टेलिविज़न मीडिया राजनीति चैनल डिबेट की आक्रामकता में धुंधलाता सौहार्द June 6, 2022 / June 6, 2022 by ललित गर्ग | Leave a Comment -ललित गर्ग – इस्लाम एवं पैगम्बर पर टिप्पणी के बाद देश-विदेश खासकर खाड़ी देशों में घिरी भारतीय जनता पार्टी ने अपने दो प्रवक्ताओं नूपुर शर्मा एवं नवीन कुमार जिंदल पर एक्शन लेते हुए उन्हें पार्टी से बाहर का रास्ता दिखा दिया है। भाजपा ने स्पष्ट किया है कि हम सभी धर्मों और उनके पूजनीयों का […] Read more » Blur harmony in the aggressiveness of the channel debate Naveen Jindal Nupur Sharma
राजनीति नरेंद्र मोदी की प्रतीक्षा में उतावला राष्ट्र June 6, 2022 / June 7, 2022 by अरूण कुमार जैन | Leave a Comment आगामी लोकसभा चुनाव के मद्देनजर भारतीय जनता पार्टी की चुनाव अभियान समिति का अध्यक्ष गुजरात के मुख्यमंत्राी नरेंद्र मोदी जबसे बने हैं, तबसे पूरे देश में एक अजीब हलचल देखने को मिल रही है। देशवासियों को लगता है कि अब सब कुछ ठीक होने वाला है। यूपीए सरकार के नेतृत्व में सोये राष्ट्र की जागने […] Read more » Nation eager to wait for Narendra Modi नरेंद्र मोदी की प्रतीक्षा में उतावला राष्ट्र
राजनीति भारतीय व्यवस्था में ‘अपनी-अपनी ढपली, अपना-अपना राग’ का बोलबाला June 5, 2022 / June 7, 2022 by अरूण कुमार जैन | Leave a Comment वर्तमान समय भारत ही नहीं बल्कि पूरी दुनिया के लिए मंथन का दौर है? इस मंथन से क्या निकलेगा यह तो वक्त ही बतायेगा, किंतु उम्मीद की जा रही है कि आने वाला समय पूरी दुनिया के लिए अच्छा ही होगा। मंथन का दौर किसी एक क्षेत्रा में ही नहीं बल्कि हर क्षेत्रा में चल रहा है। इस मंथन में नकारात्मक शक्तियों का क्षय एवं सकारात्मक श्ािक्तयों का पुनः उत्थान एक तरह से निश्चित माना जा रहा है। आज जिस तरह पूरी दुनिया में तमाम तरह की अप्राकृतिक एवं असामयिक घटनाएं देखने एवं सुनने को मिल रही हैं, वे इस बात का प्रमाण हैं कि मंथन का दौर चल रहा है। मंथन में अमृत एवं विष दोनों का निकलना स्वाभाविक है किंतु भगवान भोलेनाथ की तरह समाज में आज ऐसे लोगों की आवश्यकता है जो ‘विष’ का पान स्वयं करें और ‘अमृत’ समाज कल्याण के लिए छोड़ दें। पूरी दुनिया के साथ यदि भारत की बात की जाये तो यह पूर्ण रूप से एक प्रजातांत्रिक राष्ट्र है। प्रजातंत्रा का वास्तविक अर्थ है प्रजा यानी आम जनता का राज्य किंतु आज यह निहायत ही विचारणीय प्रश्न है कि क्या वास्तव में देश में आम जनता का ही शासन है या प्रजातंत्रा के नाम पर प्रजा यानी आम जनता के साथ छल हो रहा है। यह बात आम जनता की भी समझ में नहीं आ रही है कि देश तो प्रजातांत्रिक है, किंतु प्रजा के हाथ कुछ लग नहीं रहा है। ‘आम जनता’ के नाम पर ‘खास’ लोगों का पोषण हो रहा है। भारतीय शासन-प्रशासन प्रणाली या व्यवस्था इस प्रकार की बन चुकी है कि इस व्यवस्था में ‘कोई खा-खाकर परेशान है तो कोई खाने बिना मर रहा है।’ आखिर इस प्रकार की व्यवस्था को एक आदर्श व्यवस्व्था कैसे कहा जा सकता है? आखिर ऐसा हो भी क्यों न? क्योंकि व्यवस्था को सुचारु रूप से संचालित करने के लिए जो आवश्यक अंग हैं, उनमें आपसी समन्वय एवं एकता की कमी है। संविधान में हमारी व्यवस्था को संचालित करने के लिए कार्यपालिका, न्याय पालिका एवं विधायिका की विधिवत व्यवस्था की गई है और यह तय किया गया है कि किसके क्या काम, क्या कर्तव्य एवं क्या अधिकार हैं? कार्यपालिका, न्यायपालिका एवं विधायिका के अतिरिक्त एक मीडिया भी है, जिसे व्यवस्था के अंतर्गत चौथे स्तंभ के रूप में माना जाता है। व्यवस्था के ये चारों स्तंभ एक दूसरे के पूरक एवं सहायक हैं। यदि इनमें से कोई एक भी स्तंभ अपनी जिम्मेदारियों से विमुख हो जाये तो पूरी व्यवस्था ध्वस्त हो जायेगी। वैसे तो सभी अंगों का अपना एक विशेष महत्व है, किंतु विधायिका एक ऐसा स्तंभ है जिसे देश में विधान यानी नियम-कानून बनाने का अधिकार है। इस सतंभ को सीधे-सीधे जन-प्रतिनिधियों का माना जा सकता है। ये जनप्रतिनिधि प्रत्यक्ष रूप से सरकार चलाते हैं। इन्हीं के नेतृत्व में देश के लिए नीतियां एवं कार्यक्रम बनाये जाते हैं। जन प्रतिनिधियों की देख-रेख में इन्हीं नीतियों एवं कार्यक्रमों को सुचारु रूप से संचालित करने की जिम्मेदारी कार्यपालिका की होती है। कार्यपालिका का सीधा-सा अर्थ ब्यूरोक्रेसी या पूरी की पूरी नौकरशाही से है। इस व्यवस्था को सीधे-सीधे इस भाषा में भी समझा जा सकता है कि जिन लोगों को जनता की सेवा करने की जिम्मेदारी दी गई है, चाहे वह किसी भी रूप में हों, कार्यपालिका के अंतर्गत आते हैं। शासन-प्रशासन में किसी भी किस्म का व्यवधान उत्पन्न न हो, कोई नियमों-कानूनों के खिलाफ कार्य करने एवं चलने का दुस्साहस न करे या अनैतिक कार्य न करे, ऐसे सभी लोगों को दंडित करने की जिसकी जिम्मेदारी है, वह न्यायपालिका है। न्यायपालिका के बारे में समझने एवं जानने के लिए अलग से लिखा जा सकता है, किंतु फिलहाल अभी यही कहा जा सकता है कि संविधान विरोधी, समाज विरोधी, देश विरोधी एवं अन्य अनैतिक कार्य न हों, इसे नियंत्रित करने में न्यायपालिका बहुत मददगार साबित हो रही है। कार्यपालिका, विधायिका एवं न्यायपालिका के अलावा एक स्तंभ मीडिया भी है, जिसे चौथे स्तंभ के रूप में जाना जाता है। मीडिया की जिम्मेदारी यह है कि इन स्तंभों से कहीं कोई चूक हो जाये या अपने दायित्व का निर्वाह न करें तो उसके प्रति मीडिया जनता को जागरूक करे और इन स्तंभों को अपने कर्तव्यों से भटकने न दे। देश में जहां कहीं अज्ञानता, अशिक्षा, सामाजिक कुरीति, अंधविश्वास, भ्रष्टाचार, अपराध, बेरोजगारी या अन्य किसी तरह की बुराई या कमजोरी नजर आये तो मीडिया शासन-प्रशासन एवं देश की आम जनता को उसके प्रति जागरूक करे। कुल मिलाकर कहा जा सकता है कि समाज में मीडिया की भूमिका एक सजग प्रहरी की है। मीडिया यदि प्रहरी की भूमिका ठीक ढंग से निभाये तो बाकी तीनों स्तंभ सचेत रहेंगे। उन्हें ऐसा लगेगा कि वे जो कुछ भी कर रहे हैं, उन पर किसी की नजर है। वर्तमान समय में देखने में आ रहा है कि ये चारों स्तंभ एक दूसरे के पूरक न होकर प्रतिद्धंदी के रूप में नजर आते हैं। हालांकि, इस प्रकार की स्थिति सभी मामलों में देखने को मिलती है, ऐसा नहीं कहा जा सकता है, किंतु तमाम मौकों पर ऐसा देखने को मिल जाता है। कई बार ऐसा देखने को मिलता है कि एक स्तंभ दूसरे स्तंभ पर अपना वर्चस्व स्थापित करने की कोशिश करता है। ऐसे में हर स्तंभ के अधिकारों का संतुलन बिगड़ जाता है। विशेषकर जन-प्रतिनिधियों की इच्छा तो यही होती है कि उनके ऊपर किसी तरह का कोई नियंत्राण स्थापित न हो। जन-प्रतिनिधि यही चाहते हैं कि उनका प्रभुत्व हर किसी पर बना रहे। कई बार देखने में आया है कि न्याय पालिका की तरफ से कुछ सख्त निर्णय या टिप्पणी आ जाती है तो जन-प्रतिनिधियों को नागवार लगने लगती है और इसके विरोध में सभी दलों के नेता एकजुट होने लगते हैं। अभी हाल-फिलहाल कुछ ऐसा ही देखने को मिला है। कई बार न्यायपालिका की भूमिका को देखकर ऐसा लगता है कि यदि न्यायपालिका न होती तो देश में किसी भी घोटाले का पर्दाफाश ही नहीं हो पाता। हाल के कुछ वर्षों में देखने में आया है कि न्यायपालिका की सक्रियता के कारण ही कुछ घोटालों को पर्दाफाश हो गया और कुछ माननीयों को जेल की हवा भी खानी पड़ी। आज न्यायपालिका कह रही है कि यदि किसी भी व्यक्ति को सजा हो जाये तो उसे चुनाव लड़ने से तुरंत रोक दिया जाये तो इसमें क्या हर्ज है? यह तो बहुत अच्छी बात है किंतु दुर्भाग्य इस बात का है कि इस निर्णय के विरुद्ध पूरी राजनैतिक बिरादरी एकजुट हो गई है। इसी प्रकार राजनैतिक दलों को आरटीआई के दायरे में लाने के पक्ष में राजनैतिक दल तैयार नहीं हैं। इसके विरोध में तमाम राजनैतिक दल लामबंद हो गये, किंतु संसद में जब सांसदों का वेतन-भत्ता बढ़ाने एवं अन्य किसी तरह की सुविधा देने की बात आती है तो सभी दल एकजुट हो जाते हैं। आखिर इस प्रकार की स्थिति उत्पन्न ही क्यों हुई कि देश की राजनीति को सुधारने एवं भ्रष्टाचार पर अंकुश लगाने के लिए न्यायपालिका को आगे आना पड़ रहा है। यह काम तो विधायिका एवं कार्यपालिका को करना चाहिए था। तमाम लोग तो अब यहां तक कहने लगे हैं कि अब न्यायपालिका ही उम्मीद की एक मात्रा किरण है। कभी-कभी ऐसा देखने को मिलता है कि यदि मीडिया न होता तो ऐसा नहीं होता, […] Read more » भारतीय व्यवस्था
राजनीति भारत के अनाज पर दुनिया की निगाहें June 4, 2022 / June 4, 2022 by प्रमोद भार्गव | Leave a Comment प्रमोद भार्गव एक समय वह था, जब यूरोप को ‘रोटी की टोकरी‘ की संज्ञा प्राप्त थी। स्वयं भारत ने आजादी के बाद लंबे समय तक आस्ट्रेलिया से गेहूं आयात करते हुए अपनी बड़ी आबादी का पेट भरा है। लेकिन आज भारत गेहूं ही नहीं अनेक आवष्यक खाद्य पदार्थों के उत्पादन में अग्रणी देश है। गर्म हवाओं के प्रभाव में […] Read more » World's eyes on India's grain
राजनीति मोहन भागवत की बोध-दृष्टि में ज्ञानवापी June 4, 2022 / June 4, 2022 by ललित गर्ग | 1 Comment on मोहन भागवत की बोध-दृष्टि में ज्ञानवापी -ललित गर्ग – किसी भी देश की माटी को प्रणम्य बनाने, राष्ट्रीय एकता को सुदृढ़ बनाने एवं कालखंड को अमरता प्रदान करने में राष्ट्रनायकों की अहंभूमिका होती है। राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ के सरसंघ चालक होते हुए भी मोहन भागवत ने भारत की वसुधैव कुटुम्बकम् एवं सर्वधर्म समभाव की संस्कृति एवं सिद्धान्तों को निरन्तर बल […] Read more » Gyanvapi in the vision of Mohan Bhagwat मोहन भागवत की बोध-दृष्टि में ज्ञानवापी
राजनीति मुसलमानों से अपील June 4, 2022 / June 4, 2022 by विपिन किशोर सिन्हा | 1 Comment on मुसलमानों से अपील स्पेन यूरोप का एक समृद्ध् रोमन कैथोलिक देश था। था तो यह एक प्रायद्वीप लेकिन इसकी दक्षिणी सीमा के पास ही उत्तरी अफ़्रिका था, जो उस समय तक पूरी तरह एक इस्लामी साम्राज्य बन चुका था। सन् ७११ में उत्तरी अफ़्रिका के मुस्लिम शासक ने स्पेन पर, जिसे उस समय आइबेरियन प्रायद्वीप कहा जाता था, […] Read more » appeal to muslims मुसलमानों से अपील
राजनीति उत्तराखंड की आपदा से उपजे कुछ सवाल June 4, 2022 / June 7, 2022 by अरूण कुमार जैन | Leave a Comment उत्तराखंड की आपदा ने देश को ऐसा गम दिया है, जिसकी भरपाई तो किसी भी कीमत पर नहीं की जा सकती है किंतु इस भीषण आपदा से जो सवाल उभर कर सामने आये हैं उसकी चर्चा विभिन्न रूपों में पूरे देश में हो रही है। यह बात अलग है कि हर कोई अपने-अपने मुताबिक उसकी […] Read more » Some questions arising from the disaster of Uttarakhand उत्तराखंड की आपदा से उपजे कुछ सवाल
राजनीति भ्रष्टाचार एवं कालेधन के खिलाफ भाजपा का संघर्ष संसद से सड़क तक जारी है June 3, 2022 / June 3, 2022 by सिम्मी जैन | Leave a Comment सिम्मी जैनभारतीय जनता पार्टी की वरिष्ठ नेत्राी श्रीमती सिम्मी जैन , दिल्ली प्रदेश भाजपा की मंत्राी एवं दक्षिण दिल्ली नगर निगम के दरियागंज वार्ड से पार्षद होने के साथ-साथ अनेक सामाजिक, धार्मिक एवं सांस्कृतिक संगठनों से भी जुड़ी हुई हैं। पार्टी के प्रति उनकी निष्ठा, योग्यता, ईमानदारी एवं कर्मठता को देखते हुए पार्टी की तरफ […] Read more » BJP's struggle against corruption and black money continues from Parliament to Road: भ्रष्टाचार एवं कालेधन के खिलाफ भाजपा का संघर्ष
राजनीति भ्रष्टाचार के खिलाफ निष्पक्ष कार्रवाई का दौर June 3, 2022 / June 3, 2022 by ललित गर्ग | Leave a Comment – ललित गर्ग –राष्ट्र में भ्रष्टाचार और राजनीतिक अपराधों के विरुद्ध समय-समय पर क्रांतियां होती रही हैं। लेकिन उनका लक्ष्य, साधन और उद्देश्य शुद्ध न रहने से उनका दीर्घकालिक परिणाम संदिग्ध रहा है। लेकिन प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने भ्रष्टाचार के विरूद्ध एक ऐसी क्रांति का शंखनाद किया है जिसने न केवल विभिन्न राजनीतिक दलों एवं […] Read more » The era of fair action against corruption भ्रष्टाचार के खिलाफ निष्पक्ष कार्रवाई का दौर
राजनीति समाज जिंदगी मै रंग भरती बिटिया, चूल्हे-चौके से सिविल सेवा के शीर्ष तक June 2, 2022 / June 2, 2022 by प्रियंका सौरभ | 1 Comment on जिंदगी मै रंग भरती बिटिया, चूल्हे-चौके से सिविल सेवा के शीर्ष तक सिविल सेवा परीक्षा के नतीजों में इस बार देश की बेटियों ने जैसी धूम मचाई है, वह न सिर्फ उनके परिवारजनों बल्कि संपूर्ण भारतीय समाज के लिए गर्व करने का विषय है. -प्रियंका ‘सौरभ’________________________________श्रुति शर्मा, अंकिता अग्रवाल तथा गामिनी सिंगला संघ लोक सेवा द्वारा घोषित सिविल सेवा परीक्षा 2021 में क्रमश: प्रथम, द्वितीय और तृतीय […] Read more » from the stove-top to the top of the civil service Life is full of colors UPSC toppers अंकिता अग्रवाल गामिनी सिंगला श्रुति शर्मा
राजनीति कश्मीर में हिंदुओं की लक्षित हत्याओं का सिलसिला June 2, 2022 / June 2, 2022 by प्रमोद भार्गव | Leave a Comment प्रमोद भार्गव कश्मीर में पाकिस्तान परस्त आतंकवादियों ने लक्षित हिंसा के तहत कश्मीरी हिंदुओं को निशाना बनाए जाने का सिलसिला तेज कर दिया है। कश्मीर में यह सिलसिला अक्टूबर 2021 से शुरू हुआ और 31 मई को दलित स्कूल शिक्षिका रजनी बाला की हत्या के साथ यह संख्या 18 हो गई है। इसके पहले 12 […] Read more » Targeted killings of Hindus in Kashmir कश्मीर में हिंदुओं की लक्षित हत्या
राजनीति कश्मीर में फिर आतंकवाद June 2, 2022 / June 2, 2022 by डॉ. वेदप्रताप वैदिक | Leave a Comment डॉ. वेदप्रताप वैदिक जम्मू-कश्मीर में जबसे धारा 370 हटी है, वहां राजनीतिक उठा-पटक और आतंकवादी घटनाओं में काफी कमी हुई है लेकिन इधर पिछले कुछ हफ्तों में आतंकवाद ने फिर से जोर पकड़ लिया है। कश्मीर घाटी के एक स्कूल में पढ़ा रही जम्मू की अध्यापिका रजनीबाला की हत्या ने कश्मीर में तूफान-सा खड़ा कर […] Read more » Terrorism again in Kashmir कश्मीर में फिर आतंकवाद