारू लक्ष्मण, श्री के. जना. कृष्णूर्ति, श्री राजनाथ सिंह तथा श्री नितिन गडकरी। मुझे जहां तक लगता है। कुछ एक को छोड़कर ये सभी […] Read more » Nitin Gadkari नितिन गडकरी संगठन सर्वोपरि
साहित्य लन्दन में हिंदी कविता सेमीनार February 25, 2011 / December 15, 2011 by शिखा वार्ष्णेय | Leave a Comment शिखा वार्ष्णेय, लंदन रविवार की संध्या थी और उस दिन ठण्ड भी बहुत थी परन्तु हिंदी साहित्य के कुछ कवियों की रचनाओं ने ठन्डे मौसम में गर्माहट लाने में कोई कसर नहीं छोड़ी .२० फरवरी तो लन्दन के नेहरु सेंटर में संपन्न हुआ हिंदी समिति द्वारा आयोजित एक कविता सेमीनार जिसकी अध्यक्षता की साउथ एशियन […] Read more » London लन्दन
साहित्य जनता के ज्यादा निकट होती है मंचीय कविता February 22, 2011 / December 15, 2011 by आशीष कुमार ‘अंशु’ | Leave a Comment आशीष कुमार ‘अंशु’ बात अधिक पुरानी नहीं है, मंचीय कवि अशोक चक्रधर जब हिन्दी अकादमी दिल्ली के उपाध्यक्ष तय हुए, उस वक्त हिन्दी साहित्य समाज इसलिए उन्हें गंभीरता से लेने को तैयार नहीं हुआ क्योंकि वे एक मंचीय कवि थे। उस वक्त की मंचीय कवियों की एकता उल्लेखनीय है। कवि जो मंच के गणित में […] Read more » poem कविता
कविता गीत / अब तो जागो जवानी तुम्हें है क़सम February 22, 2011 / December 15, 2011 by प्रवक्ता ब्यूरो | 2 Comments on गीत / अब तो जागो जवानी तुम्हें है क़सम है परीक्षा को देखो घड़ी आ गयी , अब तो जागो जवानी तुम्हें है क़सम। भावनाओं का बढ़ है प्रदूषण रहा, आए दिन अब सुलगने लगे हैं शहर। जड़ जमाती ही जातीं दुरभिसन्धियाँ, और फैला रही हैं नसों में ज़हर। साज़िशों में घिरी यह धरा छोड़कर, यों न भागो जवानी तुम्हें है क़सम। लाख चौकस […] Read more » song गीत
कविता कविता / गुस्सा गधे को आ गया February 20, 2011 / December 15, 2011 by पंडित सुरेश नीरव | 3 Comments on कविता / गुस्सा गधे को आ गया कौन है जो फस्ल सारी इस चमन की खा गया बात उल्लू ने कही गुस्सा गधे को आ गया प्यार कहते हैं किसे है कौन से जादू का नाम आंख करती है इशारे दिल का हो जाता है काम बारहवें बच्चे से अपनी तेरहवीं करवा गया बात उल्लू ने कही गुस्सा गधे को आ गया […] Read more » poem कविता
पुस्तक समीक्षा कथा में नई दृष्टि और भाषा गढ़ती हैं रीता सिन्हा February 20, 2011 / December 15, 2011 by चंडीदत्त शुक्ल | Leave a Comment फिर सुनें स्त्री-मन और जीवन की कहानियां चण्डीदत्त शुक्ल चूल्हे पर रखी पतीली में धीरे-धीरे गर्म होता और फिर उफनकर गिर जाता दूध देखा है कभी? ऐसा ही तो है स्त्री-मन। संवेदनाओं की गर्माहट कितनी देर में और किस कदर कटाक्ष-उपेक्षा की तपन-जलन में तब्दील हो जाएगी, पहले से इसका अंदाज़ा लगाना संभव होता, तो […] Read more » Rita Sinha रीता सिन्हा
प्रवक्ता न्यूज़ साहित्य विश्वनाथ त्रिपाठी के अस्सीवें जन्मदिन पर बतकही का लोकार्पण February 17, 2011 / December 15, 2011 by प्रवक्ता ब्यूरो | 1 Comment on विश्वनाथ त्रिपाठी के अस्सीवें जन्मदिन पर बतकही का लोकार्पण डीयरपार्क दिलशाद गार्डन में दि.16-2-11 को हिन्दी के जाने माने आलोचक और वरिष्ठ साहित्यकार डॉ. विश्वनाथ त्रिपाठी का 80वाँ जन्मदिन मनाया गया। पार्क के खुले आँगन मे जहाँ वे रोज सुबह सैर करते हैं वहीं के कुछ लेखक और पत्रकार मित्रो के सहयोग से यह समारोह आयोजित किया गया। इस अवसर पर डीयरपार्क के मित्रो […] Read more » Vishwnath Tripathi विश्वनाथ त्रिपाठी
व्यंग्य व्यंग्य बाण : दर्द का हद से गुजरना है… February 16, 2011 / December 15, 2011 by विजय कुमार | 2 Comments on व्यंग्य बाण : दर्द का हद से गुजरना है… विजय कुमार दुनिया में शायद ही कोई हो, जिसे कभी दर्द का अनुभव न हुआ हो। बूढ़ों में सिर, हाथ, पैर या पूरे शरीर का दर्द, बच्चों में विद्यालय न जाने के लिए पेट का दर्द और युवाओं के दिल में दर्द प्रायः देखने में आता हैं; पर लेखकों को एक विशेष प्रकार का दर्द […] Read more » Pain दर्द
कविता सात प्रेम कविताएँ February 14, 2011 / December 15, 2011 by सतीश सिंह | 4 Comments on सात प्रेम कविताएँ 1 चुपके से मैं तो चाहता था सदा शिशु बना रहना इसीलिए मैंने कभी नहीं बुलाया जवानी को फिर भी वह चली आई चुपके से जैसे चला आता है प्रेम हमारे जीवन में अनजाने ही चुपके से 2 प्रथम प्रेम इंसान को कितना कुछ बदल देता है प्रथम प्रेम उमंग और उत्साह लिए लौट जाता […] Read more » Love Poems प्रेम कविताएँ
कविता अनामिका घटक की कविता – नि:शब्द February 13, 2011 / December 15, 2011 by प्रवक्ता ब्यूरो | 1 Comment on अनामिका घटक की कविता – नि:शब्द खामोश हम तुम बात ज़िन्दगी से आँखों ने कुछ कहा धड़कन सुन रही है धरती से अम्बर तक नि:शब्द संगीत है मौसम की शोखियाँ भी आज चुप-चुप सी है गीत भी दिल से होंठ तक न आ पाए बात दिल की दिल में ही रह जाए जिस्मों की खुशबू ने पवन महकाया है खामोशी को […] Read more » poem नि:शब्द
कविता नवगीत/तूफ़ान सड़क पर February 12, 2011 / December 15, 2011 by प्रवक्ता ब्यूरो | 1 Comment on नवगीत/तूफ़ान सड़क पर -रामेश्वर काम्बोज ‘हिमांशु’ जब देश लूटता राजा कोई करे कहाँ शिकायत , संसद में बैठे दागी एकजुट हो करें हिमायत ; बेहयाई नहीं टूटती , रोज़ उठें तूफ़ान सड़क पर । दूरदर्शनी बने हुए इस दौर के भोण्डे तुक्कड़, सरस्वती के सब बेटे हैं घूमते बनकर फक्कड़ ; अपमान का गरल पी रहा ग़ालिब का […] Read more » song
व्यंग्य व्यंग्य/ जाओ! जमकर हुड़दंग पाओ!! February 7, 2011 / December 15, 2011 by अशोक गौतम | Leave a Comment अशोक गौतम ज्यों ही दूरदर्शन ने मौसम विभाग की ओर से जानकारी दी कि अबके वसंत सही समय पर आ रहा है जिससे जनता में निरंतर गिर रहे प्रेम की रेपोदर में धुआंधार वृद्धि होने की पूरी आशंका है तो सरकार की बांछें खिल गईं। वह खुश थी कि चलो उसके राज में कुछ तो […] Read more »