समाज मजदूरों के लिए क्या आजादी और क्या गुलामी! May 1, 2011 / December 13, 2011 by प्रवक्ता ब्यूरो | Leave a Comment एक दिन बाद यानी 1 मई को देशभर में बड़ी-बड़ी सभाएं होगी, बड़े-बड़े सेमीनार आयोजित किए जाएंगे, जिनमें मजदूरों के हितों की बड़ी-बड़ी योजनाएं भी बनेगी और ढ़ेर सारे लुभावने वायदे किए जाएंगे, जिन्हें सुनकर एक बार तो यही लगेगा कि मजदूरों के लिए अब कोई समस्या ही बाकी नहीं रहेगी। इन खोखली घोषणाओं पर […] Read more » Freedom आजादी गुलामी मजदूरों
समाज बेहतर शादी शुदा जिन्दगी के लिये… April 21, 2011 / December 13, 2011 by शादाब जाफर 'शादाब' | 4 Comments on बेहतर शादी शुदा जिन्दगी के लिये… शादाब जफर ”शादाब” बात सन् 1999 की है। मण्डी हाऊस के नजदीक नई दिल्ली स्थित रूसी ऑडिटोरियम के सभागार में बालकन जी बारी इन्टरनेशल नई दिल्ली द्वारा आयोजित देश भर से आये कवि शायरों के सम्मान समारोह का कार्यक्रम चल रहा था। मुझे भी इसी वर्ष इस संस्था ने मेरी काव्य रचना पर राष्ट्रीय […] Read more » Marrige शादी
समाज अनुराधा की मौत आधुनिक समाज पर तमाचा April 21, 2011 / April 21, 2011 by शादाब जाफर 'शादाब' | Leave a Comment शादाब जफर ”शादाब” कहते है कि इन्सान एक सामाजिक प्राणी है। अल्लाह ने इन्सान को दुनिया में सब चीजों में श्रेष्ट बनाया है। पर आज इन्सान का इन्सान के प्रति जो नजरिया सामने आ रहा है उससे नहीं लगता कि आज इन्सान इन्सान कहलाने के लायक रहा है। क्योंकि ये सब बाते गुजरे जमाने की […] Read more »
समाज सामाजिक समरसता के उपासकों का सम्मान आवश्यक April 20, 2011 / December 13, 2011 by प्रवक्ता ब्यूरो | Leave a Comment राजीव मिश्रा संस्कारों का भारतीय मानवीय चेतना से गहरा संबंध है। इसके माध्यम से शारीरिक, मानसिक एवं आध्यात्मिक परिष्कार की प्रक्रियाएं पूर्ण होकर परिवार, समाज एवं देश में समर्पण भाव से प्रशिक्षित सुसंस्कृत तथा समरस्ता से संपन्न सामाजिक सत् परिणामों को प्राप्त किया जा सकता है। शिक्षा स्वावलंबंन, संस्कृति के समन्वय से ही सामाजिक उन्नति […] Read more »
समाज क्रूर प्रशासन की वेदी 4 लोगों की बलि । April 16, 2011 / December 13, 2011 by डब्बू मिश्रा | Leave a Comment एक परिवार में माँ सहित तीन बहनों नें केवल इस लिये अपनी जिंदगी खत्म कर ली ताकि उनके परिवार का इकलौता बेटा अपने जीवन का शेष भाग सुखपूर्वक बिता सके । यह दर्दनाक घटना कोई अचानक ही नही घट गई बल्कि इस पूरे परिवार नें अपने को लगातार चार दिनों तक खुद को कैद करते हुए, मीडिया के […] Read more »
समाज साहित्य बिहार में ठहराव की स्थिति में दलित आंदोलन व साहित्य April 15, 2011 / December 14, 2011 by संजय कुमार | 1 Comment on बिहार में ठहराव की स्थिति में दलित आंदोलन व साहित्य संजय कुमार बिहार में महाराष्ट्र की तरह दलित आंदोलन तो नहीं दिखता है, लेकिन यहां की जमीन, दलित उत्पीड़न-जुल्म-सितम और दलित चेतना-अवचेतना से भरी पड़ी है। देशा के अन्य भागों की तरह बिहार के दलित अभी भी हाशिए पर हैं। दलित आंदोलन को लेकर महाराष्ट्र की तरह कोई बड़ा आंदोलन यंहा नहीं दिखता है। लेकिन […] Read more » bihar दलित विमर्श दलित साहित्य बिहार
समाज कब समाप्त होगी मैला उठाने की परंपरा April 13, 2011 / December 14, 2011 by लिमटी खरे | 2 Comments on कब समाप्त होगी मैला उठाने की परंपरा लिमटी खरे विडम्बना दर विडम्बना! आजादी के लगभग साढ़े छः दशकों के बाद भी भारत गणराज्य में आज भी सर पर मैला ढोने की परंपरा जारी है। केंद्रीय सामाजिक न्याय और अधिकारिता मंत्रालय खुद इस बात को स्वीकार करता है कि मैला ढोने की परंपरा से मुक्ति के लिए बने 1993 के कानून का पालन […] Read more »
समाज ये है हमारे देश का धार्मिक चरित्र-दलित रिटायर हुआ तो रूम को गोमूत्र से धोया! April 11, 2011 / December 14, 2011 by डॉ. पुरुषोत्तम मीणा 'निरंकुश' | 26 Comments on ये है हमारे देश का धार्मिक चरित्र-दलित रिटायर हुआ तो रूम को गोमूत्र से धोया! डॉ. पुरुषोत्तम मीणा ‘निरंकुश’ केरल तिरूअनंतपुर से एक खास खबर है, कि ‘‘दलित रिटायर हुआ तो रूम को गोमूत्र से धोया’’ जिसे इलेक्ट्रोनिक मीडिया और प्रिण्ट मीडिया ने दबा दिया और इसे प्रमुखता से प्रकाशित या प्रसारित करने लायक ही नहीं समझा| कारण कोई भी समझ सकता है| मीडिया बिकाऊ और ऐसी खबरों को ही […] Read more » Religious Character
समाज टूटते परिवार दरकते रिश्ते April 2, 2011 / December 14, 2011 by श्याम नारायण रंगा | 6 Comments on टूटते परिवार दरकते रिश्ते श्याम नारायण रंगा ‘अभिमन्यु’ एक समय था जब लोग समूह में और परिवार में रहना पसंद करते थे। जिसका जितना बड़ा परिवार होता वो उतना ही संपन्न और सौभाग्यशाली माना जाता था और जिस परिवार में मेल मिलाप होता था और सम्पन्नता होती थी उसके पूरे क्षेत्र में प्रतिष्ठा रहती थी। यह ऐसा समय […] Read more » Relation परिवार रिश्ता
समाज साहित्य कुलपतियों के बुते शिक्षा की बुनियाद March 27, 2011 / December 14, 2011 by डा.गोपा बागची | 1 Comment on कुलपतियों के बुते शिक्षा की बुनियाद विश्वविद्यालय अध्ययन, अनुसंधान और अनुशासन के केन्द्र होते हैं। विद्यार्थियों के लिये अध्ययन की यह अंतिम पाठशाला होती हैं। यहां से निकलकर वे अपने जीवन के कर्म क्षेत्र में सक्रिय होते हैं। कर्मक्षेत्र और सामाजिक जीवन की कठिनाईयों से जूझने और कुछ नया करने का जज्बा उन्हें विश्वविद्यालय के गुरुजनों से मिलता है। गुरुजनों पर […] Read more »
जन-जागरण समाज कन्या भ्रूणहत्या देश और समाज के लिये अभिशाप। March 26, 2011 / December 14, 2011 by शादाब जाफर 'शादाब' | 2 Comments on कन्या भ्रूणहत्या देश और समाज के लिये अभिशाप। आज इस कलयुग में जहॉ कुछ लोग बेटी के जन्म को मुसीबत मानने लगे है और कन्या भ्रूण हत्या का प्रचलन तेजी से बता चला जा रहा है। बेटी के पैदा होने पर घरो में मातम छा जाता है। साझे चूल्हे और संयुक्त परिवार लगभग खत्म होते जा रहे है। हर एक रिश्ता सिर्फ और […] Read more » Female feticide
आलोचना समाज ऑनर किलिंग॔ से कुदरत को बडा खतरा March 26, 2011 / December 14, 2011 by शादाब जाफर 'शादाब' | Leave a Comment आज देश में ऑनर किलिंग का फैशन चल निकला है। बेगुनाह और बेकसूर लडके लडकियो को कही इज्जत के नाम पर कही बडी बडी मूॅछो के नाम पर कही खानदान के रिति रिवाजो के नाम पर मारा जा रहा है। झूठे मान सम्मान के नाम पर फूल से मासूम बच्चो की हत्याओ का दौर अनवरत […] Read more » Killing ऑनर किलिंग॔