व्यंग्य साहित्य एक पत्र बरखा रानी के नाम June 29, 2017 by विपिन किशोर सिन्हा | Leave a Comment । तुम आंधी के साथ आओ, बिजली के साथ आओ, बाप बादल की पीठ पर सवार होकर आओ, लेकिन आओ। हम तोके कचौड़ी गली की कचौड़ी खिलाऊंगा, लंगड़ा आम खिलाऊंगा, गोदौलिया की मलाई वाली भांग की ठंढ़ई पिलाऊंगा, रामनगर की लस्सी पिलाऊंगा और लंका के केशव का बनारसी पान खिलाऊंगा। तुम कहोगी तो आईपी माल में ले जाकर हाफ गर्लफ़्रेंड भी दिखा दूंगा। Read more » Featured बरखा रानी
व्यंग्य हैलो माईक टेस्टिंग , हैलो , हैलो June 22, 2017 by जगमोहन ठाकन | Leave a Comment चौबे जी मंद मंद मुस्काये , बोले –ठीक पकड़े है . आज की सत्ता के शिखर पर बैठे पुरोधा यही तो चाहते हैं , यही तो इनका एजेंडा है , कि वजन बढे तो केवल उनका , दूसरा कोई इनके समान वजन धारी ना हो जाए . सुना है कि कुछ ‘शाह’ लोग ज्यादा ही वजनधारी होने लगे थे , पर समय रहते हमारे पारखी ‘ग्रीन टी’ वाले की नजर पड़ गयी और आज उनका लगभग बीस किलो वजन कम हो गया बताते हैं . वजन कम करने की तकनीक में तो ग्रीन टी का कोई सानी नहीं है . कल तक जिनकी ‘वाणी’ में अदम्य ‘जोश’ था , आज उनका इतना कम वजन हो गया है कि कोई उनका वजन तौलने तक राजी नहीं है . Read more »
व्यंग्य साहित्य यह आंदोलन , वह आंदोलन ….!! June 13, 2017 by तारकेश कुमार ओझा | Leave a Comment बेशक अपराधी के गांव वाले या परिजनों के लिए यह मामूली बात थी। क्योंकि उसका जेल आना – जाना लगा रहता था। अपराधी को जीप में बिठाने के दौरान परिजनों ने पुलिस वालों से कहा भी कि ले तो जा रहे हैं ... लेकिन ऐसी व्यवस्था कीजिएगा कि बंदे को आसानी से जमानत मिल जाए। पुलिस ने केस फारवर्ड किया तो अदालत ने उसकी जमानत याचिका नामंजूर करते हुए आरोपी को 14 दिनों की न्यायिक हिरासत में भेज दिया। बस फिर क्या था। आरोपी के गांव में कोहराम मच गया। लोगों ने पास स्थित राष्ट्रीय राजमार्ग पर पथावरोध कर ट्रैफिक जाम कर दिया। सूचना पर पुलिस पहुंची तो उन्हें दौड़ा – दौड़ा कर पीटा। Read more » Featured आंदोलन
व्यंग्य साहित्य सम्मानित करने का टुकड़ा June 11, 2017 by अशोक गौतम | Leave a Comment ज्यों ही यह खबर पूरे जंगल में जंगल की आग की तरह फैली कि मैं अबके फिर अपनी टांग अड़ा सरकार की नरवंश अधिसूचना कमेटी का सक्रिय सदस्य हो गया हूं, तो मुझे देश के समस्त पशुओं, जानवरों के संगठनों के फोन पर फोन आने लगे। आदमी तो मुझे देखते ही ऐसे गायब हो जाते […] Read more » नरवंश अधिसूचना कमेटी सम्मानित सम्मानित करने का टुकड़ा
व्यंग्य राहुल बाबा का गीता ज्ञान June 11, 2017 by विजय कुमार | Leave a Comment मेरी राय है कि इसके बाद वे रामायण, महाभारत, वेद, पुराण और स्मृतियों का भी अध्ययन करें। अच्छा हो वे श्री गुरुग्रंथ साहब, बाइबल, कुरान, त्रिपिटक और जैनागम ग्रंथ भी पढ़ें। इससे उन्हें भारत में प्रचलित विभिन्न धर्म, पंथ, सम्प्रदाय और मजहबों के बारे में पता लगेगा। इस जन्म की तो मैं नहीं जानता, पर शायद इससे उनका अगला जन्म सुधर जाए। Read more » Featured Rahul Gandhi reading Gita and Upanishaad राहुल बाबा का गीता ज्ञान
व्यंग्य व्यंग : आप हमारे लीडर नही हो …! June 3, 2017 by अनुज हनुमत | Leave a Comment पहले दिल्ली और लखनऊ में टिकट के लिए हाथ फैलाते हैं फिर जनता के पास आकर वोट के लिए । अगर आपकी दिल्ली -लखनऊ में बात नही बनी तो वहीं विचारों में मतभेद बताकर आप दूसरी पार्टी में भी छलांग लगाकर कूदने से बाज नही आते हो । अगर पिछले 5 साल अच्छे से मन […] Read more » लीडर
व्यंग्य बकरी हों तो वही… May 31, 2017 by विजय कुमार | 1 Comment on बकरी हों तो वही… हमारे प्रिय शर्मा जी पिछले दिनों किसी विवाह के सिलसिले में मध्य प्रदेश गये थे। परसों वे लौटे, तो मैं उनसे मिलने चला गया। चाय पीते और शादी की मिठाई खाते हुए शर्मा जी ने म.प्र. का एक अखबार मुझे देकर कहा – लो वर्मा, इसे पढ़ो..। – शर्मा जी, कहां ताजी चाय और कहां […] Read more » Featured मुनव्वर सलीम मुनव्वर सलीम की 23 बकरियां
व्यंग्य साहित्य खबरों के खजाने का सूखाग्रस्त क्षेत्र …!! May 27, 2017 by तारकेश कुमार ओझा | Leave a Comment तारकेश कुमार ओझा ब्रेकिंग न्यूज… बड़ी खबर…। चैनलों पर इस तरह की झिलमिलाहट होते ही पता नहीं क्यों मेरे जेहन में कुछ खास परिघटनाएं ही उमड़ने – घुमड़ने लगती है। मुझे लगता है यह ब्रेकिंग न्यूज देश की राजधानी दिल्ली के कुछ राजनेताओं के आपसी विवाद से जुड़ा हो सकता है या फिर किसी मशहूर […] Read more » सूखाग्रस्त क्षेत्र
व्यंग्य साहित्य चोरी और डकैती का लाइसेंस May 24, 2017 by विजय कुमार | Leave a Comment सच कहूं, मैं कपिल सिब्बल से बहुत प्रभावित हूं। यद्यपि मेरी उनसे आज तक भेंट नहीं हुई। भगवान न करे कभी हो। चूंकि वकील, डॉक्टर और थाने के चक्कर में एक बार फंसे, तो जिंदगी भले ही छूट जाए, पर ये पिंड नहीं छोड़ते। हमारे प्रिय शर्मा जी ने जवानी में डेढ़ साल कानून की […] Read more » कपिल सिब्बल
व्यंग्य साहित्य अथ श्री आलोचक कथा May 24, 2017 by अमित शर्मा (CA) | Leave a Comment वे आलोचक है, अभी से नहीं, तभी से, मतलब जब से उनके धरती पर अवतरित होने की दुर्घटना हुई थी तब से। यहाँ तक की उन्होंने अपने अवतरित होने की भी आलोचना कर दी थी। वो आलोचना खाते, पीते, ओढ़ते और बिछाते है। उनकी रग- रग में आलोचना समाई हुई है। वो कर्मयोगी भी है, […] Read more » Featured अथ श्री आलोचक कथा
व्यंग्य साहित्य नयेपन की डिमांड और अलग तरह की राजनीती May 13, 2017 by अमित शर्मा (CA) | Leave a Comment आम आदमी के नाम पर बनी पार्टी ने मतदाता के एंटरटेनमेंट का पूरा ख्याल रखा है । आम आदमी पार्टी ("आप") ने लोकतंत्र की नीरसता को ना केवल दूर करने का काम किया है बल्कि दूरदर्शी राजनैतिक मूल्यों की स्थापना करने में भी महती भूमिका निभाई है। आप पर कोई भ्रष्टाचार का आरोप लगाए उससे पहले ही आप सबको भ्रष्टाचारी घोषित कर स्वयं को ईमानदारी का एकमात्र मसीहा घोषित कर दो। इससे ना तो आप की ईमानदारी साबित होती है और ना ही दूसरे की बेईमानी लेकिन टाइमपास अच्छा हो जाता है और मुँह बाए खड़ी सैंकड़ो समस्याओ के बावजूद सबका मूड फ्रेश रहता है। Read more » Featured नयेपन की डिमांड
व्यंग्य साहित्य दूर के रसगुल्ले , पास के गुलगुले …!! May 12, 2017 by तारकेश कुमार ओझा | Leave a Comment तारकेश कुमार ओझा इसे जनसाधारण की बदनसीबी कहें या निराशावाद कि खबरों की आंधी में उड़ने वाले सूचनाओं के जो तिनके दूर से उन्हें रसगुल्ले जैसे प्रतीत होते हैं, वहीं नजदीक आने पर गुलगुले सा बेस्वाद हो जाते हैं। मैगों मैन के पास खुश होने के हजार बहाने हो सकते हैं, लेकिन मुश्किल यह कि […] Read more » दूर के रसगुल्ले