Category: राजनीति

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गांधी की विरासत कहाँ तक होगी मददगार

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गाँधी जी और उनके सहयोगियों तथा वहाँ के किसानों की सक्रियता के कारण तत्कालीन बिहार सरकार ने उच्च स्तरीय समिति का गठन किया जिसके मनोनीत सदस्य गाँधी जी भी थे। इस कमेटी की रिपोर्ट को सभी पक्षों द्वारा स्वीकार किया गया और तीन कठ्ठा प्रथा समाप्त कर दी गई। इसके अलावा किसानों के हित में अनेक सुविधायें दी गईं। इस प्रकार निहलों के विरुद्ध ये आन्दोलन सफलता पूवर्क समाप्त हुआ। इससे चंपारण के किसानों में आत्मविश्वास जगा और अन्याय के प्रति लङने के लिये उनमें एक नई शक्ति का संचार हुआ। चंपारण सत्याग्रह भारत का प्रथम अहिंसात्मक सफल आन्दोलन था। गाँधी जी द्वारा भारत में पहले सत्याग्रह आन्दोलन का शंखनाद चंपारण से शुरु हुआ। यहाँ किसानों के बच्चों को शिक्षित करने के लिए ग्रामीण विद्यालय खोले गये। लोगों को साफ-सफाई से रहने का तरीका सिखाया गया। सारी गतिविधियाँ गांधीजी के आचरण से मेल खाती थीं। स्वयंसेवकों ले मैला ढोने, धुलाई, झाडू-बुहारी तक का काम किया। इसके साथ ही गांधीजी का राजनीतिक कद और बढ़ा।

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दिल्ली में सरपट दौड़ा भाजपा का विजयरथ

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दिल्ली महानगर पालिका के चुनाव परिणाम के बाद जैसी आशंका व्यक्त की जा रही थी, वही दिखाई दे रहा है। चुनाव में उपयोग किए जा रहे विद्युतीय मतदान यंत्रों पर फिर से सवाल खड़े होने लगे हैं। सवाल खड़े करने वाले राजनीतिक दलों के कार्यकर्ता अपनी हार को हार नहीं मान रहे हैं, बल्कि वह यह बताना चाह रहे हैं कि हमारी हार ईवीएम मशीनों के कारण हुई है। जबकि सत्यता यही है कि जनता ने उन्हें हरा दिया है। इसके अलावा गंभीरता पूर्वक चिन्तन किया जाए तो एक बात और इस हार को प्रमाणित करती हुई दिखाई देती है। अगर हम चुनाव के बाद किए गए सर्वेक्षणों पर दृष्टि डालें तो यह विदित हो जाता है कि सभी सर्वे संस्थाओं ने भारतीय जनता पार्टी को विजय की तरफ जाते हुए बताया था। यह सर्वे संस्थाएं वास्तव जनता की आवाज के आधार पर ही अपना मत व्यक्त करते हैं। इसलिए विद्युतीय मतदान यंत्रों पर सवाल खड़े करना कहीं न कहीं लोकतांत्रिक प्रक्रिया पर आघात ही कहा जा सकता है। यहां सबसे बड़ा सवाल यह है कि इन सर्वे संस्थाओं ने ईवीएम से पूछकर अपना सर्वे नहीं दिया था। यानी जनता ने जो मत व्यक्त किया, वही ईवीएम ने दिखाया।

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अब और गहराएगा राम मंदिर का मुद्दा

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आजादी के बाद 1949 में मस्जिद में भगवान राम की मूर्तियां पाई गई। एकाएक इन मूर्तियों के प्रकट होने पर मुस्लिमों ने विरोध जताया। दोनों पक्षों ने अदालत का दरवाजा खटखटाया। नतीजतन सरकार ने इस स्थल को विवादित घोषित कर ताला डाल दिया और दोनों संप्रदाओं के प्रवेश पर रोक लगा दी। 1984 में विहिप ने भगवान राम के जन्मस्थल को मुक्त करके वहां राम मंदिर का निर्माण करने के लिए एक समिति का गठन किया। इस अभियान का नेतृत्व भाजपा नेता लालकृष्ण आडवाणी ने संभाला। 1986 में जब केंद्र में प्रधानमंत्री राजीव गांधी की सरकार थी तब फैजाबाद के तत्कालीन कलेक्टर ने हिंदुओं को पूजा के लिए विवादित ढांचे के ताले खोल दिए। इसके परिणामस्वरूप मुस्लिमों ने बावरी मस्सिद संघर्ष समिति बना ली।

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कश्मीर समस्या, प्रजातंत्र, जिहाद और नेहरू |

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उसके बाद जमात-ए-इस्लामी के विभिन्न धड़ों ने एकजुट होकर यूनाइटेड मुस्लिम फ्रंट बनाकर 1987 के चुनाव में भागीदारी की | आम मान्यता है कि 1987 के चुनाव कश्मीर के चुनावी इतिहास के सबसे काले चुनाव थे. बड़े पैमाने पर हस्तक्षेप किया गया और नेशनल कॉन्फ्रेंस को 40 तथा कांग्रेस को 26 सीटें मिलीं जबकि मुस्लिम यूनाइटेड फ्रंट को केवल 4 | भारी पैमाने पर प्रशासनिक मशीनरी का दुरुपयोग कर मतदान प्रतिशत 75 तक पहुंचा दिया गया, इस बात को बाद में स्वयं फारूख अब्दुल्ला ने भी एक टीवी इंटरव्यू में स्वीकार किया | और उसके बाद शुरू हुआ 1990 का हिंसक दौर, जिसमें कश्मीर घाटी हिन्दू विहीन बना दी गई | हिंसा का दौर तो अब खत्म हो गया है और एक नया दौर शुरू हुआ है, जिसमें कश्मीर के नौजवान लड़ रहे हैं इस्लाम के नाम पर।

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 ऐ ‘पाक परस्त’ कश्मीरी नौजवानों…

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पाकिस्तानी नेताओं के लिए मसल-ए-कश्मीर एक ऐसी संजीवनी है जिसे चुनाव के समय पाकिस्तानी अवाम के बीच उछाल कर वहां की राजनैतिक पार्टियां लोगों से हमदर्दी हासिल करना चाहती हैं। बड़े आश्चर्य की बात है कि कश्मीरी नवयुवक पाकिस्तान के साथ-साथ पाक अधिकृत कश्मीर के हालात पर भी आख़िर नज़र क्यों नहीं डालते? जिस पाकिस्तान जि़ंदाबाद के नारे भारत में लगाए जाते हैं जिस पाकिस्तान के झंडे कश्मीर में बुलंद किए जाते हैं वही नारे और वही झंडे पाक अधिकृत कश्मीर में वहां के कश्मीरवासी बुलंद करने से आख़िर क्यों गुरेज़ करते हैं?

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यूपीः भंग होगा वक्फ बोर्ड, जांच होगी !

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आज़म खान के लिये आने वाला समय काफी मुश्किलों से भरा साबित हो सकता है। एक तरफ जहा सत्ता उनसे छिटक कर बहुत दूर जा चुकी हैं तो दूसरी तरफ उनके ऊपर अपने पद का दुरुपयोग करते हुये रामपुर के जौहर अली विश्वविद्यालय परिसर में तमाम सरकारी जमीन पर अवैध कब्ज़ा करने के मामले गर्माने लगे हैं। रामपुर के ही पूर्व जिला पंचायत अध्यक्ष अब्दुल सलाम ने उत्तरप्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को प्रमाणों के साथ एक शिकायत भेजी हैं जिसमे उन्होंने पूर्व मंत्री आजम खान के ऊपर आरोप लगाया हैं कि आजम खान ने ग्राम सींगनखेड़ा, तहसील सदर, रामपुर के खाता संख्या 01214 की ग्राम सभा की 14.95 एकड़ जमीन 30 वर्षों के लिये जबरदस्ती पट्टे पर ले रखी हैं और इसके साथ ही उन्होंने वहाँ की चक रोड (जिसकी खाता संख्या 01232 की 2.13 एकड़ भूमि पर जो की इस विश्वविद्यालय को दी गयी थी उस पर भी आज़म खान ने अवैध तरीके से कब्ज़ा कर रखा हैं।

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पत्थरबाजों का उपचार पत्थर से ही संभव

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अब यह अत्यावश्यक हो गया है कि हम आर-पार की लड़ाई लड़ें। सैनिकों का अपमान, उन पर पत्थर-प्रहार और राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए की जा रही कार्यवाहियों में बाधा किसी भी कीमत पर सहन नहीं की जा सकती। पाकिस्तानपरस्त अलगाववादी तत्त्व और उनके संरक्षक-समर्थक हमारे नहीं हो सकते। इन्हें चिन्हित किया जाना और इन पर कठोर नियंत्रण किया जाना आवश्यक है । जब तक दूसरों के मानवाधिकारों का हनन करने वालों, सैनिकों पर पत्थर फेंकने वालों के विरुद्ध कड़ी से कड़ी कार्यवाही नहीं होगी तब तक पत्थरबाजी बंद नहीं हो सकती। हमारी उदार नीतियों ने ही पत्थरबाजों को प्रोत्साहित किया है। उनकी संख्या बढ़ी है।

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यूपीः बुंदेलखंड के लिये मोदी-योगी का रोडमैप

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बुन्देलखण्ड क्षेत्र तीस लाख हेक्टेयर क्षेत्र में फैला है। इनमें से 24 लाख हेक्टेयर कृषि योग्य है परन्तु इनमें से मात्र चार लाख हेक्टेयर भूमि की ही सिंचाई हो पा रही है, क्योंकि इस इलाके में खेती के विकास के लिए सिंचाई की ऐसी योजनायें ही नहीं बनाई गई, जिनका प्रबंधन कम खर्च में समाज और गाँव के स्तर पर ही किया जा सके। बड़े-बड़े बांधों की योजनाओं से 30 हजार हेक्टेयर उपजाऊ जमीन बेकार हो गई। ऊँची लागत के कारण खर्चे बढे,लेकिन यह बाँध कभी भी बहुज ज्यादा कारगर नहीं साबित हुए। बुंदेलखंड में पिछले एक दशक में 09 बार गंभीर सूखा पड़ा है। बुंदेलखंड में जंगल, जमीन पर घांस, गहरी जड़ें ना होने की कारण तेज गति से गिरने वाला पानी बीहड़ का इलाका पैदा कर रहा है। बुंदेलखंड को करीब से जानने वाले कहते हें कि केवल बारिश में कमी का मतलब सुखा ़ नहीं है, बल्कि व्यावहारिक कारणों और विकास की प्रक्रिया के कारण पर्यावरण चक्र में आ रहे बदलाव सूखे के दायरे को और विस्तार दे रहे हैं।

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लालबत्ती के आतंक से मुक्ति की नई सुबह

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उत्तर प्रदेश में मुख्यमंत्री आदित्यनाथ योगी ने ऐसे अनेक साहसिक निर्णय लिये एवं कठोर कदम उठाये है और अब केंद्र सरकार ने आगे बढ़कर मोटर वीइकल्स ऐक्ट के नियम 108 (1) और 108 (2) में बदलाव करके लाल बत्ती वाली गाड़ियों को ट्रैफिक नियमों से छूट देने की व्यवस्था ही खत्म कर दी। लेकिन मोदी एवं योगी से आगे की बात सोचनी होगी। देश में सही फैसलों की अनुगूंज होना शुभ है, लेकिन इनकी क्रियान्विति भी ज्यादा जरूरी है। वीआईपी कल्चर खत्म करने के नफा-नुकसान का गणित उतना महत्वपूर्ण नहीं है जितना महत्वपूर्ण यह है कि इससे आम लोगों के मन से खास लोगों का खौफ कुछ कम जरूर होगा।

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