Category: राजनीति

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नेहरू और लोकतंत्र पर दाग

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गांधी के राजनीतिक शिष्य या उत्तराधिकारी पं. नेहरू थे। इसलिए उन्हेंाने गांधी के कई गुरों को बड़ी सूक्ष्मता से अपनाया और उन्हें सही अवसर आने पर प्रयोग भी किया। अत: नेहरू ने अपने अभिन्न मित्र मौलाना आजाद को देश की संसद में लाने की जिद की, और तत्कालीन मुख्यमंत्री पं. गोविन्दवल्लभ पंत को अपनी इच्छा बताकर सारी व्यवस्था करने का निर्देश दे दिया। मुख्यमंत्री ने रामपुर के जिलाधिकारी पर दबाब बनाया और हारे हुए प्रत्याशी को जीत का सेहरा बांधकर दूल्हा की भांति संसद में भेज दिया।

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भ्रष्टाचार , अपराध ,अवैध कारनामों के खिलाफ योगी सरकार का हल्ला बोल

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आज प्रदेश का कोई विभाग ऐसा नहीं बचा है जहां पर बदलाव साफ नजर न आ रहा हो। समाजवादी आवास योजना बंद होने जा रही है। खाद्य एवं रसद विभाग में प्रदेश के सभी नागरिकों के राशन कार्डो को रदद कर दिया हैं । अब सभी को स्मार्ट राशनकार्ड देने की योजना है। प्रदेश के विद्यालयों में हाईस्कूल व इंटर की परीक्षाओं में जमकर नकल हो रही थी जिससे निपटने के लिए कड़े कदम सरकार की तरफ से उठाये जा रहे हैं।नकल करने वाले तथा नकलचियों के खिलाफ हल्ला बोल दिया गया है। अभी तक 57 कालेजों की मानयता रदद की जा चुकी है तथा 54 से अधिक को डिबार किया जा चुका है।

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असलम साहब, अकेले राष्ट्रीय कांग्रेस स्वयंसेवक संघ बनाने से काम नहीं चलेगा

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वैसे भी देखा जाए तो कांग्रेस को इस वक्‍त सबसे ज्‍यादा शु्द्ध हवा की जरूरत है जोकि कठोर सेवा-श्रम के बूते उसके शरीर को मिलेगी और इसके लिए कांग्रेस में कोई स्‍वयंसेवक संघ होना ही चाहिए था, जिसकी जरूरत लम्‍बे समय से महसूस भी की जा रही है। किंतु इसी के साथ जो प्रश्‍न उठ रहा है वह यह है कि क्‍या नया कांग्रेसी संघ आरएसएस जैसा त्‍याग, समर्पण और सादगीभरे जीवन का भाव भी अपने स्‍वयंसेवकों में संचारित कर पाएगा ? प्रतिक्रिया स्‍वरूप कोई कार्य खड़ा किया जाए तो कहीं इसका भी हश्र पूर्व में कांग्रेस द्वारा किए गए प्रयोगों की तरह ही न हो?

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राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ बनाम राष्ट्रीय कांग्रेस स्वयं सेवक संघ

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संघ के स्वयंसेवक समाज - सेवा एवं राष्ट्र-निर्माण के लिये कठोर जीवन जीते हैं। उनका लक्ष्य राजनींति एवं सत्ता के माध्यम से सुविधायें न जुटाकर, पूरे देष मे सुदूर वनवासी क्षेत्रों तक में- पैदल तक चलकर, अनवरत काम करते हैं। हिन्दू समाज मे सामाजिक समरसता का भाव भरते हुये उसे एकता के सूत्र में पिरोते हैं। संघ मे लाखों-लाख ऐसे स्वयं सेवक हैं, जो आजीवन अविवाहित रहकर एकाकी जीवन जीकर अपने रक्त की एक-एक बूंद राष्ट्र के लिये समर्पित कर देते हैं। राष्ट्र-जीवन की भयावह समस्याओं के समक्ष अपने परिजनो के दुःख-दैन्य उनके लिये गौण हो जाते हैं।

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दिल्ली एमसीडी चुनाव एक महासंग्राम है

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एमसीडी चुनाव में जीत को सुनिश्चित करने के लिये ही कुछ महीने पहले बीजेपी ने मनोज तिवारी को राज्य में पार्टी का अध्यक्ष बनाया था। दिल्ली के पूर्वांचल वोटरों को साधने के साथ ही कार्यकर्ताओं में नई ऊर्जा भरने के लिए मनोज तिवारी को दिल्ली की कमान सौंपी गयी है। देखना यह है कि वे इसमें कितना सफल हो पाते हैं? मौजूदा पार्षदों के टिकट काटने का निर्णय कहीं बीजेपी के खिलाफ न चला जाए, क्योंकि कई दिग्गज नेताओं को घर बैठा देना कहीं बगावती तेवर को हवा न दे- इस तरह की चुनौतियां भी तिवारी के सामने हैं।

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सामाजिक सांस्कृतिक संगठन के विरोध में बननेवाले दो राजनीतिक पुच्छल तारे

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डीएसएस के गठन को लेकर भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के वरिष्ठ नेता और पूर्व उपमुख्यमंत्री सुशील कुमार मोदी ने तेजप्रताप को पहले आरएसएस का प्रशिक्षण लेने की सलाह दे दी. उन्होंने कहा कि तेजप्रताप को पहले आरएसएस की ट्रेनिंग लेनी चाहिए, उसके बाद कोई संगठन बनाने की बात करनी चाहिए. प्रशिक्षण लेने के बाद संगठन की असफलता का शक कम हो जाएगा, बिना प्रशिक्षण के असफलता का भय बना रहेगा. कांग्रेस उपाध्यक्ष राहुल गांधी आरएसएस की विचारधारा को महात्मा गांधी की हत्या के लिए जिम्मेदार मानते हैं.

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भाजपा की जीत और योगी आदित्यनाथ की ताजपोशी के निहितार्थ

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योगी को कट्टर हिंदूवादी यानी मुस्लिम विरोधी के रूप में दर्शा कर एक निश्चित राजनितिक एजेंडे के तहत मुस्लिम समाज को भयभीत करने की कोशिश हो रही है, बिल्कुल उसी तरह जैसे मोदी के नाम से १२ वर्ष तक किया गया था। १५ प्रतिशत मुस्लिम समाज को भयभीत करके उन्हें गोलबंद करना और ८५ प्रतिशत हिंदु समाज को जातियों, उपजातियों, अगड़ों, पिछड़ों, अतिपिछड़ों, दलितों में विभक्त करना ताकि मुस्लिमों के साथ हिन्दुओं के कुछ समूहों को मिला कर सत्ता प्राप्त की जा सके यही अब तक भारतीय राजनैतिक दलों की रीति नीति रही है।

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