विधि-कानून जनांदोलन के अलावा और कोई रास्ता नहीं May 16, 2013 / May 16, 2013 by हिमकर श्याम | Leave a Comment हिमकर श्याम हिंदी को राष्ट्रभाषा का दर्जा हासिल करने के लिए लंबा संघर्ष करना पड़ा। यह दर्जा भी केवल कागजों तक ही सीमित रहा। गुजरात उच्च न्यायालय के अनुसार ऐसा कोई प्रावधान या आदेश रिकार्ड में मौजूद नहीं है जिससे हिंदी को राष्ट्रभाषा घोषित किया गया हो। दिल ही दिल में सभी स्वीकार करते हैं […] Read more »
विधि-कानून दरअसल अब तक परतंत्र ही हैं हम May 16, 2013 by गिरीश पंकज | 4 Comments on दरअसल अब तक परतंत्र ही हैं हम गिरीश पंकज ”कहने को आज़ाद हो गए मगर गुलामी जारी है मुझको हर पल ही लगता है, ये दिल्ली हत्यारी है”. अपनी ही काव्य पंक्तियों से बात शुरू कर रहा हूँ। सच कहूं तो बड़ी पीड़ा होती है , जब हम देखते हैं कि अपने ही स्वतंत्र देश में अपनी ही राष्ट्र भाषा के लिए […] Read more »
विधि-कानून सुप्रीम कोर्ट की सभी भाषाओं की अलग-अलग बेंच हो (पार्ट-2) May 16, 2013 / May 16, 2013 by विकास कुमार गुप्ता | 1 Comment on सुप्रीम कोर्ट की सभी भाषाओं की अलग-अलग बेंच हो (पार्ट-2) 26 जनवरी 1950 को भारत का संविधान लागू हुआ। संविधान के अनुच्छेद 343 से 351 तक भाषा से सम्बन्धित उपबन्धों का विवेचन किया गया है। अनुच्छेद 343 के अनुसार भारत की राजभाषा हिन्दी और लिपि देवनागरी निर्धारित की गयी है। और साथ में इस धारा के उप विन्दु 2 में कहा गया है कि ”किसी […] Read more » सुप्रीम कोर्ट की सभी भाषाओं की अलग-अलग बेंच हो
विधि-कानून सुप्रीम कोर्ट में सभी भाषाओं की अलग-अलग बेंच हो May 15, 2013 by विकास कुमार गुप्ता | Leave a Comment विश्व के किसी भी देश के नागरिकों को अपने मातृभाषा के बारे उच्च शिक्षा, न्याय और अन्य मुलभूत सुविधायें पाने का अधिकार है। लेकिन भारत में ऐसा नहीं है। भारत में तीन प्रतिशत अंग्रेजी 97 प्रतिशत जनता पर शासन करती है। आईयें इतिहास में खंगालते है कि आखिर यहां ऐसा क्यो है। –भारतीय समाज में […] Read more » सुप्रीम कोर्ट में सभी भाषाओं की अलग-अलग बेंच हो
विधि-कानून न्याय की भाषा अगर अनजानी हो तो कैसे किसी का समाधान करेगी May 14, 2013 / May 14, 2013 by प्रवक्ता.कॉम ब्यूरो | 2 Comments on न्याय की भाषा अगर अनजानी हो तो कैसे किसी का समाधान करेगी प्रतिभा सक्सेना अनायास ही मन में प्रश्न उठता है – न्यायालय किसलिये स्थापित किये गये हैं ? लंबे समय के वाद-विवादों,गवाहियों,प्रमाणों और साक्षियों के बाद जो निर्णय लिये जाते हैं इसीलिये न कि दोषी के दंड का औचित्य सिद्ध हो , जन-मन में उचित-अनुचित का बोध जागे जिससे कि वह अपराध से विरत रहें. , […] Read more »
विधि-कानून सीमा पार के संविधान पर एक विहंगम दृष्टि May 13, 2013 by एडवोकेट मनीराम शर्मा | Leave a Comment मनी राम शर्मा तुर्की के संविधान के अनुच्छेद 40 के अनुसार लोक पद धारण करने वाले व्यक्ति के अवैध कृत्यों से होने वाली हानि के लिए राज्य द्वारा पूर्ति की जाएगी| राज्य ऐसे अधिकारी के विरुद्ध अपना अधिकार सुरक्षित रखता है| भारत में ऐसे प्रावधान का नितांत अभाव है| कानून में स्थापित व्यवस्था के अनुसार […] Read more » Indian constitution indian constitution vs turkey constitution turkey constitution
विधि-कानून अदालतों में अंग्रेज़ी की अनिवार्यता : हमारी ग़ुलाम मानसिकता का प्रमाण May 13, 2013 / May 13, 2013 by अम्बा चरण वशिष्ठ | Leave a Comment अम्बा चरण वशिष्ठ अंग्रेज़ तो हमें 65 साल पूर्व आज़ाद कर चले गये पर हमारी ग़ुलामी वाली मानसिकता हमारा पीछा नहीं छोड़ रही है। यह स्थिति एक नहीं भारतीय जीवन व प्रशासन के अनेक पहलुओं में उजागर होती है। लार्ड मैकाले ने लगभग 8 वर्ष में ही भारतीय दण्ड संहिता (आईपीसी) की रचना कर दी […] Read more » अंग्रेजी अदालत न्यायालय
विधि-कानून हमारे लायक नही है ये लोकतंत्र May 8, 2013 / May 8, 2013 by राकेश कुमार आर्य | Leave a Comment भारत के विषय में बड़े चौंकाने वाली स्थिति है। हमारे किसानों मजदूरों और कारीगरों को उजाड़कर भारत की आर्थिक आजादी को विदेशी कंपनियों के यहां गिरवी रख देने का कुचक्र आर्थिक उदारीकरण के नाम पर और देश के औद्योगिकीकरण के नाम पर बड़े जोर शोर से चल रहा है। चीन, जो कि हमारा सबसे बड़ा […] Read more » हमारे लायक नही है ये लोकतंत्र
जन-जागरण विधि-कानून बेहतर संविधान की तलाश में May 7, 2013 / May 7, 2013 by एडवोकेट मनीराम शर्मा | 2 Comments on बेहतर संविधान की तलाश में हमारे नेतृत्व द्वारा भारतीय संविधान की भूरी-भूरी प्रशंसा की जाती है और कहा जाता है कि हमारा संविधान विश्व के श्रेष्ठ संविधानों में से एक है| वास्तविकता क्या है यह निर्णय पाठकों के विवेक पर छोडते हुए लेख है कि हमारा संविधान ब्रिटिश संसद के भारत सरकार अधिनयम,1935 के प्रावधानों से काफी कुछ मेल खाता […] Read more » indian constitution versus turkey constitution बेहतर संविधान की तलाश में
जरूर पढ़ें परिचर्चा महत्वपूर्ण लेख विधि-कानून परिचर्चा : सर्वोच्च न्यायालय एवं उच्च न्यायालयों में भारतीय भाषा में न्याय पाने का हक April 20, 2013 / May 14, 2013 by प्रवक्ता.कॉम ब्यूरो | 21 Comments on परिचर्चा : सर्वोच्च न्यायालय एवं उच्च न्यायालयों में भारतीय भाषा में न्याय पाने का हक आजादी के बाद भी, जनता है परतंत्र! है कैसी ये आजादी, कैसा यह जनतंत्र? संविधान में यह प्रावधान है कि उच्चतम न्यायालय और प्रत्येक उच्च न्यायालय में सभी कार्यवाहियां केवल अंग्रेजी भाषा में होंगी। इस अन्याय को खतम करने के लिए श्री श्याम रुद्र पाठक अपने दो सहकारी कार्यकर्ताओं के साथ गत 4 दिसम्बर 2012 […] Read more » न्याय एवं विकास अभियान श्याम रुद्र पाठक
विधि-कानून हम और हमारा लोकतंत्र किधर जा रहे हैं ….. April 17, 2013 / April 17, 2013 by एडवोकेट मनीराम शर्मा | Leave a Comment जापान के संविधान के अनुच्छेद 35 में आगे प्रावधान है कि समस्त लोगों का अपने घरों में, कागजात और सामान का प्रवेश, तलाशी और जब्ती के प्रति सुरक्षित रहने के अधिकार का पर्याप्त कारण और विशेष रूप से तलाशी के स्थान और तलाशी की वस्तुओं का उल्लेख सहित जारी वारंट या अनुच्छेद 33 में प्रावधान […] Read more » हम और हमारा लोकतंत्र किधर जा रहे हैं
विधि-कानून सर्वोच्च न्यायालय ही है पुरोहित विदुर April 16, 2013 / April 16, 2013 by राकेश कुमार आर्य | Leave a Comment एक सामाजिक संगठन प्रवासी भलाई संगठन की ओर से दायर एक जनहित याचिका पर संज्ञान लेते हुए सर्वोच्च न्यायालय ने राजनीतिक, सामाजिक और धार्मिक नेताओं के भड़काऊ भाषणों पर रोक लगाने की मांग को लेकर केन्द्र सरकार से जवाब तलब किया है। प्रधान न्यायाधीश अल्तमश कबीर की अध्यक्षता वाली पीठ ने चुनाव आयोग से भी […] Read more »