कविता कविता/अबोध बच्चा August 7, 2009 / December 27, 2011 by प्रवक्ता ब्यूरो | 1 Comment on कविता/अबोध बच्चा अबोध बच्चा कल मिला मुझे अबोध बच्चा एक आंखों में आंसू होंठों पर सिसकियों के साथ न जाने उसका अपना कौन, क्या कहां गुम था ? सुनाई पड़ रही थी उसके रोने की हिचकियां चुप कराने की बहुत की कोशिश बच्चा नहीं माना नहीं थम रहे थे आंसू आंखों में टंगा था किसी के लिए […] Read more » poem कविता
व्यंग्य व्यंग/रसोई घर में बनती सौ दिन की कार्य योजना August 6, 2009 / December 27, 2011 by रामस्वरूप रावतसरे | 1 Comment on व्यंग/रसोई घर में बनती सौ दिन की कार्य योजना हम कमरे में बैठे टकटकी लगाये बाहर देख रहे थे कि कब गृहलक्ष्मी अपने कामों से फ्री हो और हमें भोजन मिले। पर गृहलक्ष्मी की स्थिति यह थी कि वह क्या कर रही है? किस कार्य में लगी है। मालूम ही नहीं चल रहा था। हमने उसे बार-बार पूछा कि आज क्या बात है, वह […] Read more » vyangya व्यंग
राजनीति साहित्य अशोक चक्रधर को लेकर हंगामा क्यों बरपा है ? August 5, 2009 / December 27, 2011 by जयराम 'विप्लव' | 5 Comments on अशोक चक्रधर को लेकर हंगामा क्यों बरपा है ? हिन्दी अकादमी में विवाद गहराने लगा है। वजह बनी है एक ऐसा शक्स, जिस पर आरोप लगायें जा रहे है कि वह गंभीर नहीं है बल्कि हास्यवादी है। जो अपने चिंता और चिंतन को माथे के सिकन की लकीरों में तबदील होने नहीं देता बल्कि अपनी चुटिली अंदाजों से पल में हवा कर देता है। जी हाँ हम बात कर रहे है डाॅ. अशोक चक्रधर जी की। Read more » Ashok chakradhar अशोक चक्रधर
कविता आओ, अंधेरे से हम लड़ें August 4, 2009 / December 27, 2011 by प्रवक्ता ब्यूरो | 3 Comments on आओ, अंधेरे से हम लड़ें रात कितनी भी अंधेरी – घनी क्यों न हो रात कोख में छिपी होती है उजाले की किरण। कितना भी तुम क्यों न सताओ किसी को- अपने बच्चे को देख उभरती है तुम्हारे चेहरे पर अब भी मुस्कान। अंधेरा- नहीं पहचानने देता है खुद की शक्ल और अंधेरे की उपज तमाम अनबुझी कामनाएं सुरसा की […] Read more » Dark अंधेरे
गजल बेज़ार मैं रोती रही, वो बे-इन्तेहाँ हँसता रहा August 3, 2009 / December 27, 2011 by दीपक चौरसिया ‘मशाल’ | 11 Comments on बेज़ार मैं रोती रही, वो बे-इन्तेहाँ हँसता रहा बेज़ार मैं रोती रही, वो बे-इन्तेहाँ हँसता रहा। वक़्त का हर एक कदम, राहे ज़ुल्म पर बढ़ता रहा। ये सोच के कि आँच से प्यार की पिघलेगा कभी, मैं मोमदिल कहती रही, वो पत्थर बना ठगता रहा। उसको खबर नहीं थी कि मैं बेखबर नहीं, मैं अमृत समझ पीती रही, वो जब भी ज़हर देता […] Read more » Bezar बेज़ार
कविता शायद पत्रकार हूँ मैं…. August 2, 2009 / December 27, 2011 by हिमांशु डबराल | 5 Comments on शायद पत्रकार हूँ मैं…. क्या कहूँ कौन हूँ मैं??? शायद इंसानों की भीड़ का हिस्सा, या उस भीड़ में सबसे जुदा शब्दों का काश्तकार हूँ मैं, शायद पत्रकार हूँ मैं… एक आईना जो बहुत कुछ दिखता है, कभी हकीकत तो कभी झूठ से भी मिलवाता है, कभी-कभी तो धुंधुला भी पड़ जाता है, उस आईने का व्यवहार हूँ मैं, […] Read more » journalist पत्रकार
व्यंग्य व्यंग्य : हे कुत्ते, तुझे सलाम!! July 26, 2009 / December 27, 2011 by अशोक गौतम | 1 Comment on व्यंग्य : हे कुत्ते, तुझे सलाम!! वे मेरे परमादरणीय पड़ोसी हैं। मेरे लिए रोल माडल हैं। परमादरणीय इसलिए कि उन्होंने मुझे दुनियादारी की बहुत सी बातें सिखाई हैं। उनके ही आशीर्वाद से मैं यहां तक मक्खन लगाने की कला में निपुण हो पाया हूं। वे न होते तो कसम खाकर कहता हूं कि आज मैं एक अच्छे पद पर होने के […] Read more » vyangya व्यंग्य
कविता जीवन की उलझी राहों में ……… July 26, 2009 / December 27, 2011 by जयराम 'विप्लव' | 1 Comment on जीवन की उलझी राहों में ……… ख़ुद से दूर रहना चाहता हूँ , अपने हीं अक्स से घबराता हूँ , प्यार किसी से करता हूँ , क्या प्यार उसी से करता हूँ ? Read more » life जीवन
व्यंग्य व्यंग्य/ तालियां! तलियां!! तलियां!!! July 21, 2009 / December 27, 2011 by अशोक गौतम | 2 Comments on व्यंग्य/ तालियां! तलियां!! तलियां!!! पहाड़ पर एक गांव था। गांव में सबकुछ था। पर पानी न था। कई बार चुनाव आए। वहां के लोगों से भरे पूरे मुंह मंत्रियों ने वोट के बदले पानी पहुंचाने के वादे किए और वोट ले रफूचक्कर होते रहे। और वे बेचारे पहाड़ पर से कोसों नीचे बहती नदी को देख अपनी प्यास बुझाते […] Read more » vyangya व्यंग्य
लेख Share with Care : शेयर विथ केयर July 21, 2009 / December 27, 2011 by इसरार अहमद | 1 Comment on Share with Care : शेयर विथ केयर धन कमाने की लालसा, (उत्साह, ख्वाहिश) शायद ही कोई ऐसा इंसान होगा जिसमे न हो आज तो चारो तरफ वातावरण धनामय हो चूका है पूरब हो या पश्चिम, उत्तर हो या दक्षिण धन की वर्षा तो हर तरफ हो रही है ! कोई वैधानिक अथवा कोई अवैधानिक तरीके से भोली भली जनता को धन कूबैर […] Read more » Share with Care
लेख The True Beauty : द ट्रुथ इज ब्यूटी July 20, 2009 / December 27, 2011 by इसरार अहमद | 4 Comments on The True Beauty : द ट्रुथ इज ब्यूटी The True Beauty: ब्यूटी शब्द यानि सुन्दरता यानि आकर्षण से भरा हुवा शब्द.यह वो जादूई (तिलिस्म) शब्द है जिसे सुनते ही इंसान के दिमाग में एक अजीब सी हरकत पयदा (जन्म जन्म लेती है) हो जाती है. Read more » The True Beauty
व्यंग्य व्यंग्य : यार, लौट आओ!! – डॉ. अशोक गौतम July 19, 2009 / December 27, 2011 by अशोक गौतम | 2 Comments on व्यंग्य : यार, लौट आओ!! – डॉ. अशोक गौतम इस इश्तहार के माध्यम से सर्व साधारण को एक बार फिर सूचित किया जाता है कि हमारे मुहल्ले का पिछले कई महीनों से गुम हुआ प्रेम अभी भी गुम है। इस बारे मैं कई बार देश के प्रमुख समाचार पत्रों के माध्यम से इश्तहार भी दे चुका हूं। पर आज तक न तो सूचना पढ़कर […] Read more » vyangya व्यंग्य