मीडिया ये इश्क नही आसा बस इतना समझ लिजे………. October 8, 2012 / October 8, 2012 by शादाब जाफर 'शादाब' | 1 Comment on ये इश्क नही आसा बस इतना समझ लिजे………. शादाब जफर ‘‘शादाब’’ पीपीपी यानि पाकिस्तान पीपुल्स पार्टी कल तक शायद इस का ये ही मतलब था पर बांग्लादेशी अखबार ‘‘बिल्ट्ज़’’ ने हिना और बिलावल की प्रेम कहानी जब से छापी है तब से पीपीपी का मतलब पाकिस्तान पीपुल्स पार्टी से प्यार, प्यार, प्यार हो गया है जिससे पाक राष्ट्रपति जरदारी बेहद नाराज़ हैं और […] Read more » bilawal & hina rabbani
मीडिया राजनीति थोरियम घोटाला : पड़ताल एक कदम आगे : भाग-1 October 7, 2012 / October 7, 2012 by अभिनव शंकर | Leave a Comment अभिनव शंकर पिछले लेख में मुख्यतः इस घोटाले की “परिकल्पना” बतायी गयी थी, पृष्ठभूमि समझाई गयी थी,बताया गया की कैसे एक बेहद सुनियोजित,सामरिक रूप से बेहद संवेदनशील एवं राष्ट्र-कल्याणकारी योजना अन्तराष्ट्रीय साजिशों का शिकार बनी.अब इस साजिश को अमल में कैसे लाया गया इसकी बात करते हैं. लेकिन इससे पहले इस घोटाले के अर्थशास्त्र पर […] Read more » थोरियम घोटाला
मीडिया वर्तमान पत्रकारिता को बाजारवाद से बचाना होगा October 2, 2012 / September 30, 2012 by अविनाश वाचस्पति | Leave a Comment अविनाश वाचस्पति महात्मा गांधी की पत्रकारिता अच्छाई, सच्चाई और अहिंसा की रही है। उसी के जरिए देश को आजाद कराया गया और वो सिर्फ आजाद ही नहीं हुआ, कुछ मामलों में अधिक ही आजाद हो गया परंतु उस स्थिति के दोषी गांधी जी नहीं हैं। कुछ परिस्थितियों को सुधारना किसी के बस में नहीं होता […] Read more »
जन-जागरण मीडिया भारतीय संप्रभुता पर संकट: एक विवेचन October 1, 2012 / September 30, 2012 by सिद्धार्थ मिश्र “स्वतंत्र” | Leave a Comment सिद्धार्थ मिश्र‘स्वतंत्र’ विकीलिक्स के खुलासों ने रातांे रात पूरी दुनिया की रंगत बदल कर रख दी है । इसका सीधा सा असर अमेरिका पर पड़ता दिख रहा है । वास्तव में इस रिपोर्ट ने वैश्विक साजिशों को बेनकाब कर डाला है । ऐसे में इस संगठन के प्रति अमेरिका की आक्रामकता को समझा जा सकता […] Read more » भारतीय संप्रभुता पर संकट
मीडिया मीडिया का स्वनियंत्रण बनाम बाह्यनियंत्रण और सर्वोच्च न्यायालय के दो निर्णय September 25, 2012 by रवि शंकर | Leave a Comment रवि शंकर पिछले कुछ दिनों से मीडिया यानी कि पत्रकारिता पर अंकुश लगाए जाने की खबरें काफी चर्चा में रही हैं। सरकार जहां एक ओर इस मामले में कानून बनाए जाने की बात कह रही थी तो मीडिया इसका पुरजोर विरोध करने और आत्मानुशासन की बातें कह रहा था। इसी बीच सर्वोच्च न्यायालय के दो […] Read more » मीडिया का स्वनियंत्रण
महत्वपूर्ण लेख मीडिया ‘अ’सत्यमेव जयते! September 25, 2012 / September 25, 2012 by हिमांशु शेखर | Leave a Comment हिमांशु शेखर लोकप्रिय फिल्म अभिनेता आमिर खान ‘सत्यमेव जयते’ के जब छोटे पर्दे पर आए तो यहां भी वे बेहद सफल रहे और उनके कार्यक्रम को हर तरफ जमकर सराहा गया. सामाजिक मसलों को उठाने वाले उनके इस कार्यक्रम की पहली कड़ी में कन्या भ्रूण हत्या के मामले को उठाया गया और बड़ी मजबूती से […] Read more » aamir klhan show satyamev jayate mukesh ambani and satyamev jayate
मीडिया स्त्री के वस्तुकरण में विज्ञापन की भूमिका September 19, 2012 by सारदा बनर्जी | 2 Comments on स्त्री के वस्तुकरण में विज्ञापन की भूमिका सारदा बनर्जी स्त्री के वस्तुकरण में जितनी मदद विज्ञापन ने की है उतना किसी और माध्यम ने नहीं। विज्ञापन ने स्त्री के इमेज को वस्तु में तब्दील करके उसे लोकप्रिय बनाने में गहरी भूमिका अदा की है।यही वजह है कि आज स्त्री घर में प्रयोग होने वाली सामान्य वस्तुओं से लेकर खास किस्म के प्रोडक्ट […] Read more » स्त्री विज्ञापन
मीडिया ‘अवांछित सामग्री’ से बचे मीडिया September 13, 2012 / September 13, 2012 by निर्मल रानी | Leave a Comment निर्मल रानी हमारे देश में प्रेस अथवा मीडिया को लोकतंत्र का चौथा स्तंभ स्वीकार किया जाता है। ज़ाहिर है इतने बड़े अलंकरण के बाद मीडिया की जि़म्मेदारी उतनी ही बढ़ जाती है जितनी कि लोकतंत्र के शेष तीन स्तंभों की है। यानी न्यायपालिका,कार्यपालिका व संसदीय व्यवस्था के बराबर की जि़म्मेदारी। यहां इस प्रकार की तुलनात्मक […] Read more » अवांछित सामग्री' मीडिया
मीडिया घटिया कार्टून बना कर भगत सिंह हो गया असीम त्रिवेदी? September 12, 2012 by तेजवानी गिरधर | 19 Comments on घटिया कार्टून बना कर भगत सिंह हो गया असीम त्रिवेदी? तेजवानी गिरधर कैसी विडंबना है कि देशभक्ति की मौजूदा लहर में एक कार्टूनिस्ट असीम त्रिवेदी अभिव्यक्ति की आजादी के नाम पर देश के राष्ट्रीय प्रतीक चिह्न के साथ अपमानजनक छेड़छाड़ करता है और इस कृत्य की बिना पर महान क्रांतिकारी व देशभक्त भगत सिंह से अपनी तुलना करता है। और उससे भी अधिक दुर्भाग्यपूर्ण है […] Read more » cartoon by asim trivedi असीम त्रिवेदी
मीडिया प्रजातंत्र की प्राणशक्ति के बचाव के लिए / मा. गो. वैद्य September 12, 2012 by मा. गो. वैद्य | Leave a Comment राम बहादुर राय एक निर्भीक एवं निर्भय पत्रकार है. जयपुर से प्रकाशित होने वाले ‘पाथेय कण’ पाक्षिक के १ अगस्त के अंक में उनका एक लेख प्रकाशित हुआ है. शीर्षक पर दिए आंकड़े से ध्यान में आता हे कि, इस विषय पर उनका यह तीसरा लेख है; मतलब उनके प्रदीर्घ लेख का तीसरा भाग है. […] Read more » प्रेस आयोग मीडिया राम बहादुर राय लोकतंत्र
मीडिया राजनीति पूर्वाग्रह रखकर किसी का विरोध नहीं किया जाना चाहिये ! September 9, 2012 / September 9, 2012 by इक़बाल हिंदुस्तानी | Leave a Comment इक़बाल हिंदुस्तानी हम निष्पक्ष व ईमानदार होकर मसले आसानी से हल कर सकेंगे! पूरा देश एक होकर भी एक नहीं है। दलगत आधार की तो बात ही छोड़ दीजिये जाति, धर्म और क्षेत्र के साथ ही अब हम व्यक्तिगत विरोध और समर्थन पर उतर आये हैं। मिसाल के तौर पर पिछले दिनों गुजरात के मुख्यमंत्री […] Read more »
मीडिया क्या अब विदेशी मीडिया हांकेगा देश को? September 8, 2012 by सिद्धार्थ शंकर गौतम | Leave a Comment सिद्धार्थ शंकर गौतम एक समय विदेशी मीडिया की आँख का तारा बने प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह लगता है अब उसकी आँखों में चुभने लगे हैं| तभी तो घरेलू मोर्चे पर भ्रष्टाचार के आरोपों पर घिरी संप्रग सरकार और प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह की फजीहत करने में विदेशी मीडिया भी बढ़-चढ़कर हिस्सा ले रहा है। अमेरिकी अखबार वाशिंगटन […] Read more » foreign media will influence the country विदेशी मीडिया