राजनीति देश विभाजन के दोषी कौन ? August 17, 2025 / August 23, 2025 by प्रमोद भार्गव | Leave a Comment प्रमोद भार्गव भारत में राष्ट्रीय शैक्षिक अनुसंधान और प्रशिक्षण परिषद (एनसीईआरटी) द्वारा विभाजन की विभीषिका स्मृति दिवस के मौके पर जारी एक विशेष पाठ में भारत के बंटवारे के लिए मोहम्मद अली जिन्ना, कांग्रेस और तत्कालीन ब्रिटिश वायसराय लार्ड माउंटबेटन को जिम्मेदार ठहराया है। पाठ में यह भी उल्लेख है कि विभाजन के बाद कश्मीर […] Read more » देश विभाजन के दोषी
राजनीति मतों की हेराफेरी के जनक और उनके परनाती की सनक August 16, 2025 / November 10, 2025 by मनोज ज्वाला | Leave a Comment कांग्रेस के नेतागण जब चुनाव हार जाते हैं, या हारने की सम्भावनादेख लेते हैं, तब वे ईवीएम में गडबडी का राग अलापने लगते हैं । हॉलाकिचुनावी मतदान के लिए ईवीएम का इस्तेमाल ही हो रहा है- पहले की तत्सम्बन्धी व्यवस्था में होती रही गडबडियों को रोकने के लिए । ‘ईवीएम’ की विश्वसनीयता पर सवाल उठाते रहने वाले कांग्रेसी नेतागण अब इन दिनों मतदाता-सूची में हेराफेरी का एक नया […] Read more » The father of vote rigging and the obsession of his great grandson मतों की हेराफेरी के जनक
राजनीति राजनीतिक स्वाधीनता के बाद अब- लड़नी होगी आर्थिक आजादी की जंग! August 15, 2025 / August 15, 2025 by डॉ घनश्याम बादल | Leave a Comment स्वाधीनता दिवस विशेष : डॉ घनश्याम बादल 15 अगस्त 1947 को आजाद हुआ भारत आज 2025 में आजादी के 78 साल बाद एक दूसरी आजादी के जंग में खड़ा है । बेशक हम एक संप्रभु राष्ट्र हैं, राजनीतिक रूप से हमारा एक अलग देश है और हम स्वतंत्र राष्ट्र हैं लेकिन पिछले कुछ दिनों से […] Read more » After political independence लड़नी होगी आर्थिक आजादी की जंग
राजनीति आज़ादी के “जश्न” के साथ मिली विभाजन की “त्रासदी” August 15, 2025 / August 15, 2025 by प्रदीप कुमार वर्मा | Leave a Comment विभाजन विभीषिका का दिवस 14 अगस्त पर विशेष… प्रदीप कुमार वर्मा भारत माता के कई वीर सपूतों की कुर्बानी के बाद 15 अगस्त सन 1947 को भारत देश विदेशी दासता की बेड़ियों से मुक्त हो गया। भारतीयों के लिए यह एक सुखद पल था लेकिन टीस यह रही कि भारतवर्ष को अपनी आजादी की कीमत […] Read more » विभाजन विभीषिका
राजनीति विदेशी मूल के अमेरिकन नागरिकों की भूमिका और ट्रंप टैरिफ August 15, 2025 / August 15, 2025 by विवेक रंजन श्रीवास्तव | Leave a Comment विवेक रंजन श्रीवास्तव मूल अमेरिकी नागरिक संख्या में सीमित हैं। वहां बड़ी संख्या में विदेशों से आकर बस गए लोगों की जनसंख्या है। अपनी मूल मिट्टी से , भले ही पीढ़ियों पहले वह छूट चुकी हो, मनुष्य के संबंध समाप्त नहीं होते । कमला हैरिस , ऋषि सुनक, सुंदर पिचाई आदि हस्तियों से भारतीय इसी […] Read more » ट्रंप टैरिफ विदेशी मूल के अमेरिकन नागरिकों की भूमिका\
पर्यावरण राजनीति धराली की घटना के निहित – अर्थ August 13, 2025 / August 13, 2025 by राकेश कुमार आर्य | Leave a Comment उत्तराखंड के धराली में ऊपर पहाड़ियों पर बादल फटा और उसके साथ जिस प्रकार बड़ा भारी मलबा पहाड़ से नीचे की ओर आया तो उसने धराली गांव को अतीत बना दिया। हम सबके लिए यह घटना बहुत दुखद रही है। परंतु यह घटना हमें बहुत कुछ सिखा कर भी गई है। इसने बताया है कि […] Read more » The implicit meaning of the Dharali incident धराली की घटना
राजनीति क्या हैं आरएसएस के पंच परिवर्तन August 13, 2025 / August 13, 2025 by डॉ इंदिरा दॉंगी | Leave a Comment राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ एक शताब्दी पुराना एक ऐसा संगठन है जिसे देश सेवा, आपात स्थितियों में नागरिक-सहायता और सांस्कृतिक उत्थान के अगुआ के रूप में भारत क्या, विश्व के नागरिक जानते हैं। राष्ट्रीय का अर्थ हुआ जिसकी सीमा संपूर्ण राष्ट्र हो; लेकिन वास्तव में ये संगठन विश्व पटल पर अपने सेवा कार्य के कारण जाना […] Read more » आरएसएस के पंच परिवर्तन
राजनीति आर्थिक व सैन्य मोर्चे पर अमेरिका-चीन को मुंहतोड़ जवाब देने में सक्षम हुआ भारत, अब बराबरी से ही करेगा बातचीत August 12, 2025 / August 12, 2025 by कमलेश पांडेय | Leave a Comment कमलेश पांडेय दुनिया के आर्थिक और सैन्य मंच पर तेजी से कद्दावर बन चुके गुटनिरपेक्ष देश भारत ने रूस को साधकर नम्बर वन अमेरिका और नम्बर टू चीन को रणनीतिक मुश्किल में डालते हुए भींगी बिल्ली बना दिया है। इससे समकालीन विश्व के जी-7, नाटो, जी–20, ,ब्रिक्स और एससीओ जैसे अंतरराष्ट्रीय संगठनों में ग्लोबल साउथ […] Read more » आर्थिक व सैन्य मोर्चे पर अमेरिका-चीन
राजनीति फट रहे अविश्वास और आरोपों के बम- ख़तरनाक मोड़ पर राजनीति August 12, 2025 / August 12, 2025 by डॉ घनश्याम बादल | Leave a Comment डॉ घनश्याम बादल कांग्रेस के सबसे बड़े नेता राहुल गांधी ने प्रेस कांफ्रेंस करके जिस तरह के आरोप चुनाव आयोग पर लगाए हैं, वे काफी सनसनीखेज हैं। इन आरोपों के माध्यम से राहुल गांधी ने अपना तथा कथित ‘एटमबम’ फोड़ा है जिसके बारे में उन्होंने कहा था कि इस बम के फटते ही चुनाव आयोग उड़ […] Read more » Bombs of mistrust and accusations are exploding- Politics at a dangerous turn ख़तरनाक मोड़ पर राजनीति
राजनीति भारत के साहसिक कदम से अमेरिका की दादागिरी पर लग सकता है ‘ग्रहण’। August 12, 2025 / August 12, 2025 by संतोष कुमार तिवारी | Leave a Comment संतोष कुमार तिवारी अमेरिका की तरफ से भारत पर टैरिफ लगाने का सिर्फ रूस से तेल खरीदना ही एक कारण नहीं है बल्कि इसके पीछे कई और भी कारण हैं। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने भारत पर 25% टैरिफ लगा दिया है, जो 7 अगस्त से प्रभावी है और वहीं इस टैरिफ को बढ़ाकर 50 प्रतिशत करने की चेतावनी दे चुके हैं, जिसके पीछे की वजह भारत द्वारा रूसी तेल खरीदना बताया जा रहा है जबकि भारत का रूस सबसे बड़ा दोस्त है जो हमेशा भारत के साथ बड़े भाई की तरह खड़ा रहता है। इधर अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड टंप ने गीदड़भभकी दिखाते हुए भारत के खिलाफ सख्त रुख अपनाते हुए कहा कि जब तक टैरिफ को लेकर मसला नहीं सुलझ जाता है, तब तक कोई बातचीत नहीं होगी जबकि अमेरिका के राष्ट्रपति को ज्ञात है कि भारत में नरेंद्र मोदी प्रधानमंत्री है जो अपने देश के हित के आगे अमेरिका क्या दुनिया की किसी ताकत के साथ नहीं झुक सकते है। ट्रम्प के टैरिफ़ बढ़ाने की गीदड़भभकी के बाद ही प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने साफ-साफ कह दिया कि देश के किसानों, पशुपालकों और मछुवारों के हितों के साथ कोई समझौता नहीं होगा। उन्होंने कहा कि व्यक्तिगत रूप से मुझे बहुत बड़ी कीमत चुकानी पड़ेगी, लेकिन मैं इसके लिए तैयार हूं।प्रधानमंत्री का यह बयान अमेरिका को और चुभ गया और ट्रम्प को समझ में आ गया कि भारत को झुकाना अब सरल नहीं है। प्रधानमंत्री के इस बयान के बाद देश के किसान, पशुपालक और मछुवारा व्यवसाय से जुड़े लोग काफ़ी खुश है और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के कार्यों और हिम्मत की सराहना कर रहे है। अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप यह चाहते हैं कि भारत अमेरिकी कृषि उत्पाद और डेयरी प्रोडक्ट्स पर टैरिफ कम करे ताकि भारत जैसे बड़े बाजार में अमेरिका के इन उत्पादों को बेचा जा सके लेकिन भारत इन क्षेत्रों को देश में ज्यादा प्राथमिकता देता है. अगर भारत इन क्षेत्रों को अमेरिका के लिए खोलता है तो भारत के किसानों की आय पर असर होगा जिसे लेकर भारत कभी भी समझौता नहीं करना चाहेगा जबकि अमेरिका कृषि और दुग्ध उत्पादों के लिए शत प्रतिशत टैरिफ़ कम करने की मांग कर रहा है। इसके अलावा अमेरिका यह भी चाहता है कि भारत रूसी तेल का आयात कम करे और अमेरिका से ज्यादा तेल का आयात करे जबकि भारत को अमेरिका की तुलना में सस्ता तेल रूस से मिल रहा है तो अमेरिका से भारत तेल क्यों ख़रीदे। भारत जैसे बड़े बाजार में अमेरिका के मुंह खाने के बाद अमेरिका के दादागिरी पर ग्रहण लगने की आशंका बन रही है क्योंकि अमेरिकी डॉलर दुनिया भर में इस्तेमाल की जाने वाली करेंसी है। वर्ष 1944 से ही अमेरिकी डॉलर का इस्तेमाल सभी देश व्यापार के लिए कर रहे हैं। दुनिया भर के सेंट्रल बैंक अपने यहां डॉलर का रिजर्व रखते हैं। करीब 90 फीसदी विदेशी मुद्रा लेन-देन डॉलर में ही होती है लेकिन ब्रिक्स देशों ने इस पर निर्भरता कम करने के लिए कदम उठाये जिसे लेकर ट्रंप बौखलाए हुए हैं क्योंकि ब्रिक्स संगठन के देश मिलकर वर्ल्ड इकोनॉमी में कुल 35 प्रतिशत का योगदान देते हैं। ऐसे में अगर इन देशों ने अमेरिका और डॉलर का विरोध किया तो अमेरिका के सुपर पॉवर बने रहने का स्थिति छिन सकती है। साथ ही डॉलर वर्ल्ड करेंसी से हट भी सकता है और अमेरिकी दादागिरी में ग्रहण लग सकता है। भारत और रूस के तेल व्यापार की बात की जाये तो भारत रूस से 2022 से तेल का आयात बढ़ाया है। भारत अभी रूस से हर दिन 1.7 से 2.2 मिलियन बैरल तक का रूसी तेल आयात करता है। भारत रूसी तेल का करीब 37 फीसदी हिस्सा आयात कर रहा है। वहीं सबसे ज्यादा चीन रूस से तेल खरीद रहा है। साल 2024 में भारत ने रूस से 4.1 लाख करोड़ रुपये का कच्चा तेल आयात किया है। जो अमेरिका को पच नहीं रहा है और अपनी दादागिरी के दम पर अपने देश के कृषि और दुग्ध उत्पाद को भारत जैसे बड़े बाजार में बिना टैरिफ़ के बेचने के लिए बेताब है और भारत द्वारा अमेरिका की बात न मामने पर 50 प्रतिशत टैरिफ़ बढ़ाने की बात कहीं जा रही है। जबकि अमेरिका के इस फैसले से भारत के विरोध में रहने वाला चीन भी अमेरिका के इस कदम को गलत बताया है। अब अमेरिका के लिए एक चिंता और हो रही है कि भारत,रूस और चीन जैसे महाशक्ति यदि एक हो जाएगी तो अमेरिका की दादागिरी भी खतरे में पड़ सकती है। अमेरिका के इस मनमानी टैरिफ़ पर न चीन बल्कि विश्व के कई देशों ने सही नहीं करार दिया है। भारत द्वारा रूस से तेल खरीदने का विरोध तो अमेरिका का बहाना है, अमेरिका का मुख्य दर्द भारत जैसे बड़े बाजार में अमेरिका के कृषि और दुग्ध उत्पाद को बेचने का मौका न मिलना प्रमुख है। अमेरिका चाहता है कि उसके कृषि और दुग्ध उत्पाद जैसे दूध, पनीर, घी आदि को भारत में आयात की अनुमति मिले। अमेरिका का तर्क हैं कि उनका दूध स्वच्छ और गुणवत्ता वाला है और भारतीय बाजार में सस्ता भी पड़ सकता है। भारत दुनिया का सबसे बड़ा दूध उत्पादक देश है और इस क्षेत्र में करोड़ों छोटे किसान लगे हुए हैं। भारत सरकार को डर है कि अगर अमेरिकी दुग्ध उत्पाद भारत में आएंगे तो वे स्थानीय किसानों को भारी नुकसान पहुंचा सकते हैं। भारत में ज्यादातर लोग शुद्ध शाकाहारी दूध उत्पाद चाहते हैं जबकि अमेरिका में कुछ दुग्ध उत्पादों में जानवरों की हड्डियों से बने एंजाइम का इस्तेमाल होता है। इसके साथ ही अमेरिका चाहता है कि गेहूं, चावल, सोयाबीन, मक्का और फलों जैसे सेब, अंगूर आदि को भारत के बाजार में कम टैक्स पर बेचा जा सके और भारत अपनी इम्पोर्ट ड्यूटी को कम करे। इसके अलावा, अमेरिका जैव-प्रौद्योगिकी फसलों को भी भारत में बेचने की कोशिश करता रहा है लेकिन भारत की सरकार और किसान संगठन इसका कड़ा विरोध करते हैं। इसको लेकर खुद प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने स्पष्ट रूप से कह दिया कि देश के किसानों, पशुपालकों और मछुवारों के हितों के साथ समझौता नहीं हो सकता है। प्रधानमंत्री के इस बयान से अमेरिका समेत पूरे विश्व ने भारत के रुख को समझ लिया और सभी ने मान लिया कि भारत अमेरिका के आगे झुकने वाला देश नहीं है। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी को राष्ट्रहित सर्वोपरि है, इसके लिए जो भी कीमत चुकानी पड़े उसके लिए वह तैयार रहते है। इसलिए इस समय पुरे देश के पक्ष और विपक्ष दलों के नेताओं, किसानों, पत्रकारों, बुद्धजीवियों और आम लोगो को अमेरिका के इस कड़े कदम का विरोध करते हुए सरकार के साथ खड़े होने की जरूरत है। संतोष कुमार तिवारी Read more » अमेरिका की दादागिरी
राजनीति आज़ादी के 78 साल का हासिल: थोड़ा है, थोड़े की जरूरत है August 12, 2025 / August 12, 2025 by राजेश जैन | Leave a Comment राजेश जैन 15 अगस्त 1947 को जब देश ने आज़ादी की सांस ली तो करोड़ों लोगों की आंखों में ऐसे देश का सपना था जो अपने पैरों पर खड़ा हो, जहां वैज्ञानिक सोच और सामाजिक समरसता को बढ़ावा मिले, हर इंसान को बराबरी का दर्जा और हर गांव-गली को शिक्षा की रौशनी हासिल हो । […] Read more » आज़ादी के 78 साल
राजनीति शिक्षा-चिकित्सा को मुनाफाखोरी से बचाने का भागवत-आह्वान August 12, 2025 / August 12, 2025 by ललित गर्ग | Leave a Comment – ललित गर्ग – राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सरसंघचालक मोहन भागवत ने इंदौर के एक किफायती कैंसर अस्पताल के उद्घाटन अवसर पर जो बात कही, वह आज की सबसे बड़ी सामाजिक-आर्थिक और नैतिक आवश्यकता को उजागर करती है। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा कि शिक्षा और चिकित्सा जैसे बुनियादी क्षेत्रों को मुनाफाखोरी से मुक्त होना […] Read more » Bhagwat's call to save education and medical treatment from profiteering