राजनीति यह कैसा ‘बड़ों का सदन’? March 31, 2017 by डॉ. वेदप्रताप वैदिक | Leave a Comment सरकार की इस प्रवृत्ति पर राज्यसभा में काफी रोष प्रकट किया गया है। कांग्रेस के वीरप्पा मोइली ने तो यहां तक कह दिया कि राज्यसभा का होना न होना एक बराबर है। यदि राज्यसभा के साथ मोदी सरकार ऐसा ही बर्ताव करती रहे तो राज्यसभा के सभी सदस्यों को इस्तीफा दे देना चाहिए। Read more » Featured भारत की राज्यसभा लोकसभा
राजनीति भाजपा की जीत और योगी आदित्यनाथ की ताजपोशी के निहितार्थ March 31, 2017 by सुरेन्द्र नाथ गुप्ता | Leave a Comment योगी को कट्टर हिंदूवादी यानी मुस्लिम विरोधी के रूप में दर्शा कर एक निश्चित राजनितिक एजेंडे के तहत मुस्लिम समाज को भयभीत करने की कोशिश हो रही है, बिल्कुल उसी तरह जैसे मोदी के नाम से १२ वर्ष तक किया गया था। १५ प्रतिशत मुस्लिम समाज को भयभीत करके उन्हें गोलबंद करना और ८५ प्रतिशत हिंदु समाज को जातियों, उपजातियों, अगड़ों, पिछड़ों, अतिपिछड़ों, दलितों में विभक्त करना ताकि मुस्लिमों के साथ हिन्दुओं के कुछ समूहों को मिला कर सत्ता प्राप्त की जा सके यही अब तक भारतीय राजनैतिक दलों की रीति नीति रही है। Read more » Featured आदित्यनाथ भाजपा की जीत योगी आदित्यनाथ योगी आदित्यनाथ की ताजपोशी
राजनीति मजबूत लोकतंत्र के लिए सांसदों की हाजिरी जरूरी March 30, 2017 / March 30, 2017 by ललित गर्ग | Leave a Comment संसदीय व्यवस्था के हालात प्रारंभ से ही ढुलमूल रहे हैं। शुरुआत में जवाहरलाल नेहरू ने स्वयं जागरूक रहकर सांसदों को भी जागरूक बनाया था। अब पीएम मोदी संसदीय व्यवस्था को सुदृढ़ एवं अनुशासित करने में जुटे हैं तो उसके सकारात्मक परिणाम भी देखने को मिल रहे हैं। थोड़ी बहुत चुनौतियों के बीच मौजूदा लोकसभा कामकाज के हिसाब से पिछले कई वर्षों के रिकॉर्ड तोड़ चुकी है। सदन के प्रति सांसदों को जवाबदेह बनाने के लिए मौजूदा लोकसभा अध्यक्ष सुमित्रा महाजन ने भी ढेरों प्रयास किए हैं। जरूरत है लोकतंत्र प्रशिक्षण के कार्यक्रम की। नये बनने वाले सांसदों के लिये यह प्रशिक्षण अनिवार्य किया जाना चाहिए, जिसमें एक आदर्श जन-प्रतिनिधि के व्यवहार के साथ-साथ उसकी कार्यशैली, संसदीय व्यवस्था का सघन प्रशिक्षण दिया जाना चाहिए। इसके लिये कार्यशाला एवं प्रशिक्षण का प्रबन्ध हो। तभी हम हमारे इस सर्वोच्च मंच की पवित्रता और गरिमा को अक्षुण्ण रख सकेंगे। Read more » Featured presence of MP essential during Parliament session मजबूत लोकतंत्र संसद सत्र के दौरान सांसदों के अनुपस्थित रहने का मामला सांसदों की हाजिरी जरूरी
राजनीति 2019 में और प्रखर हो सकती है मोदी सुनामी March 30, 2017 by डा रवि प्रभात | Leave a Comment मोदी सरकार सामाजिक सुरक्षा के साथ साथ राजनीतिक निर्णय लेने में भी किसी तरह की हिचकिचाहट नहीं दिखा रही है।फिलहाल एक निर्णय जिसने भारत नहीं पूरे विश्व का ध्यान विभिन्न कारणों से अपनी ओर खींचा है , जिसे मोदी द्वारा लिए गए साहसिक निर्णय में से एक माना जा रहा है , वह है योगी आदित्यनाथ को मुख्यमंत्री , उत्तर प्रदेश बनाना । यद्यपि तमाम राजनीतिक पंडित इस बात से आशान्वित थे कि कोई भी मुख्यमंत्री होगा परंतु योगी के नाम पर तो विचार भी नहीं किया जाएगा। लेकिन मोदी और भाजपा के इस फैसले ने सभी को हैरान कर दिया। निश्चित रूप से मोदी ने यह निर्णय बहुत सोच समझकर और दूरदर्शिता के साथ लिया है ।जैसा कि पहले मैंने लिखा था कि अब भाजपा के पास विकास और हिंदुत्व को एक साथ लेकर चलने का स्वर्णिम अवसर है ,यह निर्णय उसी का प्रतिमान है। जिस तेजी से योगी ने इन दिनों में फैसले दिए हैं उससे यह बात सिद्ध भी हो रही है कि वह इस निर्णय पर बिल्कुल खरे उतरेंगे , जिसका असर देशव्यापी होगा और 2019 में सहायक भी । Read more » 2019 में मोदी सुनामी BJP massive victory in 2019 Featured मोदी सुनामी
राजनीति उत्तरप्रदेश के बूचड़खानों का सत्य पक्ष March 30, 2017 by मयंक चतुर्वेदी | Leave a Comment इससे संबंधित यह बात जानना भी सभी के लिए जरूरी है कि लाख आर्थिक नुकसान सहते हुए भी सरकार ने यह कदम आम जन के स्वास्थ्य को ठीक रखने के लिए सख्ती से अमल में लाना उचिᛢत समझा है । क्योंकि यह तो सभी को पता होना ही चाहिए कि वे मांस किसका खा रहे हैंऔर जिसका भी खा रहे हैं वह स्वस्थ जानवर था भी कि नहीं । उत्तर प्रदेश के तमाम बूचड़खानों को बंद करने से राज्य सरकार को करीब 11 हजार 350 करोड़ रुपये के नुकसान होने की आशंका व्यक्त की गई है। इससे जुड़ा एक तथ्य यह भी है कि यहां अब तक करीब 356बूचड़खाने संचालित किये जा रहे थे , जिनमें से सिर्फ 40 बूचड़खाने ही वैध हैं, इन्हें केंद्र सरकार की कृषि एवं खाद्य प्रसंस्करण निर्यात विकास प्राधिकरण (एपीईडीए) से बाकायदा लाइसेंस मिला हुआ है। Read more » Featured उत्तरप्रदेश बूचड़खाना बूचड़खानों की बंदी
राजनीति असाधारण चुनाव के असाधारण नतीजे March 30, 2017 by डॉ नीलम महेन्द्रा | Leave a Comment जो लोग यह कह रहे हैं कि जिस व्यक्ति के पास कोई प्रशासनिक अनुभव नहीं है उसे इतने बड़े प्रदेश की बागडोर सौंप देना कहाँ तक उचित है वे भूल रहे हैं कि उप्र के पिछले मुख्यमंत्री के पास किसी प्रकार के प्रशासनिक अनुभव तो क्या कोई राजनैतिक अनुभव भी नहीं था लेकिन योगी द्वारा किए गए संसदीय कार्यों की समीक्षा करने मात्र से ही उनको अपने प्रश्न का उत्तर मिल जाएगा। 1998 से लगातार गोरखपुर से सांसद रहे योगी आदित्यनाथ के व्यापक जनाधार और एक प्रखर वक्ता की छवि को भी शायद यह लोग अनदेखा करने की भूल कर रहे हैं। जब परिवादवाद की देन एक अनुभव हीन मुख्यमंत्री को प्रदेश की बागडोर संभाल सकता है तो योगी को तो 26 वर्ष की उम्र में सबसे कम उम्र के सांसद बनने का गौरव प्राप्त है। Read more » Featured असाधारण चुनाव असाधारण नतीजे यूपी यूपी में होगा योगी का राज योगी का राज सबका विकास सबका साथ
राजनीति एक्शन में योगी, जनमानस में खुशी की लहर March 29, 2017 by मृत्युंजय दीक्षित | Leave a Comment एम योगी आदित्यनाथ अब हर रोज कोई न कोई दिशानिर्देश अपने मंत्रियों को दे रहे हैं तथा पुरानी सरकारों की योजनाओं की समीक्षा बैठकें कर हैं। उन्होनें गोरखपुर दौरे में साफ ऐलान कर दिया है कि जिन लोगों को 18-20 घंटे काम करना हो वहीं लोग उनके साथ रहें तथा उन्होनें यह भी ऐलान कर दिया है कि गुंडे व असामाजिक तत्व या तो सुधर जायें या फिर प्रदेश छोड़कर चले जायें। सीएम इस बात के लिए पूरी तरह से कटिबद्ध है कि वह प्रदेश का भेदभाव रहित विकास करेंगे और सभी वर्गो को न्याय मिलेगा। जिस पर अमल भी प्रारम्भ हो गया है। मुख्यमंत्री का कहना है कि किसी का भी किसी भी प्रकार से तुष्टीकरण नहीं किया जायेगा। Read more » Featured गौतस्करी गौवध बूचड़खानें बंद मुख्यमंत्री योगी सड़कों को गडढा मुक्त सीएम योगी आदित्यनाथ
राजनीति कश्मीर के चुनाव में अब्दुल्ला परिवार की रणनीति March 29, 2017 by डॉ. कुलदीप चन्द अग्निहोत्री | Leave a Comment सत्ता छिन जाने के बाद अब्दुल्ला परिवार के पास एक ही रास्ता बचा था । वह जनता का विश्वास जीतने के लिए पुनः घाटी की जनता के पास जाता । लेकिन उसने जनता के पास जाने का लम्बा और कष्टसाध्य रास्ता चुनने की बजाए सरल और शॉर्टकट रास्ता ही चुनना ही बेहतर समझा । वह हुर्रियत कान्फ्रेंस की गोद में जाकर बैठ गया । हुर्रियत कान्फ्रेंस का मानना है कि आतंकवादी कश्मीर में आज़ादी की लड़ाई लड़ रहे हैं । जल्द ही कश्मीर आज़ाद हो जाएगा । हुर्रियत कान्फ्रेंस के लोगों में थोड़ी बहुत नोंकझोंक इस बात को लेकर होती रहती है कि लड़ाई जीत लेने के बाद कश्मीर आज़ाद रहेगा या पाकिस्तान में शामिल हो जाएगा । सैयद अली शाह गिलानी की गोद में बैठे फारुक अब्दुल्ला । Read more » Featured kashymir election role of Abdullah Family in kashmir election अब्दुल्ला परिवार की रणनीति कश्मीर चुनाव
राजनीति नया पिछड़ा आयोग गठन की तैयारी March 27, 2017 by प्रमोद भार्गव | Leave a Comment प्रमोद भार्गव केंद्रीय मंत्रीमंड़ल ने राष्ट्रीय पिछड़ वर्ग आयोग की जगह नया आयोग के गठन को मंजूरी दे दी है। पिछडे़पन के आधार पर आरक्षण की बढ़ती मांग को देखते हुए यह फैसला प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अघ्यक्षता में संपन्न हुई कैबिनेट की बैठक में लिया गया। इसे संवैधानिक दर्जा भी दिया जाएगा। मौजूदा आयोग […] Read more » Featured नया पिछड़ा आयोग नया पिछड़ा आयोग गठन
राजनीति भाजपाः वैचारिक हीनग्रंथि से मुक्ति का समय March 27, 2017 by संजय द्विवेदी | Leave a Comment लंबे समय के बाद भाजपा में अपनी वैचारिक लाइन को लेकर गर्व का बोध दिख रहा है। असरे बाद वे भारतीय राजनीति के सेकुलर संक्रमण से मुक्त होकर अपनी वैचारिक भूमि पर गरिमा के साथ खड़े दिख रहे हैं। समझौतों और आत्मसमर्पण की मुद्राओं के बजाए उनमें अपनी वैचारिक भूमि के प्रति हीनताग्रंथि के भाव कम हुए हैं। अब वे अन्य दलों की नकल के बजाए एक वैचारिक लाइन लेते हुए दिख रहे हैं। दिखावटी सेकुलरिज्म के बजाए वास्तविक राष्ट्रीयता के उनमें दर्शन हो रहे हैं। मोदी जब एक सौ पचीस करोड़ हिंदुस्तानियों की बात करते हैं तो बात अल्पसंख्यक और बहुसंख्यक से ऊपर चली जाती है। यहां देश सम्मानित होता है, एक नई राजनीति का प्रारंभ दिखता है। एक भगवाधारी सन्यासी जब मुख्यमंत्री की कुर्सी पर बैठता है तो वह एक नया संदेश देता है। वह संदेश त्याग का है, परिवारवाद के विरोध का है, तुष्टिकरण के विरोध का है, सबको न्याय का है। Read more » bjp Featured भाजपा वैचारिक हीनग्रंथि से मुक्ति का समय
राजनीति समाज मैकाले-पद्धति को शीर्षासन कराता महर्षि अरविन्द का शिक्षा-दर्शन March 27, 2017 / March 27, 2017 by मनोज ज्वाला | Leave a Comment “ वास्तविक शिक्षण का प्रथम सिद्धान्त है- ‘कुछ भी न पढ़ाना’ , अर्थात् शिक्षार्थी के मस्तिष्क पर बाहर से कोई ज्ञान थोपा न जाये । शिक्षण प्रक्रिया द्वारा शिक्षार्थी के मस्तिष्क की क्रिया को सिर्फ सही दिशा देते रहने से उसकी मेधा-प्रतिभा ही नहीं, चेतना भी विकसित हो सकती है, जबकि बाहर से ज्ञान की घुट्टी पिलाने पर उसका आत्मिक विकास बाधित हो जाता है ।” Read more » “उदात्त सत्य का ज्ञान” Featured Integral view of life) Realization of the sublime Truth) है जो “समग्र जीवन-दृष्टि” महर्षि अरविन्द महर्षि अरविन्द का शिक्षा-दर्शन मैकाले-पद्धति मैकाले-पद्धति को शीर्षासन कराता
राजनीति दिलचस्प दिन March 27, 2017 by गंगानन्द झा | Leave a Comment साठ के दशक के मध्य में अमेरिका में युवा आन्दोलन की एक धारा के रुप में हिप्पी उपसंस्कृति का जन्म हुआ और दुनिया भर के अनेको देशों में फैल गया। हिप्पियों के फैशन और मूल्य-बोध ने संगीत, फिल्म, साहित्य और शिल्प पर गहरा असर डाला। इस हिप्पी संस्कृति के अनेको पहलुओं का दुनिया भर के देशों की आज की संस्कृति की मुख्य धारा में समावेश हो गया है। साठ के दशक में दुनिया के विभिन्न देशों में प्रतिवाद और प्रतिरोध के स्वर गूँजते रहे थे। अमेरिका, यूरोप और एशिया के विश्वविद्यालयों के कैम्पस में छात्र अशान्त और उत्तेजित रहा करते थे। Read more » Featured दिलचस्प दिन