लेख बच्चों का यौन शोषण कानून March 23, 2011 / December 14, 2011 by शादाब जाफर 'शादाब' | Leave a Comment निठारी काण्ड के बाद दुनिया का शायद ही कोई ऐसा व्यक्ति होगा जिसने बच्चो के साथ हुए इस घिनौने यौन अपराध और हत्याकाण्ड के विरूद्व आवाज न उठाई हो और इस पर सख्त कानून बनाने के लिये सरकार से आग्रह न किया हो। राष्ट्रीय सलाहकार परिषद ( एनएसी ) की अध्यक्ष सोनिया गॉधी की पहल […] Read more »
लेख कई झोल है महिला यौन उत्पीड़न विधेयक में March 23, 2011 / December 14, 2011 by शादाब जाफर 'शादाब' | Leave a Comment 13 साल की लम्बी लडाई के बाद आखिर पिछले दिनो लोक सभा के शीतकालीन सत्र में महिला उत्पीड़न रक्षा विधेयक 2010 पेश हुआ जो केंद्रीय मंत्री मंडल की मंजूरी के बाद लोकसभा की स्थाई समिति के पास जा चुका है। लेकिन अभी इस में कई खामिया है ऐसा कहना है देश के कई महिला संगठनो […] Read more » Women's sexual harassment
कविता जनकवि मनमोहन की 6 कविताएं March 21, 2011 / December 14, 2011 by जगदीश्वर चतुर्वेदी | 1 Comment on जनकवि मनमोहन की 6 कविताएं जिन्होंने मरने से इन्कार किया जिन्होंने मरने से इन्कार किया जिन्होंने मरने से इन्कार किया और जिन्हें मार कर गाड़ दिया गया वे मौका लगते ही चुपके से लौट आते हैं और ख़ामोशी से हमारे कामों में शरीक हो जाते हैं कभी-कभी तो हम घंटों बातें करते हैं या साथ साथ रोते हैं खा खाकर […] Read more »
लेख समझो संदेश सुनामी का March 20, 2011 / December 14, 2011 by तनवीर जाफरी | 2 Comments on समझो संदेश सुनामी का ड्पृथ्वी पर बसने वाली मानव जाति को समय-समय पर अपने रौद्र एवं प्रचंड रूप से आगाह कराती रहने वाली प्रकृति ने गत 11 मार्च ो जापान पर एक बार फिर अपना कहर बरपा किया। पहले तो रिएक्टर पैमाने पर 8.9 मैग्नीच्यूड तीव्रता वाले ज़बरदस्त भूकंप ने देश को झकझोर कर रख दिया। मौसम वैज्ञानिक अब […] Read more » Tsunami
कविता मिली कुंए में भांग आज फिर होली में March 18, 2011 / December 14, 2011 by पंडित सुरेश नीरव | 2 Comments on मिली कुंए में भांग आज फिर होली में मिली कुंए में भांग आ ज फिर होली में काम हुए सब रॉंग आज फिर होली में सजी-धजी मुर्गी की देख अदाओं को दी मुर्गे ने बांग आज फिर होली में करे भांगड़ा भांग उछल कर भेजे में नहीं जमीं पर टांग आज फिर होली में फटी-फटाई पेंट […] Read more »
आलोचना घोषणा-पत्र प्रधानमन्त्री डॉ. मनमोहन सिंह के नाम भ्रष्टाचार एवं अत्याचार अन्वेषण संस्थान (बास) के राष्ट्रीय अध्यक्ष डॉ. पुरुषोत्तम मीणा का खुला खत! March 17, 2011 / January 12, 2012 by डॉ. पुरुषोत्तम मीणा 'निरंकुश' | 1 Comment on प्रधानमन्त्री डॉ. मनमोहन सिंह के नाम भ्रष्टाचार एवं अत्याचार अन्वेषण संस्थान (बास) के राष्ट्रीय अध्यक्ष डॉ. पुरुषोत्तम मीणा का खुला खत! पत्रांक : बास/राअ/1112/1 दिनांक : 11.03.2011 प्रेषक : डॉ. पुरुषोत्तम मीणा, राष्ट्रीय अध्य्यक्ष-भ्रष्टाचार एवं अत्याचार अन्वेषण संस्थान (बास), राष्ट्रीय अध्यक्ष का कार्यालय-7 तँवर कॉलोनी, खातीपुरा रोड, जयपुर-302006 (राजस्थान), फोन : 0141-2222225, मोबाइल : 098285-02666 प्रेषिति : माननीय श्री डॉ. मनमोहन सिंह जी, प्रधानमन्त्री, भारत सरकार, नयी दिल्ली| विषय : राजस्थान के […] Read more » Manmohan Singh प्रधानमन्त्री
कहानी बच्चों का पन्ना एकलव्य प्रसंग : आधुनिक पुनर्पाठ March 16, 2011 / December 14, 2011 by अखिल कुमार (शोधार्थी) | 1 Comment on एकलव्य प्रसंग : आधुनिक पुनर्पाठ एक राजा का लड़का था जो इतने के बावजूद राजपूत नहीं था। चूँकि उसका पिता जन्म से क्षत्रप न होकर निशाद था अतः वह राजपूत होने की न्यूनतम अर्हता पूरी करके भी वांछनीयताओं में पिछड़ जाता था। तत्कालीन पूर्ण पक्के राज पुत्रों के समान उसने भी िक्षित होने का मन बनाया। हालांकि उसके पिता ने […] Read more »
कविता लड़ाई चलेगी लंबी इस बार … March 8, 2011 / December 15, 2011 by राजीव दुबे | 7 Comments on लड़ाई चलेगी लंबी इस बार … अब यह उजाड़ एक टीस बन कर उतर गया है अंदर, देखी नहीं जाती यह बदहाली हमसे… ऐ वक्त तू दिखा ले – जो भी दिखाना हो तुझे, हम भी जिद्द पर हैं – लड़ाई चलेगी लंबी इस बार, हमारी जीत तक … । जो तुम सोचते हो कि – यह देश है ठंडा […] Read more » Quarrel लड़ाई
कविता मेरी तड़त का मतलब March 2, 2011 / December 15, 2011 by डॉ. पुरुषोत्तम मीणा 'निरंकुश' | 3 Comments on मेरी तड़त का मतलब मेरा शरीर मेरा है| जैसे चाहूँ, जिसको सौंपूँ! हो कौन तुम- मुझ पर लगाम लगाने वाले? जब तुम नहीं हो मेरे मुझसे अपनी होने की- आशा करते क्यों हो? पहले तुम तो होकर दिखाओ समर्पित और वफादार, मैं भी पतिव्रता, समर्पित और प्राणप्रिय- बनकर दिखाऊंगी| अन्यथा- मुझसे अपनी होने की- आशा करते क्यों हो? तुम्हारी […] Read more » मेरी तड़त मेरी तड़त का मतलब
साहित्य कविता के उपनिवेश का अंत और नागार्जुन February 27, 2011 / December 15, 2011 by जगदीश्वर चतुर्वेदी | 2 Comments on कविता के उपनिवेश का अंत और नागार्जुन जगदीश्वर चतुर्वेदी साइबरयुग में कविता और साहित्य को लेकर अनेक किस्म की आशंकाएं व्यक्त की जा रही हैं। कुछ लोग यह सोच रहे हैं लोकतंत्र में कविता या साहित्य को कैद करके रखा जा सकता है ? यह सोचते रहे हैं कि साहित्य हाशिए पर पहुँच गया है।लेकिन ऐसा हो नहीं पाया है। इसके विपरीत […] Read more » Baba Nagarjun बाबा नागार्जुन
कहानी साहित्य कहानी/बाबूजी February 27, 2011 / December 15, 2011 by प्रवक्ता ब्यूरो | Leave a Comment एस. के. रैना हमारे पड़ोस में रहने वाले बाबूजी की उम्र यही कोई अस्सी के लगभग होनी चाहिए। इस उम्र में भी स्वास्थ्य उनका ठीक-ठाक है। ज़िन्दगी के आखिरी पड़ाव तक पहुंचते-पहुंचते व्यक्ति आशाओं-निराशाओं एवं सुख-दु:ख के जितने भी आयामों से होकर गुज़रता है,उन सब का प्रमाण उनके चेहरे को देखने से मिल जाता […] Read more » Story कहानी
पुस्तक समीक्षा राजनीति पत्रकारिता और दीनदयाल उपाध्याय February 27, 2011 / December 15, 2011 by डॉ. मनोज चतुर्वेदी | 2 Comments on पत्रकारिता और दीनदयाल उपाध्याय पुस्तक समीक्षक – डॉ. मनोज चतुर्वेदी दीनदयाल उपाध्याय एक विचारक, प्रचारक, विस्तारक, राष्ट्रषि, संपादक, पत्रकार अर्थशास्त्री, समाजसेवी, एक प्रखर वक्ता, शिक्षाविद तथा अपूर्व संगठनकर्ता थे। उन्होंने अहोरात्र भारत माता की सेवा करते-करते अपने जीवन को होम कर दिया। दीनदयाल जी ने लेखन तथा संपादन की शिक्षा, आज के महाविद्यालयों-विश्वविद्यालयों से नहीं लिया था। उन्होंने ‘आर्गेनाइजर’ […] Read more » Journalism पत्रकारिता और दीनदयाल उपाध्याय