राजनीति भाजपा : नौटंकी अब बंद होनी चाहिए June 3, 2012 / June 9, 2012 by राकेश कुमार आर्य | 7 Comments on भाजपा : नौटंकी अब बंद होनी चाहिए भाजपा एक उम्मीद के साथ भारतीय राजनीतिक गगन मंडल पर उभरी। स्वतंत्रता के बाद से कांग्रेस के खिलाफ किसी भी सक्षम विपक्ष की जो कमी अनुभव की जा रही थी उसे भाजपा ने राष्ट्रीय स्तर पर दूर किया। समकालीन इतिहास में भाजपा की यह सबसे बड़ी उपलब्धि थी। भाजपा ने एक ऐसे सर्व स्वीकृत चेहरे […] Read more » अटल बिहारी वाजपेयी नरेन्द्र मोदी नौटंकी भाजपा लालकृष्ण आडवाणी
राजनीति आत्ममुग्धता में स्वयं का नुकसान कर रही है टीम अन्ना June 3, 2012 / June 3, 2012 by सिद्धार्थ शंकर गौतम | 2 Comments on आत्ममुग्धता में स्वयं का नुकसान कर रही है टीम अन्ना सिद्धार्थ शंकर गौतम अन्ना हजारे के लोकपाल के गठन एवं भ्रष्टाचार के विरुद्ध किए जा रहे आंदोलन को एक वर्ष से अधिक का समय हो चुका है किन्तु अभी तक यह स्पष्ट नहीं हो पाया है कि आखिर अन्ना और उनकी टीम में सामंजस्य क्यों नहीं बैठ पा रहा? अरविन्द केजरीवाल, किरण बेदी, प्रशांत भूषण, […] Read more » अन्ना हजारे अरविन्द केजरीवाल किरण बेदी प्रशांत भूषण मनीष सिसौदिया संतोष हेगड़े सिद्धार्थ शंकर गौतम
राजनीति गडकरी के इशारे पर तो नहीं दी आडवाणी को संन्यास की सलाह? June 3, 2012 / June 3, 2012 by तेजवानी गिरधर | Leave a Comment भाजपा के वरिष्ठ नेता व पूर्व उप प्रधानमंत्री लालकृष्ण आडवाणी ने जैसे ही अपने ब्लाग में बीजेपी : एक हब आफ होप शीर्षक से आलेख लिख कर अपनी ही पार्टी की आलोचना की तो पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन गडकरी के करीबी अंशुमान मिश्रा ने आडवाणी को पत्र लिख कर रिटायर होने की सलाह दे […] Read more » अंशुमान मिश्रा नितिन गडकरी लालकृष्ण आडवाणी
राजनीति कम्युनिज्म की असहिष्णुता / विपिन किशोर सिन्हा June 2, 2012 / June 28, 2012 by विपिन किशोर सिन्हा | 4 Comments on कम्युनिज्म की असहिष्णुता / विपिन किशोर सिन्हा कार्ल मार्क्स ने कहा था कि जब दो संस्कृतियां एक ही भूभाग पर एक साथ उपस्थित हो जाती हैं, तो वह संस्कृति जिसके पास श्रेष्ठ दर्शन होता है, दूसरे को निगल लेती है। मार्क्स का यह कथन भारत के बारे में सर्वथा सत्य है। इस प्राचीन देश की मूल आर्य संस्कृति को नष्ट करने के […] Read more » intolerance of communism कम्युनिज्म की असहिष्णुता वैचारिक अश्पृश्यता
राजनीति कैसे संभव हुई माकपा की विजय June 1, 2012 / June 1, 2012 by विनायक शर्मा | 1 Comment on कैसे संभव हुई माकपा की विजय विनायक शर्मा हिमाचल प्रदेश की राजधानी शिमला के नगर निगम के चुनावों के नतीजे राजनीतिक दलों और प्रदेश की भोली-भाली जनता के लिए बहुत ही चौकाने वाले रहे. देश-विदेश के पर्यटकों को लुभाने वाली पहाड़ों की रानी शिमला के २५ सदस्यों वाले प्रतिष्ठित नगर निगम पर विगत २६ वर्षों से चले आ रहे कांग्रेस के […] Read more » victory of C.P.I(M) in Himachal Pradesh माकपा की विजय मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी
राजनीति अडवाणीजी अब तो सच्चाई स्वीकारिये June 1, 2012 / June 1, 2012 by वीरेन्द्र जैन | 4 Comments on अडवाणीजी अब तो सच्चाई स्वीकारिये वीरेन्द्र जैन दर्शन शास्त्र के एक प्रोफेसर को साधारण भौतिक वस्तुएं भूल जाने की बीमारी थी। बरसात की एक शाम जब वे भीगे हुए अपने घर के दरवाजे पर पहुँचे तो घर में प्रवेश से पहले ही तेज याददाश्त वाली उनकी पत्नी ने पूछा “छाता कहाँ है?” “वह तो कहीं खो गया” प्रोफेसर ने बताया […] Read more »
राजनीति आम आदमी के साथ क्रूर मज़ाक कर रहे हैं राजनीतिक दल June 1, 2012 / June 1, 2012 by सिद्धार्थ शंकर गौतम | Leave a Comment सिद्धार्थ शंकर गौतम प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह की अध्यक्षता में गुरूवार हो हुई कैबिनेट बैठक में नई राष्ट्रीय दूरसंचार नीति २०१२ (एनटीपी) को मंजूरी दे दी गई जिसमें यह व्यवस्था है कि देश में कहीं भी जाएं, आप अपना मोबाइल नंबर बनाए रख सकेंगे| यानी देश भर के लिए नंबर पोर्टेबिलिटी की सुविधा मिलेगी। इस नीति […] Read more » political paries of India क्रूर मज़ाक कर रहे हैं राजनीतिक दल
राजनीति क्यो मुँह छुपा रही सपा, बसपा निकाय चुनाव से May 31, 2012 / June 1, 2012 by शादाब जाफर 'शादाब' | Leave a Comment शादाब जफर‘‘शादाब’’ करीब छः माह से राजनीतिक दावपेंच और कानूनी लडाई के शिकार उत्तर प्रदेश निकाय चुनावो की घोषणा अतंतः 25 मई को हो ही गई। आप को याद ही होगा कि पिछले साल नवंबर 2011 में प्रदेश की नगर पालिकाओ का कार्यकाल पूरा हो गया था, मगर आरक्षण समेत विभिन्न कारणो से उत्तर प्रदेश […] Read more » बसपा निकाय चुनाव सपा
राजनीति नपुंसक विरोध May 31, 2012 / June 10, 2012 by श्यामल सुमन | Leave a Comment श्यामल सुमन केन्द्र सरकार का तुगलकी – फरमान एकाएक २३-०५-२०१२ को पेट्रोल की कीमत ७-५४ रुपये पैसे प्रति लीटर बढ़ा दी गयी। देश के हर पेट्रोल पम्पों पर अपनी अपनी गाड़ियों के साथ रात १२ बजे तक ग्राहकों की भारी भीड़ ताकि अपने अपने संसाधन और वाहन के हिसाब से वे अधिक से अधिक पेट्रोल […] Read more » नपुंसक विरोध
राजनीति ओम थानवी और माध्यम निरक्षरता May 31, 2012 / June 28, 2012 by जगदीश्वर चतुर्वेदी | 5 Comments on ओम थानवी और माध्यम निरक्षरता जगदीश्वर चतुर्वेदी ओम थानवी साहब बहुत अच्छे व्यक्ति हैं। मैं कभी उनसे नहीं मिला हूँ। लेकिन उनके लिखे को इज्जत के साथ पढ़ता रहा हूँ। “आवाजाही” शीर्षक से उन्होंने 29 अप्रैल 2012 को जनसत्ता में एक लेख लिखा है, वह एक संपादक के ज्ञान का आभास कम और माध्यम निरक्षरता का एहसास ज्यादा कराता है। […] Read more » इंटरनेट ओम थानवी जनसत्ता वैचारिक अश्पृश्यता
राजनीति कोयले की दलाली में प्रधानमंत्री के हाथ May 30, 2012 / May 30, 2012 by प्रमोद भार्गव | 1 Comment on कोयले की दलाली में प्रधानमंत्री के हाथ प्रमोद भार्गव दल अण्णा ने प्रधानमंत्री डॉ. मनमोहन सिंह समेत 15 केबिनेट मंत्रियों पर दस्तावेजी साक्ष्य पेश करके भ्रष्टाचार के जो संगीन आरोप लगाए हैं, वे प्रथम दृष्टया तो यही तय करते हैं, कि केंद्र सरकार का यह मंत्रीमण्डल अलीबाबा चालीस चोरों का समूह है। दल के सहयोगी अरविंद केजरीवाल और प्रसिद्ध वकील प्रशांत भूषण […] Read more » कोयला घोटाला डॉ. मनमोहन सिंह
महत्वपूर्ण लेख राजनीति कम्युनिज्म का अन्तर्द्वन्द्व, विरोधाभास और असफलता-२ May 29, 2012 / June 10, 2012 by विपिन किशोर सिन्हा | Leave a Comment विपिन किशोर सिन्हा कार्ल मार्क्स के जीवन का अधिकांश भाग इंगलैन्ड में व्यतीत हुआ था। उन्होंने संपूर्ण अध्ययन वहीं किया था। उनके मन-मस्तिष्क पर वहां की पृष्ठभूमि का गहरा असर था। इंगलैन्ड की अर्थनीति कृषि पर आधारित नहीं थी। वहां पूरी तरह औद्योगिक क्रान्ति हो चुकी थी। मार्क्स की पूरी अवधारणा और सोच उद्योगों में […] Read more » reasons for the failure of communism कम्युनिज्म का अन्तर्द्वन्द्व कम्युनिज्म का विरोधाभास और विफलता विरोधाभास और विफलता-2